CM Yogi Adityanath approves 'UPCOS'

उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स भर्ती के लिए नया नियम: मुख्यमंत्री योगी ने दिया ‘UPCOS’ को मंजूरी

उत्तर प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्तियों और उनके हितों की रक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए एक अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (Universal Pharma-Coding System {UPCOS}) के गठन को मंजूरी दे दी गई है। यह निगम कंपनी एक्ट के तहत गठित किया जाएगा और इसका उद्देश्य न केवल आउटसोर्स भर्ती में पारदर्शिता लाना है, बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों और सुरक्षा को भी सुनिश्चित करना है। क्या है यूपीकॉस (UPCOS)? UPCOS यानी Uttar Pradesh Corporation for Outsourced Services राज्य का एक नया सरकारी निकाय होगा, जो अब राज्य में होने वाली सभी आउटसोर्स भर्तियों की निगरानी और काम-काज की देखभाल करेगा। यह निगम कंपनी एक्ट के अंतर्गत रजिस्टरकिया जाएगा और एक स्वतंत्र नियामक संस्था (Independent Regulatory Body) की तरह काम करेगा। इसकी स्थापना से पहले आउटसोर्स भर्तियाँ निजी एजेंसियों के माध्यम से की जाती थीं, जिन पर कई बार पारदर्शिता और शोषण के आरोप लगे हैं। भर्ती प्रक्रिया में आएगा बदलाव अब यूपी में आउटसोर्स के ज़रिए की जाने वाली सभी नियुक्तियाँ UPCOS के माध्यम से ही होंगी। इसमें खास बात यह है कि भर्ती में SC, ST, OBC, EWS, महिलाओं, दिव्यांगजनों और पूर्व सैनिकों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। इतना ही नहीं तलाकशुदा महिलाओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे सामाजिक रूप से पिछड़े और हाशिए पर खड़े वर्गों को समान अवसर मिल सके। मुख्य सचिव होंगे अध्यक्ष UPCOS की प्रशासनिक संरचना भी काफी स्पष्ट है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार निगम के अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव होंगे। इसके साथ ही एक बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और एक डायरेक्टर की नियुक्ति की जाएगी। राज्य स्तर पर ही नहीं, मंडल और जिला स्तर पर भी भर्ती समितियों का गठन किया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर भर्ती की प्रक्रिया सुचारु रूप से हो सके। भर्ती के लिए निजी एजेंसियों का चयन GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल के जरिए किया जाएगा और ये एजेंसियाँ 3 साल की अवधि के लिए नियुक्त की जाएंगी। भर्ती में अनुभव को भी प्राथमिकता दी जाएगी। UPCOS की एक खास भूमिका यह भी होगी कि यह रेगुलेटरी बॉडी की तरह काम करेगा। इसका मतलब है कि यह निगम केवल भर्ती ही नहीं करेगा, बल्कि भर्ती एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी नजर रखेगा। यदि कोई एजेंसी नियमों का उल्लंघन करती है, तो निगम उन्हें ब्लैकलिस्ट, डिबार या दंडित कर सकेगा। इस कदम से एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी और कर्मचारियों के साथ शोषण या भेदभाव की घटनाओं पर अंकुश लगेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि नियमित पदों पर आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की जाएगी, ताकि सरकारी ढांचे की स्थिरता बनी रहे और नियमित नियुक्तियाँ बाधित न हों। इसे भी पढ़ें:-  क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी? क्यों जरूरी था UPCOS का गठन? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने बताया कि पिछले काफी समय से आउटसोर्स कर्मियों की शिकायतें सामने आ रही थीं। वेतन कटौती, EPF/ESI का लाभ न मिलना, ओवरटाइम के बावजूद भुगतान न होना और अनुचित कार्य-घंटों जैसी समस्याएं आम थीं। इन समस्याओं के पीछे मुख्य रूप से भर्ती एजेंसियों की लापरवाही और मनमानी थी। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया कि एक केंद्रीकृत और पारदर्शी प्रणाली बनाई जाए जो कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा कर सके।  सामाजिक न्याय की दिशा में कदम UPCOS सामाजिक न्याय की दिशा में एक बेहतर निर्णय माना जा रहा है । इसमें वंचित वर्गों को न केवल भागीदारी दी गई है, बल्कि उन्हें प्राथमिकता भी दी गई है। इस तरह राज्य सरकार यह संदेश देना चाहती है कि विकास और अवसर सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध होने चाहिए। उत्तर प्रदेश में UPCOS का गठन आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इससे न केवल आउटसोर्स कर्मियों को अधिकार मिलेगा, बल्कि भर्ती प्रणाली में अनुशासन और स्थिरता भी आएगी। यह योजना सामाजिक समानताऔर श्रमिक हितों की रक्षा का एक संतुलित मॉडल पेश करती है, जो अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Yogi Adityanath #UPCOS #YogiAdityanath #UttarPradeshJobs #OutsourcingRecruitment #UPJobs #UPNews #GovernmentJobs

