अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 के क्रैश (Ahmedabad Plane Crash) होने से सैकड़ों लोगों की जान चली गई। मृतकों में फ्लाइट में सवार 241 लोगों के अलावा जमीन पर मौजूद दर्जनों लोग भी शामिल हैं। इस दर्दनाक हादसे ने लोगों को यह समझने का मौका दिया कि एक छोटी सी तकनीकी या ऑपरेशन गलती (कॉन्फिगरेशन एरर) से कैसे एक बड़ा विमान हादसा हो सकता है। इस विमान के दोनों पायलट काफी अनुभवी थे और मौसम भी बिल्कुल साफ था, लेकिन इसके बाद भी हादसा होना कॉन्फिगरेशन एरर (Configuration Error) की तरफ संकेत कर रहा है। आइये जानते हैं कि कॉन्फिगरेशन एरर क्या होती है?
कॉन्फिगरेशन एरर किसे कहा जाता है?
विमान के टेकऑफ के समय विमान को उड़ाने के लिए कई सेटिंग्स करनी पड़ती है, इन सेटिंग्स में होने वाली गलती को ही कॉन्फिगरेशन एरर (Configuration Error) कहा जाता है। पायलट से होने वाली एक छोटी सी गलती भी विमान को सही ढंग से उड़ान भरने से रोक देती हैं। इसमें तय स्पीड से पहले टेकऑफ (रोटेशन) करना, फ्लैप्स की गलत सेटिंग, कम थ्रस्ट या लैंडिंग गियर का सही समय पर उठाना जैसी गलतियां शामिल होती हैं। इनमें से एक गलती विमान को उड़ान भरने से रोक सकता है, जिससे पायलट विमान से नियंत्रण खो देता है। यह विमान जिस तरह टेकऑफ के समय ही हादसे का शिकार हुआ, उसे देखते हुए कॉन्फिगरेशन एरर (Configuration Error) को ही सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। आइये जानते हैं क्या हो सकती हैं संभावित गलतियां।
मानवीय चूक की संभावना

इस हादसे को लेकर कई एविएशन एक्सपर्ट मानवीय चूक होने का अनुमान लगा रहे हैं। इन एविएशन एक्सपर्ट (Ahmedabad Plane Crash) का मानना है कि हो सकता है टेकऑफ के समय पायलट्स किसी अलर्ट या एटीसी के संदेश को सुनने में उलझ गया हो या दोनों पायलट ने आपसी तालमेल से सेटिंग्स को सही से क्रॉसचेक न कर पाए हों। जिसकी वजह से यह हादसा हुआ हो। बोइंग 787 में भले ही इलेक्ट्रॉनिक चेकलिस्ट होती है, लेकिन अहमदाबाद के गर्म मौसम में बहुत ज्यादा जांच की जरूरत पड़ता है।
विमान में थ्रस्ट में कमी
भीषण गर्मी के कारण इंजन की पावर कम हो जाती है, इसलिए विमान के टेकऑफ के लिए सही थ्रस्ट सेट करना बहुत जरूरी होता है। एविएशन एक्सपर्ट का मानना है कि अगर पायलट्स ने कम थ्रस्ट में ही विमान को उड़ाने की कोशिश की हो या वजन का गलत हिसाब लगाया हो, तो विमान उड़ान भरने लायक उंचाई पर नहीं पहुंच पाएगा। इसकी वजह से विमान नीचे आ सकता है।
समय से पहले रोटेशन
रोटेशन का मतलब उड़ान भरते समय विमान की नोज को ऊपर उठाना ताकि विमान ऊपर उठ सके। रोटेशन के लिए 787 जैसे विमान को आमतौर पर 140-160 नॉट्स की स्पीड चाहिए होती है। अगर विमान इससे पहले ही ऊपर उठने की कोशिश करता है, तो उसे ठीक से लिफ्ट नहीं मिल पाती। इससे विमान पूरा जोर लगाने के बाद भी हवा में अस्थिर होकर गिर सकता है।
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ऑटोमेशन पर भरोसा
अहमदाबाद में हादसे का शिकार हुआ 787 विमान (Ahmedabad Plane Crash) काफी एडवांस है। इसमें लगा फ्लाइट मैनेजमेंट सिस्टम (FMS) टेकऑफ से जुड़ी गणनाएं खुद करता है। लेकिन अगर विमान के एफएमएस (FMS) में तापमान और वजन की गलत जानकारी फिड कर दी जाए तो इस सिस्टम की सारी गणनाएं गलत हो सकती है। पायलट्स कई बार जल्दबाजी में इस मशीन पर ही पूरी तरह से भरोसा कर लेते हैं और मैन्युअली जांच नहीं करते। ऐसे में हादसा होने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि इस विमान को उड़ा रहे दोनों पायलट काफी अनुभवी थे, ऐसे में मशीन पर अंधविश्वास करने की संभावना कम है।
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