बिहार में वोटर लिस्ट से कट सकते हैं 35 लाख से ज्यादा नाम, वेरिफिकेशन प्रक्रिया में अब तक 88% मतदाताओं ने भरा गणना पत्र
बिहार में चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा कराया जा रहा मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण और सत्यापन कार्य (SIR) अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। आयोग की यह महत्त्वाकांक्षी पहल 24 जून 2025 को राज्यभर में गणना फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो 25 जुलाई तक चलेगा। मतलब अब इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मात्र 10 दिन और रह गए हैं। एसआईआर (SIR) के तहत अब तक 7 करोड़ 90 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाताओं में से 6 करोड़ 60 लाख 67 हजार 208 लोगों ने अपने गणना फॉर्म सफलतापूर्वक भरकर जमा करा दिए हैं। यह आंकड़ा कुल मतदाताओं का लगभग 88 फीसदी है, जो आयोग के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है। हालांकि, इस प्रक्रिया में जो सबसे चौकाने वाली सामने आई है, वह यह है कि अब तक के सर्वेक्षण और फॉर्म सत्यापन के आधार पर करीब 35 लाख 69 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट (Voter List) से हटाए जा सकते हैं। यह आंकड़ा उन मतदाताओं का है, जो सत्यापन के दौरान या तो मृत पाए गए या एक से ज्यादा स्थानों पर पंजीकृत मिले या फिर स्थायी रूप से किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो गए। मतदाता सूची से हट सकता है बिहार के 4.52% लोगों का नाम चुनाव आयोग (Election Commission) की वेबसाइट पर अब तक कुल 5 करोड़ 74 लाख से अधिक प्रपत्र अपलोड किए जा चुके हैं। दस्तावेजों के आधार पर बताया गया है कि सत्यापन के दौरान 1.59% मतदाता मृत पाए गए और 2.2% ने स्थायी रूप से अपने निवास स्थान बदल चुक हैं। इसके अलावा 0.73% मतदाता ऐसे भी मिले हैं जो एक से ज्यादा स्थानों पर पंजीकृत पाए गए। कुल मिलाकर आयोग को इन तीनों श्रेणियों में 4.52% मतदाता ऐसे मिले हैं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। वहीं, अब भी करीब 11.82% मतदाता ऐसे हैं जिन्होंने अपने फॉर्म आयोग के पास जमा नहीं किए हैं। आयोग इन बचे हुए मतदाताओं तक पहुंचने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। तीसरे दौर में राज्यभर में एक लाख बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को फिर से मैदान में उतारा गया है ताकि घर-घर जाकर बचे हुए मतदाताओं से फॉर्म भरवाया जा सके। इस कार्य में चुनाव आयोग को विभन्न राजनीतिक दलों द्वारा तैनात 1.5 लाख बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) का भी सहयोग मिल रहा है। मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण और सत्यापन कार्य (SIR) के लिए बिहार के सभी 261 विधानसभा क्षेत्र के 5,683 वार्डों में विशेष शिविर लगाया गया है। इन शिविरों का उद्देश्य सभी विधानसभा में मतदाता फॉर्म का सत्यापन करना है। साथ ही जो मतदाता अस्थायी रूप से राज्य से बाहर गए हैं, उनके लिए भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि वे भी ऑनलाइन या अन्य माध्यमों से समय रहते अपना फॉर्म जमा कर सकें। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? आयोग 1 अगस्त को जारी करेगा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट चुनाव आयोग (Election Commission) के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के बाद 1 अगस्त 2025 को मतदाता सूची का ड्राफ्ट संस्करण प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद मतदाताओं को आपत्ति और सुधार के लिए कुछ दिन के लिए समय दिया जाएगा, ताकि अंतिम सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि न रह जाए। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइनल मतदाता सूची जारी कर विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी जाएगी। बिहार में चल रही इस मतदाता सत्यापन प्रक्रिया को भाजपा समेत एनडीए गठबंधन के दल जहां लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान वैध मतदाताओं का नाम भी सूची से हटाया जा रहा है। Latest News in Hindi Today Hindi news #ElectionCommission #Biharelection2025 #Voterlist #SIR #Biharassemblyelection