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Kumbh stampede 2025

Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire: महाकुंभ भगदड़ पर चौतरफा घिरी योगी सरकार, हाईकोर्ट ने दागे बड़े सवाल

उत्तर प्रदेश स्थित प्रयागराज में 114 साल बाद लगे महाकुंभ का आयोजन और समापन दोनों बड़े धूमधाम से हुआ। लेकिन महाकुंभ के इस आयोजन में हुई भगदड़ में कई लोगों के जानमाल का नुकसान हुआ था। सूबे की योगी सरकार के मुताबिक इस भगदड़ में 37 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। लेकिन एक मीडिया ने अपनी जाँच पड़ताल में 82 लोगों की मौत का दावा किया। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि महाकुंभ भगदड़ में 37 लोग मरे थे या फिर 82? दरअसल, योगी सरकार की ओर से बताया गया था कि भगदड़ में कुल 37 श्रद्धालुओं की मौत हुई है, लेकिन मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि कम से कम 82 लोगों मारे गए थे। खैर, अब इस मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट भी योगी सरकार से तीखे सवाल (Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire) पूछ चुका। यही नहीं, समाजवादी पार्टी के मुखिया और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी इस मामले पर सवाल उठा चुके हैं।  प्रशासन ने भगदड़ में जान गंवाने वाले परिजनों को मुआवजा देने का किया (Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire) था वादा  ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि इस मामले में पत्रकार और विपक्ष ही नहीं बल्कि अदालत भी योगी सरकार को फटकार लगा चुकी हैं। अभी दो दिन पहले ही इसी मामले पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की काफी क्लास लगाई थी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार और प्रशासन ने भगदड़ में जान गंवाने वाले परिजनों को मुआवजा देने का वादा किया (Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire) था। यह तो ठीक, लेकिन इस इल्जाम यह कि अब तक उन्हें मुआवजा नहीं मिल सका है। मामला जब इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष पहुंचा, तो उन्होंने सरकार के ढुलमुल रवैये को ठीक न मानते हुए इसे नागरिकों की तकलीफ के प्रति उदासीन रुख बताया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने इस मामले में सख्त टिप्पणी की। दरअसल, उदय प्रताप सिंह नामक एक याचिकाकर्ता द्वारा याचिका में कहा गया था, याचिककर्ता की पत्नी सुनैना देवी की कुंभ भगदड़ में गंभीर चोट लगने से मौत हो गई थी। सुनैना देवी की तब उम्र 52 साल से कुछ ज्यादा थी।  28 और 29 जनवरी की दरमियानी रात मची भगदड़ में सरकार ने 30 लोगों की मौत (Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire) का दावा किया था।  