Sanjay Raut announces Uddhav and Raj Thackeray's

महाराष्ट्र निकाय चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे उद्धव और राज ठाकरे, संजय राउत का बड़ा ऐलान, कहा- कांग्रेस अकेले अपने दम पर लड़े

महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। कहा जा रहा था कि महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले इंडिया (INDIA) गठबंधन टूट जाएगा। इस बात पर अब शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने मुहर लगा दी है। राउत ने कहा है कि  BMC समेत सभी स्थानीय निकाय चुनाव शिवसेना (UBT) अब INDIA गठबंधन के साथ नहीं लड़ेगी। उनकी पार्टी यह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ लड़ेगी। कांग्रेस को यह चुनाव अपने दम पर लड़ना होगा। संजय राउत (Sanjay Raut) ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) करीब 20 साल बाद एक साथ आए हैं। दोनों भाईयों के बीच पिछले छह महीने से पर्दे के पीछे बातचीत चल रही थी। अब जब महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता और हिंदी भाषा को जबरन थोपे जाने का मुद्दा गरमा गया है, तो दोनों पार्टियों ने इस मोर्चे पर साथ मिलकर लड़ने का निर्णय लिया है। राउत ने कहा, “भाजपा सरकार जिस तरह मराठी भाषा और संस्कृति की अनदेखी कर रही है, उसके खिलाफ उद्धव और राज ठाकरे एकजुट हैं। इससे जनता का भी जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। इसलिए अब जनता खुद चाहती है कि शिवसेना (UBT) और MNS मिलकर निकाय चुनाव लड़ें।” दोनों भाईयों का मिलन कांग्रेस के लिए बड़ा झटका पत्रकारों ने जब संजय राउत (Sanjay Raut) से पूछा कि महाराष्ट्र में INDIA गठबंधन (जिसमें कांग्रेस, एनसीपी (SCP) और शिवसेना UBT शामिल हैं) का स्थानीय चुनावों में क्या रोल होगा, तो उन्होंने स्पष्ट कहा, “INDIA गठबंधन केवल लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए था। स्थानीय चुनावों की परिस्थितियां और रणनीति अलग होती हैं।” संजय राउत ने यह भी याद दिलाया कि 2017 के BMC चुनाव में भी शिवसेना ने भाजपा के साथ गठबंधन होते हुए भी अलग चुनाव लड़ा था और उसी चुनाव के नतीजों ने 2019 में शिवसेना-भाजपा गठबंधन को तोड़ने की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि स्थानीय चुनावों की परिस्थिति अलग होती है और पार्टियां अलग-अलग निर्णय लेती हैं। राउत के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस को मुंबई और अन्य निकाय चुनावों में अपने दम पर उतरना होगा। कांग्रेस पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह गठबंधन के मुद्दे पर कोई टकराव नहीं चाहती, लेकिन अंदरखाने उसे इस फैसले से झटका जरूर लगा है। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ BMC सहित सभी नगर निगमों में साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी संजय राउत ने यह भी बताया कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे की पार्टियां सिर्फ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में ही नहीं, बल्कि ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, नासिक, उल्हासनगर और संभाजीनगर (औरंगाबाद) जैसे नगर निगमों में भी मिलकर चुनाव लड़ सकती हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि शिवसेना परिवार ‘मराठी मानुष’ की राजनीति पर दोबारा केंद्रित हो रहा है। दोनों भाईयों का यह कदम बालासाहेब ठाकरे की उस राजनीति को वापसी लाने के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें क्षेत्रीय अस्मिता, हिंदुत्व और सड़कों पर आंदोलन का अनूठा मिश्रण होता था। माना जा रहा है कि उद्धव और राज ठाकरे इस शैली को फिर से अपनाकर भाजपा को निकाय चुनाव में चुनौती देना चाहते हैं। शिवसेना (UBT) और MNS ने हाल ही में महाराष्ट्र में हिंदी भाषा की अनिवार्यता के खिलाफ आंदोलन शुरू किया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार हिंदी को जबरन महाराष्ट्र पर थोपने की कोशिश कर रही है, जिससे मराठी पहचान खतरे में पड़ गया है। यह आंदोलन उत्तर भारतीय राजनीति में भी हलचल मचा रहा है, क्योंकि बिहार में भी इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में आरजेडी और कांग्रेस गठबंधन हिंदी अस्मिता को लेकर संवेदनशील है। Latest News in Hindi Today Hindi news Uddhav Thackeray #UddhavThackeray #RajThackeray #MaharashtraPolls #SanjayRaut #Congress #ShivSena #MNS #MaharashtraPolitics

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Uddhav Thackeray news

महाराष्ट्र में टूटेगा कांग्रेस-उद्धव ठाकरे का गठबंधन या रहेंगे साथ! बिहार चुनाव में क्या पड़ेगा असर?

