Trump announces end to Iran-Israel war

ट्रंप का ऐलान…खत्म हुआ ईरान-इजरायल युद्ध, तेहरान का दावा हमारा समझौता अभी फाइनल नहीं

कतर में मौजूद अमेरिका के एयरबेस पर ईरानी हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने युद्धविराम का ऐलान किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर एक पोस्ट करते हुए दावा किया है कि ईरान और इजरायल पूर्ण युद्धविराम (Iran–Israel Ceasefire) के लिए सहमत हो गए हैं। पहले ईरान युद्धविराम करेगा और फिर इजरायल करेगा। अगले 24 घंटे के अंदर 12 दिनों से चल रहा युद्धविराम खत्म हो जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के इस ऐलान पर जहां इजरायल ने सहमति जताई है, वहीं ईरान ने युद्धविराम (Iran–Israel Ceasefire) के किसी भी समझौते से इंकार किया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने ट्रंप के दावे का खंडन करते हुए कहा कि फिलहाल अभी युद्धविराम का कोई भी समझौता फाइनल नहीं हुआ है।  12 घंटे बाद इजरायल भी 12 घंटे का सीजफायर करेगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘बधाई हो सभी को! ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध में पूर्ण सीजफायर पर सहमति बन गई है। यह सीजफायर आगामी छह घंटे के भीतर शुरू होगा और सबसे पहले ईरान इसका पालन करते हुए 12 घंटे का युद्धविराम करेगा। 12 घंटे बाद इजरायल भी 12 घंटे का सीजफायर करेगा और फिर 24 घंटे बाद युद्ध औपचारिक तौर पर खत्म हो जाएगा।’ ट्रंप ने अपने इस पोस्ट में इजरायल और ईरान के नेताओं  की सहनशक्ति और बुद्धिमत्ता की जमकर तारीफ करते हुए दावा किया कि दोनों देशों के बीच यह युद्ध सालों तक चल सकती थी, जिसके चपेट में आकर पूरा मध्य पूर्व तबाह हो सकता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।  युद्ध विराम पर फाइनल समझौता नहीं- अराघची  वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए दावा किया कि, फिलहाल अभी कोई समझौता फाइनल (Iran–Israel Ceasefire) नहीं हुआ है। हालांकि इस दौरान उन्होंने इजरायल की ओर से हमले रुकने पर ईरान द्वारा युद्ध रोकने की बात कही। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा है कि, इस युद्ध की शुरुआत इजरायल ने ईरान पर हमला करके किया, हमने अपने बचाव में सिर्फ जवाबी कार्रवाई की है। ऐसे में सीजफायर करने की जिम्मेदारी इजरायल पर है। इजरायल को सबसे पहले अपने हमले रोकने होंगे। अगर इजरायल हमला नहीं करता तो ईरान भी जवाबी हमला नहीं करेगा। हम अपने सैन्य अभियान को समाप्त करने पर अंतिम निर्णय बाद में लेंगे।  इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने किया था हमला  बता दें कि ईरान को परमाणु ठिकानों को नष्ट करने के लिए अमेरिका ने हमला किया था। अमेरिका का दावा है कि इस हमले से ईरान का परमाणु निर्माण ढांचा पूरी तरह से खत्म हो गया है। इस हमले के बाद ईरान ने अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला करने की घोषणा की थी। ईरान ने बीती रात कतर की राजधानी दोहा में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला बोलते हुए 14 मिसाइलें दागी। अमेरिका का दावा है कि इनमें से 13 मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया। वहीं एक मिसाइल ने जमीन पर हिट किया। ईरान के इस हमले से किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ। कहा जा रहा है कि ईरान ने हमला करने से पहले इसकी जानकारी कतर को दे दी थी, जिसकी वजह से अमेरिका को अपने सैन्य अड्डे को खाली करने के साथ एयर डिफेंस को एक्टिव करने का मौका मिल गया।  अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्था रॉयटर्स ने बताया कि इस हमले के बाद ट्रंप ने कतर के प्रधानमंत्री को फोन कर सीजफायर का प्रस्ताव रखा और तेहरान से बात करने को कहा। इस बातचीत के बाद ही ट्रंप ने सीजफायर का दावा किया था, लेकिन अब ईरान ने फाइनल समझौते से इंकार कर दिया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Iran–Israel Ceasefire #iranisraelwar #trumpnews #middleeastconflict #iranlatestupdate #ceasefiredeal

