Rudraksha benefits

रुद्राक्ष पहनने पर भी नहीं मिल रहा लाभ? हो सकती हैं ये आम गलतियां

हिंदू धर्म में रुद्राक्ष को अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना गया है। यह केवल एक बीज नहीं बल्कि भगवान शिव का आशीर्वाद माना जाता है। शास्त्रों में रुद्राक्ष को धारण करने से मानसिक शांति, आत्मबल, और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होने की बात कही गई है। रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति को कई लाभ प्राप्त होते हैं। यह न केवल मन की शांति प्रदान करता है, बल्कि एकाग्रता को भी बढ़ाता है। यदि इसे विधि-विधान और नियमों का पालन करते हुए पहना जाए, तो यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखता है और मन में बुरे विचार नहीं आने देता। रुद्राक्ष पहनने वाले व्यक्ति पर भगवान शिव (Lord Shiva) की विशेष कृपा बनी रहती है और उसे अशुभ ग्रहों के प्रभाव से भी राहत मिल सकती है। मान्यता है कि सही नियमों का पालन करते हुए रुद्राक्ष पहनने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। लेकिन बहुत से लोग यह शिकायत करते हैं कि रुद्राक्ष पहनने के बावजूद उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा। इसका मुख्य कारण है – पहनने में की गई छोटी लेकिन प्रभावशाली गलतियां। आइए जानते हैं वे कौन-सी गलतियां हैं जिनकी वजह से रुद्राक्ष का प्रभाव कम हो जाता है। 1. रुद्राक्ष को बिना शुद्ध किए पहन लेना रुद्राक्ष खरीदते ही उसे पहन लेना सबसे आम गलती है। शास्त्रों के अनुसार, रुद्राक्ष को धारण करने से पहले गंगाजल, गाय के दूध या शुद्ध जल से शुद्ध करना चाहिए। उसके बाद शिव (Lord Shiva) मंत्र “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ ह्रीं नमः” का जाप करके इसका अभिषेक करना चाहिए। 2. गलत माला का उपयोग करना रुद्राक्ष (Rudraksha) को हमेशा रेशम के धागे, चांदी, सोने या पंचधातु की माला में धारण करना चाहिए। कई लोग प्लास्टिक या लोहे की चैन में रुद्राक्ष पहनते हैं, जिससे इसकी ऊर्जा बाधित होती है। इसके अलावा, माला को शुद्ध और पवित्र रखना भी जरूरी है। 3. रुद्राक्ष की संख्या और मुख का चयन रुद्राक्ष कई प्रकार के होते हैं – 1 मुख से लेकर 21 मुख तक। हर मुख का अपना विशेष प्रभाव और फल होता है। कई बार लोग बिना ज्योतिषीय सलाह के किसी भी प्रकार का रुद्राक्ष पहन लेते हैं, जो लाभ के बजाय हानि भी पहुंचा सकता है। जैसे, 3 मुख रुद्राक्ष अग्नि तत्व का प्रतीक है, जबकि 5 मुख को सामान्य रूप से हर कोई पहन सकता है। 4. रुद्राक्ष पहनकर गलत आचरण करना रुद्राक्ष (Rudraksha) धारण करने के बाद मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही रुद्राक्ष पहनकर श्मशान या किसी ऐसे स्थान पर जाने से बचें जहां किसी की मृत्यु हुई हो। ऐसे स्थानों पर जाने से रुद्राक्ष की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है और इसके उल्टे प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं। 5. सोते समय या स्नान करते समय पहनना रात को सोते समय या शौचालय जाते वक्त रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहिए। इन समयों में इसे उतारकर किसी पवित्र और स्वच्छ स्थान, जैसे मंदिर में, रखना चाहिए। रुद्राक्ष को धारण करने से पहले स्नान करना जरूरी है और इसे पहनते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करना चाहिए। इन नियमों का पालन करने से रुद्राक्ष के सम्पूर्ण लाभ प्राप्त होते हैं। इसे भी पढ़ें:- पति की लंबी आयु के लिए रखें ये शुभ व्रत और करें ये उपाय 6. टूटा या दरार वाला रुद्राक्ष पहनना यदि रुद्राक्ष (Rudraksha) टूट गया है, उस पर दरार आ गई है या उसका धागा खुल गया है, तो उसे तुरंत उतार देना चाहिए। टूटे हुए रुद्राक्ष को पहनना अपशकुन माना जाता है और यह नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकता है। रुद्राक्ष धारण से जुड़ी महत्वपूर्ण सावधानियां रुद्राक्ष (Rudraksha) को हमेशा स्वच्छ हाथों से ही छूना चाहिए। इसे गंदे हाथों से छूने से इसकी पवित्रता प्रभावित हो सकती है। साथ ही, अपना पहना हुआ रुद्राक्ष किसी और को नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे इसकी ऊर्जा कमजोर हो सकती है। गर्भवती महिलाओं को रुद्राक्ष धारण करने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इसमें अत्यधिक ऊर्जा होती है, जो गर्भस्थ शिशु के लिए हानिकारक हो सकती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Rudraksha #rudraksha #spiritualhealing #rudrakshabenefits #rudrakshamistakes #vedicremedies

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Ramcharitmanas chaupai benefits

रामचरितमानस की इस दिव्य चौपाई का जाप हर संकट से दिलाता है मुक्ति, सफलता का द्वार खोलता है 

