Anu Sharma

heatwave advisory

हीटवेव से बचाव, स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी, जानें क्या करें और क्या न करें

हीट वेव (Heat wave) यानी गर्मी की लहर उस पीरियड को कहा जाता है, जब किसी जगह का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। हमारे देश में हीट वेव पीरियड को मार्च से लेकर जून तक माना जाता है। आमतौर पर हमारे देश में हीट वेव (Heat wave) की घोषणा तब की जाती है जब कुछ दिनों तक मैदानी स्थानों में टेम्प्रेचर 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है या पहाड़ी क्षेत्रों में यह तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो। हाल ही में हेल्थ डिपार्टमेंट (Health department) ने दिल्ली के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें यह कहा गया है कि हीट वेव (Heat wave) के कारण लोग जितना हो सके घर के अंदर ही रहें। आइए जानें हेल्थ डिपार्टमेंट की हीट वेव से संबंधित एडवाइजरी (Health Department advisory regarding heat wave) के बारे में। हीट वेव से बचाव के तरीकों के बारे में भी जानें।  हेल्थ डिपार्टमेंट की हीट वेव से संबंधित एडवाइजरी (Health Department advisory regarding heat wave): पाएं जानकारी इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट यानी भारतीय मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में दिल्ली में दिन के समय 45 डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है। रात का तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है। इसलिए हेल्थ डिपार्टमेंट (Health department) ने लोगों से आग्रह किया है कि वो उस समय घर पर रहें जब धूप बहुत तेज होती है। यही नहीं, अधिक पेय पदार्थों का सेवन करना भी न भूलें। हेल्थ डिपार्टमेंट की हीट वेव से संबंधित एडवाइजरी (Health Department advisory regarding heat wave) जारी करने के साथ ही उन्होने लोगों को यह सलाह भी दी है: इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक हीट वेव से बचने के लिए अपनाएं यह उपाय हीट वेव (Heat wave) से बचाव के लिए जरूरी है घर में ही रहना और धूप से बचना। इसके साथ ही इन चीजों का भी ध्यान रखें: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi heat wave #heatwave #healthministry #summer2025 #heatstrokeprevention #staycool #healthtips #summeradvisory #doanddont #heatwavealert

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Millennials Face Rising Appendix Cancer Risk

मिलेनियल्स में बढ़ रहा है एपेंडिक्स कैंसर खतरा, जानिए कैसे बचें इस दुर्लभ बीमारी से

एपेंडिक्स कैंसर (Appendix cancer) एक दुर्लभ बीमारी है, जिसे एपेंडिसियल कैंसर के नाम से भी जाना जाता है। यह समस्या तब होती है जब हमारे एपेंडिक्स में मौजूद सेल्स में बदलाव होता है और इनकी ग्रोथ असामान्य हो जाती है। अगर बात की जाए एपेंडिक्स की, तो यह हमारे डायजेस्टिव सिस्टम का भाग है। यह अंग पेट के दाई तरफ होता है। हाल ही में हुई एक स्टडी के मुताबिक आजकल युवाओं यानी मिलेनियल्स में इस कैंसर (Cancer) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। मिलेनियल्स उस जनरेशन को कहा जाता है जिनका जन्म 1981 से 1996 के बीच में हुआ हो। यही नहीं यह भी पाया है कि 1980 से 1985 के बीच पैदा हुए लोगों में यह मामले तीन गुना बढ़ गए हैं। आइए जानें मिलेनियल्स में एपेंडिक्स कैंसर (Appendix Cancer in Millennials) के बारे में। मिलेनियल्स में एपेंडिक्स कैंसर (Appendix Cancer in Millennials): क्या कहती है स्टडी? कैंसर काउंसिल (Cancer Council) के अनुसार इस कैंसर (Cancer) के कारणों के बारे में जानकारी नहीं है। यही नहीं, इसके रिस्क फैक्टर्स भी नहीं हैं लेकिन ऐसे माना गया है कि यह समस्या जेनेटिक हो सकती है। उम्र के बढ़ने से भी इसका जोखिम बढ़ सकता है। एक स्टडी के अनुसार मिलेनियल्स में एपेंडिक्स कैंसर ((Appendix Cancer in Millennials)) का रिस्क बढ़ता जा रहा है और इसका कारण खराब जीवनशैली, एनवायर्नमेंटल रिस्क और जेनेटिक को माना जा रहा है। चिंत्ता का विषय यह है कि एपेंडिक्स कैंसर (Appendix cancer) का शुरू में पता नहीं चलता, जिससे इलाज थोड़ा मुश्किल हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि युवाओं में इस कैंसर (Cancer) में बढ़ोतरी एक गंभीर हेल्थ रिस्क है। ऐसे में जरूरी है कि सभी अपनी जीवनशैली में सुधार करें। हेल्दी खाएं और जंक फ़ूड से बचें। यही नहीं, लक्षणों को पहचानें और नियमित चेकअप कराएं। आइए जानें कि एपेंडिक्स कैंसर के लक्षण (Appendix cancer symptoms) क्या हो सकते हैं? एपेंडिक्स कैंसर के लक्षण (Appendix cancer symptoms) जैसा की पहले ही बताया गया है कि इस एपेंडिक्स कैंसर के लक्षण  (Appendix cancer symptoms) अधिकतर रोगियों में नजर नहीं आते हैं। लेकिन, इसके सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं: कई बार एपेंडिक्स कैंसर (Appendix cancer) के साथ एक दुर्लभ स्थिति भी हो सकती है, जिसे स्यूडोमाइक्सोमा पेरिटोन कहा जाता है, जिसमें कैंसर सेल्स जैली जैसे पदार्थ को निकालते हैं, जो एपेंडिक्स परेशानी का कारण बन सकता है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक एपेंडिक्स कैंसर से बचाव हालांकि, एपेंडिक्स कैंसर (Appendix cancer) से पूरी तरह से बचाव संभव नहीं है, लेकिन कुछ चीजों का ध्यान रख कर इसकी संभावना को कम किया जा सकता है। एपेंडिक्स कैंसर (Appendix cancer) से बचाव के तरीके इस प्रकार हैं: इसके साथ ही नियमित चेकअप और जेनेटिक काउन्सलिंग व टेस्टिंग भी जरूरी है। एपेंडिक्स कैंसर (Appendix cancer) के बारे में पूरी जानकारी और जल्दी निदान से सही उपचार में मदद मिल सकती है।  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Appendix cancer #Appendixcancer #cancer #appendixcancersymptoms #appendixcancerprevention #appendixcancerinmillennials

