Murshidabad violence

Murshidabad violence: वक्फ संसोधन बिल के विरोध में सड़कों पर उतरे लोग, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में इस वजह से भड़की हिंसा

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद स्थित जंगीपुर के मुस्लिम बहुल वक्फ संसोधन बिल के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस विरोध प्रदर्शन में भारी संख्या में लोग जुटे थे। प्रदर्शनकारी बिल को वापस लेने की मांग कर रहे थे। शांतिपूर्वक चल रहा प्रदर्शन देखते ही देखते एकएका एक झूठी अफवाह के चलते उग्र और हिंसक (Murshidabad violence) हो गया। अचानक उग्र हुए प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ पुलिस की कई गाड़ियों के साथ तोड़फोड़ की बल्कि उन्हें आग के हवाले भी कर दिया। दरअसल, किसी ने अफवाह फैला दी कि वक्फ संसोधन बिल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों में से किसी की पुलिसलाठी चार्ज में मौत हो गई है। फिर क्या था , आंदोलन हिंसक हो गया। घटना मंगलवार शाम की बताई जा रही है।  अफवाह के चलते फैली (Murshidabad violence) हिंसा  जानकारी के मुताबिक जंगीपुर ग्राउंड पर पुलिस की तैनाती कम थी। दरअसल, इस बीच रामनवमी के मौके पर दूसरों जगहों पर पुलिसकर्मियों को भेजा गया था। कारण यही अनियंत्रित भीड़ को काबू करने में पुलिस को काफी मशक्क्त करनी पड़ी। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी नेशनल हाईवे के पास पहुंचकर सड़क को जाम करने लगे। इस बीच पुलिस ने जब इन प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की तो धक्का मुक्की शुरू हो गई। और इस धक्का मुक्की में एक युवक नीचे गिर गया।  युवक के नीचे गिरने के बाद यह अफवाह फैल गई कि जो व्यक्ति नीचे गिरा है वो पुलिस की लाठीचार्ज में गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौत हो गई। इस अफवाह के बाद माहौल बिगड़ गया। इससे आक्रोशित प्रदर्शनकारी आगजनी और तोड़फोड़ (Murshidabad violence) करने लगे।  कई इलाकों बीएनएसए की धारा 163 (Murshidabad violence) कर दी गई है लागू  स्थिति बेकाबू होती देख पुलिस प्रशासन ने इंटरनेट सेवा को बंद करने का दिया। स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। यही नहीं,  स्थिति को काबू करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाना पड़ा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज और सूती इलाकों बीएनएसए की धारा 163 लागू (Murshidabad violence) कर दी है। जानकारी के मुताबिक इन क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं। अब इस घटना को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर करारा हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुंकात मजूमदार ने सोशल साइट एक्स पर पोस्ट कर कहा कि “ममता बनर्जी के शासन में बंगाल लहूलुहान हो रहा है।” इसे भी पढ़ें:- मराठी बनाम हिंदी विवाद से डरा महाराष्ट्र का उद्योग जगत, कारोबारियों को सता रहा मजदूरों के पलायन का डर रैली पर लाठीचार्ज करना (Murshidabad violence) अस्वीकार्य है- तृणमूल कांग्रेस जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि “प्रदर्शनकारियों ने इलाके में तैनात पुलिस पर पथराव किया और कुछ पुलिस वाहनों में आग लगा (Murshidabad violence) दी गई। उन्होंने कहा कि घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। झड़प में कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हो गए हैं। तो वहीं इस मामले में राज्य के मंत्री और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि “वामपंथी शासन के दौरान भी अल्पसंख्यकों के साथ पुलिस द्वारा ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता था।” इस बीच तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चौधरी ने कहा कि “वामपंथी शासन के दौरान भी पुलिस ने अल्पसंख्यकों पर कभी लाठीचार्ज नहीं किया। अगर किसी ने हिंसा का सहारा लिया है तो जाहिर तौर पर कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन एक रैली पर लाठीचार्ज करना अस्वीकार्य है।” Latest News in Hindi Today Hindi News Murshidabad violence #MurshidabadViolence #WaqfAmendmentBill #WestBengalNews #ProtestNews #WaqfBillProtest #MurshidabadClash #WaqfBillControversy #IndianPolitics #BreakingNewsIndia #WaqfRights

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Waqf Amendment Bill)