मामल संज्ञान में आते ही अदालत ने कहा, जब सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की बात कही थी, तो फिर सरकार को इसे पूरा करना था। कोर्ट ने साफ कहा था कि ऐसे मामलों में नागरिकों की कोई गलती नहीं होती। गौरतलब हो कि 28 और 29 जनवरी की दरमियानी रात प्रयागराज में भगदड़ हुआ था। इसमें तब सरकार ने माना था कि 30 लोगों की मौत हुई (Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire) है। जिसे बाद में सरकार 37 तक मानने पर सहमत हुई थी। सरकार ने मृतकों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये देने का वादा किया था पर ये अब पीड़ित परिवारों को नहीं दिया गया है। कोर्ट ने मामले में चिकित्सा संस्थानों, जिला प्रशासन और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे एक ऐसा हलफनामा दाखिल करें, जिसमें 28 जनवरी को मरने वाले सभी मृतकों और मरीजों का ब्यौरा शामिल हो। यही नहीं, अदालत ने उन सभी डॉक्टरों का की जानकारी भी मांगी है, जिन्होंने घायलों का इलाज किया।  और इलाज के बाद जो मृत घोषित किए गए। कहने की जरूरत नहीं, अगर इस तरह से अदालत के हस्तक्षेप के बाद डॉक्टर और प्रशासन की और तफसील से जानकारी सामने आती है तो मृतकों और घायलों के बारे में और अधिक जानकारी सामने आएगी।  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक अदालत ने इसे सरकारी संस्थानों की एक गंभीर चूक माना (Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire) था इस मामले में याचिकाकर्ता का कहना था कि उनकी पत्नी के शव का न तो पोस्टमार्टम हुआ और न ही उनके परिवार को ये जानकारी दी गई कि महिला कब, किस हालत में अस्पताल ले जाई गईं। हालाँकि अदालत ने इसे सरकारी संस्थानों की एक गंभीर चूक माना (Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire) था। कोर्ट में घिरा देख अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। सपा मुखियां न कहा कि जो लोग किसी की मृत्यु के लिए झूठ बोल सकते हैं…ऐसे भाजपाइयों पर विश्वास भी विश्वास नहीं करेगा। महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए अखिलेश ने यह सवाल ये भी किया है कि अगर किसी को मुआवजा दिया भी गया है, तो उसे नकद में क्यों दिया गया, नकदी का आदेश कहां से आया? इस विवाद के बीच ध्यान भी देना चाहिए कि इलाहाबाद हाईकोर्ट भी कुंभ भगदड़ पर काफी तीखे सवाल योगी सरकार से पूछ चुका है।  Latest News in Hindi Today Hindi Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire #kumbhstampede #yogiadityanath #highcourt #upgovernment #kumbhmela2025 #tragedy #breakingnews #politicalnews #uttarpradeshnews

