App-based Cab Services अब होगी महंगी: क्या है केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन्स? 

app-based cab services

आज के डिजिटल दौर में ओला (Ola), उबर (Uber) और रैपिडो (Rapido) जैसी ऐप-आधारित कैब सेवाएं (App-based Cab Services) आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। ऑफिस जाना हो, स्टेशन पहुंचना हो या किसी भी जगह जाने के लिए कैब चाहिए तो इन अलग-अलग कैब सेवाओं (Cab Service) की मदद से कहीं भी आना-जानाआसान बना दिया है। लेकिन अब इन सेवाओं का उपयोग आपकी जेब पर पहले से ज्यादा बोझ डाल सकता है। हाल ही में केंद्र सरकार (Central Government)  द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइन्स से यह साफ होता है कि आने वाले दिनों में कैब और बाइक, टैक्सी की सवारी महंगी हो सकती है।

App-based Cab Services: क्या हैं नई गाइडलाइन्स?

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे आगामी तीन महीनों में नई कैब एग्रीगेटर पॉलिसी (Cab Aggregator Policy) को लागू करें। इसके तहत ऐप-आधारित टैक्सी कंपनियों (App-based Cab Services) को पीक ऑवर्स (Peak Hours) के दौरान बेस फेयर का दो गुना तक किराया वसूलने की अनुमति दी गई है। इसे सर्ज प्राइजिंग कहा जाता है। अब तक यह सीमा 1.5 थी यानी अगर किसी शहर में बेस फेयर 100 रुपये है, तो कंपनियां 150 रुपये तक चार्ज कर सकती थीं। लेकिन अब यह सीमा 200 रुपये तक बढ़ सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार का कहना है कि यह फैसला कैब एग्रीगेटर्स को पीक ऑवर्स में ज्यादा ड्राइवर उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। साथ ही कंपनियों को अधिक लचीलापन (Flexibility) मिलेगा ताकि वे मांग के अनुसार सेवाएं दे सकें।

बाइक टैक्सी सेवा को मिली मंजूरी

नई गाइडलाइन में एक और अहम फैसला लिया गया है। अब नॉन-ट्रांसपोर्ट व्हीकल्स (Non-Transport Vehicle) यानी सफेद नंबर प्लेट वाली निजी बाइक्स को भी शेयर्ड मोबिलिटी सर्विस देने की अनुमति दे दी गई है। पहले केवल येलो नंबर प्लेट वाली कमर्शियल बाइक्स (Commercial bike) ही टैक्सी सेवा (Taxi Service) दे सकती थीं, जिसके लिए भारी-भरकम टैक्स और रजिस्ट्रेशन की जरूरत होती थी। इस फैसले के तहत कोई भी आम नागरिक, जिसके पास निजी बाइक है अब वे ओला (Ola), उबर (Uber) या रैपिडो (Rapido) जैसे प्लेटफॉर्म पर ट्रेवलर्स को लिफ्ट दे सकते हैं जिससे उनकी अर्निंग भी हो सकती है। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। राज्य सरकारें अब इन सेवाओं पर रोजाना, एक सप्ताह या फिर 15 दिनों पर फीस लगा सकती है, जिससे राजस्व भी बढ़ेगा।

राइड कैंसिलेशन पर कड़ा जुर्माना

नई गाइडलाइन में एक और बड़ा बदलाव यह है कि बिना वजह राइड कैंसिल (Ride Cancellation) करने पर ड्राइवर या यूज़र, दोनों पर 10% या ज्यादा से ज्यादा 100 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इससे यात्रियों और ड्राइवरों दोनों की जिम्मेदारी तय होगी और सेवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

ड्राइवरों के लिए इंश्योरेंस और ट्रेनिंग जरूरी

ड्राइवरों की सुरक्षा और कल्याण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सभी कैब ड्राइवरों के लिए अनिवार्य कर दिया है कि:

उन्हें 5 रुपये लाख का हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) और 10 लाख रुपये का टर्म लाइफ इंश्योरेंस (Term Life Insurance) मिलेगा। इसके साथ ही उन्हें हर साल ट्रेनिंग लेना भी अनिवार्य होगा, जिससे न सिर्फ ड्राइवरों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि सर्विस भी बेहतर होगी।

क्या कहना है सर्विस प्रोवाइडर का? 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रैपिडो (Rapido) ने इन गाइडलाइन्स को विकसित भारत की दिशा में मील का पत्थर कहा है और दावा किया है कि इससे कनेक्टिविटी बेहतर होगी। वहीं उबर ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि सभी राज्य समय पर इस गाइडलाइन को लागू करेंगे।

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क्या होगा आम जनता पर असर?

इन गाइडलाइन्स का मिला-जुला असर देखा जा सकता है:

  • एक ओर जहां पीक टाइम पर सवारी महंगी होगी, वहीं दूसरी ओर कैब भी ज्यादा होंगी।
  • बाइक टैक्सी जैसी सस्ती सेवाओं से कम दूरी की यात्रा किफायती हो सकती है।
  • नई व्यवस्था से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और परिवहन व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकती है।

सरकार द्वारा लागू की गई यह नई कैब पॉलिसी उपभोक्ताओं, ड्राइवरों और कंपनियों के लिए कई तरह के बदलाव लेकर आई है। हालांकि इससे तत्काल प्रभाव में यात्रा महंगी हो सकती है, लेकिन क्या यह नीतियां स्मार्ट मोबिलिटी, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती हैं या नहीं ये तो आने वाले समय में पता चलेगा। 

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