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Central Bank of India recruitment 2025

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा निकाली एप्रेंटिस पोस्ट्स (Apprentice Posts by Central Bank of India): पाएं जानकारी

अगर आप इसके लिए आवेदन भेजना चाहते हैं, तो आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि यह प्रोसेस 7 जून 2025 से शुरू हो चुकी है और इसके लिए अंतिम तिथि 23 जून 2025 है। इसके बाद आप इसके लिए अप्लाई नहीं कर पाएंगे। एप्रेंटिस पोस्ट्स (Apprentice Posts) के लिए ऑनलाइन आसानी से अप्लाई किया जा सकता है।  एजुकेशनल क्वालिफिकेशन सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा निकाली एप्रेंटिस पोस्ट्स (Apprentice Posts by Central Bank of India) के लिए वैकेंसीज निकाली हैं, जिसके लिए कैंडिडेट्स के पास किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या इंस्टिट्यूट से बैचलर डिग्री या इसके समान डिग्री होना जरूरी है। इसके साथ ही इसके लिए कैंडिडेट का एनएटीएस पोर्टल पर रजिस्टर होना भी अनिवार्य है। आयु सीमा एप्रेंटिस पोस्ट्स (Apprentice Posts) के लिए आवेदन भेजने से पहले यह जान लें कि इसके लिए मिनिमन एजलिमिट 20 साल और मैक्सिमम एजलिमिट 28 साल निर्धारित की गई है। आरक्षित श्रेणी के लोगों के लिए इसमें कुछ छूट दी गई है, जिसके बारे में आपको पूरी जानकारी ऑफिशियल वेबसाइट पर मिल जाएगी। वेकेंसीज एप्रेंटिस पोस्ट्स (Apprentice Posts) के लिए हर राज्य और यूटी से भर्ती की जाएगी। इसके लिए सबसे अधिक भर्तियां महाराष्ट में की जाएगी, जिनकी संख्या 586 है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश से 580, मध्य प्रदेश से 459, बिहार से 433 और गुजरात से 305 पदों को भरा जाएगा। आप अपने राज्य या यूटी में इससे सम्बन्धित पूरी जानकारी इसकी ऑफिशियल वेबसाइट से पा सकते हैं। ध्यान रहे कि चयन के लिए सबसे पहले लिखित परीक्षा होगी जो ऑनलाइन ली जाएगी। इसके बाद कैंडिडेट्स की स्थानीय भाषा की परीक्षा ली जाएगी। फीस  अगर आप सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की एप्रेंटिस पोस्ट्स (Apprentice Posts) के लिए आवेदन भरना चाहते हैं, तो इसकी फीस के बारे में भी थोड़ा जान लें, जो इस प्रकार है: इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक कैसे करें अप्लाई नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi #centralbankofindia #apprenticeposts #bankjobs #governmentjobs #jobnotification #recruitment2025 #careers #cbijobs #indiagovernmentjobs #latestvacancy

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COVID variant update

कोविड-19 के नए वेरिएंट ने बढ़ाई चिंता, जानें कोविड-19 वेरिएंट्स और म्यूटेशन के बारे में