सनातन धर्म में “रामचरितमानस” (Ramcharitmanas) को एक पवित्र ग्रंथ माना गया है, जिसे गोस्वामी तुलसीदास जी ने 16वीं शताब्दी में अवधी भाषा में रचा। यह ग्रंथ भगवान श्रीराम (Lord Rama) के आदर्श जीवन, चरित्र, भक्ति, मर्यादा और धर्म की गहराइयों को छूता है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित यह चौपाई न सिर्फ आध्यात्मिक शांति देती है, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की कुंजी भी मानी जाती है। रामचरितमानस की चौपाइयों को न केवल आध्यात्मिक उन्नति का साधन माना गया है, बल्कि यह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत भी है। ऐसी ही एक प्रसिद्ध चौपाई है— “प्रबिसि नगर कीजे सब काजा, हृदय राखि कौशलपुर राजा” – का आशय यह है कि जब भी आप किसी कार्य के लिए कहीं जाएं या कोई नया कार्य आरंभ करें, तो मन में भगवान श्रीराम (Lord Rama) को स्मरण करें। अगर श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रभु श्रीराम को हृदय में रखकर काम करेंगे, तो वह कार्य अवश्य सफल होगा। “रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई। उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई” –  अगर आप लगातार मेहनत करने के बावजूद भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और कर्ज का भार कम नहीं हो रहा है, तो रोज सुबह स्नान के बाद श्रीरामचरितमानस (Ramcharitmanas) की इस चौपाई का जितनी बार संभव हो सके, श्रद्धा से पाठ करें। माना जाता है कि इस चौपाई का नियमित जप आर्थिक परेशानियों को दूर करने में सहायक होता है और इससे भगवान श्रीराम (Lord Rama) की कृपा भी प्राप्त होती है। “जिमि सरिता सागर मंहु जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।। तिमि सुख संपत्ति बिनहि बोलाएं। धर्मशील पहिं जहि सुभाएं।।” यदि आप चाहते हैं कि मां लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहे और जीवन में धन, सुख-समृद्धि का वास हो, तो रामचरितमानस (Ramcharitmanas) की इस चौपाई का नियमित जाप करें। माना जाता है कि इस चौपाई का पाठ करने से व्यक्ति के घर में कभी धन की कमी नहीं होती और तिजोरी हमेशा भरी रहती है। कहु तात अस मोर प्रनामा । सब प्रकार प्रभु पूरनकामा ॥  दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी ॥ यह चौपाई संकट और कठिन समय में पढ़ने के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। इसका भावार्थ यह है – “हे प्रभु! मैं आपको नमन करता हूँ। आप तो सभी प्रकार की कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं। दीन-दुखियों पर कृपा करना आपकी स्वभाविक प्रवृत्ति है, अतः मेरी इस भारी परेशानी को भी दूर कर दीजिए।” यदि आप किसी मानसिक परेशानी या जीवन की कठिनाइयों से गुजर रहे हैं, तो इस चौपाई का नित्य पाठ करने से आपको मानसिक शांति प्राप्त होगी और प्रभु श्रीराम की कृपा आप पर बनी रहेगी। इन आसान उपायों से मिलेगी सफलता की राह इसे भी पढ़ें:- पति की लंबी आयु के लिए रखें ये शुभ व्रत और करें ये उपाय कैसे करें स्मरण? प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद शांत मन से इस चौपाई का 11 बार जाप करें। इसे पूजा स्थान पर बैठकर, धूप-दीप जलाकर स्मरण करें। यात्रा पर निकलते समय या कोई नया काम शुरू करते वक्त इसका उच्चारण करें। इस चौपाई को कंठस्थ करना लाभकारी रहेगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Ramcharitmanas #ramcharitmanas #chaupai #hindumantra #successmantra #spiritualhealing #sankatmochan #ramayan #divinechant

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Copper Ring

तांबे का छल्ला पहनने के चमत्कारी फायदे

तांबा (Copper) एक ऐसा धातु है, जिसका उपयोग हजारों वर्षों से आयुर्वेद और वास्तु शास्त्र में किया जाता रहा है। खासकर तांबे का छल्ला (Copper Ring) या अंगूठी पहनने को शुभ माना जाता है। यह केवल एक आकर्षक आभूषण ही नहीं होता, बल्कि इसे धारण करने से व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। आज के समय में भी तांबे के छल्ले  (Copper Ring) का चलन बना हुआ है और लोग इसे पहन कर अपने स्वास्थ्य और जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस करते हैं। तांबे का संबंध किससे है ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तांबा मुख्य रूप से सूर्य ग्रह से जुड़ा हुआ धातु माना जाता है। जब व्यक्ति तांबे का छल्ला (Copper Ring) पहनता है, तो यह उसकी कुंडली में सूर्य की स्थिति को मजबूत करने में सहायक होता है। इसके अलावा, तांबे का संबंध मंगल ग्रह से भी माना गया है। इसलिए यदि कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर हो, तो तांबे का छल्ला धारण करना लाभकारी हो सकता है। तांबे का छल्ला पहनने के नियम ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तांबे का छल्ला (Copper Ring) धारण करने के लिए रविवार का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह दिन सूर्य देव को समर्पित होता है और तांबा भी सूर्य ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। इसे पहनने का सबसे उपयुक्त स्थान अनामिका उंगली (Ring Finger) मानी जाती है, क्योंकि यह उंगली सूर्य से संबंधित मानी जाती है और इसमें तांबे का प्रभाव अधिक सकारात्मक होता है। इसे भी पढ़ें:- क्यों देवी यमुना कहलाती हैं ‘कालिंदी’? जानिए भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी इस दिव्य कथा तांबे का छल्ला पहनने के फायदे ध्यान देने योग्य बातें नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news  Copper Ring #CopperRingBenefits #HealthTips #VastuShastra #SpiritualHealing #CopperTherapy #WellnessTips #AncientRemedies #HolisticHealing #EnergyBalance

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