US visa new rule

अमेरिका का नया वीज़ा नियम: सोशल मीडिया अकाउंट होना चाहिए पब्लिक 

अमेरिका में पढ़ाई, काम या रिसर्च के इरादे से जाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। अमेरिकी सरकार (American government) ने अपनी वीज़ा नीति (Visa Policy) में बदलाव  करते हुए अब यह अनिवार्य कर दिया है कि वीज़ा के लिए आवेदन करने वाले आवेदकों के सोशल मीडिया अकाउंट्स (Social Media Accounts) सार्वजनिक यानी पब्लिक (Public) होने चाहिए। इसलिए अब अमेरिका के लिए किसी को भी F, M या J वीज़ा चाहिए तो उसका सोशल मीडिया अकाउंट (Social Media Accounts) होने के साथ-साथ अकाउंट पब्लिक भी होना चाहिए।  सोशल मीडिया और वीज़ा का कनेक्शन यह नया नियम अमेरिका की बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के चलते लागू किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब वीज़ा आवेदन (Visa Applicants) की प्रक्रिया में केवल दस्तावेज़ ही नहीं, बल्कि आवेदक की ऑनलाइन गतिविधियों को भी मॉनिटर किया जाएगा। आवेदक के पोस्ट, फोटोज़, कमेंट्स, शेयर और यहां तक कि लाइक्स तक की जांच की जाएगी। विशेष ध्यान उस कंटेंट पर होगा जिसमें हिंसा, नफरत, कट्टरता, आतंकवाद, धर्म या जाति के प्रति किसी भी प्रकार की नकारात्मक भावना झलकती हो। अगर किसी का अकाउंट प्राइवेट है यानी उसकी गतिविधियां सिर्फ दोस्त या फॉलोअर्स तक सीमित हैं, तो वीज़ा अधिकारियों को शक हो सकता है कि वह कुछ छिपा रहा है और इसका सीधा असर वीज़ा अप्रूवल (Visa Approval) पर पड़ेगा। किसे मिलेगा कौन-सा वीज़ा? चिंतित हैं आवेदक  इस बदलाव के बाद कई युवा असमंजस और चिंता में हैं। खासकर वे छात्र जो अपने सोशल मीडिया को निजी (Private) रखना पसंद करते हैं, अब उन्हें अपने अकाउंट की सेटिंग्स बदलनी होंगी। कई छात्र और पेशेवर यह महसूस कर रहे हैं कि यह नियम उनकी निजता (Privacy) पर सीधा हमला है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या अमेरिका में पढ़ाई या काम के अवसर की कीमत पर अपनी प्राइवेसी का त्याग करना होगा? सोशल मीडिया अकाउंट (Social Media Accounts) को सार्वजनिक करने का मतलब है कि न केवल अमेरिकी अधिकारी बल्कि कोई भी व्यक्ति आपकी निजी जानकारी तक पहुंच सकता है। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? प्रोसेस में देरी की आशंका इस नियम के कारण वीज़ा प्रक्रिया और इंटरव्यू में देरी भी संभव है। हर आवेदक के सोशल मीडिया अकाउंट (Social Media Accounts) की समीक्षा करना एक बड़ा और समय लेने वाला काम है। इससे एम्बेसी पर दबाव बढ़ सकता है और वीज़ा मिलने में अधिक समय लग सकता है। हालांकि अमेरिका की मंशा अपने देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है, लेकिन इस नियम पर कई मानवाधिकार संगठनों और विशेषज्ञों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यह कदम निजता के अधिकार (Right to Privacy) का उल्लंघन है। किसी भी व्यक्ति के सोशल मीडिया अकाउंट से जज करना ठीक नहीं माना जा रहा है। क्योंकि  कई बार लोग मज़ाक, ट्रेंड या दूसरों की पोस्ट शेयर करते हैं, जिसका उनके वास्तविक व्यवहार से कोई लेना-देना नहीं होता। अमेरिका का यह नया वीज़ा नियम (Visa Rule) एक तरफ जहाँ सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास है, वहीं दूसरी तरफ यह डिजिटल दुनिया (Digital World) में निजी आज़ादी और पारदर्शिता के बीच एक नई बहस को जन्म दे रहा है। स्टूडेंट्स, एक्सपर्ट्स और रिसर्च स्कॉलर्स को अब केवल अपने एजुकेशनल रिकॉर्ड या अनुभव ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया एक्टिविटी (Social Media Accounts) भी गौर किया जाएगा। अगर आप अमेरिका जाने की योजना बना रहे हैं, तो अब वीज़ा फॉर्म भरने से पहले अपने इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर या अन्य सोशल मीडिया अकाउंट (Social Media Accounts) की सेटिंग्स जरूर चेक करें। क्योंकि अब पासपोर्ट के साथ-साथ, आपका डिजिटल चेहरा भी आपकी पहचान बन चुका है। View this post on Instagram A post shared by JaiRashtra_News (@manishhmishra) Latest News in Hindi Today Hindi news Social Media Accounts #usvisa #newvisarule #socialmedia #usimmigration #visaupdate2025

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Venezuela gang members

Venezuela gang members: अवैध प्रवासियों पर सख्त ट्रंप प्रशासन, वेनेजुएला के गिरोह के 200 से अधिक सदस्यों को भेजा अल-सल्वाडोर,