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) इस साल के अंत तक होनी है। जिसको लेकर राजनीतिक पार्टियां जोड़-तोड़ और गठजोड़ में जुटी हैं। इन सबके बीच एक घटना ने इंडिया गठबंधन (India Alliance) यानी (महाविकास आघाड़ी) में हलचल मचा दी है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) फिर से एक साथ आ गए हैं। दोनों ठाकरे बंधु बीते शनिवार को वर्ली में एक साथ मंच साझा किया, लेकिन इस भरत मिलाप से कांग्रेस (Congress) ने दूरी बनाए रखी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या इंडिया गठबंधन (India Alliance) यानी (महाविकास आघाड़ी) में फूट पड़ गया है? क्या कांग्रेस (Congress) महाराष्ट्र में अब भी शिवसेना यूबीटी साथ रहेगी?  एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाली शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने ठाकरे बंधुओं के मिलन के बाद कटाक्ष करते हुए महाविकास आघाड़ी (एमवीए) को नए नाम से संबोधित किया। निरुपम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि, ”यह एमवीए गठबंधन नहीं, बल्कि टीवीए यानी ठाकरे विकास आघाड़ी गठबंधन है।” संजय निरुपम ने कहा कि, महाराष्ट्र में कांग्रेस (Congress) को गठबंधन से घटाकर एक नया राजनीतिक गठबंधन बना है। पहले इस गठबंधन को एमवीए कहा जाता था यानी महा विकास अघाड़ी, लेकिन अब इसका नया नाम टीवीए रख देना चाहिए, क्योंकि यह ‘ठाकरे विकास अघाड़ी’ बन चुका है।  बिहारियों पर अत्याचार करने वालों के साथ कांग्रेस- केसी त्यागी  बिहार चुनावों (Bihar Assembly Elections) से ठीक पहले महाराष्ट्र में हुए इस गठबंधन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या कांग्रेस उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के साथ अभी भी गठबंधन में रहेगी या फर इनसे दूरी बना लेगी। इस नए गठबंधन पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेसी नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने निशाना साधा था। चव्हाण ने मीडिया से बातचीत में कहा था राज उद्धव अगर मराठी भाषा को लेकर सरकारी आदेश वापस लेने का श्रेय अकेले लेना चाहते हैं, तो हमें कोई परेशानी नहीं। लेकिन अगर वे राजनीतिक रूप से हमारे साथ आना चाहते हैं, तो इस पर सोचना पड़ेगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक हर्षवर्धन सपकाल ने भी कहा कि ठाकरे परिवार अगर साथ मिलकर सरकारी आदेश वापस लेने का जश्न मनाना चाहता हैं तो हमे कोई परेशानी नहीं, लेकिन भाइयों के बीच संभावित राजनीतिक गठबंधन पर अलग मत है। वहीं दूसरी तरफ जेडीयू नेता केसी त्यागी ने भी इंडिया गठबंधन पर हमला होगा। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता का सबसे ज्यादा उत्पीड़न मुंबई में होता है। वहां पर कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी गठबंधन में हैं, लेकिन बिहारियों के शोषण का विरोध नहीं कर रही है। जो बताता है कि कांग्रेस किस तरह से बिहारियों पर अत्याचार पर मौन सहमति दे रही है।   इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ उद्धव और राज के साथ दिखने पर बिहार में कांग्रेस को हो सकता है नुकसान  राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार में जल्द ही चुनाव होने हैं, ऐसे में उद्धव और राज ठाकरे के बिहार विरोधी स्वभाव को देखते हुए कांग्रेस अब उद्धव ठाकरे के साथ रहने से परहेज कर सकती है। अगर कांग्रेस अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की कोशिश करती है तो उसे हिंदी भाषी बिहार के आगामी चुनाव (Bihar Assembly Elections) में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। बता दें कि राज ठाकरे (Raj Thackeray) की राजनीति ही उत्तर भारतीयों का विरोध करने पर टिकी है। इनकी पार्टी के कार्यकर्ता आए दिन उत्तर भारतीयों को पीटने को लेकर चर्चा में रहते हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना भी इस मामले में मनसे के पाले में ही खड़ी नजर आती है। महाराष्ट्र में इसी साल के अंत तक स्थानीय निकाय चुनाव होने की संभावना है, ऐसे में यहां पर उत्तर भारतीयों का खिलाफ जहर उगलने की राजनीति अपने चरम पर पहुंच चुकी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Uddhav Thackeray #congress #shivsenaupta #uddhavthackeray #maharashtrapolitics #biharelections2025 #politicalnews #alliancebreak #indianpolitics

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Narayan Rane reignites old feud by recalling Uddhav's

Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas: विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात 

