A Shiv Sena MP's driver received a ₹150 crore gift deed

Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe: शिवसेना सांसद के ड्राइवर को मिली 150 करोड़ रुपये की गिफ्ट डीड, EOW हुई एक्टिव

उपहार देने में कोई बुराई नहीं है। अक्सर लोग अपने परिचितों को उपहार भेंट स्वरूप देते हैं। लेकिन क्या हो यदि कोई अनजान शख्स किसी को करोड़ों की जमीन गिफ्ट में दे दे? आप कहेंगे आज के इस दौर में कौन दानवीर है जो करोड़ों की जमीन गैर परिचित शख्स को दान कर रहा है? जाहिर सी बात है जब देने और लेनेवाले में किसी भी तरह का कोई संबंध ही न हो, तो ऐसे में शक होना स्वाभाविक है। दरअसल, पूर्ववर्ती हैदराबाद के निजाम से नजदीकी संबंध रखने वाले परिवार के वंशज ने शिवसेना सांसद के ड्राइवर को तकरीबन 150 करोड़ रुपये मूल्‍य की तीन एकड़ जमीन गिफ्ट कर दी है। इसकी शिकायत मिलते ही आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) की टीम जांच में जुट (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe) गई है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि गिफ्ट देने और लेने वाले में दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है।  फिर भी ड्राइवर को प्राइम लोकेशन पर तीन एकड़ जमीन उपहार के तौर पर क्‍यों दी गई? शिकायत के बाद संबंधित ड्राइवर और सांसद के विधायक बेटे से पूछताछ की गई है।  सालार जंग परिवार से ताल्‍लुक रखने वाले मीर मजहर अली खान और उनके 6 अन्‍य संबंधियों ने किए (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe) हैं हस्‍ताक्षर  बता दें कि 150 करोड़ रुपये की जमीन गिफ्ट देने का यह मामला हैदराबद के मशहूर सालार जंग फैमिली और शिवसेना सांसद संदीपनराव भुमरे के ड्राइवर जावेद रसूल शेख से जुड़ा है। रसूल शेख सांसद के साथ ही उनके विधायक बेटे विलास भुमरे से पिछले 13 साल से जुड़े हैं। गौरतलब हो कि सालार जंग पूर्ववर्ती हैदराबाद के निजाम के काल में दीवान थे। सालार जंग परिवार की बड़ी प्रतिष्‍ठा है। जानकारी के मुताबिक इस गिफ्ट डीड पर सालार जंग परिवार से ताल्‍लुक रखने वाले मीर मजहर अली खान और उनके 6 अन्‍य संबंधियों ने हस्‍ताक्षर किए (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe) हैं। हालांकि, इन लोगों ने ईओडब्लू की ओर से जारी नोटिस का अभी तक जवाब नहीं दिया है। उनसे अपना बयान दर्ज करवाने को कहा गया है। बता दें कि मुजाह‍िद खान के एक वकील ने इस बाबत शिकायत की थी, जिसके बाद जांच शुरू की गई है। कहने की जरूरत नहीं, हैदराबाद के प्रतिष्ठित सालार जंग परिवार द्वारा महाराष्ट्र में स्थित तकरीबन 150 करोड़ रुपये मूल्य की तीन एकड़ ज़मीन शिवसेना सांसद संदीपनराव भुमरे के ड्राइवर के नाम गिफ्ट किए जाने के मामले ने सियासी और प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब छत्रपति संभाजीनगर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को एक वकील की शिकायत मिली कि सांसद के ड्राइवर जावेद रसूल शेख के नाम गिफ्ट डीड के जरिए कीमती ज़मीन ट्रांसफर कर दी गई है।  