करवा चौथ सबसे बड़ा पर्व आज, जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा और इसका धार्मिक महत्व

करवा चौथ सबसे बड़ा पर्व आज, जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा और इसका धार्मिक महत्व

नई दिल्ली: पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाने वाला करवा चौथ व्रत आज यानी 10 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को पूरे देश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है यह व्रत हर विवाहित महिला के लिए प्रेम, आस्था और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

 करवा चौथ 2025 की सटीक तिथि और शुभ मुहूर्त

करवा चौथ व्रत तिथि: शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025

चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 9 अक्टूबर, रात 9:42 बजे

चतुर्थी तिथि समाप्त: 10 अक्टूबर, शाम 7:10 बजे

पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:49 बजे से 7:05 बजे तक (नोएडा/दिल्ली NCR के अनुसार)

चंद्रोदय (चांद निकलने का समय): रात 8:13 बजे

इस दिन महिलाएं चांद निकलने तक जल-अन्न का त्याग कर निर्जला उपवास रखती हैं। पूजा का समय बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

पूजा विधि: कैसे करें करवा चौथ का व्रत

1. सुबह सर्गी:
करवा चौथ की शुरुआत भोर में “सर्गी” से होती है, जो सास की ओर से दी जाती है। इसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे और पूरी-सब्जी शामिल होते हैं। सर्गी ग्रहण करने के बाद महिलाएं सूर्योदय से पहले व्रत का संकल्प लेती हैं।

2. दिनभर का निर्जला व्रत:
इस दिन महिलाएं पूरे दिन जल तक नहीं पीतीं। माना जाता है कि यह कठिन तपस्या पति के दीर्घायु और दांपत्य सुख के लिए की जाती है।

3. शाम की पूजा:
सूर्यास्त के बाद महिलाएं सोलह श्रृंगार कर नई साड़ी पहनती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती हैं। पूजा थाली में दीपक, करवा, रोली, चावल, मिठाई, चूड़ियां और जल रखा जाता है।

4. चांद की पूजा:
चांद निकलने के बाद महिलाएं छलनी से पहले चांद और फिर अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसके बाद पति के हाथ से जल पीकर व्रत तोड़ा जाता है।

 करवा चौथ व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, वीरावती नामक एक रानी अपने भाइयों के आग्रह पर करवा चौथ का व्रत रखती है। जब वह भूख-प्यास से व्याकुल हो जाती है, तो उसके भाइयों ने छल करके दीपक की लौ को छलनी में दिखाकर कहा कि चांद निकल आया है। वीरावती ने व्रत तोड़ दिया, जिसके कारण उसके पति की तबीयत बिगड़ गई। तब देवी पार्वती ने प्रकट होकर उसे अगले वर्ष सच्चे मन से व्रत करने का उपदेश दिया।

अगले साल वीरावती ने पूरे विधि-विधान से करवा चौथ का व्रत किया, जिससे उसके पति को दीर्घायु का आशीर्वाद मिला। तभी से यह व्रत सभी सुहागिनों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं बल्कि विश्वास, प्रेम और अटूट बंधन का प्रतीक है। यह व्रत विवाह में एक-दूसरे के प्रति समर्पण और त्याग की भावना को दर्शाता है।

इस दिन की विशेषता यह भी है कि महिलाएं एक-दूसरे के साथ एकजुट होकर व्रत करती हैं, जिससे नारी एकता और सहयोग की भावना भी झलकती है।

 मेहंदी, श्रृंगार और बाजारों की रौनक
देशभर में करवा चौथ की तैयारियाँ चरम पर हैं। बाजारों में पारंपरिक साड़ियाँ, गहने, थाली सजावट और मेहंदी की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ देखी जा सकती है।

दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, जयपुर और मुंबई जैसे शहरों के ब्यूटी पार्लरों में एडवांस बुकिंग फुल हो चुकी हैं।

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