बीते दिनों हिंदी भाषा को लेकर छिड़े विवाद और लंबी चली बहस के बाद आखिरकार महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार को अपना फैसला वापस लेना ही पड़ा। भाषा विवाद पर भले राज्य सरकार ने बीएमसी इलेक्शन और मराठी वोटो के छिटकने एक डर से पूर्व के अपने दोनों आदेश रद्द कर दिए हों, लेकिन ठाकरे बंधु इस मुद्दे को हाथ से जाने देना नहीं (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) चाहते। हालाँकि राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि एक नई समिति बनाई जाएगी जो हिंदी भाषा को प्राथमिक स्कूलों में कक्षा पहली से पांचवी तक तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाना है या नहीं इसपर निर्णय लेगी। मजे की बात यह कि सूबे की भाजपा सरकार भले ही मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रही है, लेकिन ठाकरे बंधु 5 जुलाई को एक मंच पर साथ दिखेंगे। दरअसल, राज्य सरकार के इस फैसले को दोनों ठाकरे बंधू अपनी लड़ाई की जीत बता रहे हैं। दोनों का कहना है कि “महाराष्ट्र का मराठी मानुष साथ आया ये देख सरकार डर गई। ये मराठी मानुष की जीत है। इसका विजय दिवस जुलूस मनाया जाएगा।”  ठाकरे गुट और मनसे के वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बैठकें हो (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) रही हैं मीडिया रिपोर्ट की माने तो 5 जुलाई को दोनों ठाकरे भाई एक साथ एक मंच पर कई वर्षों के बाद आएंगे। पहले इस विजय दिवस के लिए शिवाजी पार्क और गिरगांव चौपाटी पर विचार चल रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं की आपसी सहमति से वर्ली डोम संभागृह को फाइनल किया गया है। ध्यान देने वाली बात यह कि 5 जुलाई को होने वाले विजय दिवस को लेकर ठाकरे गुट और मनसे के वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बैठकें हो (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) रही हैं। शिवसेना की ओर से संजय राऊत, अनिल परब और मनसे की ओर से बाला नांदगावकर और अभिजीत पानसे के बीच हाल ही में करीब 40 मिनट तक की अहम बैठक हुई है। एक तरह से कारगर रणनीति पर मंथन हो रहा है। पार्टी से जुड़े करीबी सूत्रों की माने तो इस बैठक में विजय दिवस की संपूर्ण रूपरेखा, आयोजन स्थल, भीड़ प्रबंधन और भाषणों की रणनीति पर चर्चा हुई। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि यह सिर्फ मराठी भाषा, मराठी अस्मिता और सरकार के निर्णय वापसी का उत्सव होगा। इसमें कोई राजनीतिक झंडा या एजेंडा नहीं होगा। वरली डोम को आयोजन स्थल के रूप में चुना गया है। दोनों दलों में इसे लेकर सहमति बन चुकी है। आयोजकों का कहना है कि यह पूरी तरह से मराठी भाषा और संस्कृति की विजय के रूप में मनाया जाएगा।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? यही उद्धव ठाकरे थे, जिन्होंने राज ठाकरे को अपमानित किया, तंग किया और पार्टी से बाहर जाने के लिए (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) मजबूर किया इस पूरे मामले पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) कहा कि “उद्धव ठाकरे आज राज ठाकरे को भाईचारे के नाते वापस आने की अपील कर रहे हैं। लेकिन मुझे याद है, यही उद्धव ठाकरे थे, जिन्होंने राज ठाकरे को अपमानित किया, तंग किया और पार्टी से बाहर जाने के लिए मजबूर किया। क्या उन्हें यह सब याद नहीं है? अब वे क्यों इतनी मिन्नतें कर रहे हैं? उद्धव को आड़े हाथों लेते हुए नारायण राणे ने कहा कि “राज ठाकरे, नारायण राणे, गणेश नाईक और एकनाथ शिंदे जैसे नेताओं ने शिवसेना को खड़ा करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया, लेकिन इन्हीं लोगों को उद्धव ने बाहर का रास्ता दिखाया। जिस शिवसेना को माननीय बालासाहेब ठाकरे ने सत्ता तक पहुंचाया, उसी सत्ता को उद्धव ठाकरे ने गंवा दिया। शिवसेना की इस गिरावट के लिए पूरी तरह से उद्धव ठाकरे जिम्मेदार हैं।” उन्होंने आगे कहा, मराठी जनता और हिंदू समाज ने इन्हें घर बिठा दिया है। जो चीज एक बार हाथ से निकल जाती है, वो फिर से वापस नहीं आती जो बूंद से गई, वो हौद से नहीं आती! उद्धव ठाकरे में न तो वह हिम्मत है और न ही वह क्षमता कि वो फिर से सब कुछ हासिल कर सकें। Latest News in Hindi Today Hindi news Narayan Rane #NarayanRane #UddhavThackeray #VijayDiwas #RajThackeray #MaharashtraPolitics #ShivSena

