महाराष्ट्र निकाय चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे उद्धव और राज ठाकरे, संजय राउत का बड़ा ऐलान, कहा- कांग्रेस अकेले अपने दम पर लड़े
महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। कहा जा रहा था कि महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले इंडिया (INDIA) गठबंधन टूट जाएगा। इस बात पर अब शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने मुहर लगा दी है। राउत ने कहा है कि BMC समेत सभी स्थानीय निकाय चुनाव शिवसेना (UBT) अब INDIA गठबंधन के साथ नहीं लड़ेगी। उनकी पार्टी यह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ लड़ेगी। कांग्रेस को यह चुनाव अपने दम पर लड़ना होगा। संजय राउत (Sanjay Raut) ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) करीब 20 साल बाद एक साथ आए हैं। दोनों भाईयों के बीच पिछले छह महीने से पर्दे के पीछे बातचीत चल रही थी। अब जब महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता और हिंदी भाषा को जबरन थोपे जाने का मुद्दा गरमा गया है, तो दोनों पार्टियों ने इस मोर्चे पर साथ मिलकर लड़ने का निर्णय लिया है। राउत ने कहा, “भाजपा सरकार जिस तरह मराठी भाषा और संस्कृति की अनदेखी कर रही है, उसके खिलाफ उद्धव और राज ठाकरे एकजुट हैं। इससे जनता का भी जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। इसलिए अब जनता खुद चाहती है कि शिवसेना (UBT) और MNS मिलकर निकाय चुनाव लड़ें।” दोनों भाईयों का मिलन कांग्रेस के लिए बड़ा झटका पत्रकारों ने जब संजय राउत (Sanjay Raut) से पूछा कि महाराष्ट्र में INDIA गठबंधन (जिसमें कांग्रेस, एनसीपी (SCP) और शिवसेना UBT शामिल हैं) का स्थानीय चुनावों में क्या रोल होगा, तो उन्होंने स्पष्ट कहा, “INDIA गठबंधन केवल लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए था। स्थानीय चुनावों की परिस्थितियां और रणनीति अलग होती हैं।” संजय राउत ने यह भी याद दिलाया कि 2017 के BMC चुनाव में भी शिवसेना ने भाजपा के साथ गठबंधन होते हुए भी अलग चुनाव लड़ा था और उसी चुनाव के नतीजों ने 2019 में शिवसेना-भाजपा गठबंधन को तोड़ने की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि स्थानीय चुनावों की परिस्थिति अलग होती है और पार्टियां अलग-अलग निर्णय लेती हैं। राउत के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस को मुंबई और अन्य निकाय चुनावों में अपने दम पर उतरना होगा। कांग्रेस पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह गठबंधन के मुद्दे पर कोई टकराव नहीं चाहती, लेकिन अंदरखाने उसे इस फैसले से झटका जरूर लगा है। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ BMC सहित सभी नगर निगमों में साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी संजय राउत ने यह भी बताया कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे की पार्टियां सिर्फ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में ही नहीं, बल्कि ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, नासिक, उल्हासनगर और संभाजीनगर (औरंगाबाद) जैसे नगर निगमों में भी मिलकर चुनाव लड़ सकती हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि शिवसेना परिवार ‘मराठी मानुष’ की राजनीति पर दोबारा केंद्रित हो रहा है। दोनों भाईयों का यह कदम बालासाहेब ठाकरे की उस राजनीति को वापसी लाने के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें क्षेत्रीय अस्मिता, हिंदुत्व और सड़कों पर आंदोलन का अनूठा मिश्रण होता था। माना जा रहा है कि उद्धव और राज ठाकरे इस शैली को फिर से अपनाकर भाजपा को निकाय चुनाव में चुनौती देना चाहते हैं। शिवसेना (UBT) और MNS ने हाल ही में महाराष्ट्र में हिंदी भाषा की अनिवार्यता के खिलाफ आंदोलन शुरू किया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार हिंदी को जबरन महाराष्ट्र पर थोपने की कोशिश कर रही है, जिससे मराठी पहचान खतरे में पड़ गया है। यह आंदोलन उत्तर भारतीय राजनीति में भी हलचल मचा रहा है, क्योंकि बिहार में भी इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में आरजेडी और कांग्रेस गठबंधन हिंदी अस्मिता को लेकर संवेदनशील है। Latest News in Hindi Today Hindi news Uddhav Thackeray #UddhavThackeray #RajThackeray #MaharashtraPolls #SanjayRaut #Congress #ShivSena #MNS #MaharashtraPolitics

