नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026: तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के खिलाफ अपना विरोध फिर तेज कर दिया है। रिहाई के कुछ घंटों बाद सोशल मीडिया पर अपने पहले पोस्ट में दास ने लिखा—“Gyanu must go”, यानी उन्होंने CEC के इस्तीफे की मांग दोहराई।
रिहाई के बाद पहला पोस्ट
सौरव दास और आशुतोष रांका को 21 अक्टूबर को तिहाड़ जेल से रिहा किया गया था। इसके बाद देर रात दास ने X पर संक्षिप्त पोस्ट करते हुए Gyanesh Kumar को लेकर अपना रुख साफ किया। CJP लंबे समय से SIR और electoral-roll revisions को लेकर CEC के खिलाफ campaign चला रही है।
CJP ने फिर मांगा इस्तीफा
CJP का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में voter deletions और electoral transparency को लेकर गंभीर irregularities हुई हैं। Party इसी आधार पर Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग करती रही है। हालांकि Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और उसका कहना है कि voter-roll revision नियमों के तहत किया जा रहा है।
Abhijeet Dipke ने भी किया समर्थन
CJP founder Abhijeet Dipke ने सौरव दास और आशुतोष रांका की release के बाद पोस्ट किया—“Boys have a message, Gyanu must go!” इससे साफ है कि party ने जेल से रिहाई के बाद भी CEC के खिलाफ अपना political campaign खत्म नहीं किया है।
पहले भी Gyanesh Kumar पर तीखे आरोप लगा चुके हैं Das
सौरव दास इससे पहले Gyanesh Kumar को लेकर और भी कड़ी भाषा इस्तेमाल कर चुके हैं। सितंबर में उन्होंने CEC को “Enemy Number 1” और “original anti-national” तक कहा था तथा BJP को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए थे। ये CJP के आरोप हैं और इन्हें साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।
जेल से क्यों रिहा हुए?
Das और Ranka को Jantar Mantar protest के बाद detention में भेजा गया था। 21 अक्टूबर को Special Executive Magistrate ने personal और surety bonds स्वीकार करने के बाद उनकी release का आदेश दिया। दोनों ने undertaking दी कि वे law and order बनाए रखेंगे और Jantar Mantar को officially protest site बनाए जाने तक वहां प्रदर्शन का call नहीं देंगे।
राजनीतिक टकराव अभी खत्म नहीं
Release के बावजूद CJP और Election Commission के बीच टकराव खत्म होता नहीं दिख रहा। SIR, voter deletions और CEC के resignation की मांग आने वाले दिनों में opposition politics और protest strategy का बड़ा मुद्दा बनी रह सकती है।
जय राष्ट्र न्यूज़