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Maharashtra 2025 elections

महाराष्ट्र की राजनीति में क्या साथ आएंगे उद्धव और राज ठाकरे? दबाव बनाने के आरोप पर संजय राउत ने कह दी बड़ी बात 

शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के बीच संभावित गठबंधन की चर्चा अभी खत्म नहीं हुई है। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने इस गठबंधन को लेकर विराम लगती चर्चा को एक बार फिर से हवा दे दी है। संजय राउत (Sanjay Raut) ने कहा है कि दोनों दलों के बीच अभी बातचीत चल रही है। किसी भी अन्य की तरफ से इस मुद्दे पर कोई भी टिप्पणी करना अनुचित है। आखिरी निर्णय उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे खुद करेंगे।  संजय राउत (Sanjay Raut) का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ठाकरे बंधुओं के बीच फिर से गठबंधन होने की चर्चा पर विराम लगता नजर आ रहा था। उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) के नेता एक तरफ तो राज ठाकरे को गठबंधन के लिए संकेत भेज रहे थे, लेकिन मनसे अध्यक्ष इससे दूरी बनाते नजर आ रहे थे। उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) से एक होटल में मुलाकात कर यह संदेश दिया था कि वो भाजपा के साथ रहना पसंद करेंगे। लेकिन संजय राउत ने अब एक बार फिर से बयान देकर इस चर्चा को हवा दे दी है कि दोनों भाईयों के बीच अभी भी गठबंधन पर चर्चा चल रही है।   राजनीति में देर से आए लोग गठबंधन के खिलाफ- राउत संजय राउत ने मुंबई में मीडिया से बातचीत में कहा कि दावा किया, “मनसे के कुछ लोग इस गठबंधन के खिलाफ बयान दे रहे हैं, ऐसे लोग राजनीति में देर से आए हैं और इनकी जानकारी बेहद सीमित है। दूसरे लोग क्या कहते हैं और क्या करते हैं उसका कोई महत्व नहीं है। मैंने दोनों भाईयों (ठाकरे बंधुओं) को कई सालों तक करीब से देखा है और साथ में काम किया है। मैं जानता हूं कि आगे क्या होने जा रहा है और क्या नहीं होगा। शायद मुझसे बेहतर कोई दूसरा नहीं जानता। इस गठबंधन पर अंतिम फैसला लेने वाले केवल उद्धव और राज ही हैं।” संजय राउत यह बयान मनसे नेता संदीप देशपांडे के दबाव बनाने के आरोप के जवाब में दे रहे थे। राउत ने इस दौरान देशपांडे को कम जानकारी रखने वाला नेता तक कह दिया।  इसे भी पढ़ें:- विधानसभा चुनाव से पहले बिहार को पीएम मोदी ने दिया तोहफा गठबंधन के लिए दबाव बना रही है उद्धव की सेना- देशपांडे बता दें कि, मनसे नेता संदीप देशपांडे ने बीते दिनों कहा था कि उद्धव गुट गठबंधन के लिए मनसे पर दबाव बनाने की कोशिश न करे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि, ”आगामी स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर शिवसेना (Uddhav Thackeray) गठबंधन करने पर आतुर नजर आ रही है। आखिर उद्धव की सेना  मनसे से गठबंधन को लेकर इतना उत्साह क्यों दिखा रही है? मैं अच्छे से समझ सकता हूं कि उनके दिन बेहद खराब चल रहे हैं, इसलिए उनके शीर्ष नेता इस समय मनसे के साथ गठबंधन की कोशिश में जुटे हैं।” संदीप देशपांडे ने इस दौरान यह भी कहा कि,  गठबंधन के लिए प्रयास करना गलत बात नहीं है, लेकिन इसके लिए उद्धव की पार्टी मनसे पर दबाव नहीं बना सकती है। हमारे नेता राज ठाकरे समय आने पर गठबंधन के बारे में उचित निर्णय लेंगे। देशपांडे ने यह भी कहा कि उद्धव की शिवसेना गठबंधन करने के लिए उत्साह तो दिखा रही है, लेकिन उनकी क्षमता क्या है। इस पार्टी को बीते विधानसभा चुनाव में मात्र 20 सीटें ही मिली हैं। उनके पास अभी अगर 60 विधायक होते तो क्या वो गठबंधन के लिए इतना ही उत्साह दिखाते? देशपांडे ने यह भी बताया कि मनसे ने साल 2014 और साल 2017 के चुनाव में उद्धव को गठबंधन का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उस समय उन लोगों ने इंकार कर दिया और अब गठबंधन के लिए दबाव बना रहे हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi  Uddhav Thackeray #uddhavthackeray #rajthackeray #sanjayraut #maharashtrapolitics #shivsenamns #indianpolitics #uddhavrajalliance

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Uddhav Thackeray Sanjay Raut