आगे और पढ़ें
Apple iPhone India production

Trump’s threat fails to impact Apple’s strategy: ट्रंप की धमकी रही बेअसर, भारत में बना आईफोन ही खरीदेगा अमेरिका

ऑपरेशन सिंदूर से पस्त हुए पाकिस्तान सीज फायर के लिए राजी हुआ था। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान के डीजीएमओ ने सामने से भारत के डीजीएमओ को कॉल कर सीजफायर का प्रस्ताव रखा था। तब जाकर भारत अपनी शर्तों पर सीज फायर के लिए राजी हुआ था। यह खबर भारतीय मीडिया में आती कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर खुद ही इस सीजफायर का श्रेय लेकर वाहवाही लूटी थी, लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री के खुलासे के बाद ट्रंप ने खुद अपने इस दावे से पल्ला झाड़ लिया था। मजबूरन यू टर्न लेने के बाद खार खाये ट्रंप ने भारत में एपल के आईफोन मैन्युफैक्चरिंग को लेकर नाराजगी जाहिर कर दी। ट्रंप नहीं चाहते कि एपल भारत में आईफोन का प्रोडकशन (Trump Apple warning) करें। गौर करंव वाली बात यह कि ट्रंप यहाँ भी शर्मिंदगी का सामना (Trump’s threat fails to impact Apple’s strategy) करना पड़ा। ट्रंप की लाख नाराजगी के बावजूद टिम कुक का मेन फोकस इस सबसे परे अपकमिंग आईफोन सीरीज पर ही है। अमेरिकी मार्केट के लिए आईफोन (Trump’s threat fails to impact Apple’s strategy) भारत से नहीं मंगवाए- ट्रंप  दरअसल, कतर दौरे पर गए ट्रंप ने एपल के सीईओ टिम कुक को कुछ ऐसा कहा जिससे दुनियाभर में हड़कंप मच गया। इस दौरान ट्रंप ने कहा कि “अमेरिका के मार्केट के लिए आईफोन भारत से नहीं मंगवाए (Trump Apple warning) जाएं।” मुख्य बात यह कि ट्रंप चाहते हैं कि आईफोन का प्रोडक्शन अमेरिका में ही हो। एपल ने ट्रंप सरकार को कहा कि “कंपनी अगले चार साल में अमेरिका में 500 अरब डॉलर का इंवेस्टमेंट करेगी।” इसी कड़ी में एपल ह्यूस्टन में एक नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी लगाने वाली है। खबर है कि वहां पर सर्वर बनाए जाएंगे।  एपल भारत में आईफोन 17 Pro का प्रोडक्शन बढ़ाने की (Apple India plant) बना रहा है योजना  जानकारी के मुताबिक एपल भारत में आईफोन 17 Pro का प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना (Apple India plant) बना रहा है। खबर है कि भारत में बने आईफोन 17 Pro मॉडल को अमेरिका में भी बेचा जाएगा। गौरतलब हो कि अमेरिका में अधिकतर लोग एपल के प्रो मॉडल्स को खरीदना पसंद करते हैं। यही नहीं, एप्पल ने भारत में आईफोन 17 सीरीज का ट्रायल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। बता दें कि भारत में फॉक्सकॉन और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ मिलकर ये ट्रायल चल रहा है और ये दोनों कंपनियां एपल के बड़े मैन्युफैक्चरर्स में शामिल हैं। हालाँकि एपल को उम्मीद है कि साल 2026 तक अमेरिका में बिकने वाले सभी आईफोन मेड इन इंडिया होने वाले हैं। हालांकि देखना ये बड़ा दिलचस्प होगा कि ट्रंप के बयान के बाद क्या इस प्लानिंग में कोई बदलाव आता है या नहीं, लेकिन इससे एक बात तो बड़ी साफ हो गई है कि एपल अपकमिंग आईफोन सीरीज को भारत में (India-made iPhone) बनाने की तैयारी कर रही है।  इसे भी पढ़ें:- जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में मुठभेड़ जारी, सुरक्षाबलों ने 2 आतंकियों को किया ढेर टैरिफ के मामले में अमेरिकी सरकार ने कई बार किया है (Trump’s threat fails to impact Apple’s strategy) बदलाव  गौर करनेवाली बात यह कि टैरिफ के मामले में अमेरिकी सरकार ने कई बार बदलाव किया है। चीन में भी कुछ चीजों पर टैक्स काफी कम (Apple India plant) हो गया है। ऐसे में कंपनी इस इंतजार में है कि आगे चलकर अमेरिका क्या फैसला लेता है? फ़िलहाल कंपनी भारत से अमेरिका में आईफोन सप्लाई करने और भारत में बड़े लेवल पर प्रोडक्शन शुरू करने से पहले इंतजार कर रही है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump Apple warning #AppleIndia #TrumpNews #iPhoneMadeInIndia #AppleStrategy #TechNews #iPhoneExport #MakeInIndia #FoxconnIndia #AppleVsTrump #GlobalTechShift