कोविड-19 (Covid-19) यानी कोरोना वायरस (Coronavirus) एक संक्रामक बीमारी है, जिसे 2019 में चाइना में पहचाना गया था। इसके बाद यह पूरी दुनिया में फैल गया था और इसके कारण करोड़ों लोग प्रभावित हुए थे। यह वायरस रेस्पिरेटरी ड्रॉप्लेट्स और दूषित सरफेस से फैल सकता है। यही नहीं, यह वायरस एयरबोर्न ट्रांसमिशन यानी वायुजनित संक्रमण के माध्यम से भी स्प्रेड हो सकता है, विशेष रूप से बंद स्थानों में। अब तक इसके कई अलग-अलग कोविड-19 वेरिएंट्स (Covid-19 variants) सामने आ चुके हैं जैसे अल्फा, बीटा, डेल्टा, ओमिक्रॉन आदि। इसका कारण हैं म्यूटेशन। आइए जानें कि कोविड-19 वेरिएंट्स (Covid-19 variants) कौन-कौन से हैं? कोरोना वायरस कैसे म्यूटेट करता है (How does Coronavirus mutate) यह भी जानें?   इस प्रकार है कोविड-19 (Covid-19) के वेरिएंट्स की लिस्ट अल्फा: यह वो वेरिएंट है, जो यूनाइटेड किंगडम में सबसे पहले पहचाना गया था। असली वायरस की तुलना में यह वेरिएंट 40-80% अधिक संक्रामक है।  इनके अलावा ऐसे कई कोविड-19 वेरिएंट्स (Covid-19 variants) हैं, जिन्हें अभी मॉनिटर किया जा रहा है जैसे  JN.1,KP.3, KP.3.1.1, JN.1.18, LB.1, LP.8.1, NB.1.8.1 और XEC। आजकल कई देशों में एक नया वेरिएंट फैला हुआ है जिसका नाम है NB.1.8.1। भारत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया, हांगकांग, थाईलैंड, चीन आदि में इसके कई मामले सामने आ रहे हैं। हमारे देश में इस समय इसके लगभग 6500 एक्टिव मामले हैं। अब जानते हैं कि कोरोना वायरस कैसे म्यूटेट करता है (How does Coronavirus mutate)? इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक कोरोना वायरस कैसे म्यूटेट करता है (How does Coronavirus mutate)? एक्सपर्ट्स का मानना है कि वायरस हमारे शरीर में पहले से ही मौजूद हैं और बी हम इन्हें नष्ट करने की कोशिश करते हैं तो यह वायरस अपने रूप को बदलते हैं ताकि वो नष्ट न हो बल्कि सर्वाइव कर सकें। इस प्रोसेस में यह वायरस अधिक स्प्रेड होने और कम खतरनाक वेरिएंट्स में बदल सकता है।  एक्सपर्ट्स के अनुसार कोरोना वायरस (Coronavirus) के सभी वेरिएंट्स में ओमिक्रॉन वेरिएंट अधिक स्प्रेड हुआ था लेकिन इसके लक्षण सीरियस नहीं थे। संक्षेप में कहा जाए तो म्यूटेशन के बाद वायरस अधिक फैलता तो है लेकिन इसका प्रभाव पहले से कम हो सकता है। यही कारण है कि हाल ही में फैले कोरोना वायरस (Coronavirus) के वेरिएंट्स को इतना खतरनाक नहीं माना जा रहा। एक्सपर्ट्स भी यह मान रहे हैं कि कोविड-19 वेरिएंट्स (Covid-19 variants) में यह वेरिएंट कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों, बुजुर्गों और बच्चों को अधिक प्रभावित कर सकता है। लेकिन, लोग सावधानियां अवश्य बरतें, ताकि किसी भी तरह की समस्या से बचाव हो सके। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Covid-19 variants #covid19 #newvariant #coronavirusupdate #mutation #covidmutation #covidnews #healthalert #covidindia #virusupdate #publichealth

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Bihar ASO Salary and Qualification

बिहार में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर भर्ती: जानिए क्या है योग्यता और कैसे करें अप्लाई