‘उद्धव को बर्बाद करने के लिए एक राउत ही बहुत’, गिरीश महाजन ने बोला तीखा हमला

महाराष्ट्र जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन और उद्धव गुट के राज्यसभा सदस्य व मुख्य प्रवक्ता संजय राउत (Sanjay Raut) के बीच चल रहा वाक युद्ध अब निचले स्तर पर पहुंचने लगा है। गिरीश महाजन (Girish Mahajan) ने संजय राउत (Sanjay Raut) को दलाल तक कह दिया है। महाजन ने कहा है कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) को बर्बाद करने के लिए भाजपा की जरूरत नहीं पड़ेगी, उनके लिए बस एक राउत ही काफी हैं। अगर समय रहते ठाकरे ने राउत औन उनकी जुबान पर लगाम नहीं लगाई, तो बची हुई शिवसेना भी टूट जाएगी। बता दें कि भाजपा (BJP) के वरिष्ठ नेता महाजन को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) का बेहद करीबी माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से राजनीति हलकों में चर्चा चल रही है कि फडणवीस किसी कारणवस महाजन से नाराज हैं। इसी मुद्दे पर बातचीत करते हुए संजय राउत ने पिछले दिनों कहा था कि भाजपा जब भी राज्य की सत्ता से बाहर होगी, तो सबसे पहले पार्टी छोड़कर भागने वाले गिरीश महाजन ही होंगे।  गिरीश महाजन ने शुरू किया था वार, राउत ने किया था पलटवार  दोनों के बीच इसी तीखी बयानबाजी की शुरुआत पिछले सप्ताह गिरीश महाजन (Girish Mahajan) ने की थी। नासिक में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाजन ने कहा था कि उद्धव ठाकरे की बची हुई पार्टी अब खत्म होने की कगार पर है। अगले कुछ दिनों में उनके साथ पार्टी में कोई नहीं बचेगा। महाजन के इस बयान पर पलटवार करते हुए संजय राउत (Sanjay Raut) ने कहा था कि महाजन सबसे पहले यह खुद तय कर लें कि क्या उनकी खुद की जमीन भाजपा में बची है। भाजपा एक समय साफ-सुथरे लोगों की पार्टी हुआ करती थी, लेकिन यह पार्टी आज के समय में दलाल, भ्रष्ट और ठेकेदार लोगों की पार्टी बन चुकी है। जिन लोगों के पास पुलिस और पैसे की ताकत है, वो इसका इस्तेमाल कर लोगों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा ने इन कामों के लिए जो दलाल नियुक्त किए हैं, गिरीश महाजन उनमें से एक हैं। जिस दिन हम सत्ता में आएंगे, उस दिन सबसे पहले दल बदलने वाले गिरीश महाजन ही होंगे। संजय राउत ने इस दौरान यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र में जब महाविकास आघाडी की सरकार थी, तब मुख्यमंत्री रहते उद्धव ठाकरे ने गिरीश महाजन के घोटालों की जांच शुरू कराई थी। उस समय महाजन दल बदलने के लिए तैयार हो गए थे और संदेश भिजवा रहे थे कि वह राजनीति छोड़ कर शांति से बैठ जाएंगे। ऐसे लोग एक नंबर के डरपोक लोग हैं।  इसे भी पढ़ें:- बीजेपी नेता के बेटे के वायरल हुए 130 से अधिक अश्लील वीडियो, मचा हड़कंप, अखिलेश यादव ने कही यह बात  महाजन ने राउत को बताया पार्टी का दलाल  राउत के बयान पर गिरीश महाजन (Girish Mahajan) बुरी तरह से विफर उठे हैं। उन्होंने राउत के इस बयान का जवाब देते हुए कहा कि राउत ने उद्धव ठाकरे को कांग्रेस और शरद पवार के साथ गठजोड़ करा उद्धव को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। उद्धव ठाकरे अगर समय रहते राउत पर लगाम नहीं लगाई, तो उनकी बची-खुची पार्टी भी टूट कर बिखर जाएगी। यह दलाल है और दलाली वाला काम कर रहा है। राउत जिस तरह से अपनी पार्टी के साथ कर रहे हैं, वैसा मैं अपनी पार्टी के साथ जीवन में कभी नहीं कर सकता। Latest News in Hindi Today Hindi news Girish Mahajan #GirishMahajan #UddhavThackeray #SanjayRaut #BJPvsShivSena #MaharashtraPolitics #PoliticalAttack #ShivSenaCrisis

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Thackeray brothers reunion

Thackeray brothers reunion: क्या साथ आएंगे उद्धव और राज ठाकरे? दोनों ने कही यह बात

