Kailash Mansarovar Yatra 2025

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2025: शिवधाम की ओर आध्यात्मिक सफर फिर से शुरू, जानिए तारीखें और पंजीकरण प्रक्रिया

हिंदू धर्म, बौद्ध, जैन और तिब्बती बोन धर्म के अनुयायियों के लिए पवित्र माने जाने वाले कैलाश मानसरोवर की यात्रा  (Kailash Mansarovar Yatra) आध्यात्मिकता, आस्था और साहस का संगम मानी जाती है। हर साल हजारों श्रद्धालु इस कठिन लेकिन दिव्य यात्रा में भाग लेते हैं। कैलाश पर्वत को भगवान शिव (Lord Shiva) का निवास स्थल माना जाता है और मानसरोवर झील को अमृत समान पवित्र जलधारा। 2025 में भी यह यात्रा एक बार फिर भारतीय श्रद्धालुओं के लिए खुल रही है, और इसके लिए पंजीकरण प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो जाएगी। कब से कब तक होगी यात्रा? इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा (Kailash Mansarovar Yatra) की शुरुआत 30 जून 2025 से होगी। यात्रा पांच चरणों में 50-50 लोगों के दल के साथ आयोजित की जाएगी। यात्रा का पहला दल 10 जुलाई को लिपुलेख पास के रास्ते चीन में प्रवेश करेगा, जबकि अंतिम दल की वापसी 22 अगस्त 2025 को भारत में होगी। यानी इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा का संपूर्ण आयोजन 30 जून से 22 अगस्त 2025 तक निर्धारित है। हर दल की यात्रा दिल्ली से आरंभ होगी। प्रारंभिक पड़ाव टनकपुर होगा, जहां एक रात विश्राम होगा। इसके बाद धारचुला में दो रातें, गुंजी में दो और नाभीढांग में दो रात ठहरने के बाद यात्रा दल कैलाश मानसरोवर क्षेत्र की ओर आगे बढ़ेगा। वापसी के समय यात्री बूंदी, चौकोड़ी और अल्मोड़ा जैसे स्थानों से होते हुए दिल्ली लौटेंगे। इस पूरी यात्रा की अवधि कुल 22 दिन की होगी। रजिस्ट्रेशन कैसे करें? कैलाश मानसरोवर यात्रा (Kailash Mansarovar Yatra) में शामिल होने के लिए इच्छुक श्रद्धालुओं को भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा। आवेदन के समय आवेदक के पास वैध पासपोर्ट, पैन कार्ड और तीन पासपोर्ट साइज फोटो होना अनिवार्य है। पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने के बाद निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। यदि आवेदन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण हो जाती है, तो आवेदक को इसकी पुष्टि SMS या ईमेल के माध्यम से भेज दी जाती है। इसे भी पढ़ें:-  विष्णु भक्ति से मिलेगा अक्षय पुण्य, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और भोग का महत्व कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ कैलाश मानसरोवर यात्रा (Kailash Mansarovar Yatra) की अवधि सामान्यतः 22 से 25 दिनों की होती है। इस आध्यात्मिक और कठिन यात्रा पर जाने के लिए एक श्रद्धालु को लगभग 1.5 लाख से 3 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है, जो यात्रा के माध्यम, सुविधाओं और मार्ग के अनुसार बदल सकता है। इस यात्रा में शामिल होने के लिए शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ और फिट होना अनिवार्य है, क्योंकि इसमें ऊंचाई पर ट्रेकिंग और कठिन रास्तों से गुजरना होता है। इसके अलावा, यात्री के पास एक वैध पासपोर्ट होना आवश्यक है, क्योंकि यात्रा का कुछ हिस्सा चीन (तिब्बत) के क्षेत्र में आता है, जहां प्रवेश के लिए पासपोर्ट अनिवार्य होता है। कितने श्रद्धालु करेंगे यात्रा? भारत सरकार के निर्देशानुसार, इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा में कुल 5 दलों को भेजा जाएगा, जिनमें प्रत्येक दल में 50-50 यात्री शामिल होंगे। इस प्रकार कुल 250 श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बन सकेंगे। इसके अलावा, कुछ निजी टूर ऑपरेटर भी कैलाश मानसरोवर यात्रा (Kailash Mansarovar Yatra) की व्यवस्था करते हैं। हालांकि इनके माध्यम से यात्रा करने पर भी पंजीकरण प्रक्रिया भारत सरकार की विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ही पूरी करनी होती है। यदि कोई यात्री प्राइवेट टूर ऑपरेटर के माध्यम से यात्रा करना चाहता है, तो वे आवेदन प्रक्रिया में भी पूरी सहायता प्रदान करते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi News Kailash Mansarovar Yatra #KailashMansarovarYatra2025 #ShivDham #SpiritualJourney #MansarovarYatra #MountKailash #KailashYatra #Pilgrimage2025 #KailashDarshan #HolyYatra #HimalayanPilgrimage

