होली का त्योहार भारत के सबसे प्रसिद्ध और उत्साहपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार न केवल रंगों और उल्लास से भरा होता है, बल्कि इसमें आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व भी छिपा होता है। भारत में एक ऐसा धाम है, जहां होली के दिन भगवान शिव (Lord Shiva) और भगवान कृष्ण (Lord Krishna) की अद्भुत लीला देखने को मिलती है। यह स्थान है देवघर मंदिर, जहां महादेव के साथ होली खेलने आते हैं कन्हैया। आइए जानते हैं कि देवघर में होली कैसे मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है।
हरिहर मिलन के दिन देवघर आए थे बाबा बैद्यनाथ
पौराणिक ग्रंथों और बाबा बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, ‘हरिहर मिलन’ (Harihar Milan) के दिन ही बाबा बैद्यनाथ देवघर पहुंचे थे। इस अवसर पर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु (श्रीकृष्ण) अपने आराध्य भगवान शिव से मिलने आते हैं। दोनों देवता साथ में होली खेलते हैं और आनंद से भर जाते हैं।
हरिहर मिलन का प्रसंग
बाबा बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थ पुरोहित प्रभाकर शांडिल्य के अनुसार, हरिहर मिलन (Harihar Milan) के दिन ही भगवान शिव देवघर पहुंचे थे। इस घटना का संबंध रावण से जुड़ी कथा से है। मान्यता है कि रावण ने भगवान शिव से आग्रह किया था कि वे लंका चलें। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव (Lord Shiva) शिवलिंग के रूप में लंका जाने के लिए तैयार हुए, लेकिन एक शर्त रखी कि यात्रा के दौरान रावण शिवलिंग को कहीं भी न रखे, क्योंकि जहां भी वह शिवलिंग रखेगा, वह वहीं स्थापित हो जाएगा।
जब रावण शिवलिंग लेकर लंका जा रहा था, तब भगवान विष्णु वृद्ध ब्राह्मण के रूप में प्रकट हुए। इसी दौरान रावण को लघुशंका महसूस हुई, जिससे वह शिवलिंग को रखने के लिए मजबूर हो गया। बैद्यनाथ धाम वह स्थान है, जहां माता सती का हृदय गिरा था, और यही कारण था कि भगवान विष्णु की योजना के तहत रावण को यहां शिवलिंग रखना पड़ा।
इसे भी पढ़ें:- कब मनाई जाएगी छोटी होली, जानिए इस दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
हरिहर मिलन पर खेली जाती है होली
रावण ने भगवान शिव (Lord Shiva) से वचन लिया था कि यदि वह शिवलिंग को जमीन पर रख देगा, तो शिव वहीं स्थापित हो जाएंगे। भगवान विष्णु ने ही रावण से शिवलिंग लेकर इसे देवघर में स्थापित कर दिया। इसी स्थान पर माता सती और भगवान शिव का मिलन हुआ। जिस शिवलिंग को भगवान विष्णु ने ग्रहण किया था, उसी के साथ वे श्रीकृष्ण के रूप में ‘हरिहर मिलन’ के अवसर पर होली खेलते हैं।
भगवान शिव और श्रीकृष्ण खेलते हैं गुलाल
प्रभाकर शांडिल्य के अनुसार, ‘हरिहर मिलन’ (Harihar Milan) के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) की प्रतिमा वर्ष में केवल एक बार बाहर लाई जाती है। इस दौरान वे बैजू मंदिर के पास झूला झूलते हैं और आनंदित हो जाते हैं। इसके बाद वे परमानंद महादेव के पास जाते हैं, जहां भगवान शिव और श्रीकृष्ण एक साथ गुलाल खेलते हैं। इस दिन भगवान को विशेष भोग अर्पित किया जाता है, जिसमें मालपुआ चढ़ाया जाता है। भक्त भी भगवान के साथ गुलाल अर्पित कर इस पावन अवसर को मनाते हैं। चूंकि गुलाल प्राकृतिक रंग होता है, इसलिए इसे भगवान को समर्पित किया जाता है। ‘हरिहर मिलन’ (Harihar Milan) के पश्चात भगवान श्रीकृष्ण अपनी मूल स्थान पर लौट जाते हैं।
Latest News in Hindi Today Hindi news Harihar Milan
#HariharMilan #DevgharHoli #ShivaKrishnaHoli #SpiritualFestivals #HoliWithGods #DivineCelebration #MythologicalHoli #ShivKrishnaLeela #FestiveDevghar #HoliTraditions