सालार जंग परिवार के सदस्य क्यों उसके नाम इतनी बड़ी संपत्ति गिफ्ट करना (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe) चाहेंगे? जांच अधिकारियों की माने तो यह ज़मीन संभाजीनगर के दौलतपुरा इलाके में जलना रोड पर स्थित है। इसे प्राइम लोकेशन माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईओडब्लू के इंस्पेक्टर संभाजी पवार ने इस पूरे मामले पर कहा कि “हम जावेद के इनकम टैक्स रिटर्न और आय के अन्य स्रोतों की जांच करेंगे। उसे यह स्पष्ट करना होगा कि सालार जंग परिवार के सदस्य क्यों उसके नाम इतनी बड़ी संपत्ति गिफ्ट करना (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe) चाहेंगे। इंस्पेक्टर ने बताया कि जावेद जांच में पूरा सहयोग कर रहा है। जावेद का कहना है कि वह सालार जंग परिवार के वंशजों से अच्छे संबंध रखता है। इसलिए उन्होंने उसे यह ज़मीन तोहफे में दी। दस्तावेजों के मुताबिक, गिफ्ट डीड उसी समय बनाई गई जब मजहर अली और अन्य ने एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 12 में से 3 एकड़ ज़मीन पर अपना दावा साबित किया था। फ़िलहाल पुलिस ने गिफ्ट डीड पर हस्ताक्षर करने वाले सालार जंग परिवार के सदस्य मीर मजहर अली खान और उनके छह रिश्तेदारों को बयान दर्ज करने के लिए नोटिस भेजा है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? दोनों में न तो कोई संबंध है और न ही ये इस्लाम के एक ही सेक्‍ट से ताल्लुक रखते (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe हैं टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता वकील मुजाहिद खान ने सवाल उठाया कि बिना किसी पारिवारिक या रिश्तेदारी के इतनी कीमती ज़मीन किसी ड्राइवर को क्यों दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गिफ्ट डीड सिर्फ रक्त संबंधियों के बीच मान्य होती है। यहां दोनों में न तो कोई संबंध है और ये इस्लाम के अलग-अलग सेक्‍ट से ताल्लुक रखते (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe हैं। फिलहाल यह पहेली बनी हुई है कि ड्राइवर जावेद का सालार जंग परिवार से क्या वास्तविक संबंध है और यह ज़मीन उसे गिफ्ट क्यों की गई? हालांकि इस मामले में सांसद संदीपनराव भुमरे और उनके बेटे विलास भुमरे ने सफाई देते हुए कहा कि “ड्राइवर हमारे यहां काम करता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम उसके हर फैसले के लिए जिम्मेदार हैं। इस बीच उन्होंने यह भी बताया कि “पुलिस ने उनसे और उनके पिता से भी पूछताछ की है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe #shivsenanews #150crgift #eowprobe #maharashtrapolitics #driverscandal #politicalnews #mumbainews #indianpolitics

