प्रमुख खबरें

Trump बोले—ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिक भेजने की संभावना कम, परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से भी किया इनकार

वॉशिंगटन, 16 अक्टूबर 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष में अमेरिकी जमीनी सैनिकों को तैनात करने की संभावना बेहद कम है। Newsmax को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री सुरक्षा को लेकर तनाव बना हुआ है। Trump ने क्या कहा? ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान में अमेरिकी सैनिकों को जमीन पर उतारने की जरूरत नजर नहीं आती। उन्होंने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना को भी खारिज कर दिया। इन टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान में सीधे जमीनी सैन्य अभियान और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से दूरी बनाए रखने की बात कर रहे हैं। हालांकि, इससे संघर्ष के अन्य सैन्य विकल्पों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती। बयान क्यों अहम है? ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के संभावित अगले कदमों को लेकर चर्चा जारी है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिकी सैन्य योजनाकार ईरान के खिलाफ GBU-43/B ‘Mother of All Bombs’ (MOAB) जैसे शक्तिशाली गैर-परमाणु हथियार के संभावित इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इस रिपोर्ट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी। MOAB एक पारंपरिक गैर-परमाणु बम है। इसके संभावित इस्तेमाल की चर्चा परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से अलग मुद्दा है। Strait of Hormuz में समुद्री खतरा बरकरार ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना ने क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरे को गंभीर बताया है। जहाजों पर संभावित हमलों और समुद्री परिवहन में व्यवधान ने वैश्विक व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकते हैं। तेल की कीमतों पर भी असर मध्य पूर्व में तनाव और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर बाजार की नजर बनी हुई है। 16 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 105.45 डॉलर प्रति बैरल था। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही सामान्य स्तर से नीचे रहने की खबरों ने आपूर्ति संबंधी चिंताओं को बढ़ाया है। हालांकि, तेल की कीमतें केवल भू-राजनीतिक तनाव से नहीं, बल्कि वैश्विक मांग, उत्पादन और अन्य बाजार परिस्थितियों से भी प्रभावित होती हैं। ईरान से जुड़े लोगों और संस्थाओं पर नई पाबंदियां अमेरिकी प्रशासन ने 15 अक्टूबर को ईरान से जुड़े 16 व्यक्तियों और 10 संस्थाओं पर नई प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखना है। इससे संकेत मिलता है कि जमीनी सैन्य कार्रवाई और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार के बावजूद वॉशिंगटन ईरान के खिलाफ आर्थिक तथा अन्य रणनीतिक दबाव के विकल्पों का इस्तेमाल जारी रखे हुए है। संघर्ष खत्म होने के संकेत अभी स्पष्ट नहीं ट्रंप की टिप्पणियों से ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिकों की तैनाती और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर उनकी मौजूदा स्थिति सामने आई है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि संघर्ष जल्द समाप्त हो जाएगा। हवाई हमले, आर्थिक प्रतिबंध और समुद्री सुरक्षा से जुड़े कदम आगे की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा बने रह सकते हैं। क्षेत्र में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह दोनों देशों के अगले फैसलों और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा स्थिति पर निर्भर करेगा। स्रोत – The Indian Express, Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