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street namaz controversy

street namaz controversy: हिंदुओं से सीखें धार्मिक अनुशासन, सड़क पर नमाज न पढ़ने को लेकर योगी आदित्यनाथ ने कही यह बड़ी बात

इन दिनों देश में हिन्दू-मुस्लिम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। आए दिन नेतागण किसी न किसी बहाने हिंदू-मुस्लिम के मुद्दों को भुनाने का एक भी मौका नहीं गंवाना चाहते। इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क पर होने वाली नमाज (street namaz controversy) को लेकर साफ़ तौर पर कहा है कि ये नहीं हो सकती है। दरअसल, समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “सड़कें चलने के लिए होती हैं और जो लोग ऐसा कह रहे हैं उन्हें हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए। प्रयागराज में 66 करोड़ लोग आए। कहीं कोई लूटपाट नहीं हुई, कहीं कोई आगजनी नहीं हुई, कहीं कोई छेड़छाड़ नहीं हुई, कहीं कोई तोड़फोड़ नहीं हुई, कहीं कोई अपहरण नहीं हुआ, यही अनुशासन है, यही धार्मिक अनुशासन है। वे श्रद्धा के साथ आए, महास्नान में भाग लिया और फिर अपने गंतव्य की ओर बढ़ गए। त्योहार और उत्सव या ऐसे कोई भी आयोजन उदंडता का माध्यम नहीं बनने चाहिए। अगर आप सुविधा चाहते हैं, तो उस अनुशासन का पालन करना भी सीखें।”   नमाज पढ़ने के नाम पर क्या घंटों सड़क जाम (street namaz controversy) करेंगे? इस पर उन्होंने आगे कहा कि “ईद में कौन सा प्रदर्शन करेंगे? नमाज पढ़ने के नाम पर क्या घंटों सड़क जाम (street namaz controversy) करेंगे? नमाज पढ़ने के लिए ईदगाह और मस्जिद हैं, न कि सड़क। इसके लिए ठीक तो बोला जा रहा है। और वैसे भी मैं किसी एक वर्ग विशेष के लिए सभी को असुविधा में नहीं डाल सकता। मुझे पूरे प्रदेश के लोगों को हर जरूरी सुविधा उपलब्ध करानी है।” इस बीच सड़क पर नमाज की तुलना कांवड़ यात्रा से करने पर सीएम ने कहा कि “कांवड़ यात्रा से तुलना की जा रही है, कावंड़ यात्रा हरिद्वार से लेकर गाजियाबाद और एनसीआर के क्षेत्रों तक जाती है। वो सड़क पर ही चलेगी। क्या हमने कभी परंपरागत मुस्लिम जुलूस को रोक, कभी भी नहीं रोक। मुहर्रम के जुलूस निकलते हैं। हां, ये जरूर कहा है कि ताजिया का साइज थोड़ा छोटा रखें क्योंकि तुम्हारी सुरक्षा के लिए है। रास्ते में हाईटेंशन तार होंगे, जोकि आपके लिए बदले नहीं जाएंगे। हाईटेंशन की चपेट में आने से मर जाओगे। यही होता है, कांवड़ यात्रा में भी यही बोला जाता है कि डीजे का साइज छोटा करो, जो ऐसा नहीं करता है तो सख्ती की जाती है। कानून सभी के लिए बराबर लागू होता है। फिर कैसे तुलना की जा रही है।”  इसे भी पढ़ें:- वक्फ संशोधन बिल 2 अप्रैल को लोकसभा में हो सकता है पेश, राज्यसभा में मिलेगी चुनौती  सुधार समय की मांग (street namaz controversy) है वक्फ (संशोधन) विधेयक पर पूछे गए सवाल का प्रश्न का उत्तर देते हुए सीएम योगी ने कहा कि “सुधार समय की मांग (street namaz controversy) है। हर अच्छे काम का विरोध होता है।इसी तरह वक्फ संशोधन विधेयक पर भी हंगामा हो रहा है, जो लोग इस मुद्दे पर हंगामा कर रहे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूँ, क्या वक्फ बोर्ड ने कोई कल्याण किया है? सब कुछ छोड़िए, क्या वक्फ ने मुसलमानों का भी कोई कल्याण किया है? वक्फ निजी स्वार्थ का केंद्र बन गया है। यह किसी भी सरकारी संपत्ति पर जबरन कब्जा करने का माध्यम बन गया है और सुधार समय की मांग है और हर सुधार का विरोध किया जाता है।” Latest News in Hindi Today Hindi news street namaz controversy YogiAdityanath #ReligiousDiscipline #Namaz #Hinduism #UttarPradesh #IndianPolitics #ReligiousFreedom

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Yogi Adityanath third term: सीएम योगी ने अपने तीसरे टर्म को लेकर कही यह बड़ी बात, मचा सियासी हड़कंप 