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MNS controversy

विधानमंडल में जो लोग बैठे, वो नपुंसक, मराठी भाषा विवाद में MNS नेता का बेतुका बयान, शिवसेना लाएगी विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव 

महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर जारी विवाद (Marathi Language Controversy) में मनसे मुंबई अध्यक्ष संदीप देशपांडे (Sandeep Deshpande) ने विवादास्पद बयान दे दिया है। महाराष्ट्र विधानभवन में इस समय संसद और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानमंडल की प्राक्कलन समितियों का राष्ट्रीय सम्मेलन चल रहा है। इस कार्यक्रम में मराठी का बैनर न होने को लेकर संदीप देशपांडे (Sandeep Deshpande) ने कहा, जो लोग विधानमंडल में बैठे हुए हैं, वे ‘नपुंसक’ बन चुके हैं और यह महाराष्ट्र के लिए दुर्भाग्य है। देशपांडे के इस बयान पर अब सियासी घमासान शुरू हो गया। मराठी हमारी मातृभाषा है, इसे कोई मिटा नहीं सकता है देशपांडे की इस विवावदास्पद टिप्पणियों पर शिवसेना मंत्री गुलाबराव पाटिल (Gulabrao Patil) ने नाराजगी जाहिर करते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पाटिल ने कहा, ”विधानमंडल का अपमान करने के लिए वे जल्द ही देशपांडे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएंगे। किसी भी चीज की आलोचना करना सही है, लेकिन हर आलोचना की एक गरिमा होती है, उस सीमा को पार नहीं करना चाहिए। विधानमंडल सम्मानित जगह है, जिसे अपमानित करने वालों को सजा जरूर मिलना चाहिए।” वहीं विधान परिषद की उपाध्यक्ष नीलम गोर्हे (Neelam Gorhe) ने देशपांडे के बयान का जवाब देते हुए कहा, मराठी हमारी मातृभाषा है, इसे कोई मिटा नहीं सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने मराठी भाषा को शास्त्रीय दर्जा दिलाया है। राजनीति के लिए छोटी-छोटी बातों पर आलोचना करना अनावश्यक है। इस तरह के अपमानित बयान को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।    अपने बयान पर कायम, मराठी भाषा के लिए जेल जाने को भी तैयार- देशपांडे  संदीप देशपांडे (Sandeep Deshpande) ने अपने बयान का विरोध होता देख सफाई भी दी है। देशपांडे ने कहा, मैं अपने पहले के बयान पर अभी भी कायम हूं, क्योंकि मैंने केवल मराठी भाषा विरोधी मानसिकता के बारे में बात की थी, किसी व्यक्ति के बारे में मैनें कुछ नहीं कहा था। मैं किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार हूं। इसके साथ देशपांडे ने यह भी कहा कि, अगर मेरी बात से कोई परेशान या नाराज है, तो उसे खुद पर विचार करना चाहिए। हम मराठी भाषी ही अगर अपनी भाषा को जीवित नहीं रखेंगे, तो कौन रखेगा, क्या बिहार और यूपी के बाहरी लोग? देशपांड ने आगे कहा, लोकसभा ने 22 प्रमुख भाषाओं को मान्यता दे रखी है, इसलिए जिस राज्य में कार्यक्रम हो रहा है, वहां की भाषा होनी चाहिए। मैं मराठी भाषा और मराठी मानुष के लिए जेल तक जाने को तैयार हूं। मराठी भाषा पर बढ़ते विवाद पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने बयान दिया है। पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में शिंदे ने कहा, इस सम्मेलन का आयोजन लोकसभा सचिवालय द्वारा किया गया था। इसलिए कार्यक्रम का बैनर हिंदी और अंग्रेजी में था। अगर इसका आयोजन महाराष्ट्र सरकार द्वारा किया जाता तो कार्यक्रम का बैनर मराठी भाषा में होता।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? भारत करेगा अंतर-संसदीय मैत्री समूह- ओम बिरला बता दें कि संसद और राज्य विधायी निकायों की प्राक्कलन समितियों का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सोमवार को शुरू हुआ। इस सम्‍मेलन में प्रशासन की दक्षता और बजट आकलन की प्रभावी निगरानी की भूमिका पर चर्चा किया जाएगा। इस सम्मेलन को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) ने भी संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान घोषणा कि की भारत की नीति को विदेशों में आगे बढ़ाने के लिए जल्द ही विभिन्न देशों की संसदों के साथ एक मैत्री समूह की स्थापना की जाएगी। इस अंतर-संसदीय मैत्री समूह को स्थापित करने का सुझाव बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न देशों का दौरा कर वापस लौटने के बाद दिया। इस विषय पर विभिन्न राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। आमे बिरला ने इस संसदीय मैत्री समूह को स्थापित करने के लिए कई देशों ने अनुरोध किया है। इसके बनने के बाद दूसरे देशों के साथ त्वरित संपर्क करने और मुद्दों को सुलझाने में आसानी होगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Om Birla #mnscontroversy #marathilanguage #shivsenanews #maharashtrapolitics #privilegemotion #assemblydebate #politicalnews

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Maharashtra civic polls spark new alliances.

महाराष्‍ट्र निकाय चुनाव को लेकर बदल रहा सियासी समीकरण, भाजपा, NCP, शिवसेना और MNS क्‍या बना रहे प्‍लान? 

