Sawan 2025

सावन 2025 में लगाएं ये पौधे, मिलेगी भोलेनाथ की कृपा

हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और कृपा प्राप्ति के लिए विशेष महत्व रखता है। यह माह पूरे वर्ष में सबसे पवित्र महीनों में एक माना जाता है, जिसमें शिव भक्त पूरे समर्पण और श्रद्धा से उपवास, पूजा, जलाभिषेक और व्रत करते हैं। सावन के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने, बेलपत्र अर्पित करने के साथ-साथ कुछ खास पौधे लगाने की भी परंपरा है, जिन्हें धर्म, आयुर्वेद और वास्तु तीनों दृष्टिकोण से बेहद शुभ और कल्याणकारी माना गया है। आइए जानते हैं सावन 2025 (Sawan) में कौन-कौन से पौधे लगाने से न केवल बिगड़े काम बन सकते हैं, बल्कि भगवान शिव की कृपा भी आप पर बनी रहती है। 1. बेल का पौधा (Bel Tree) भगवान शिव (Lord Shiva) को बेल के पत्ते (बिल्व पत्र) अत्यंत प्रिय माने जाते हैं। तीन पत्तियों वाला बेल पत्र शिवलिंग पर अर्पित करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं। सावन माह (Sawan) में घर के आंगन या बगीचे में बेल का पौधा लगाना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इसे लगाने से घर से दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। वास्तु शास्त्र भी इसे शुभ मानता है, क्योंकि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाता है। 2. तुलसी का पौधा (Tulsi Plant) हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र और देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। भले ही तुलसी के पत्ते सीधे भगवान शिव को अर्पित नहीं किए जाते, लेकिन घर में तुलसी का पौधा लगाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। सावन के महीने में तुलसी का पौधा लगाकर नियमित रूप से उसकी पूजा करने से घर में सुख-शांति और धन-समृद्धि का वास होता है। 3. धतूरे का पौधा धतूरा उन प्रिय पुष्पों में से एक है जिन्हें भगवान शिव को अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन के पावन महीने में शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाने से भगवान भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं। यदि आप अपने घर में धतूरे का पौधा लगाते हैं, तो यह शिव कृपा का प्रतीक माना जाता है। यह पौधा न केवल आर्थिक समृद्धि लाता है, बल्कि शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में भी सहायक होता है। 4. आक का पौधा (मदार) भगवान शिव को आक का पौधा विशेष रूप से प्रिय है, विशेषकर इसके सफेद फूल। सावन के महीने में आक का पौधा रोपण करना शुभ माना जाता है। इसे घर में लगाने से महादेव की कृपा बनी रहती है, जिससे परिवार में धन-धान्य में वृद्धि होती है। आक के फूल और पत्ते शिवलिंग पर चढ़ाने से शिवजी प्रसन्न होते हैं और भक्त की इच्छाएं पूर्ण करते हैं। 5. शमी का पौधा (Shami Tree) शमी का पौधा भगवान शिव (Lord Shiva) के साथ-साथ शनिदेव को भी अत्यंत प्रिय है। इसे घर में लगाने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और वातावरण में शांति बनी रहती है। सावन के पावन महीने में शमी का पौधा लगाने से शिवजी की कृपा तो मिलती ही है, साथ ही शनिदेव का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। मान्यता है कि इससे धन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं और आर्थिक स्थिति में सुधार आता है। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? घर में सकारात्मकता लाने वाला पौधा भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय हैं। यदि आप महादेव की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो सावन के महीने में अपने घर में बेलपत्र का पौधा अवश्य लगाएं और नियमित रूप से उसकी पूजा करें। इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेलपत्र का पौधा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और शिवजी को अर्पित करने पर भक्त को उत्तम फल प्राप्त होते हैं। इस पौधे को घर की उत्तर या दक्षिण दिशा में लगाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। हर इच्छा होगी पूरी सनातन धर्म में शमी के पौधे को अत्यंत पावन और फलदायी माना गया है। सावन (Sawan) के पवित्र माह में यदि इस पौधे को घर में लगाया जाए, तो परिवार के सभी सदस्यों पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और नकारात्मकता दूर होती है। पूजा के समय महादेव को शमी की पत्तियां अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Lord Shiva #sawan2025 #lordshiva #sacredplants #shivbhakti #hindufestivals #plantforpositivity #shivpooja

