Mahakaleshwar Temple

महाकाल का शृंगार: क्यों हर दिन बदलता है भगवान शिव का स्वरूप?

उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भगवान शिव के रूप महाकाल (Mahakaal) का प्रतिदिन विशेष शृंगार किया जाता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी छिपा होता है। आइए जानते हैं कि प्रतिदिन महाकाल का शृंगार अलग-अलग क्यों किया जाता है और इसके पीछे की क्या कहानी है। महाकाल का शृंगार: एक दिव्य परंपरा महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) में भगवान शिव के रूप महाकाल का शृंगार प्रतिदिन अलग-अलग तरीके से किया जाता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी छिपा होता है। महाकाल का शृंगार उनके विभिन्न रूपों और भावों को दर्शाता है, जो भक्तों को उनके दिव्य स्वरूप के करीब ले जाता है। शृंगार के पीछे का धार्मिक महत्व महाकाल का शृंगार (Mahakal Shringar) केवल सजावट नहीं है, बल्कि यह एक धार्मिक अनुष्ठान है। यह शृंगार भगवान शिव के विभिन्न रूपों और उनकी लीलाओं को दर्शाता है। प्रतिदिन अलग-अलग शृंगार करने के पीछे का उद्देश्य भक्तों को भगवान शिव (Lord Shiva) के विभिन्न रूपों के दर्शन कराना और उनकी कृपा प्राप्त करना है। महाकाल का अनूठा शृंगार 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन में विराजित बाबा महाकाल का हर दिन विभिन्न रूपों में शृंगार होता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि यह भगवान शिव (Lord Shiva) के विभिन्न रूपों को दर्शाता है। हर दिन अलग-अलग रूप में महाकाल के दर्शन करने से भक्तों को एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है। महाकाल के शृंगार के विभिन्न रूप इसे भी पढ़ें:- प्रेमानंद जी महाराज: गुरु दक्षिणा का सही अर्थ और महत्व महाकाल के शृंगार का महत्व उज्जैन स्थित महाकाल (Mahakaleshwar Temple) के मंदिर में हर दिन आरती के बाद बाबा को एक अलग रूप में सजाया जाता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि यह भगवान शिव के विभिन्न रूपों को दर्शाता है। हर दिन अलग-अलग रूप में महाकाल के दर्शन करने से भक्तों को एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है। महाकाल के शृंगार (Mahakal Shringar) का यह अनूठा तरीका भक्तों को भगवान शिव की विभिन्न लीलाओं और रूपों के बारे में जानने का अवसर प्रदान करता है। यह शृंगार न केवल भक्तों की आस्था को मजबूत करता है, बल्कि उन्हें भगवान शिव (Lord Shiva) के प्रति समर्पण और भक्ति का संदेश भी देता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Mahakaleshwar Temple #UddhavThackeray #BJP #ModiGovt #MaharashtraPolitics #ShivSena #LokSabhaElections #IndianPolitics #PoliticalAttack #MaharashtraNews #ModiVsOpposition

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Uddhav Thackeray's Shiv Sena

उद्धव की ‘बची-खुची’ शिवसेना का बीएमसी चुनावों में होगा सफाया, कुणाल कामरा का सपोर्ट करने पर भड़के संजय निरुपम

