भगवान शिव की तीसरी आंख: चेतना, संहार और सृजन का रहस्य
हिंदू धर्म में भगवान शिव को संहारक के रूप में जाना जाता है, लेकिन उनका संहार केवल विनाश नहीं बल्कि सृजन का भी मार्ग है। शिव की सबसे रहस्यमयी और शक्तिशाली पहचान उनके तीसरे नेत्र से जुड़ी है, जिसे “त्रिनेत्रधारी” स्वरूप कहा जाता है। यह तीसरी आंख न केवल उनकी दिव्य चेतना का प्रतीक है, बल्कि ज्ञान, विवेक, और समय आने पर सर्वनाश की शक्ति का भी प्रतिनिधित्व करती है। तीसरी आंख का रहस्य क्या है? धार्मिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान शिव हिमालय पर्वत पर देवताओं की एक सभा में व्यस्त थे। उसी समय मां पार्वती अचानक वहां पहुंचीं और प्रेमवश उन्होंने भगवान शिव की दोनों आंखों को अपने हाथों से ढक लिया। जैसे ही शिव की आंखें ढकीं, संपूर्ण सृष्टि अंधकार में डूब गई। चारों ओर हाहाकार मच गया। पशु-पक्षी भयभीत होकर इधर-उधर भागने लगे। यह दृश्य भगवान शिव (Lord Shiva) से देखा नहीं गया। तभी उनके ललाट से एक तेजस्वी ज्योति फूटी, जो आगे चलकर उनका तीसरा नेत्र बना। इस नेत्र के प्रकट होते ही पूरे ब्रह्मांड में पुनः प्रकाश फैल गया। जब पार्वती जी ने शिव से इस तीसरे नेत्र के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि यह नेत्र संसार की रक्षा के लिए है। यदि यह नेत्र न प्रकट होता, तो संपूर्ण सृष्टि का विनाश निश्चित था। यह तीसरा नेत्र (Third Eye) न केवल चेतना और जागरूकता का प्रतीक है, बल्कि सृष्टि के संतुलन और संचालन का भी आधार है। तीनों कालों की दृष्टा है शिव की तीसरी आंख भगवान शिव (Lord Shiva) की तीसरी आंख (Third Eye) को अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। मान्यता है कि इस दिव्य नेत्र के माध्यम से वे भूतकाल, वर्तमान और भविष्य—तीनों कालों को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। यही कारण है कि शिव की तीसरी आंख को उनकी सामान्य दोनों आंखों से अधिक प्रभावशाली और विशिष्ट माना गया है। कहा जाता है कि यह नेत्र वह सब देख सकता है, जो सामान्य दृष्टि की पकड़ से बाहर होता है। इसे भी पढ़ें:- पति की लंबी आयु के लिए रखें ये शुभ व्रत और करें ये उपाय कब खोलते हैं, भगवान शिव अपनी तीसरी आंख भगवान शिव (Lord Shiva) अपनी तीसरी आंख (Third Eye) तब खोलते हैं जब उन्हें भौतिक जगत की परतों को हटाकर केवल शुद्ध सत्य को देखना होता है। यह नेत्र माया, भ्रम और संसार की बाहरी परतों को भस्म कर देता है, इसलिए इसे विनाश का प्रतीक माना जाता है। लेकिन असल में यह विनाश सत्य की स्थापना के लिए होता है। शिव की तीसरी आंख उस चेतना का प्रतिनिधित्व करती है जो भौतिक सीमाओं से परे जाकर वास्तविकता को समझती है। माना जाता है कि यह आंख कर्म और स्मृतियों के प्रभाव से काम करती है। जहां सामान्य आंखें समय के साथ भ्रमित हो सकती हैं, वहीं तीसरी आंख हमारे अस्तित्व की गहरी और स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Lord Shiva #lordshiva #thirdeye #hindumythology #shivapower #spiritualawakening #divinecreation #shivasecrets