आगे और पढ़ें
Trump's 50% Tariff Threat Triggers China’s Warning

Trump tariff threat: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 50% और टैरिफ लगाने की धमकी पर भड़का चीन, दी महाशक्ति को सीधे धमकी

दो अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन समेत दुनियाभर के 180 देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने का एलान किया था। इसी कड़ी में चीन पर भी 34 फीसदी टैरिफ लगाया था। इससे पहले भी ट्रंप 20 फीसदी टैरिफ लगा चुके हैं। इस तरह अमेरिका अब तक चीनी सामानों पर कुल-मिलाकर 54 फीसदी टैरिफ थोप चुका (Trump tariff threat) है। कारण यही जो इस टैरिफ को लेकर चीन का अमेरिका पर बेहद रुख सख्त है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि “चीन अमेरिका के दबाव में किसी भी हाल में नहीं झुकेगा।” चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि “अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों को दरकिनार कर रहा है।” गौर करने वाली बात यह कि ट्रंप के टैरिफ एलान के 48 घंटे के भीतर चीन ने अमेरिका को करारा जवाब दिया। उसने भी अमेरिकी सामानों पर 34 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की। कहने की जरूरत नहीं ट्रंप, चीन के इस कदम से खफा हैं। सोमवार को ट्रंप ने चीन को धमकी भरे लहजे में कहा कि “यदि बीजिंग मंगलवार तक अपने जवाबी शुल्क नहीं हटाता है, तो इसी सप्ताह चीनी आयात पर 50% अतिरिक्त टैरिफ लगाएंगे।” इस दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि “चीन के साथ होने वाली सभी बैठकों को भी रद कर दिया जाएगा।” अमेरिका के टैरिफ के आगे झुकेगा (Trump tariff threat) नहीं चीन  इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि चाहे कुछ भी हो, चीन अमेरिका के टैरिफ के आगे झुकेगा (Trump tariff threat) नहीं, बल्कि इसके खिलाफ आखिरी तक लड़ेगा। इस पूरे मामले पर चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि “वे अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ अंत तक लड़ाई लड़ेंगे। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि “चीन पर और टैरिफ लगाने की धमकी एक गलती के ऊपर दूसरी गलती होगी। इससे अमेरिका का ब्लैकमेलिंग स्वभाग उजागर होगा। चीन इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा। अगर अमेरिका हमें अपने तरीके से चलने पर मजबूर करेगा तो चीन आखिरी तक उसका मुकाबला करेगा। और अगर अमेरिका ने टैरिफ की दर बढ़ाई तो चीन अपने अधिकारों और हितों की रक्षा में जवाबी कदम उठाएगा।” इसके साथ ही चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने यह भी कहा कि “वह अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहता है। ट्रेड वार में कोई विजेता नहीं होता है।” बता दें कि टैरिफ के ऐलान के बाद से ही वैश्विक बाजार में उथल-पुथल का माहौल बना हुआ है। इसे भी पढ़ें:– क्या टैरिफ से 90 दिन के लिए राहत देंगे ट्रंप? अपने सलाहकार के बयान पर व्हाइट हाउस ने दी सफाई  ट्रंप के टैरिफ (Trump tariff threat) से बौखला उठा है चीन  इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि ट्रंप के टैरिफ (Trump tariff threat) से चीन बौखला उठा। बदले में उसने भी अमेरिकी सामान पर 34 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। चीन की इस घोषणा से ट्रंप खफा हैं। इसके बाद खार खाए ट्रंप ने चीन पर 50 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी। कहने की जरूरत नहीं, दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टैरिफ युद्ध ने वैश्विक मंदी की सुगबुगाहट को तेज कर दिया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump tariff threat #TrumpTariffThreat #ChinaVsUS #TradeWar #TrumpNews #50PercentTariff #ChinaReaction #GlobalTrade #USChinaConflict #DonaldTrump #TariffHike