देश भर में हो रहा Waqf Amendment Bill का विरोध, कोई लैंड जिहाद खत्म होने की दे रहा दुहाई, तो कोई बता रहा मजहबी मामला

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 (Waqf Amendment Bill) पर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब यह कानून पूरे देश में लागू हो चुका है। इस विधेयक को संसद के बजट सत्र में पारित किया गया था। बता दें की लोकसभा में 3 अप्रैल की सुबह और राज्यसभा में 4 अप्रैल की सुबह हुई मतदान प्रक्रिया में इसे मंजूरी मिली। लोकसभा में 520 में से 288 सांसदों ने इसके पक्ष में और 232 ने विरोध में वोट दिया, जबकि राज्यसभा में 128 सांसदों ने समर्थन और 95 ने विरोध किया। सरकार को उम्मीद है कि इससे वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण और उचित उपयोग को नई दिशा मिलेगी। लेकिन विरोधी पक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर खतरे के रूप में देख रहा है। बिल के पास होते ही विपक्षी दलों और कई मुस्लिम संगठनों ने इसके खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। यही नहीं, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और आप विधायक अमानतुल्लाह खान सहित कई लोगों ने विधेयक की वैधता को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। इसके साथ ही एक गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स ने भी वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है। इस कानून (Waqf Amendment Bill) के जरिए सरकार मुस्लिमों का छीन रही है हक  वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 (Waqf Amendment Bill) का विरोध थमता नहीं दिख रहा है। वक्फ कानून पर जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने बड़ा बयान दिया है। मदनी ने कहा है कि “इस कानून के जरिए सरकार मुस्लिमों का हक छीन रही है। वक्फ हमारे मजहब का मामला है इसलिए इससे हम खुद निपट लेंगे।” यही नहीं, मदनी ने वक्फ कमेटी में हिंदुओं के रखे जाने पर सवाल उठाया और इस कानून का विरोध करने वाले विपक्ष नेताओं को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि “विपक्ष के जो नेता इस कानून का विरोध कर रहे हैं, वे मुस्लिमों को उनका हक देंगे। आज नहीं तो कल हमारा हक मिलेगा।” मदनी ने आगे यह भी कहा कि “सरकार को वक्फ मंत्रालय भी किसी मुस्लिम को दे देना चाहिए था।” संशोधित वक्फ विधेयक (Waqf Amendment Bill) देश में भूमि जिहाद को खत्म करने में करेगा मदद  इसके अलावा तेलंगाना से बीजेपी विधायक टी राजा सिंह ने रविवार को दावा किया कि संशोधित वक्फ विधेयक (Waqf Amendment Bill) देश में भूमि जिहाद को खत्म करने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि “भारत में भगवा सरकार के सत्ता में आने के बाद से भूमि जिहाद में शामिल लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।” कल तक जो लोग वक्फ नोटिस जारी करके भूमि जिहाद के नाम पर बोर्ड लगाते थे, जैसे कि यह उनके पिता की संपत्ति हो, वे अब ऐसे बोर्ड नहीं लगा पाएंगे क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वक्फ (संशोधन) विधेयक पारित कर दिया है। जब भारत आजाद हुआ तो ‘वक्फ बोर्ड वालों’ के पास करीब 4,000 एकड़ जमीन थी। उन्हें 9,50,000 (9.5 लाख) एकड़ जमीन कैसे मिली? बता दें कि पिछले सप्ताह भारतीय संसद के दोनों सदनों में में लंबी बहस और कड़े विरोध के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अपनी मंजूरी दिए जाते ही शनिवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 कानून बन गया। गजट अधिसूचना जारी होने के साथ ही वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम बदलकर अब यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, इम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट (उम्मीद) अधिनियम, 1995 हो गया है। इसे भी पढ़ें:- मराठी बनाम हिंदी विवाद से डरा महाराष्ट्र का उद्योग जगत, कारोबारियों को सता रहा मजदूरों के पलायन का डर नए कानून का मुख्य उद्देश्य (Waqf Amendment Bill) वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग और अतिक्रमण को रोकना है नए कानून का मुख्य उद्देश्य (Waqf Amendment Bill) वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग, पक्षपात और अतिक्रमण को रोकना है। सरकार का दावा है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य वक्फ संपत्तियों का पारदर्शी और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करना है। हालांकि, इस कानून का विरोध करने वाले मुस्लिम समुदाय और विपक्षी दलों का कहना है कि “यह धार्मिक स्वायत्तता पर हमला है। खास तौर पर वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को वे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप मानते हैं।”  विरोधियों का यह भी तर्क है कि यह कदम वक्फ की मूल भावना को कमजोर करता है। Latest News in Hindi Today Hindi News Waqf Amendment Bill #WaqfAmendmentBill #LandJihadDebate #WaqfProtests #ReligiousFreedom #IndiaPolitics #WaqfBill2025 #MinorityRights #WaqfLandIssue #WaqfControversy #SecularIndia