कॉमेडियन कुणाल कामरा (Kunal Kamra) द्वारा महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) पर गद्दार की टिप्पणी करने के बाद से शिवसेना के दोनों गुटों में जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) द्वारा कुणाल कामरा (Kunal Kamra) को सही बताने और भाजपा के सौगात-ए-मोदी कार्यक्रम पर सवाल उठाने के बाद अब शिंदे गुट के नेता संजय निरुपम ने जवाबी हमला किया है। निरुपम ने उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) गुट की शिवसेना को ‘बची-खुची’ शिवसेना बताते हुए कहा कि संजय राउत हमारे गठबंधन के नेताओं को गधा बता रहे हैं। निरुपम ने कहा कि अगर शिवसेना के नेताओं की यही स्थिति रही तो आगामी बीएमसी चुनावों में बची-खुची शिवसेना को भी लोग खत्म कर देंगे। विदित  हो कि इससे पहले गुरुवार को संजय निरुपम ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कुणाल कामरा (Kunal Kamra) को लेकर कहा था कि वह झुकेगा तो नहीं, लेकिन हमसे छिपेगा जरूर। उसे अपने कर्मों की सजा तो भुगतनी ही पड़ेगी। निरुपम ने कहा था कि इस मामले में मुंबई पुलिस जरूर कार्रवाई करेगी। महाराष्ट्र की जनता चुनाव में दे चुकी उद्धव गुट को संदेश  संजय निरुपम ने कहा कि उद्धव गुट को जनता लगातार अपना संदेश दे रही है। पहले लोकसभा चुनाव में फिर विधानसभा चुनावों में हराकर महाराष्ट्र की जनता बता चकी है कि कौन असली है और कौन नकली शिवसेना है। विधानसभा चुनावों में हमारी शिवसेना का स्ट्राइक रेट 70.37 प्रतिशत रहा था जबकि उद्धव गुट वाली शिवसेना का स्ट्राइक रेट 21.05 प्रतिशत रहा था। यह जनता द्वारा दिया गया साफ संदेश है। इसे भी पढ़ें:- प्रेमानंद जी महाराज: गुरु दक्षिणा का सही अर्थ और महत्व उद्धव बाला साहब के बेटे जरूर हैं, लेकिन उनके वारिस नहीं- संजय निरुपम संजय निरुपम ने उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) पर तंज कसते हुए कहा कि वह बाला साहब के बेटे जरूर हैं, लेकिन उनके वारिस नहीं। बाला साहब के असली वारिस एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) हैं। जो उनकी विचारधारा पर चहते हुए पार्टी का विस्तार कर रहे हैं। उद्धव और उनकी पार्टी को अब हार स्वीकार कर लेना चाहिए। वहीं, मीडिया ने जब निरुपम से यह पूछा गया है कि उद्धव ठाकरे ने भाजपा के सौगात-ए मोदी कार्यक्रम की आलोचना की है, तो निरुपम ने इसका जवाब देते हुए कहा कि न तो हम मुस्लिमों के खिलाफ हैं और न ही बाला साहब ठाकरे थे। शिवसेना हो या फिर भाजपा, हम रोहिंग्याओं, बांग्लादेशियों और पाकिस्तान का सपोर्ट करने वाले मुस्लिमों के खिलाफ हैं। निरुपम ने कहा कि, उद्धव ठाकरे को अब सबसे बड़ा डर यही है कि बाला साहब ठाकरे का वोटबैंक पहले ही सिखक चुका है और अब अगर अल्पसंख्यक भी हमारे साथ आ गए तो उनकी शिवसेना खत्म हो जाएगी। Latest News in Hindi Today Hindi News Uddhav Thackeray #UddhavThackeray #ShivSena #BMCelections #KunalKamra #SanjayNirupam #MumbaiPolitics #Maharashtra #BJPvsShivSena #Elections2024 #PoliticalDebate

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Sanjay Raut on Maharashtra Govt

महाराष्ट्र सरकार का शासन औरंगजेब से भी बदतर: संजय राउत 

महाराष्ट्र में मुगल शासक औरंगजेब (Aurangzeb) पर शुरू हुआ विवाद और राजनीतिक बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। इस बहस में अब शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) भी कूद पड़े हैं। राउत ने कहा है कि भाजपा की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार औरंगजेब से भी बदतर है। इस नकारी सरकार के कारण ही महाराष्ट्र के किसान मर रहे हैं, बेरोजगार और महिलाएं आत्महत्या करने को मजबूर हैं।  बता दें कि औरंगजेब (Aurangzeb) को लेकर पिछले कई दिनों से सियासी संग्राम चल रहा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सपा विधायक अबु आजमी ने औरंगजेब को क्रूर शासक मानने से इनकार करते हुए कहा कि औरंगजेब के समय में भारत सोने की चिड़िया थी। औरंगजेब के समय में मंदिर नहीं तोड़ गए थे और संभाजी महाराज की हत्या राजनीतिक कारण से हुई थी। आजमी के इस बयान का सभी पार्टियों ने विरोध किया और खूब सियासी बयानबाजी हुई। बात औरंगजेब की कब्र खोदने तक पहुंच गई। अब इस विवाद में संजय राउत (Sanjay Raut) भी कूद गए हैं।  जनता त्रस्त है, लेकिन ये अत्याचार करने में जुटे- संजय  संजय राउत (Sanjay Raut) ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘औरंगजेब को जमीन के नीचे दफन हुए 400 साल हो चुका है, उसे भूल जाइए। क्या महाराष्ट्र के किसान औरंगजेब (Aurangzeb) के कारण आत्महत्या कर रहे हैं। वे भाजपा की अगुवाई वाली सरकार की वजह से ऐसा कर रहे हैं।’ संजय राउत ने कहा कि जिस तरह से मुगल शासक औरंगजेब ने अत्याचार किए थे, उसी तरह ये सरकार भी जनता पर अत्याचार कर रही है। इनकी वजह से किसान, बेरोजगार और महिलाएं आत्महत्या कर रही। जनता त्रस्त है, लेकिन ये अत्याचार करने में जुटे हैं।   इसे भी पढ़ें:-गिरिडीह में होली जुलूस पर पत्थरबाजी, हिंसक झड़प और आगजनी संजय राउत ने यह बयान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के उस टिप्पणी पर दी। जिसमें फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने कहा था कि हर देशवासी महसूस कर रहा है कि छत्रपति संभाजी नगर में मौजूद औरंगजेब की कब्र को हटा देना चाहिए। संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता औरंगजेब का कब्र हटाने की नहीं सोच रही, वह इस अत्याचारी सरकार को हटाने की सोच रही है। यह सरकार राज्य को लूटने में जुटी हुई है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Sanjay Raut #SanjayRaut #MaharashtraPolitics #ShivSena #UddhavThackeray #EknathShinde #BJPShivSena #Aurangzeb #MVA #MaharashtraNews #PoliticalControversy

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