Ministry of Statistics and Programme Implementation

भारत में बढ़ती बेरोजगारी दर: मई 2025 के आंकड़े युवाओं और महिलाओं के लिए चिंता का संकेत

भारत में मई 2025 के रोजगार से जुड़े आंकड़े सरकार और आम जनता दोनों के लिए चिंता का विषय है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (Ministry of Statistics and Programme Implementation) द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार इस महीने बेरोजगारी दर बढ़ गई है। यह सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी बेरोजगारी ने दस्तक दी है। खासतौर पर युवा वर्ग और महिलाओं में बेरोजगारी दर ने चिंताजनक स्तर पार कर लिए हैं, जो देश की सामाजिक और आर्थिक संरचना के लिए खतरे की घंटी है। युवाओं में तेजी से बढ़ी बेरोजगारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में बेरोजगारी (Unemployment) दर मई 2025 में बढ़कर 5.6% हो गई, जो अप्रैल 2025 में 5.1% थी। सबसे अधिक प्रभाव 15 से 29 वर्ष की आयु के युवाओं पर पड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस आयु वर्ग की बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) अप्रैल में 12.3% थी, जो मई में बढ़कर 13.7% हो गई। वहीं शहरी क्षेत्रों में यह दर अप्रैल के 17.2% से बढ़कर मई में 17.9% पर पहुंच गई। यह इशारा करता है कि देश की युवाशक्ति, जो कि राष्ट्र निर्माण की रीढ़ मानी जाती है, बेरोजगारी की समस्या से परेशान है। महिलाओं में भी बढ़ी बेरोजगारी वैसे बेरोजगारी (Unemployment) का यह संकट केवल युवाओं तक सीमित नहीं रहा। महिलाओं की भागीदारी और रोजगार की स्थिति भी गिरावट में रही। मई 2025 में महिलाओं की बेरोजगारी दर 5.8% दर्ज की गई, जो पुरुषों की दर 5.6% से अधिक रही। यह दर्शाता है कि महिला सशक्तिकरण और आर्थिक भागीदारी के प्रयासों के बावजूद महिलाएं आज भी रोजगार के क्षेत्र में पिछड़ रही हैं, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में। गिरा लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) का गिरना एक और चिंता का विषय है। यह दर उन लोगों के प्रतिशत को दर्शाता है जो या तो काम कर रहे हैं या काम की तलाश में हैं। मई 2025 में यह दर घटकर 54.8% रह गई, जो अप्रैल में 55.6% थी। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 56.9% और शहरी क्षेत्रों में 50.4% रही। इससे यह स्पष्ट है कि काम की तलाश में लगे लोगों की संख्या में भी गिरावट आई है, जो या तो अवसरों की कमी या हतोत्साहित कर देने वाली परिस्थितियों का संकेत देती है। वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो में गिरावट वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो (WPR) यानी काम कर रही जनसंख्या का अनुपात भी मई में कम हो गया। अप्रैल में जहां यह दर 52.8% थी, वहीं मई में यह घटकर 51.7% हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में WPR 54.1% रहा जबकि शहरी क्षेत्रों में यह घटकर 46.9% रहा। महिलाओं की स्थिति और भी चिंताजनक रही — ग्रामीण महिलाओं में यह दर 35.2% रही और शहरी क्षेत्रों में केवल 23.0%। कुल महिला वर्कर रेश्यो 31.3% रहा, जो यह दर्शाता है कि महिला श्रमबल का पूर्ण रूप से उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक रोजगार सृजन की चुनौती सरकार ने बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) में इस वृद्धि के पीछे का कोई विशेष कारण नहीं बताया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह डेटा देश में रोजगार सृजन की दिशा में जारी चुनौतियों को उजागर करता है। Centre for Monitoring Indian Economy (CMIE) जैसे शोध संस्थानों ने भी समय-समय पर यह चेतावनी दी है कि भारत में बेरोजगारी विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं के बीच एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। हालांकि भारत की GDP ग्रोथ दर अभी भी मजबूत मानी जा रही है, लेकिन यह ग्रोथ जब तक रोजगार के अवसरों में तब्दील नहीं होती, तब तक इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगा। रोजगारहीन विकास न केवल सामाजिक असमानता को बढ़ावा देगा, बल्कि देश की सामाजिक स्थिरता और आर्थिक समरसता को भी नुकसान पहुंचा सकता है। मई 2025 के बेरोजगारी आंकड़े (May Unemployment Rate) यह साफ दर्शाते हैं कि भारत को अब रोजगार सृजन की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। विशेषकर युवा और महिलाओं के लिए नीति आधारित, कौशल विकास पर केंद्रित और क्षेत्रीय जरूरतों को ध्यान में रखने वाली योजनाएं बनानी होंगी। देश के लिए यह समय आत्मनिरीक्षण का है कि विकास केवल GDP तक सीमित न रहे, बल्कि हर नागरिक को रोजगार और आत्मनिर्भरता की ओर ले जाए। Latest News in Hindi Today Hindi Unemployment Rate #MayUnemploymentRate #UnemploymentRate #GDP #Job #WPR

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