बृहन्मुम्बई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनावों के मद्देनजर महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े उथलपुथल होने के संकेत मिल रहे हैं। दरअसल, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मुखिया राज ठाकरे ने अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे को साथ आने का प्रस्ताव (Thackeray brothers reunion) दिया है। मनसे के मुखिया ने कहा है कि “महाराष्ट्र और मराठियों के अस्तित्व के आगे उद्धव और उनके झगड़े बहुत छोटे हैं। महाराष्ट्र बहुत बड़ा है। उनके लिए उद्धव के साथ आना और साथ में रहना कोई मुश्किल काम नहीं हैं।” जानकारी के मुताबिक फिल्म अभिनेता और डायरेक्टर महेश मांजरेकर ने एक पोडकास्ट में मनसे प्रमुख राज ठाकरे का साक्षात्कार किया है। इस दौरान महेश मांजरेकर ने राज ठाकरे से कई तीखे सवाल पूछे हैं। इस बीच महेश ने राज पूछा कि महाराष्ट्र के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए क्या राज ठाकरे उद्धव ठाकरे के साथ आ सकते हैं? इस पर राज ठाकरे ने कहा कि महारष्ट्र और मराठी के मुद्दे पर वे साथ आने के लिए तैयार हैं, लेकिन यही इच्छा उनकी भी होनी चाहिए। हमारे बीच के मतभेद, झगड़े, बहुत छोटे हैं, महाराष्ट्र बहुत (Thackeray brothers reunion) बड़ा है- राज ठाकरे राज ठाकरे ने आगे कहा कि “मैं जब शिवसेना में था, तब मुझे उद्धव के साथ काम करने के कोई दिक्कत (Thackeray brothers reunion) नहीं थी। लेकिन सवाल यह है कि सामने वाले कि इच्छा है, क्या मैं उनके साथ काम करूं? महाराष्ट की अगर इच्छा है। हम दोनों साथ आएं तो उन्हें बताना चाहिए। ऐसी छोटी छोटी बातों में मैं ईगो बीच में नहीं लाता।” इस बीच राज ने कहा कि “किसी भी बड़े उदेश्य के लिए हमारे बीच के मतभेद, झगड़े, बहुत छोटे हैं। महाराष्ट्र बहुत बड़ा है। इस महाराष्ट्र के अस्तित्व के लिए मराठी व्यक्ति के अस्तित्व के लिए हमारे बीच के झगड़े और विवाद का कोई महत्व नहीं है। वे निर्रथक हैं। इसलिए एक साथ और काम करना मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं है। इसके साथ ही राज ने यह भी कहा कि “मुद्दा सिर्फ इच्छा का है। यह सिर्फ मेरे अकेले के इच्छा या मेरे अकेले के स्वार्थ का मुद्दा नहीं है। मुझे लगता है, हमें बड़े उद्देश्य की ओर देखने की जरूरत है। मैं देख रहा हूं तो मुझे तो लगता है कि महाराष्ट्र के सभी राजनैतिक दलों के मराठी लोगों को एक साथ मिलकर एक ही पार्टी शुरू करनी चाहिए।” इसे भी पढ़ें:– कांग्रेस के तल्ख तेवर में फंसे लालू-तेजस्वी! सीएम फेस से लेकर सीट बंटवारा तक अटका उद्धव के साथ आने में कोई परेशानी (Thackeray brothers reunion) नहीं है- राज ठाकरे बता दें कि राज ठाकरे ने उद्धव को साथ आने का प्रस्ताव देते हुए अपनी तरफ से साफ कर दिया कि उद्धव के साथ आने में कोई परेशानी (Thackeray brothers reunion) नहीं है। महाराष्ट्र के लिए दोनों एक साथ आ सकते हैं। गौर करने वाली बात यह कि राज ठाकरे के साथ आने के प्रस्ताव पर उद्धव ठाकरे का भी बयान सामने आया है। उद्धव का कहना है कि “उनकी तरफ से कोई झगड़ा नहीं था। महाराष्ट्र के हित के लिए वे साथ आने को तैयार हैं।” एक तरह से देखा जाए तो उद्धव ठाकरे भी भाई राज ठाकरे के प्रस्ताव से सहमत दिखाई दे हैं। उन्होंने मिलकर काम करने के संकेत दिए हैं। इस बीच उद्धव ने कहा कि “महाराष्ट्र की भलाई के लिए वह छोटे-मोटे झगड़ों को छोड़कर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।” उन्होंने कहा कि “अगर हमने सही फैसला लिया होता तो हम केंद्र और राज्य में सरकार बना सकते थे।” Latest News in Hindi Today Hindi news Thackeray brothers reunion #ThackerayBrothersReunion #UddhavThackeray #RajThackeray #ShivSena #MNS #MaharashtraPolitics #PoliticalReunion #ThackerayFamily #UddhavRaj #IndianPolitics

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Mahakaleshwar Temple

महाकाल का शृंगार: क्यों हर दिन बदलता है भगवान शिव का स्वरूप?

उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भगवान शिव के रूप महाकाल (Mahakaal) का प्रतिदिन विशेष शृंगार किया जाता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी छिपा होता है। आइए जानते हैं कि प्रतिदिन महाकाल का शृंगार अलग-अलग क्यों किया जाता है और इसके पीछे की क्या कहानी है। महाकाल का शृंगार: एक दिव्य परंपरा महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) में भगवान शिव के रूप महाकाल का शृंगार प्रतिदिन अलग-अलग तरीके से किया जाता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी छिपा होता है। महाकाल का शृंगार उनके विभिन्न रूपों और भावों को दर्शाता है, जो भक्तों को उनके दिव्य स्वरूप के करीब ले जाता है। शृंगार के पीछे का धार्मिक महत्व महाकाल का शृंगार (Mahakal Shringar) केवल सजावट नहीं है, बल्कि यह एक धार्मिक अनुष्ठान है। यह शृंगार भगवान शिव के विभिन्न रूपों और उनकी लीलाओं को दर्शाता है। प्रतिदिन अलग-अलग शृंगार करने के पीछे का उद्देश्य भक्तों को भगवान शिव (Lord Shiva) के विभिन्न रूपों के दर्शन कराना और उनकी कृपा प्राप्त करना है। महाकाल का अनूठा शृंगार 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन में विराजित बाबा महाकाल का हर दिन विभिन्न रूपों में शृंगार होता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि यह भगवान शिव (Lord Shiva) के विभिन्न रूपों को दर्शाता है। हर दिन अलग-अलग रूप में महाकाल के दर्शन करने से भक्तों को एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है। महाकाल के शृंगार के विभिन्न रूप इसे भी पढ़ें:- प्रेमानंद जी महाराज: गुरु दक्षिणा का सही अर्थ और महत्व महाकाल के शृंगार का महत्व उज्जैन स्थित महाकाल (Mahakaleshwar Temple) के मंदिर में हर दिन आरती के बाद बाबा को एक अलग रूप में सजाया जाता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि यह भगवान शिव के विभिन्न रूपों को दर्शाता है। हर दिन अलग-अलग रूप में महाकाल के दर्शन करने से भक्तों को एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है। महाकाल के शृंगार (Mahakal Shringar) का यह अनूठा तरीका भक्तों को भगवान शिव की विभिन्न लीलाओं और रूपों के बारे में जानने का अवसर प्रदान करता है। यह शृंगार न केवल भक्तों की आस्था को मजबूत करता है, बल्कि उन्हें भगवान शिव (Lord Shiva) के प्रति समर्पण और भक्ति का संदेश भी देता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Mahakaleshwar Temple #UddhavThackeray #BJP #ModiGovt #MaharashtraPolitics #ShivSena #LokSabhaElections #IndianPolitics #PoliticalAttack #MaharashtraNews #ModiVsOpposition

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Uddhav Thackeray's Shiv Sena

उद्धव की ‘बची-खुची’ शिवसेना का बीएमसी चुनावों में होगा सफाया, कुणाल कामरा का सपोर्ट करने पर भड़के संजय निरुपम

कॉमेडियन कुणाल कामरा (Kunal Kamra) द्वारा महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) पर गद्दार की टिप्पणी करने के बाद से शिवसेना के दोनों गुटों में जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) द्वारा कुणाल कामरा (Kunal Kamra) को सही बताने और भाजपा के सौगात-ए-मोदी कार्यक्रम पर सवाल उठाने के बाद अब शिंदे गुट के नेता संजय निरुपम ने जवाबी हमला किया है। निरुपम ने उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) गुट की शिवसेना को ‘बची-खुची’ शिवसेना बताते हुए कहा कि संजय राउत हमारे गठबंधन के नेताओं को गधा बता रहे हैं। निरुपम ने कहा कि अगर शिवसेना के नेताओं की यही स्थिति रही तो आगामी बीएमसी चुनावों में बची-खुची शिवसेना को भी लोग खत्म कर देंगे। विदित  हो कि इससे पहले गुरुवार को संजय निरुपम ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कुणाल कामरा (Kunal Kamra) को लेकर कहा था कि वह झुकेगा तो नहीं, लेकिन हमसे छिपेगा जरूर। उसे अपने कर्मों की सजा तो भुगतनी ही पड़ेगी। निरुपम ने कहा था कि इस मामले में मुंबई पुलिस जरूर कार्रवाई करेगी। महाराष्ट्र की जनता चुनाव में दे चुकी उद्धव गुट को संदेश  संजय निरुपम ने कहा कि उद्धव गुट को जनता लगातार अपना संदेश दे रही है। पहले लोकसभा चुनाव में फिर विधानसभा चुनावों में हराकर महाराष्ट्र की जनता बता चकी है कि कौन असली है और कौन नकली शिवसेना है। विधानसभा चुनावों में हमारी शिवसेना का स्ट्राइक रेट 70.37 प्रतिशत रहा था जबकि उद्धव गुट वाली शिवसेना का स्ट्राइक रेट 21.05 प्रतिशत रहा था। यह जनता द्वारा दिया गया साफ संदेश है। इसे भी पढ़ें:- प्रेमानंद जी महाराज: गुरु दक्षिणा का सही अर्थ और महत्व उद्धव बाला साहब के बेटे जरूर हैं, लेकिन उनके वारिस नहीं- संजय निरुपम संजय निरुपम ने उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) पर तंज कसते हुए कहा कि वह बाला साहब के बेटे जरूर हैं, लेकिन उनके वारिस नहीं। बाला साहब के असली वारिस एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) हैं। जो उनकी विचारधारा पर चहते हुए पार्टी का विस्तार कर रहे हैं। उद्धव और उनकी पार्टी को अब हार स्वीकार कर लेना चाहिए। वहीं, मीडिया ने जब निरुपम से यह पूछा गया है कि उद्धव ठाकरे ने भाजपा के सौगात-ए मोदी कार्यक्रम की आलोचना की है, तो निरुपम ने इसका जवाब देते हुए कहा कि न तो हम मुस्लिमों के खिलाफ हैं और न ही बाला साहब ठाकरे थे। शिवसेना हो या फिर भाजपा, हम रोहिंग्याओं, बांग्लादेशियों और पाकिस्तान का सपोर्ट करने वाले मुस्लिमों के खिलाफ हैं। निरुपम ने कहा कि, उद्धव ठाकरे को अब सबसे बड़ा डर यही है कि बाला साहब ठाकरे का वोटबैंक पहले ही सिखक चुका है और अब अगर अल्पसंख्यक भी हमारे साथ आ गए तो उनकी शिवसेना खत्म हो जाएगी। Latest News in Hindi Today Hindi News Uddhav Thackeray #UddhavThackeray #ShivSena #BMCelections #KunalKamra #SanjayNirupam #MumbaiPolitics #Maharashtra #BJPvsShivSena #Elections2024 #PoliticalDebate

