Saturday Shani remedies

शनिदेव की कृपा पाना चाहते हैं? शनिवार को करें ये विशेष पूजा और उपाय

हिंदू धर्म में शनिदेव (Shani Dev) को न्याय के देवता माना जाता है। वह प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। शनिदेव की कृपा जहां जीवन में खुशहाली और तरक्की लाती है, वहीं उनकी नाराजगी जीवन में दुख, बाधा और आर्थिक तंगी का कारण भी बन सकती है। यही कारण है कि शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए विशेष रूप से शनिवार के दिन पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। अगर आप चाहते हैं कि आपके जीवन से दुखों का अंत हो, नौकरी-धंधे में तरक्की हो और शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव कम हो जाए, तो शनिवार को शनिदेव की विशेष पूजा विधि को अपनाना चाहिए। आइए जानते हैं शनिदेव (Shani Dev) की पूजा की सही और प्रभावशाली विधि, जिससे वे जल्दी प्रसन्न होते हैं। शनिदेव पूजा की विधि (Shani Dev Puja Vidhi) शनिवार के दिन सुबह जल्दी उठकर पूरे घर की अच्छे से सफाई करें। फिर स्नान कर साफ और स्वच्छ वस्त्र पहनें, विशेष रूप से काले या गहरे नीले रंग के कपड़े धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर में किसी शांत और साफ स्थान या मंदिर में एक चौकी स्थापित करें, जिस पर काले रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर शनिदेव की मूर्ति रखें। यदि लोहे की मूर्ति है, तो उसे पंचामृत से स्नान कराकर, चावलों से बने चौबीस पंखुड़ी वाले कमल पर स्थापित करें। साथ में भगवान शिव और हनुमान जी की मूर्तियों को भी स्थान दे सकते हैं, क्योंकि शनिवार को इनकी पूजा का भी महत्व है। पूजा से पहले व्रत और पूजन का संकल्प लें। फिर शनिदेव के सामने सरसों के तेल का दीपक, अगरबत्ती और धूप जलाएं। इसके बाद उन्हें सरसों का तेल अर्पित करें और काले तिल, काली उड़द दाल, नीले फूल, शमी और पीपल के पत्ते तथा काले वस्त्र अर्पित करें। पूजा पूर्ण होने पर शनिदेव की आरती करें और उनसे अपने द्वारा अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगें। इसके पश्चात गरीबों और जरूरतमंदों को काले वस्त्र, तिल, उड़द की दाल या भोजन का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इसके अतिरिक्त, चींटियों को आटा डालना भी लाभकारी होता है। यदि आप व्रत रख रहे हैं, तो दिनभर फलाहार करें और शाम को उड़द की दाल की खिचड़ी खा सकते हैं। इस विधि से पूजा करने पर शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। व्रत कब शुरू करें? हिंदू धर्म में शनि देव (Shani Dev) को कर्मों का न्यायकर्ता माना गया है। मान्यता है कि वे किसी के साथ न तो अन्याय करते हैं और न ही पक्षपात, बल्कि हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुरूप फल प्रदान करते हैं। शनिवार का व्रत किसी भी समय शुरू किया जा सकता है, लेकिन यदि इसे श्रावण मास के शनिवार से आरंभ किया जाए, तो इसका विशेष महत्व होता है। इसके अलावा, यह व्रत किसी भी शुक्ल पक्ष के शनिवार से भी शुरू किया जा सकता है। माना जाता है कि शनिवार का व्रत करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य, करियर और जीवन की अन्य समस्याओं में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।  शनि मंत्रों का जाप करें:शनि देव (Shani Dev) को प्रसन्न करने के लिए निम्न मंत्रों का जाप करें: कम से कम 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है। इससे शनि देव की कृपा जल्दी प्राप्त होती है। इसे भी पढ़ें:- पति की लंबी आयु के लिए रखें ये शुभ व्रत और करें ये उपाय क्या करें दान? नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Shani Dev #ShaniDev #SaturdayPuja #ShaniRemedies #ShaniBlessings #HinduRituals #SpiritualTips #ShaniDosh

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क्यों चढ़ाया जाता है शनिदेव को तेल? जानिए धार्मिक आस्था और विज्ञान से जुड़ा रहस्य