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Sacred Abode of Lord Vitthal & PM Modi Visit

मुखवा मंदिर: भगवान विट्ठल की दिव्य धाम, जहां पीएम मोदी भी हो चुके हैं दर्शनार्थ

भारत एक ऐसा देश है जहां अनेक धार्मिक स्थल और मंदिर अपने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाने जाते हैं। इन्हीं में से एक है मुखवा मंदिर (Mukhwa Temple), जो हाल ही में चर्चा में आया है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi)  भी इस मंदिर के दर्शन कर चुके हैं। यह मंदिर न केवल अपनी धार्मिक महत्ता के लिए बल्कि अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी प्रसिद्ध है। आइए जानते हैं कि मुखवा मंदिर कहां स्थित है, यह क्यों प्रसिद्ध है, इसका क्या महत्व है और यहां किसकी पूजा की जाती है। मुखवा मंदिर कहां स्थित है? मुखवा उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हर्षिल वैली में स्थित एक खूबसूरत पहाड़ी गांव है। यह गांव गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है, जिससे इसकी सुंदरता और बढ़ जाती है। इसे मुखीमठ भी कहा जाता है। यहां एक मंदिर है, जिसे माता गंगा का मायका माना जाता है। मुखवा मंदिर क्यों प्रसिद्ध है? मुखवा गांव को मां गंगा का शीतकालीन निवास कहा जाता है। सर्दियों में जब गंगोत्री धाम बर्फ से ढक जाता है, तब माता गंगा की मूर्ति वहां से मुखवा लाई जाती है। सर्दियों की शुरुआत से पहले भक्तों की शोभायात्रा के साथ माता गंगा गंगोत्री से इस गांव में आती हैं। इसे माता गंगा का मायका माना जाता है, इसलिए जब उनकी मूर्ति यहां लाई जाती है, तो स्थानीय लोगों में खास उत्साह देखने को मिलता है। मुखवा मंदिर का क्या है महत्व? मुखवा मंदिर (Mukhwa Temple) का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व अत्यधिक है। सर्दियों में गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद भी भक्त मां गंगा की पूजा कर सकें, इसलिए उनकी प्रतिमा को मुखवा गांव लाया जाता है। यहां शीतकाल के दौरान मां गंगा की नियमित पूजा होती है। माना जाता है कि इस स्थान पर पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। प्रधानमंत्री ने भी शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुखवा गांव की यात्रा की थी। इसके अलावा, मुखवा मंदिर का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यहां प्राकृतिक सौंदर्य और शांति का अनूठा संगम है। कृष्णा नदी के तट पर स्थित यह मंदिर भक्तों को आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव प्रदान करता है। मुखवा गांव मां गंगा के शीतकालीन गद्दी स्थल होने के कारण कई प्राचीन मंदिरों का घर है। इनमें मुखीमठ मंदिर खासतौर पर मां गंगा को समर्पित है। यह स्थान हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मुखीमठ मंदिर अपनी खूबसूरत वास्तुकला और बारीक नक्काशी के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसकी भव्यता देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती है। इसे भी पढ़ें:- पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर मुखवा मंदिर कैसे पहुंचे? मुखवा मंदिर (Mukhwa Temple) तक पहुंचने के लिए सबसे पहले आपको दिल्ली से ऋषिकेश जाना होगा। वहां से उत्तरकाशी होते हुए हर्षिल पहुंच सकते हैं। दिल्ली से मुखवा मंदिर की दूरी लगभग 480 किलोमीटर है और यह यात्रा 12 घंटे से कम समय में पूरी की जा सकती है। अगर आप हवाई मार्ग से यात्रा करना चाहते हैं, तो देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट तक पहुंचकर वहां से ऋषिकेश और फिर उत्तरकाशी के हर्षिल वैली जा सकते हैं। पीएम मोदी का मुखवा मंदिर दर्शन हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने मुखवा मंदिर के दर्शन किए थे। पीएम मोदी (PM Modi) के मुखवा मंदिर दर्शन के बाद इस मंदिर की लोकप्रियता और बढ़ गई है। उन्होंने इस मंदिर के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया और लोगों से इस पवित्र  स्थल के दर्शन करने का आग्रह किया। Latest News in Hindi Today Hindi news Mukhwa Temple #MukhwaTemple #VitthalMandir #SacredTemple #PMModiVisit #SpiritualJourney #HinduTemple #DivinePlace #Bhakti #PilgrimageSite #ReligiousTourism

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