Sawan Saturday

सावन का शनिवार: शिव-शनि की पूजा से कटते हैं सारे ग्रहदोष

हिंदू धर्म में सावन माह को अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है। यह महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और पूरे भारत में विशेष रूप से उत्तर भारत में सावन के सोमवार को व्रत, पूजा और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व होता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सावन (Sawan) के शनिवार भी उतने ही फलदायी माने गए हैं, विशेषकर शनि दोष, साढ़ेसाती और कालसर्प दोष जैसे प्रभावों को शांत करने के लिए। स्कन्द पुराण में वर्णित है कि सावन महीने के शनिवार को भगवान शिव और शनिदेव की संयुक्त पूजा करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य दोष शांत होते हैं। श्रद्धा और विधिपूर्वक की गई यह पूजा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती है। इस परंपरा का उल्लेख स्कन्द पुराण में मिलता है, जिसमें भगवान शिव और शनिदेव की संयुक्त पूजा से संबंधित रहस्य और लाभ बताए गए हैं। स्कन्द पुराण का संदर्भ प्राचीन हिंदू ग्रंथ स्कन्द पुराण, जो कि सबसे बड़े पुराणों में गिना जाता है, उसमें यह बताया गया है कि सावन के महीने में शनिवार के दिन भगवान शिव और शनिदेव की संयुक्त आराधना करने से जन्मपत्रिका में मौजूद कई दोष दूर होते हैं। शनि ग्रह को न्याय का देवता कहा गया है, जो मनुष्य को उसके कर्मों के आधार पर फल देते हैं। वहीं भगवान शिव, (Lord Shiva) त्रिपुरांतक और संहारकर्ता होने के साथ-साथ करुणा और क्षमा के भी प्रतीक हैं। सावन में शनि और शिव की संयुक्त पूजा का महत्व हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव (Lord Shiva) को शनिदेव का गुरु माना गया है। यही कारण है कि शिवजी ने शनिदेव को कर्मों के आधार पर न्याय देने का दायित्व सौंपा था। ऐसे में श्रावण मास (Sawan) के दौरान जो भी भक्त शिव के साथ-साथ शनिदेव की आराधना करता है, उसे विशेष शुभ फलों की प्राप्ति होती है। यह भी मान्यता है कि भगवान शिव के अवतार—पिप्पलाद, भैरव और रुद्र रूप में हनुमान जी की पूजा करने से शनिदेव के अशुभ प्रभाव से सुरक्षा मिलती है। शास्त्रों में वर्णित है कि पीपल के वृक्ष के शीर्ष भाग में भगवान शिव (Lord Shiva) का निवास होता है, और इसी वृक्ष में शनिदेव भी वास करते हैं। इसलिए सावन के महीने में दोनों देवताओं को प्रसन्न करने के लिए पीपल के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है। लिंग पुराण के अनुसार, शनिवार के दिन पीपल को स्पर्श करने से आयु में वृद्धि होती है। इस दिन भक्तों को प्रातःकाल स्नान करके पीपल के वृक्ष को नमस्कार करना चाहिए, फिर दोनों हाथों से वृक्ष को छूकर 108 बार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से अकाल मृत्यु से रक्षा होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले श्रावण शनिवार को शनि देव की पूजा और दान का महत्व श्रावण मास (Sawan) के किसी भी शनिवार को जब भक्त शनिदेव की विशेष पूजा करते हैं, तो जीवन में शनि से जुड़ी बाधाएं और कष्टों का निवारण होता है। इस दिन किसी शनि मंदिर में जाकर शनिदेव की प्रतिमा का तिल के तेल से अभिषेक करना शुभ माना जाता है। इसके पश्चात उन्हें नीले रंग के पुष्प और शमी के पत्ते अर्पित करें। पूजा के दौरान शनिदेव को तेल का दीपक और धूप दिखाकर श्रद्धा से प्रणाम करें। भक्त शनिदेव को उड़द की दाल और चावल से बनी खिचड़ी का भोग भी अर्पित करते हैं। पूजा पूर्ण होने के बाद एक काले कपड़े में उड़द की दाल, काले तिल, खाने का तेल और कुछ धन राशि रखकर किसी योग्य ब्राह्मण को दान देना अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके अतिरिक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जूते-चप्पल, पलंग अथवा बिछावन जैसे वस्त्र या सामग्री भी दान की जा सकती है। शिवपुराण की शतरुद्र संहिता में वर्णित है कि शनिदेव की पूजा के पश्चात विश्वामित्र, पिप्पलाद मुनि तथा उनके पिता गाधि ऋषि का ध्यान कर उन्हें श्रद्धापूर्वक प्रणाम करना चाहिए। ऐसा करने से शनिदेव की कृपा बनी रहती है और जीवन में शनि दोष का प्रभाव कम हो जाता है। Latest News in Hindi Today Hindi Sawan #sawansaturday #shivshanipuja #grahdoshremedy #shanidevblessings #lordshivapuja

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