साल 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में संभल पर छिड़ी सियासत के बीच सीएम बुधवार को योगी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को पॉडकास्ट इंटरव्यू दिया। इस पॉडकास्ट इंटरव्यू में उनसे कई तरह के सवाल-जवाब किये गए। इसी बीच उनसे उनके तीसरे कार्यकाल को लेकर भी एक सवाल पूछा गया। जिसके जवाब ने सभी चौंका दिया है। दरअसल, उनसे पूछा गया कि क्या आप तीसरा टर्म (Yogi Adityanath third term) भी ट्राई करेंगे, क्या आपकी नजर हैट्रिक पर है? इस पेंचीदे सवाल के जवाब पर सीएम योगी ने बड़ी सफाई से अपनी बात रखते हुए कहा कि “वह खुद इसकी कोशिश नहीं करेंगे।” बता दें कि तीसरी बार सीएम बनने के सवाल पर मैं कहना चाहता हूं कि मैं कोशिश नहीं करूंगा। यह मेरी पार्टी पर निर्भर है। मेरी पार्टी कोशिश करेगी और फैसला लेगी। ये बात जगजाहिर है कि सीएम योगी अपनी बात बिना किसी लाग-लपेट के रखते हैं। भले ही इसका जवाब उन्होंने जो भी दिया, लेकिन वो भाजपा की रणनीति का ही एक हिस्सा है। कहने की जरूरत नहीं कि सीएम योगी के जवाब से साफ पता चलता है कि कैसे भाजपा अखिलेश यादव की सपा और राहुल गांधी की कांग्रेस से अलग सोचती है। और यही उसे अन्य दलों से अलहदा बनाती है।  पार्टी लाइन पर छोड़ा सीएम का फैसला (Yogi Adityanath third term) निश्चित ही सबके मन में यह सवाल होगा कि सीएम योगी के जवाब का भाजपा की रणनीति से क्या मतलब? तो इसका मतलब साफ़ है कि भाजपा आखिरी तक अपने पत्ते नहीं खोलती। अंदरूनी कलह से बचने के लिए शायद पार्टी ऐसा करती हो। कारण चाहे कुछ भी, लेकन इसका बड़ा फायदा यह कि पार्टी गुटबाजी से बच जाती है।  इसके साथ ही वह यह संदेश देना चाहती है कि बूथ स्तर का कार्यकर्ता भी उसके लिए उतना ही महत्व रखता है, जितना की कोई कद्दावर नेता। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा में कोई भी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री बन सकता है। वजह यही जो सीएम योगी ने जो जवाब दिया, उसके मायने बड़े गहरे हैं। इस बात से इंकार नहीं कि वर्तमान में सीएम योगी की लोकप्रियता सातवें आसमान पर है। ऐसे में वो चाहते तो अपने तीसरे टर्म (Yogi Adityanath third term) के लिए खुद को सीएम फेस घोषित कर सकते थे, लेकिन उन्होंने यह फैसला पार्टी लाइन पर छोड़ दिया। खैर, यह तो वक़्त ही बताएगा कि साल 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत होती है या हार। और यदि भाजपा हैट्रिक मारती है, तो सीएम योगी मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे या नहीं? बेशक उनके जवाब से न सिर्फ उत्तर प्रदेश में सियासी सुगबुगाहट तेज हो गई है बल्कि सियासी पंडितों के बीच भी चर्चा का विषय बना गई है। इसे भी पढ़ें:- क्या है अटल कैंटीन योजना? हम अदालत का ही कहना मान रहे हैं, वरना अभी तक वहां बहुत कुछ हो गया होता बता दें कि संभल से लेकर वाराणसी तक नए मंदिर खोजने के सवाल पर योगी ने कहा कि “हम जितने मंदिर खोज पाएंगे, खोजेंगे। मथुरा मामले के कोर्ट में होने के सवाल पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “हम अदालत का ही कहना मान रहे हैं, वरना अभी तक वहां बहुत कुछ हो गया होता (Yogi Adityanath third term)।” उन्होंने यह भी कहा कि “प्रशासन ने अब तक संभल में कुल 54 धार्मिक स्थलों को चिन्हित किया है। इसके अलावा कुछ और के लिए भी प्रयास किया जा रहा है। जितना मिलेगा हम सब खोदकर निकालेंगे।” Latest News in Hindi Today Hindi News  Yogi Adityanath third term #YogiAdityanath #UPPolitics #ThirdTerm #CMYogi #BJP #IndianPolitics #YogiGovt #Election2024 #UttarPradesh #ModiYogi