ट्रंप बोले—चीन और रूस ईरान की मदद नहीं कर रहे; अमेरिकी खुफिया आकलन से अलग बयान

वॉशिंगटन, 14 अक्टूबर 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि चीन और रूस ईरान के साथ जारी युद्ध में किसी महत्वपूर्ण तरीके से उसकी मदद कर रहे हैं। उनका यह बयान अमेरिकी खुफिया आकलनों से अलग है, जिनमें बीजिंग और मॉस्को की ओर से ईरान को सैन्य सहायता दिए जाने की बात कही गई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका, चीन और रूस के बीच ईरान को लेकर कूटनीतिक तनाव बना हुआ है और क्षेत्र में जारी संघर्ष के अंतरराष्ट्रीय प्रभावों पर नजर रखी जा रही है। ट्रंप ने क्या कहा? ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन या रूस ईरान की किसी महत्वपूर्ण तरीके से मदद कर रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ऐसी सहायता दी जा रही होती, तो अमेरिकी प्रशासन को इसकी जानकारी मिल जाती। ट्रंप का यह बयान दोनों देशों की भूमिका को लेकर उनके सार्वजनिक आकलन को दर्शाता है। हालांकि, इससे यह स्वतंत्र रूप से साबित नहीं होता कि ईरान को किसी भी प्रकार की बाहरी सहायता नहीं मिल रही है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में क्या दावा किया गया? रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया ब्रीफिंग में चीन और रूस की ओर से ईरान को सहायता मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्टों में कथित तौर पर उपग्रह तस्वीरों, हथियारों के कलपुर्जों और अन्य सैन्य सहायता का उल्लेख किया गया है। इस तरह ट्रंप के सार्वजनिक बयान और रिपोर्ट किए गए खुफिया आकलनों के बीच अंतर दिखाई देता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर सहायता की पूरी मात्रा, स्वरूप और दोनों देशों की प्रत्यक्ष भूमिका के सभी विवरण स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं किए जा सकते। शी जिनपिंग से बातचीत का भी किया गया था जिक्र ट्रंप पहले भी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत के दौरान ईरान को चीन की संभावित सहायता का मुद्दा उठा चुके हैं। सितंबर में अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि ट्रंप ने चीन की ओर से ईरान की मदद किए जाने पर आपत्ति जताई थी। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, इस बातचीत में ईरान को समर्थन देने के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। हालांकि, किसी कूटनीतिक आश्वासन और जमीन पर वास्तविक गतिविधियों के बीच अंतर हो सकता है। चीन और रूस का अलग-अलग रुख चीन ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत किया है। वहीं, रूस ने मध्य पूर्व में जारी युद्ध के व्यापक सुरक्षा प्रभावों को लेकर चिंता जताई है और चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय संघर्ष परमाणु हथियारों की प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे सकता है। ट्रंप इससे पहले भी शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ईरान संघर्ष के संदर्भ में तटस्थ बताया चुके हैं। दोनों देशों के सार्वजनिक बयानों और उनकी कथित सहायता से जुड़े खुफिया आकलनों को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच बयान के मायने ईरान से जुड़े संघर्ष के बीच चीन और रूस की भूमिका अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का अहम मुद्दा बनी हुई है। वॉशिंगटन के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि तेहरान को बाहरी सैन्य या तकनीकी सहायता किस स्तर पर मिल रही है, जबकि बीजिंग और मॉस्को इस संकट को लेकर अपने-अपने कूटनीतिक रुख रखते हैं। ट्रंप के ताजा बयान और अमेरिकी खुफिया आकलनों के बीच अंतर इस बात को रेखांकित करता है कि संघर्ष में बाहरी देशों की भूमिका को लेकर सार्वजनिक बयानों और सुरक्षा एजेंसियों के आकलनों में भिन्नता हो सकती है। फिलहाल, चीन और रूस की ओर से ईरान को कथित सहायता के दावों तथा इस संबंध में अमेरिकी आकलनों पर अंतरराष्ट्रीय नजर बनी हुई है। Source: Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

US-Iran War: ट्रंप बोले—ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने में अमेरिका शायद “बहुत आगे” निकल गया, Gulf में उड़ानें प्रभावित

वॉशिंगटन, 13 अक्टूबर 2026: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के नेतृत्व को निशाना बनाने की अमेरिकी रणनीति शायद जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ गई। उनके मुताबिक, कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के मारे जाने के बाद संभावित शांति वार्ता के लिए यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि तेहरान में किससे बातचीत की जाए और किसके पास फैसले लेने का अधिकार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के बीच कूटनीतिक प्रयास अनिश्चित बने हुए हैं। वहीं, खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं के कारण हवाई और समुद्री परिवहन पर भी असर पड़ रहा है। ट्रंप बोले—ईरान में किससे बातचीत करें, यह स्पष्ट नहीं ओहायो के यंग्सटाउन में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने के मामले में अमेरिका शायद “बहुत आगे” चला गया है। उन्होंने संकेत दिया कि वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने से संभावित वार्ता के लिए उपयुक्त प्रतिनिधियों की पहचान करना कठिन हो सकता है। ट्रंप की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ बातचीत के लिए ईरान में प्रभावी नेतृत्व और निर्णय लेने वाले अधिकारियों की पहचान भी अमेरिकी प्रशासन के सामने एक चुनौती हो सकती है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन जुलाई 2024 से पद पर हैं। हालांकि, ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व की मौजूदा स्थिति और संभावित वार्ताकारों को लेकर अनिश्चितता जताई। ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर ट्रंप के दावे ट्रंप ने रैली के दौरान दावा किया कि युद्ध में ईरान की वायुसेना और नौसैनिक क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने ईरान के सभी 159 नौसैनिक जहाजों के नष्ट होने का भी दावा किया। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इसलिए इन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। खाड़ी क्षेत्र में विमान सेवाओं पर असर ईरान युद्ध और क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों का असर खाड़ी क्षेत्र की हवाई सेवाओं पर भी पड़ रहा है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास हमलों की खबरों के बाद कई एयरलाइंस ने सऊदी अरब जाने वाली उड़ानें रद्द या अस्थायी रूप से निलंबित की हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एयर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, एतिहाद और कतर एयरवेज समेत कई विमानन कंपनियों की सेवाएं प्रभावित हुई हैं। यात्रियों को उड़ानों की स्थिति और संभावित बदलावों के लिए संबंधित एयरलाइन की आधिकारिक सूचना देखने की सलाह दी जाती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ी समुद्री सुरक्षा की चिंता फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास वाणिज्यिक जहाजों से जुड़ी सुरक्षा घटनाओं ने समुद्री परिवहन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस क्षेत्र से वैश्विक ऊर्जा व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का व्यवधान तेल आपूर्ति, माल ढुलाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं और जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंधों या जोखिमों का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी पड़ सकता है। शांति वार्ता पर अनिश्चितता बरकरार अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे कूटनीतिक प्रयासों के केंद्र में बने हुए हैं। ट्रंप की ताजा टिप्पणी सैन्य कार्रवाई और कूटनीति के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि, इससे किसी औपचारिक वार्ता की शुरुआत या समझौते की संभावना की पुष्टि नहीं होती। फिलहाल, संघर्ष का आगे का रुख दोनों देशों के फैसलों, क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति और कूटनीतिक संपर्कों पर निर्भर करेगा। खाड़ी क्षेत्र में उड़ानों और समुद्री परिवहन पर पड़ रहे असर के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर हालात पर बनी हुई है। Source: Reuters / Al Jazeera / The Indian Express / The Business Standard जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