शनिवार के दिन तिल का तेल चढ़ाना क्यों है विशेष? जानिए शास्त्रों की मान्यता, पौराणिक कथाएं और वैज्ञानिक पहलू जो बताते हैं कि यह परंपरा सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण और ऊर्जा संतुलन का प्रतीक भी है। शनिवार के दिन देशभर में शनिदेव की पूजा विशेष श्रद्धा और भक्ति से की जाती है। विशेषकर शनि जयंती और शनिवार के दिन लोग शनि मंदिर जाकर उन्हें तिल का तेल चढ़ाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शनिदेव को तेल ही क्यों चढ़ाया जाता है? इसके पीछे केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और प्रतीकात्मक अर्थ भी छिपा हुआ है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि शनिदेव को तेल चढ़ाने की परंपरा कैसे शुरू हुई और इसका महत्व क्या है। शनिदेव को तेल चढ़ाने की पौराणिक कथा शनिदेव (Lord Shani) पर तेल चढ़ाने की परंपरा के पीछे दो प्रमुख पौराणिक कथाएं बताई जाती हैं। पहली कथा के अनुसार, रावण ने अपने घमंड में सभी नवग्रहों को कैद कर लिया था और शनिदेव को उल्टा लटका कर बंदीगृह में डाल दिया था। उसी समय जब हनुमानजी (Hanuman Ji) लंका पहुंचे, उन्होंने शनिदेव को इस स्थिति में देखा और उनके शरीर पर तेल मालिश की, जिससे शनिदेव को राहत मिली। प्रसन्न होकर शनिदेव ने वचन दिया कि जो भी भक्त उन्हें श्रद्धा से तेल चढ़ाएगा, वह सभी दुखों से मुक्त होगा। हनुमान और शनिदेव का युद्ध: तेल चढ़ाने की परंपरा का रहस्य एक और पौराणिक कथा के अनुसार, शनिदेव (Lord Shani) को अपने बल और पराक्रम पर गर्व हो गया था। उसी समय भगवान हनुमान की वीरता और भक्ति की ख्याति चारों दिशाओं में फैल रही थी। शनिदेव ने जब यह सुना, तो वे हनुमानजी की परीक्षा लेने और उनसे युद्ध करने के इरादे से निकल पड़े। जब वे भगवान हनुमान (Hanuman Ji) के पास पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि हनुमान जी एक शांत स्थान पर श्रीराम के ध्यान में लीन थे। शनिदेव ने उन्हें युद्ध के लिए ललकारा। हनुमानजी ने उन्हें शांत करने की कोशिश की, लेकिन शनिदेव अड़े रहे और युद्ध की जिद पर कायम रहे। आखिरकार दोनों के बीच घमासान युद्ध हुआ, जिसमें शनिदेव बुरी तरह घायल हो गए। उन्हें गंभीर पीड़ा होने लगी। हनुमानजी (Hanuman Ji) ने दया दिखाते हुए शनिदेव के शरीर पर तेल लगाया, जिससे उन्हें राहत मिली। इस अनुभव से शनिदेव इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने वचन दिया कि जो भी श्रद्धा और भक्ति से उन्हें तेल चढ़ाएगा, उसकी सभी पीड़ाएं दूर होंगी और मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। तभी से शनिदेव को तेल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। इसे भी पढ़ें: शांत मुद्रा में शेषनाग पर क्यों विराजते हैं भगवान विष्णु? जानिए क्षीर सागर से जुड़े गहरे रहस्य शनिवार को सरसों का तेल चढ़ाने के फायदे शनिदेव (Lord Shani) को न्याय का देवता माना जाता है, जो प्रत्येक जीव के कर्मों का हिसाब रखते हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति शनिवार के दिन श्रद्धा से शनिदेव की मूर्ति पर सरसों का तेल अर्पित करता है, उसे उनका विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसा करने से न केवल आर्थिक समस्याओं में राहत मिलती है, बल्कि धन से जुड़ी परेशानियों में भी सुधार देखा जाता है। साथ ही जिन लोगों पर शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा होता है, उन्हें भी सरसों का तेल चढ़ाने से काफी हद तक राहत मिलती है और शनि की महादशा का प्रभाव कम होता है। जो भी जातक किसी भी तरह की शनि पीड़ा अथवा साढ़े साती से ग्रसित है वो यदि प्रत्येक शनिवार सुबह स्नान कर सच्ची श्रद्धा से शनिदेव की मूर्ति पर सरसों का तेल अर्पित करता है उसे शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ध्यान रहे तेल सीधा मूर्ति पर नहीं उड़ेलना है। तेल को शनि देव के दाएं पैर की सबसे छोटी वाली ऊँगली पर उड़ेलना है। मान्यता है ऐसा करने से शनि देव जल्द प्रसन्न होते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Hanuman Ji #ShaniDev #OilOffering #SpiritualBelief #ScientificReason #HinduRituals #ShaniDosh #SaturdayWorship

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Shani Dev under feet

रावण ने शनिदेव को क्यों रखा था अपने चरणों तले?