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अवैध प्रवासियों पर जरा भी नरमी बरतने के मूड में नहीं हैं। राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद से ही वो अमेरिका में रह रहे अवैध प्रवासियों को खदेड़ने में लगे हुए हैं। सख्त रुख जारी है। इसी कड़ी में वेनेजुएला के एक गिरोह (Venezuela gang members) के तकरीबन 200 से अधिक कथित लोगों को ट्रंप प्रशासन ने निर्वासित कर अल साल्वाडोर भेज दिया है। जहां उन्हें उच्च सुरक्षा वाली जेल में ले जाया गया है। अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति ने खुद इस बात की जानकारी दी है। दरअसल, यह ट्रैन डे अरागुआ गिरोह है, जिसका ट्रंप ने शनिवार को जारी की गई अपनी असामान्य घोषणा में जिक्र किया था। हालांकि, अदालत ने अपने फैसले में इनका निर्वासन रोकने का आदेश सुनाया था, लेकिन इससे पहले ही विमान इन्हें लेकर उड़ गया। बता दें कि यूएस डिस्ट्रिक्ट जज जेम्स ई. बोसबर्ग ने शनिवार को निर्वासन को अस्थायी रूप से रोकने का आदेश जारी किया। लेकिन वकीलों ने उन्हें बताया कि पहले से ही दो विमान अप्रवासियों के साथ हवा में हैं- एक अल साल्वाडोर जा रहा है, दूसरा होंडुरास जा रहा है।”  वेनेजुएला के आपराधिक संगठन, ट्रेन डी अरागुआ के पहले बैच के 238 सदस्य को (Venezuela gang members) भेजा गया अल साल्वाडोर गौर करने वाली बात यह कि बोसबर्ग ने मौखिक रूप से विमानों को वापस करने का आदेश दिया, लेकिन जाहिर तौर पर उन्हें वापस नहीं किया गया और उन्होंने अपने लिखित आदेश में निर्देश शामिल नहीं किया। इस बीच ट्रंप प्रशासन पर अदालती आदेश का उल्लंघन करने का भी आरोप लगा। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक बयान में इस बारे में अटकलों का जवाब देते हुए कहा कि “क्या प्रशासन अदालती आदेशों का उल्लंघन कर रहा है? कैरोलिन ने कहा कि “प्रशासन ने अदालती आदेश का पालन करने से इनकार नहीं किया। इस आदेश का कोई वैधानिक आधार नहीं था। इन्हें अमेरिकी क्षेत्र से पहले ही हटा दिए जाने के बाद आदेश जारी किया गया था।” इस संबंध में जानकारी देते हुए अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले ने कहा कि “वेनेजुएला के आपराधिक संगठन, ट्रेन डी अरागुआ के पहले बैच के 238 सदस्य (Venezuela gang members) अल साल्वाडोर आ गए हैं। इन सभी को एक साल के समय के लिए आतंकवाद कारावास केंद्र, सीईसीओटी में ट्रांसफर कर दिया गया है।” नायब बुकेले ने इसपर आगे कहा कि “अमेरिका इसके लिए काफी कम पैसे का भुगतान करेगा, लेकिन हमारे लिए यह काफी ज्यादा है।” उन्होंने आगे बताया कि “सरकार जीरो आइडलनेस कार्यक्रम चला रही है। इसके तहत 40,000 से अधिक कैदियों की मदद से देश की जेलों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। अमेरिका से भेजे गए कैदियों को भी इनके साथ ही प्रोडक्शन में लगाया जाएगा।” यही नहीं, अमेरिका ने अल साल्वाडोर द्वारा वांछित एमएस-13 के 23 सदस्यों को भी भेजा है। बता दें कि इसमें दो सरगना शामिल हैं जो कि आपराधिक संगठन के हाई लेवल का सदस्य है। अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले ने कहा कि इसकी मदद से खुफिया जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी।  इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला: जाफर एक्सप्रेस हाईजैक, 400 से ज्यादा यात्री बंधक 1798 के एलियन एनिमीज एक्ट की घोषणा के बाद अप्रवासियों को (Venezuela gang members) किया गया निर्वासित  बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 1798 के एलियन एनिमीज एक्ट की घोषणा के बाद अप्रवासियों को निर्वासित (Venezuela gang members) किया गया था। इसका उपयोग अमेरिकी इतिहास में सिर्फ तीन ही बार किया गया है। पहला साल 1812 के युद्ध दूसरा, प्रथम और तीसरा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान। दरअसल, इस कानून के तहत राष्ट्रपति को सिर्फ यह घोषणा करनी पड़ती है कि संयुक्त राज्य अमेरिका युद्ध में है। फिर क्या यह घोषणा करते ही उसे विदेशियों को हिरासत में लेने या हटाने के लिए असाधारण शक्तियां मिलती हैं। जिन्हें आव्रजन या आपराधिक कानूनों के तहत सुरक्षा प्राप्त होती। ध्यान देने वाली बात यह कि आखिरी बार इसका इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी-अमेरिकी नागरिकों की हिरासत को सही ठहराने के लिए किया गया था। खैर, चाहे कुछ भी हो, अमेरिका में अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने का काम बड़े स्तर पर जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार इस मुद्दे को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर रखा है कि वह सभी अवैध प्रवासियों को अमेरिका से बाहर निकालकर ही दम लेंगे। बेशक ट्रंप के इस कदम चर्चा की पूरी दुनिया में हो रही है। Latest News in Hindi Today Hindi news Venezuela gang members #TrumpImmigrationPolicy #VenezuelaGangs #IllegalMigration #USBorderSecurity #ElSalvadorDeportation #MigrantCrisis #USImmigration #CrimeControl #BidenVsTrump #GangDeportation

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