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UP law and order: योगी सरकार के आठ साल में सुधरी यूपी की कानून व्यवस्था, 222 अपराधी ढेर, 130 आतंकी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आठ साल पूरे हो रहे हैं। इस बीच पिछली सरकारों में गुंडाराज के लिए मशहूर यूपी के बदमाशों पर योगी सरकार (UP law and order) काल बनकर टूटी है। कारण यही जो योगी सरकार की पुलिस न सिर्फ यूपी, बल्कि पूरे देश में एक मॉडल के रूप में उभर रही है। नतीजतन विगत आठ वर्षों में प्रदेश की कानून व्यवस्था में हुए सुधारों से अपराध दर में भारी गिरावट आई है। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में यूपी सरकार ने न सिर्फ संगठित अपराधियों और माफिया पर शिकंजा कसा है, बल्कि आम नागरिकों के मन में सुरक्षा का भाव को भी जागृत किया है। कानून-व्यवस्था के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ज़ीरो टॉलरेंस की नीति का असर देखने को मिला। गौर करने वाली बात यह कि प्रदेश में अपराधियों पर शिकंजा कसने के साथ-साथ अपराध से अर्जित करोड़ों की संपत्ति भी जब्त की गई।  अकूत संपत्ति बनाने वाले अपराधियों पर भी योगी की पुलिस ने सख्त (UP law and order) की कार्रवाई  पिछली सरकारों में अपराध के बल पर अकूत संपत्ति बनाने वाले अपराधियों पर भी योगी की पुलिस ने सख्त कार्रवाई (UP law and order) की है। बता दें कि यूपी पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत तकरीबन 142 अरब से अधिक की संपत्ति को जब्त किया गया। यही नहीं, योगी सरकार के आठ साल में अपराधियों को सजा दिलवाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। यूपी पुलिस ने हरसंभव प्रयास किया कि अपराधी किसी भी हाल में कानूनी शिकंजे से छूटने न पाएं। योगी की पुलिस ने अपराधियों पर इस कदर शिंकजा कसा कि जुलाई 2023 से दिसंबर 2024 तक ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत 51 दोषियों को मृत्युदंड की सजा मिली। इसके अलावा 6,287 दोषियों को उम्रकैद तो वहीं, 1,091 अपराधियों को 20 वर्ष से अधिक की सजा हुई। प्राप्त जानकारी के मुताबिक योगी सरकार के आठ सालों में पुलिस और एसटीएफ के साथ हुए एनकाउंटर में कुल 222 अपराधी मारे गए। इतना ही नहीं आठ साल में 130 आतंकवादी गिरफ्तार किये गए। न सिर्फ आतंकवादी बल्कि 171 अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी भी गिरफ्तार किए गए। इसके अलावा पिछले आठ वर्षों में 20,221 इनामी बदमाश गिरफ्तार किए गए तो वहीं 79,984 अपराधियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई। प्रदेश को भयमुक्त बनाने हेतु 930 के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई हुई। मुठभेड़ में 20 हज़ार से अधिक इनामी अपराधी को पुलिस ने गिरफ्तार कर हवालात भेज दिया।  इसे भी पढ़ें:- वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ AIMPLB का विरोध प्रदर्शन योगी सरकार (UP law and order) ने तकरीबन 66 हज़ार हेक्टेयर से अधिक भूमि को अवैध कब्जे से कराया मुक्त  डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि “योगी सरकार द्वारा गठित एंटी भू माफिया टास्क फोर्स (UP law and order) ने तकरीबन 66 हज़ार हेक्टेयर से अधिक भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया। इस दौरान एटीएस ने 130 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया।” हालांकि डीजीपी ने यह भी दावा किया कि पिछले आठ सालों में प्रदेश को भयमुक्त बनाने में सफलता हासिल हुई है। उन्होंने यूपी पुलिस की पीठ थपथपाते हुए कहा कि “अपराधियों के खिलाफ इस तरह की सख्त कार्रवाई ने राज्य को सुरक्षित बनाने में मदद की है और राज्यवासियों को कानून के प्रति विश्वास दिलाया है।” Latest News in Hindi Today Hindi news UP law and order #YogiAdityanath #UPLawAndOrder #CrimeFreeUP #YogiGovernment #UPPolice #UPCrimeControl #UPSafety #UPDevelopment #TerrorismArrest #CrimeDown

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