भारतीय पौराणिक कथाओं में रावण एक ऐसा पात्र है जिसे उसके बल, बुद्धि और अहंकार के लिए जाना जाता है। लंका का राजा रावण केवल एक शक्तिशाली योद्धा ही नहीं, बल्कि महान ज्योतिषाचार्य, तांत्रिक और शिवभक्त भी था। रामायण के अनुसार, रावण ने अपने पुत्र मेघनाद के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की थी। लेकिन इसी प्रसंग में शनिदेव (ShaniDev) से उसका टकराव हो गया। यह कथा आज भी धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। ग्रहों को किया था नियंत्रित कहते हैं कि जब रावण के पुत्र मेघनाद का जन्म होने वाला था, तब रावण (Ravana) चाहता था कि वह अमर और अजेय योद्धा बने। इसके लिए रावण ने नवग्रहों को एक-एक कर बंदी बना लिया और उन्हें अपने दरबार में एक विशेष स्थान पर उल्टी दिशा में बैठा दिया। उसका उद्देश्य यह था कि ग्रहों की चाल उसके अनुसार चले और किसी भी तरह से मेघनाद के जीवन में कोई बाधा न आए। रावण ने शनि, बृहस्पति, मंगल, बुध, शुक्र, राहु, केतु, सूर्य और चंद्रमा – सभी ग्रहों को नियंत्रण में ले लिया। उसने प्रत्येक ग्रह को आदेश दिया कि वे अपनी-अपनी ऊंची स्थिति में रहें, ताकि मेघनाद की कुंडली श्रेष्ठतम बन सके। शनिदेव से हुआ विरोध रावण (Ravana) ज्योतिष शास्त्र का गहरा जानकार था और चाहता था कि उसका पुत्र अत्यंत शक्तिशाली और दीर्घायु हो। इसी उद्देश्य से जब उसकी पत्नी मंदोदरी गर्भवती थी, तो रावण ने सभी ग्रहों को आदेश दिया कि वे मेघनाद के जन्म के समय उच्च और शुभ स्थिति में रहें ताकि उसके पुत्र को उत्तम ग्रहों का आशीर्वाद मिल सके। रावण (Ravana) के भय से सभी ग्रह उसकी आज्ञा का पालन करने लगे, लेकिन शनिदेव को यह अन्यायपूर्ण लगा। चूंकि शनि आयु और कर्मों का न्याय करते हैं, वे स्वेच्छा से रावण के आदेश का पालन नहीं करना चाहते थे। यह भांपते हुए रावण ने बलपूर्वक शनिदेव को उस स्थिति में स्थापित कर दिया जो मेघनाद के दीर्घायु होने के लिए आवश्यक थी। हालांकि शनिदेव (ShaniDev) ने ऊपर से रावण की बात मान ली, लेकिन जैसे ही मेघनाद के जन्म का समय आया, उन्होंने अपनी दृष्टि वक्री कर ली, जिससे मेघनाद अल्पायु हो गया। जब रावण को इस बात का पता चला, तो वह अत्यंत क्रोधित हुआ और गुस्से में आकर अपनी तलवार से शनि के पैर पर वार कर दिया, जिससे उनका एक पैर कट गया। कहा जाता है कि तभी से शनि देव लंगड़ाकर चलते हैं और उनकी गति धीमी मानी जाती है। यही कारण है कि शनि को धीमी चाल वाला ग्रह कहा जाता है और उनका प्रभाव लंबे समय तक रहता है। इसे भी पढ़ें:- महाभारत के युद्ध में गूंजे थे दिव्य अस्त्रों के नाम, जानिए उनकी अद्भुत शक्तियां हनुमान जी ने किया शनिदेव को मुक्त हनुमान जी (Hanuman Ji) ने जब शनि देव को रावण की कैद से मुक्त कराया था, तब शनि महाराज (ShaniDev) ने उनसे प्रसन्न होकर वचन दिया कि जो भी व्यक्ति श्रद्धा से हनुमान जी की पूजा करेगा, मैं उसे अपने प्रकोप से नहीं सताऊंगा। इसी कारण माना जाता है कि शनि दोष, साढ़े साती या ढैय्या से बचाव के लिए हनुमान जी (Hanuman ji) की उपासना सबसे प्रभावी उपाय है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news ShaniDev #Ravana #ShaniDev #HinduMythology #Ramayan #ShaniDosha #MythologicalFacts