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Kanwar Yatra start date

कांवड़ यात्रा 2025: 11 जुलाई से शुरू होगी भोलेनाथ की भक्ति यात्रा

हर वर्ष की तरह इस बार भी सावन मास में भगवान शिव के भक्तों की आस्था का महापर्व ‘कांवड़ यात्रा’ 11 जुलाई 2025, शुक्रवार से आरंभ होगी। यह यात्रा श्रावण मास के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होती है और शिवरात्रि तक चलती है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु गंगा जल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। सावन मास की तिथियां और शिवरात्रि पंचांग के अनुसार, 2025 में श्रावण मास की शुरुआत 11 जुलाई से होगी। इस महीने के प्रत्येक सोमवार को ‘सावन सोमवार’ का व्रत रखा जाता है, जो भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस वर्ष की श्रावण शिवरात्रि 15 जुलाई को मनाई जाएगी। सावन 2025 की शुरुआत और समाप्ति तिथिवैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 11 जुलाई को रात 2 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि 12 जुलाई की रात 2 बजकर 8 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए, सावन मास की शुरुआत 11 जुलाई से मानी जाएगी, जबकि यह माह 9 अगस्त को समाप्त होगा। कांवड़ यात्रा का धार्मिक महत्व कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) का संबंध समुद्र मंथन की कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि जब समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव (Lord Shiva) ने ग्रहण किया, तब उनके गले में जलन हुई। इस जलन को शांत करने के लिए देवताओं ने गंगा जल से उनका अभिषेक किया। तब से यह परंपरा चली आ रही है कि श्रावण मास में भक्त गंगा जल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। कांवड़ यात्रा क्यों होती है कठिन?कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) को बेहद कठिन माना जाता है क्योंकि श्रद्धालुओं को सिर या कंधे पर भारी कांवड़, जिसमें गंगा जल भरा होता है, लेकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इस यात्रा की शारीरिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, यात्रा से पहले अच्छे स्वास्थ्य का होना आवश्यक है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सहायता के लिए कई कांवड़ यात्रा शिविर लगाए जाते हैं, जिन्हें सरकार, धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा संचालित किया जाता है। उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी की जाती है, जिससे उनकी हौसला-अफजाई होती है। इसे भी पढ़ें:- महाभारत के युद्ध में गूंजे थे दिव्य अस्त्रों के नाम, जानिए उनकी अद्भुत शक्तियां जानिए कांवड़ यात्रा की शुरुआत कहाँ से होती हैकांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) की शुरुआत आमतौर पर हरिद्वार या गंगा नदी से जल भरने के बाद होती है। कांवड़िए गंगा नदी से पवित्र जल लेकर भगवान शिव (Lord Shiva) के मंदिर की ओर निकलते हैं। कई कांवड़िए इस दौरान पैदल सैकड़ों किलोमीटर की लंबी यात्रा करते हैं। कांवड़ यात्रा के कई मार्ग होते हैं, लेकिन सबसे प्रसिद्ध रास्ता हरिद्वार से देवघर तक जाता है। यात्रा इन मार्गों से होकर गुजरेगीकांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) के रास्ते में हरिद्वार, देहरादून, ऋषिकेश, हाथरस, बुलंदशहर, दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, प्रयागराज, वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर कांवड़ यात्रा शिविर लगाए जाते हैं। पूरे सावन माह के दौरान कांवड़ यात्री “बम-बम भोले” और “जय शिव” के जयकारे लगाते हुए यात्रा करते हैं। यह यात्रा केवल एक धार्मिक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता, सद्भाव और भाईचारे का भी प्रतीक है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Kanwar Yatra #KanwarYatra2025 #BholeBaba #Sawan2025 #ShivBhakti #BolBam2025 #ShivYatra #HarHarMahadev

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