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Wakf Amendment Bill

वक्फ संशोधन बिल 2 अप्रैल को लोकसभा में हो सकता है पेश, राज्यसभा में मिलेगी चुनौती 

संसद में बजट सत्र (Parliament Budget Session) के दूसरा चरण में अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा लगातार जारी है। इस चरण के अब कुछ दिन ही बाकि रह गए हैं, ऐसे में केंद्र सरकार बड़े बिल लाने की तैयारी कर रही है। इसमें से ही एक वक्फ संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill) भी है। कहा जा रहा है कि वक्फ संशोधन बिल को कल यानी 2 अप्रैल को संसद में पेश किया जाएगा। अगर सरकार इस वक्फ संशोधन बिल (Wakf Amendment Bill) को  2 अप्रैल को लाती है तो इसे दोनों सदनों से पारित कराने के लिए मात्र दो दिन ही मिलेंगे। ऐसे में आखिरी के दिनों में सदन के अंदर भारी हंगामा होने का अंदेशा जताया जा रहा है।  संसद के पिछले सत्र के दौरान सदन में पेश किया गया था वक्फ संशोधन बिल बता दें कि वक्फ संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill) को संसद के पिछले सत्र के दौरान सदन में पेश किया गया था। इस बिल का विरोध करते हुए विपक्षी सदस्यों ने भारी हंगामा किया था। जिसके बाद बिल में सुधार करने के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया था। वक्फ बिल में सुधार के लिए भाजपा (BJP) सांसद जगदंबिका पाल की अगुवाई में जेपीसी का गठन हुआ था। इस जेपीसी ने बिल में कई सुझावों के साथ संशोधन करने के बाद बजट सत्र के दौरान अंतिम रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंप दी थी। इस रिपोर्ट में भाजपा (BJP) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दलों की तरफ से दिए गए सुझावों को शामिल किया गया है। वहीं, विपक्ष के सदस्यों ने आरोप लगाया था कि बिल में उनके सुझावों को शामिल नहीं किया गया। जिसके बाद विपक्षी सदस्यों ने डिसेंट नोट दिए हैं।  जेडीयू और टीडीपी कर सकती हैं खेल  विपक्षी दलों को वक्फ संशोधन बिल को रोकने में सबसे ज्यादा उम्मीद जेडीयू और टीडीपी का साथ मिलने का है। माना जा रहा है कि एनडीए के दो दोनों सहयोगी दल बिल में कुछ बदलाव को लेकर विरोध कर सकते हैं। लेकिन भाजपा (BJP) का कहना है कि इस बिल को लेकर दोनों दलों की सभी चिंताओं का पहले ही निवारण कर दिया गया है। जेपीसी में भी दोनों दलों के संसद मौजूद थे और इनके सुझावों को शामिल किया गया। ऐसे में इनसे कोई खतरा नहीं है।  इसे भी पढ़ें: तो ये हैं वक्फ बिल में किये जाने वाले 14 प्रस्तावित बदलाव? कितने असरकारक होंगे ये बदलाव? राज्यसभा में छोटे दलों से भाजपा को उम्मीद  भाजपा के पास लोकसभा में बहुमत तो है, लेकिन राज्यसभा में वक्फ बिल पारित कराने के लिए जरूरी बहुमत से थोड़ी पीछे है। ऐसे में भाजपा को यहां पर कुछ छोटे दलों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। राज्यसभा में पूर्ण बहुमत नहीं होने के पहले भी भाजपा कई महत्वपूर्ण बिलों को पास नहीं करा पाई है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि वक्फ बिल पर भाजपा को छोटे दलों का साथ मिलता है कि नहीं। Latest News in Hindi Today Hindi news Waqf Amendment Bill WaqfAmendmentBill #LokSabha #RajyaSabha #IndianParliament #MuslimLaw #PropertyRights #PoliticalDebate

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