आगे और पढ़ें
Trump Putin phone call

Trump Putin phone call: ट्रंप और पुतिन के बीच फोन पर लगभग दो घंटे हुई बात, इस शर्त पर होगी युद्ध समाप्ति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयास में जुटे हैं। इस सिलसिले में दोनों के बीच मंगलवार को तकरीबन 2 घंटे तक फ़ोन पर (Trump Putin phone call) बातचीत हुई। जानकारी के मुताबिक इस दौरान युद्धविराम समझौते और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। पुतिन से फोन पर बातचीत से पहले ट्रंप ने संकेत दिया कि क्षेत्रीय नियंत्रण और परमाणु ऊर्जा संयंत्र जैसे प्रमुख बुनियादी ढांचे चर्चा का हिस्सा होंगे। बड़ी बात यह कि इस बातचीत की पुष्टि व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ डैन स्कैविनो ने की। उन्होंने बाकायदा ट्वीट कर बताया कि “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ओवल ऑफिस में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सुबह 10:00 बजे से बातचीत कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “चर्चा सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और अभी जारी है।” बता दें कि यह वार्ता तीन साल से चले आ रहे रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों का हिस्सा है। इस संघर्ष ने अब तक लाखों लोगों की जान ले ली है, करोड़ों को बेघर कर दिया है और यूक्रेन के कई क्षेत्रों को तबाह कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों के तहत 30 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव पर बातचीत की। गौर करने वाली बात यह कि इस दौरान युद्ध विराम समझौते के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को मनाने (Trump Putin phone call) की कोशिश कर रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर 30 दिनों के युद्धविराम समझौते को औपचारिक रूप से स्वीकार करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को मनाने (Trump Putin phone call) की कोशिश कर रहे हैं। इसी सिलसिले में पिछले सप्ताह सऊदी अरब में हुई अमेरिका की अगुवाई वाली वार्ता के दौरान यूक्रेनी अधिकारियों ने सहमति व्यक्त की थी। इस वार्ता का नेतृत्व अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने किया था। पुतिन से फोन पर बातचीत से पहले ट्रंप ने संकेत दिया कि वार्ता के दौरान क्षेत्रीय नियंत्रण और परमाणु ऊर्जा संयंत्र जैसे प्रमुख बुनियादी ढांचे के मुद्दे चर्चा का हिस्सा होंगे। इसे भी पढ़ें:- दुनिया के साथ-साथ डॉल्फिन ने भी मनाया सुनीता विलियम्स की वापसी का जश्न, ट्रंप ने दी बधाई   पूर्वी यूक्रेन के बड़े हिस्सों सहित कब्जे में लिए गए क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की रखी है (Trump Putin phone call) शर्त  विदित हो कि सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि “वे यूक्रेन युद्ध में युद्धविराम और शांति स्थापित करने के प्रयास करेंगे और उन्हें विश्वास है कि यह संभव हो सकता है।” तो वहीं दूसरी तरफ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले सप्ताह अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव का समर्थन किया था। लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट किया कि “रूस अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने से पहले कुछ महत्वपूर्ण शर्तों को पूरा करना चाहता है। जानकारी के मुताबिक क्रेमलिन ने क्रीमिया और पूर्वी यूक्रेन के बड़े हिस्सों सहित कब्जे में लिए गए क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की शर्त (Trump Putin phone call) रखी है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Trump Putin phone call #TrumpPutin #RussiaUkraineWar #Geopolitics #GlobalDiplomacy #USRussiaRelations #TrumpNews #PutinUpdates #WarNegotiations #WorldPolitics #PeaceTalks

आगे और पढ़ें
Trump softens stance

Trump softens stance: नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप, 45 दिन बाद मैक्सिको-कनाडा को दी राहत