महाराष्‍ट्र स्थानीय निकाय चुनाव (Maharashtra Local Body Elections) इस साल के अंत तक होने के संभावना है, लेकिन इससे पहले ही राज्य की राजनीतिक हलचल अपने चरम पर पहुंच चुकी है। राजनीतिक पार्टियां निकाय चुनाव (Maharashtra Local Body Elections) में जीत हासिल करने के लिए सियासी जोड़तोड़ में जुटी हैं। राज्य की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) के बदले तेवर देख इंडिया ब्लॉक में पहले से ही हलचल मची हुई है। वहीं महाराष्‍ट्र मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और राज ठाकरे की हुई ह‍ालिया मुलाकात से महागठबंधन को बेचैन कर दिया है।  तीनों पार्टियों स्‍थानीय चुनाव को लेकर जोर-शोर से कर रही हैं अपनी तैयारियां बता दें कि महाविकास अघाड़ी गठबंधन में शामिल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) गुट शामिल हैं। ये तीनों दल पिछला लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव एकजुट होकर लड़ी थी, लेकिन स्‍थानीय निकाय चुनाव एक साथ लड़ने को लेकर उत्‍सुक नजर नहीं आ रही हैं। तीनों पार्टियों स्‍थानीय चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां जोर-शोर से कर रही हैं, लेकिन अभी तक तीनों के बीच इस चुनाव को लेकर कोई संयुक्‍त बैठक नहीं हुई है। जिससे साफ पता चलता है कि स्थानीय चुनाव (Maharashtra Local Body Elections) को लेकर महागठबंधन में दरार पड़ चुका है।   शरद पवार की NCP के लिए करो या मरो की लड़ाई! राजनीतिक जानकारों का कहना है कि शरद पवार (Sharad Pawar) की एनसीपी के लिए यह चुनाव लड़ो या मरो वाला है। इसलिए शरद पवार (Sharad Pawar) अपने लिए बेहतर से बेहतर विकल्‍प की तलाश कर रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट में तो यहां तक दावा किया जा रहा है कि शरद पवार आगामी स्थानीय चुनाव से पहले भाजपा (BJP) को छोड़कर अन्‍य किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन कर सकते हैं। पवार की सबसे ज्यादा कोशिश अपने भतीजे अजित पवार के साथ गठबंधन करने की है। इसके लिए दोनों गुट के बीच बातचीत भी चल रही है।  पिछले कुछ दिनों से चाचा और भतीजे के बीच दूरियां कम होती भी नजर आ रही है। दोनों अब सार्वजनिक मंचों पर एक साथ नजर आ रहे हैं। हालही में हुई अजित पवार के बेटे की शादी में पूरा पवार परिवार वर्षों बाद एक साथ नजर आया था। जिसके बाद से ही कायस लगाया जा रहा है कि जल्द ही चाचा-भतीजे फिर से एकसाथ आने की घोषणा कर सकते हैं।  इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार राज का उद्धव से दूरी बना भाजपा के साथ आने की अटकलें!  वहीं दूसरी तरफ शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और चचेरे भाई राज ठाकरे (Raj Thackeray) के बीच भी भरत मिलाप की अटकलें लगाई जा रही थी। दोनों भाईयों के साथ में आने को लेकर मुंबई में कई जगहों पर पोस्टर भी लग गए थे। उद्धव ठाकरे ने भी संकेत दिया था कि “मामूली मुद्दों” को नजरअंदाज कर वे निकाय चुनाव से पहले साथ आ सकते हैं। लेकिन बीते सप्‍ताह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बीच हुई मुलाकात के बाद कहा जा रहा है कि राज ठाकरे शायद अब भाजपा के साथ आ सकते हैं।  महायुति गठबंधन में पहले से ही भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित गुट) शामिल हैं। ऐसे में राज ठाकरे के आ जाने से यह गुट और भी ज्यादा मजबूत हो जाएगी, लेकिन इससे सीट बंटवारे को लेकर टकराव बढ़ने का भी अंदेशा है।  Latest News in Hindi Today Hindi Devendra Fadnavis #maharashtrapolitics #civicpolls2025 #bjp #ncp #shivsenanews #mnsupdates #politicalstrategy #electionnews #breakingnews

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