Water strike by India: मोदी सरकार ने की वॉटर स्ट्राइक, बूंद-बूंद के लिए तरसेगा पाकिस्तान
22 अप्रैल (मंगलवार) को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की निर्मम हत्या और 17 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त एक्शन लेते हुए कड़े कदम उठाए हैं। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान-आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े समूह ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने ली है। महत्वपूर्ण बात यह कि हमला ऐसे समय में हुआ जब भारत सरकार कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही थी। भारत के सख्त तेवर देख पाकिस्तान में डर का (Water strike by India) माहौल है। यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान की कायराना हरकत के बाद जवाब न दिया हो। याद करें बालाकोट हमला। इस हमले का भारत ने एयरस्ट्राइक से जवाब दिया था और तो और पुलवामा में हमलों का भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक से जवाब दिया। ऐसे में अब पहलगाम में हमले का भारत ने वॉटर स्ट्राइक से जवाब दिया है। कहने की जरूरत नहीं, भारत के इस कदम से पाकिस्तान का जीना मुहाल हो जायेगा। भारत ने सिंधु जल संधि पर लगा दी है (Water strike by India) रोक यहाँ सबसे यह समझना जरूरी है कि आखिर ये वॉटर स्ट्राइक (Water strike by India) है क्या? दरअसल, भारत ने सिंधु जल संधि पर रोक लगा दी है। बता दें कि सिंधु जल संधि साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच एक महत्वपूर्ण जल-बंटवारा समझौता है। इसे विश्व बैंक की मध्यस्थता में तैयार किया गया था। इस संधि का मुख्य उद्देश्य सिंधु नदी प्रणाली के जल संसाधनों के उपयोग को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच होनेवाले विवादों को टालना था। इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों को दो समूहों में विभाजित किया गया था। पूर्वी नदियों में ब्यास, रावी और सतलुज का अधिकार भारत को दिया गया था। तो वहीं पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब के जल का उपयोग पाकिस्तान को सौंपा गया था। इस समझौते के तहत भारत को अपनी पूर्वी नदियों के जल का पूरा उपयोग करने की अनुमति मिली, तो वहीं वह पश्चिमी नदियों के जल का सीमित उपयोग सिंचाई, घरेलू जरूरतों और गैर-उपभोग वाले उद्देश्यों के लिए कर सकता था। लेकिन अब भारत ने इस समझौते को खत्म कर दिया है। इसे भी पढ़ें:- इसलिए पीएम मोदी ने सऊदी से भारत लौटते समय पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का नहीं किया इस्तेमाल क्या होगा इस वॉटर स्ट्राइक (Water strike by India) का असर बता दें कि पाकिस्तान की लगभग 80 फीसदी खेती तकरीबन 1.6 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में फैली है। पाकिस्तान की खेती सिंधु नदी पर पूरी तरह निर्भर है। गौरतलब हो कि इस नदी से मिलने वाले पानी का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा केवल सिंचाई के काम में आता है। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं कि अगर यह पानी न मिले, तो देश में खेती लगभग असंभव हो (Water strike by India) जाएगी। महत्वपूर्ण बात यह कि सिंधु बेसिन क्षेत्र में रहने वाली पाकिस्तान की 61 प्रतिशत आबादी यानी लगभग 23.7 करोड़ लोग सिंधु नदी पर निर्भर हैं। यही नहीं, पाकिस्तान के प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएं भी सिंधु नदी पर आधारित हैं। ऐसे में भारत द्वारा सिंधु जल समझौता खत्म करने से पाकिस्तान में खाद्य उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। जिससे लाखों लोगों की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। सिंधु जल आपूर्ति बाधित होने से पाकिस्तान के शहरी इलाकों में जल संकट उत्पन्न हो सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi Water strike by India #WaterStrike #IndiaPakistan #ModiGovernment #IndusWatersTreaty #IndiaFirst #PakistanWaterCrisis #StrategicStrike #ModiAction #NationalSecurity #WaterWar