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Lord Hanuman Saturday Importance

Hanuman Chalisa for Shani Dosh : तो इसलिए होती है शनिवार को शनिदेव की जगह क्यों हनुमान जी की पूजा

शनिदेव (Shani Dev) को न्याय का देवता और कर्मफल का दाता माना जाता है। उनकी पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से शनि के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। लेकिन, शनिवार (Saturday) के दिन हनुमान जी (Hanuman Ji) की पूजा करने की भी परंपरा है। यह बात अक्सर लोगों के मन में सवाल उठाती है कि आखिर शनिवार को शनिदेव का दिन होने के बावजूद हनुमान जी की पूजा क्यों की जाती है? इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं छिपी हैं। आइए जानते हैं कि शनिवार को हनुमान जी की पूजा क्यों की जाती है और इसका क्या महत्व है। हनुमान जी की पूजा का महत्व हनुमान जी (Hanuman Ji) को भगवान राम का परम भक्त और संकटमोचन माना जाता है। उनकी पूजा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और उसे शक्ति और साहस प्राप्त होता है। हनुमान जी की पूजा करने से न केवल शनिदेव (Shani Dev) के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं, बल्कि व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का आगमन भी होता है। शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने से शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है और व्यक्ति को कर्मफल के अनुसार फल मिलता है। शनिवार को हनुमान जी की पूजा क्यों? शनिवार (Saturday) को हनुमान जी की पूजा करने के पीछे कई धार्मिक और पौराणिक कारण हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार लंकापति रावण ने शनिदेव (Shani Dev) को बंदी बना लिया था। जब हनुमान जी (Hanuman Ji) माता सीता की खोज में लंका पहुंचे, तो उनकी दृष्टि शनिदेव पर पड़ी, जिन्हें रावण ने अपने पैरों तले दबा रखा था। हनुमान जी ने उनसे पूछा कि वे इस स्थिति में कैसे पहुंचे, तो शनिदेव ने बताया कि रावण ने उन्हें बंदी बना लिया है। यह सुनकर हनुमान जी क्रोधित हो गए और लंका का दहन कर दिया, साथ ही शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया। प्रसन्न होकर शनिदेव ने हनुमान जी को वचन दिया कि जो भी व्यक्ति विधि-विधान से उनकी पूजा करेगा, उसे शनिदोष से मुक्ति मिलेगी। हनुमान जी की पूजा विधि शनिवार (Saturday) के दिन हनुमान जी की पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हनुमान जी की मूर्ति या चित्र को लाल कपड़े पर स्थापित करें और उन्हें सिंदूर, चंदन और फूलों से सजाएं। हनुमान जी को गुड़ और चना का भोग लगाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। पूजा के बाद हनुमान जी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें। इसे भी पढ़ें:- रविवार को सूर्य पूजा में पढ़ें यह कथा, मिलेगी सुख-समृद्धि शनिवार को हनुमान जी की पूजा का लाभ शनिवार (Saturday) के दिन हनुमान जी की पूजा करने से व्यक्ति को कई लाभ प्राप्त होते हैं। इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से शनिदेव के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का आगमन होता है। हनुमान जी की पूजा करने से व्यक्ति को शक्ति और साहस प्राप्त होता है और उसके सभी कष्ट दूर होते हैं। शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने से व्यक्ति को शनिदेव (Shani Dev) की कृपा भी प्राप्त होती है और उसे कर्मफल के अनुसार फल मिलता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Shani Dev Hanuman Ji #Shanidev #HanumanJayanti #SaturdayWorship #ShaniDosh #HanumanBlessings #SpiritualSaturday #ShaniPuja #HanumanBhakti #ShanivarVrat #DivineBlessings

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