US-Iran तनाव और बढ़ा: Trump बोले, Iran के Pickaxe Mountain पर जल्द हमला कर सकता है अमेरिका

वॉशिंगटन, 5 सितंबर 2026: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक और बड़ा बयान दिया है। Trump ने कहा कि अमेरिका ईरान के अत्यधिक सुरक्षित Pickaxe Mountain nuclear site को “बहुत जल्द” निशाना बना सकता है। उनके इस बयान से दोनों देशों के बीच एक और बड़े military escalation की आशंका बढ़ गई है। Natanz के पास है Pickaxe Mountain Pickaxe Mountain ईरान के पहले से क्षतिग्रस्त Natanz uranium enrichment facility के पास स्थित है। Reuters के मुताबिक यह एक heavily fortified site है, जहां पहाड़ के भीतर गहराई में दो tunnel complexes मौजूद हैं। इसी वजह से यह ईरान के nuclear infrastructure से जुड़ी बेहद संवेदनशील जगह मानी जा रही है। Trump बोले- बहुत जल्द हो सकता है हमला White House के Oval Office में reporters से बातचीत के दौरान Trump ने कहा कि अमेरिका Pickaxe Mountain को जल्द निशाना बना सकता है। हालांकि उन्होंने संभावित हमले की कोई निश्चित तारीख या operational details नहीं बताईं। US-Iran के बीच पहले से जारी हैं हमले यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब हाल के दिनों में अमेरिका ने ईरान पर नए air strikes किए हैं और Tehran ने भी जवाबी हमले किए हैं। ईरान ने गुरुवार को अमेरिकी सहयोगी Kuwait को भी निशाना बनाया था। इससे Gulf region में तनाव लगातार बना हुआ है। Trump ने संघर्ष को बताया ‘Military Conflict’ Trump ने मौजूदा लड़ाई को full-scale war कहने से परहेज करते हुए इसे “military conflict” बताया। उन्होंने इसे अमेरिका के लिए “small potatoes” भी कहा। वहीं Vice President JD Vance ने भी इससे एक दिन पहले कहा था कि वह मौजूदा स्थिति को युद्ध नहीं कहेंगे। अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत Associated Press के अनुसार फरवरी से जारी US-Iran confrontation में अब तक 18 अमेरिकी service members की मौत हो चुकी है और अमेरिकी taxpayers पर इसकी लागत 37.5 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद Trump का कहना है कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान के nuclear programme को कमजोर किया है। Nuclear programme बना विवाद का केंद्र Trump ने दोहराया कि अमेरिका ईरान को nuclear weapon हासिल नहीं करने देगा। Pickaxe Mountain को लेकर उनकी नई चेतावनी इसी wider nuclear dispute के बीच आई है। किसी भी नए strike से Middle East में पहले से जारी तनाव और अधिक बढ़ सकता है। source – Reuters / Associated Pressजय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें
Translate »