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Sanjay Raut on Maharashtra Govt

महाराष्ट्र सरकार का शासन औरंगजेब से भी बदतर: संजय राउत 

महाराष्ट्र में मुगल शासक औरंगजेब (Aurangzeb) पर शुरू हुआ विवाद और राजनीतिक बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। इस बहस में अब शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) भी कूद पड़े हैं। राउत ने कहा है कि भाजपा की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार औरंगजेब से भी बदतर है। इस नकारी सरकार के कारण ही महाराष्ट्र के किसान मर रहे हैं, बेरोजगार और महिलाएं आत्महत्या करने को मजबूर हैं।  बता दें कि औरंगजेब (Aurangzeb) को लेकर पिछले कई दिनों से सियासी संग्राम चल रहा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सपा विधायक अबु आजमी ने औरंगजेब को क्रूर शासक मानने से इनकार करते हुए कहा कि औरंगजेब के समय में भारत सोने की चिड़िया थी। औरंगजेब के समय में मंदिर नहीं तोड़ गए थे और संभाजी महाराज की हत्या राजनीतिक कारण से हुई थी। आजमी के इस बयान का सभी पार्टियों ने विरोध किया और खूब सियासी बयानबाजी हुई। बात औरंगजेब की कब्र खोदने तक पहुंच गई। अब इस विवाद में संजय राउत (Sanjay Raut) भी कूद गए हैं।  जनता त्रस्त है, लेकिन ये अत्याचार करने में जुटे- संजय  संजय राउत (Sanjay Raut) ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘औरंगजेब को जमीन के नीचे दफन हुए 400 साल हो चुका है, उसे भूल जाइए। क्या महाराष्ट्र के किसान औरंगजेब (Aurangzeb) के कारण आत्महत्या कर रहे हैं। वे भाजपा की अगुवाई वाली सरकार की वजह से ऐसा कर रहे हैं।’ संजय राउत ने कहा कि जिस तरह से मुगल शासक औरंगजेब ने अत्याचार किए थे, उसी तरह ये सरकार भी जनता पर अत्याचार कर रही है। इनकी वजह से किसान, बेरोजगार और महिलाएं आत्महत्या कर रही। जनता त्रस्त है, लेकिन ये अत्याचार करने में जुटे हैं।   इसे भी पढ़ें:-गिरिडीह में होली जुलूस पर पत्थरबाजी, हिंसक झड़प और आगजनी संजय राउत ने यह बयान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के उस टिप्पणी पर दी। जिसमें फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने कहा था कि हर देशवासी महसूस कर रहा है कि छत्रपति संभाजी नगर में मौजूद औरंगजेब की कब्र को हटा देना चाहिए। संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता औरंगजेब का कब्र हटाने की नहीं सोच रही, वह इस अत्याचारी सरकार को हटाने की सोच रही है। यह सरकार राज्य को लूटने में जुटी हुई है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Sanjay Raut #SanjayRaut #MaharashtraPolitics #ShivSena #UddhavThackeray #EknathShinde #BJPShivSena #Aurangzeb #MVA #MaharashtraNews #PoliticalControversy

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