इस साल 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति पद का पदभार संभालने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप बड़े एक्शन में दिख रहे थे। बता दें कि बीते 45 दिनों में ऐसा कोई दिन नहीं रहा, जब ट्रंप और उनके प्रशासन के लोगों ने टैरिफ शब्द का नाम न लिया हो। इसके चलते उन्होंने टैरिफ वार की धमकी अपने पड़ोसी मुल्कों कनाडा और मैक्सिको भी दी। लेकिन अब धीरे-धीरे उनके तेवर नरम (Trump softens stance) पड़ते जा रहे हैं। गुरुवार को उन्होंने पहले मैक्सिको और फिर कनाडा को टैरिफ से छूट देने की घोषणा कर दी। दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे टैरिफ वार के दौरान, कनाडा ने अमेरिका द्वारा दी गई छूट के बावजूद अपने जवाबी टैरिफ को हटाने से इंकार कर दिया है। गुरुवार को कनाडा के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयातित वस्तुओं पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को एक महीने के लिए टाल दिया है, लेकिन इसके बावजूद कनाडा द्वारा अमेरिका पर लगाए गए जवाबी टैरिफ अभी भी प्रभावी रहेंगे। इस दौरान कनाडा ने आरोप लगाया कि “राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ पहले लागू करके और फिर उन्हें हटाकर सोची समझी रणनीति के तहत अनिश्चितता और अव्यवस्था पैदा की। उनकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। कनाडा और मैक्सिको से आयातित उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ को महीने भर के लिए टाल (Trump softens stance) दिया था।  दरअसल, ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको से आयातित अधिकांश उत्पादों पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को एक महीने के लिए टाल (Trump softens stance) दिया था। हालांकि, कनाडा के एक अधिकारी ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका के खिलाफ लगाए गए उनके जवाबी टैरिफ अब भी लागू रहेंगे। ये टैरिफ लगभग $30 बिलियन (यूएस$21 बिलियन) मूल्य के हैं और इनमें अमेरिकी संतरे का रस, मूंगफली का मक्खन, कॉफी, जूते, सौंदर्य प्रसाधन, मोटरसाइकिल और कुछ प्रकार के कागज उत्पाद शामिल हैं। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आदेशों पर हस्ताक्षर करने से पहले घोषणा की कि “अधिकांश टैरिफ 2 अप्रैल से प्रभावी होंगे। फिलहाल कुछ अस्थायी और छोटे टैरिफ लागू हैं।” हालांकि इस बीच ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि “वह ऑटोमोबाइल पर 25 प्रतिशत टैरिफ में छूट को एक और महीने तक बढ़ाने पर विचार नहीं कर रहे हैं।” ट्रंप के आदेशों के अनुसार, 2020 में हुए (यूएसएमसीए) व्यापार समझौते के तहत मेक्सिको से होने वाले आयात को एक महीने के लिए 25 प्रतिशत टैरिफ से मुक्त रखा जाएगा। जानकारी के मुताबिक कनाडा से ऑटो से संबंधित आयात, जो व्यापार समझौते के नियमों का पालन करते हैं। उन्हें एक महीने के लिए 25 प्रतिशत टैरिफ से छूट मिलेगी। तो वहीं कनाडा से अमेरिकी किसानों द्वारा आयात किए जाने वाले पोटाश पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। बता दें कि यह वही दर है जिस पर ट्रंप कनाडाई ऊर्जा उत्पादों पर शुल्क लगाना चाहते हैं। इसे भी पढ़ें:-भारत समेत इन देशों के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप का सख्ती की घोषणा,  2 अप्रैल से होगा एक्शन कनाडा से लगभग 62 प्रतिशत आयातों पर अब भी नए टैरिफ (Trump softens stance) लागू हो सकते हैं व्हाइट हाउस के अधिकारी के मुताबिक, कनाडा से लगभग 62 प्रतिशत आयातों पर अब भी नए टैरिफ (Trump softens stance) लागू हो सकते हैं। इसके पीछे की वजह यह कि  वे यूएसएमसीए समझौते के मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इसी तरह, मेक्सिको से आयात होने वाले ऐसे उत्पादों पर भी कर लगाया जाएगा जो यूएसएमसीए के अनुरूप नहीं हैं, जैसा कि ट्रंप के आदेशों में कहा गया है। बता दें कि मंगलवार को ट्रंप ने अमेरिका के तीन प्रमुख व्यापारिक साझेदारों, क्रमश: कनाडा, मेक्सिको और चीन पर टैरिफ लगाकर एक नया व्यापारिक संघर्ष शुरू किया, जिसके जवाब में इन देशों ने भी प्रतिक्रिया दी। फिर क्या था इसके बाद इससे वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मच गई। खैर, इस बीच कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने गुरुवार को कहा कि “राष्ट्रपति द्वारा टैरिफ लागू करने और फिर उन्हें हटाने से हमारी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे अनिश्चितता और अराजकता बढ़ रही है।” इस दौरान उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “कनाडा इस स्थिति से नाखुश है और यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिकी जनता को इसका एहसास हो।” हालाँकि इस बीच ट्रूडो ने यह भी उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध जारी रहेगा।” खैर, इसका असर यह कि गुरुवार को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में बाजार गिरावट के साथ खुले। अमेरिकी निवेशक ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी से घबराए हुए हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump softens stance #DonaldTrump #TrumpNews #USPolitics #MexicoCanada #TradeRelations #TrumpUpdates #GlobalTrade #USA #PolicyChange #BreakingNews

आगे और पढ़ें
Translate »