बेंगलुरु, कर्नाटक, 6 नवंबर 2026: कर्नाटक में मतदाता सूची से नाम हटाने और कथित चुनावी धोखाधड़ी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार, 5 नवंबर को घोषणा की कि राज्य सरकार फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग और मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिशों की पुलिस जांच कराएगी। बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर मतदाता सूची में हेरफेर की साजिश रचने का आरोप लगाया। शिवकुमार ने दावा किया कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यक समुदायों के हजारों मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई।
बेंगलुरु में इंडिया गठबंधन का बड़ा प्रदर्शन
गुरुवार को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में इंडिया गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ‘वोट चोरी बंद करो, देश बचाओ’ अभियान के तहत विरोध प्रदर्शन किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है।
शिवकुमार ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और किसी भी पात्र नागरिक को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने घोषणा की कि सरकार कथित अनियमितताओं की जांच कराएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
Form-7 के दुरुपयोग का क्या है पूरा मामला?
भारत निर्वाचन आयोग की व्यवस्था के तहत फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम शामिल होने पर आपत्ति दर्ज कराने या नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है।
इस फॉर्म के जरिए मृत्यु, स्थायी स्थानांतरण या अन्य निर्धारित कारणों के आधार पर मतदाता का नाम हटाने का आवेदन दिया जा सकता है।
हालांकि कर्नाटक में कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इसी प्रक्रिया का दुरुपयोग करके बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दावा किया कि कई फॉर्म पहले से प्रिंट किए गए थे और उनमें मतदाताओं के नाम, पहचान पत्र संख्या तथा मोबाइल नंबर जैसी जानकारी दर्ज थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की व्यक्तिगत जानकारी किसने एकत्र की और इन फॉर्मों को तैयार करने का निर्देश किसने दिया।
BJP कार्यालयों में फॉर्म छापने का आरोप
डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े लोगों ने बड़ी संख्या में फॉर्म-7 तैयार करवाए और उन्हें स्थानीय स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं तक पहुंचाया।
उनके अनुसार, कुछ फॉर्मों में मतदाता की जानकारी पहले से भरी हुई थी और आवेदन देने वाले व्यक्ति का नाम भरना बाकी था।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस प्रक्रिया के जरिए विशेष समुदायों के मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया गया।
हालांकि भाजपा की संलिप्तता और कथित साजिश से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इन आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच और चुनाव अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
एक विधानसभा क्षेत्र में 10 से 20 हजार वोट हटाने की कोशिश का दावा
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में 10 हजार से 20 हजार तक मतदाताओं के नाम हटाने की योजना बनाई गई थी।
उनके अनुसार, कथित तौर पर अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मतदाताओं को निशाना बनाया गया।
शिवकुमार ने दावा किया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सतर्कता से कई स्थानों पर कथित अनियमितताओं का पता चल गया।
उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने संदिग्ध आवेदनों की जानकारी वरिष्ठ नेताओं तक पहुंचाई, जिसके बाद मामले को चुनाव आयोग के सामने उठाया गया।
हालांकि फॉर्म जमा होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित मतदाता का नाम स्वतः सूची से हटा दिया गया हो।
कलबुर्गी, विजयपुरा और बेंगलुरु में अनियमितताओं का आरोप
डीके शिवकुमार ने कहा कि कलबुर्गी, विजयपुरा और बेंगलुरु के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिशों की शिकायतें सामने आई हैं।
उन्होंने बेंगलुरु में कांग्रेस नेता सौम्या रेड्डी के निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं ने कई संदिग्ध आवेदन पकड़े थे।
सरकार अब यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि आवेदन किन लोगों द्वारा तैयार किए गए और किस उद्देश्य से जमा किए गए।
CCTV फुटेज के आधार पर जांच की बात
बेंगलुरु में प्रदर्शन के दौरान डीके शिवकुमार ने कहा कि कथित चुनावी अनियमितताओं से संबंधित कुछ CCTV फुटेज उपलब्ध हैं।
उनके अनुसार, फुटेज से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि संदिग्ध आवेदन कौन लेकर आया और उन्हें जमा कराने में किन लोगों ने सहयोग किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाएंगे।
उन्होंने दावा किया कि सरकार इस प्रकरण को गंभीरता से ले रही है और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
हालांकि जांच की अंतिम रिपोर्ट और दोषियों की पहचान अभी सामने नहीं आई है।
पहले भी दर्ज हो चुकी हैं कई FIR
कर्नाटक में फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर अक्टूबर में भी विवाद सामने आया था।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बल्लारी, बेंगलुरु, बीदर, बेलगावी, चिकमगलूरु, दक्षिण कन्नड़, मैसूरु, विजयपुरा और उडुपी सहित विभिन्न जिलों में संदिग्ध आवेदनों के संबंध में नौ प्राथमिकी दर्ज की गई थीं।
इन मामलों में आरोप लगाया गया था कि मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में कथित फर्जी आवेदन दिए गए।
राज्य सरकार ने इन मामलों के बीच संभावित संबंधों की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने की संभावना पर भी विचार किया था।
अब मुख्यमंत्री की नई घोषणा के बाद पुलिस जांच का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार ने पहले स्पष्ट किया था कि फॉर्म-7 जमा होने से किसी मतदाता का नाम अपने आप नहीं हटाया जाता।
प्रत्येक आवेदन की जांच संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा की जाती है।
चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि मतदाता सूची से नाम हटाने से पहले आवश्यक सत्यापन सुनिश्चित किया जाए।
इसके अलावा जानबूझकर गलत जानकारी देकर आवेदन जमा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए गए थे।
अधिकारियों के अनुसार, पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने से रोकने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
SIR प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस का विरोध जारी
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की मौजूदा प्रक्रिया को लेकर भी विरोध दर्ज कराया।
उन्होंने मांग की कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा सूची में शामिल किया जाए।
शिवकुमार ने कहा कि मृत व्यक्तियों और कानूनी रूप से अपात्र लोगों के मामलों को छोड़कर किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन इस मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखेंगे।
वहीं, भाजपा के नेताओं ने पहले सामूहिक रूप से फॉर्म-7 जमा करने को अपने आप में गैरकानूनी मानने से इनकार किया था और कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाए थे।
मतदाता सूची में नाम कैसे चेक करें?
मतदाता अपने नाम की स्थिति जांचने के लिए भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in का उपयोग कर सकते हैं।
वे अपने मतदाता पहचान पत्र की EPIC संख्या या अन्य उपलब्ध विवरणों की सहायता से मतदाता सूची में अपना नाम खोज सकते हैं।
यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं मिलता है, तो वह संबंधित निर्वाचन अधिकारी से संपर्क कर सकता है।
निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन या आपत्ति दर्ज कराने की सुविधा भी उपलब्ध है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी सच्चाई
कर्नाटक में फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर विवाद जारी है।
एक ओर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भाजपा से जुड़े लोगों पर मतदाता सूची में हेरफेर का आरोप लगाते हुए पुलिस जांच की घोषणा की है।
दूसरी ओर, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी आवेदन के आधार पर नाम हटाने से पहले उचित जांच आवश्यक है।
फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।
इस पूरे प्रकरण में मतदाता सूची की शुद्धता, आवेदन प्रक्रिया की पारदर्शिता और पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों की सुरक्षा प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
स्रोत: द इकोनॉमिक टाइम्स (6 नवंबर 2026), बैंगलोर मिरर (6 नवंबर 2026), द इंडियन एक्सप्रेस, इंडिया टुडे, हिंदुस्तान टाइम्स।
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