अगर सरकारी नौकरी करना चाहते हैं, तो बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन यानी बीपीएससी (BPSC) अब आपके लिए एक सुनहरा मीका ले कर आया है। बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन ने असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (Assistant Section Officer) के लिए पोस्ट्स निकाली हैं जिसके लिए आप आवेदन भर सकते हैं। अगर बात की जाए असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर्स की तो यह ऑफिसर एडमिनिस्ट्रेटिव फंक्शन्स के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसके लिए अभी 41 पोस्ट्स निकाली गयी हैं और इसके लिए एप्लीकशन प्रोसेस भी शुरू हो चुकी है। अगर आप इसके लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो अधिक जानकारी आपको इसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर मिल जाएगी। आइए पाएं जानकारी बीपीएससी द्वारा निकाली असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर पोस्ट्स (Assistant Section Officer Posts by BPSC) के बारे में। बीपीएससी द्वारा निकाली असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर पोस्ट्स (Assistant Section Officer Posts by BPSC): पाएं जानकारी बीपीएससी (BPSC) द्वारा निकाली इन पोस्ट्स के लिए एप्लीकशन प्रोसेस 29 मई से शुरू हो चुकी है और 23 जून इसकी आखिर डेट है। आयुसीमा असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (Assistant Section Officer) के लिए एज लिमिट को मिनिमम 21 साल निर्धरित किया गया है और इसकी अधिकतम आयु सीमा पुरुषों के लिए 37 साल है। वहीं महिलाओं और कुछ अन्य क्षेणी के लोगों अधिकतम एज लिमिट को 40 साल रखा गया है। अनसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति आदि के लोगों के लिए यह एज लिमिट 42 साल है। अधिक जानकारी के लिए आप ऑफिशियल वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (Assistant Section Officer) के लिए अप्लाई करने के लिए कैंडिडेट्स के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या इंस्टीट्यूट की डिग्री होनी चाहिए। इसके बारे में अधिक जानकारी भी आपको ऑफिशियल वेबसाइट पर मिल जाएगी। फीस अगर बात की जाए असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (Assistant Section Officer Posts by BPSC) पोस्ट्स के लिए आपको कितनी फीस भरनी होगी, तो जनरल, ओबीसी कैंडिडेट्स आदि कैंडिडेट्स के लिए यह फीस 600 रुपए है। यही नहीं महिलाओं, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए यह फीस 150 रुपए है। शारीरिक रूप से विकलांग लोगों को इसके लिए 200 रुपए फीस के रूप में भरने पड़ेंगे। कैंडिडेट डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग आदि ऑनलाइन फी पेमेंट मोड के माध्यम से एग्जामिनेशन फीस भर सकते हैं।  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक बीपीएससी द्वारा निकाली असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर पोस्ट्स (Assistant Section Officer Posts by BPSC) के लिए कैसे करें अप्लाई? नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi Assistant Section Officer Posts by BPSC #biharjobs2025 #assistantsectionofficer #biharvacancy #govtjobs #asoeligibility #applyonline #jobnewsbihar #biharsecretariat

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smoking impact on reproduction

एल्कोहॉल व तंबाकू महिलाओं और पुरुषों की फर्टिलिटी के लिए है सबसे बड़ा खतरा 

एल्कोहॉल (Alcohol) का सेवन न केवल हमारे लिवर बल्कि शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है जैसे ब्रेन, गट, फेफड़े, इम्यून सिस्टम आदि। मायोक्लिनिक (Mayoclinic) के अनुसार किसी भी मात्रा में इसका सेवन कई सेहत सम्बन्धी समस्याओं का कारण बन सकता है। डॉक्टरों का यह मानना है कि तंबाकू और एल्कोहॉल (Alcohol) जैसी आदतों से महिलाओं और पुरुषों की फर्टिलिटी (Fertility) भी प्रभावित होती है। यही नहीं, इससे गर्भपात और बर्थ डिफेक्ट्स की संभावना बढ़ सकती है। डॉक्टर्स का यह भी कहना है कि इन आदतों से बच कर इस परेशानियों के रिस्क को कम किया जा सकता है। आइए जानें कि एल्कोहॉल और इनफर्टिलिटी में कनेक्शन (Connection between alcohol and infertility) के बारे में एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं? एल्कोहॉल और इनफर्टिलिटी में कनेक्शन (Connection between alcohol and infertility) यह तो हम सभी जानते हैं कि एल्कोहॉल (Alcohol), तंबाकू और वेप जैसी चीजें हमारी हेल्थ के लिए नुकसानदायक हैं। महिलाओं में बढ़ती इनफर्टिलिटी (Infertility) प्रॉब्लम्स के लिए भी डॉक्टर तंबाकू, एल्कोहॉल (Alcohol) आदि को जिम्मेदार मानते हैं। आइए जानें इस बारे में और अधिक: महिलाओं में एल्कोहॉल और तंबाकू का प्रभाव एक्सपर्ट्स का मानना है कि महिलाएं अगर अधिक एल्कोहॉल (Alcohol) का सेवन करती हैं या स्मोकिंग (Smoking) करती हैं , तो इससे एबॉर्शन की संभावना भी बढ़ती है। यही नहीं, इससे एक्टोपिक प्रेग्नेंसी और स्पर्म में डीएनए डैमेज का रिस्क भी बढ़ जाता है। इससे एबोरशन और बर्थ डिफेक्ट हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर प्रेग्नेंसी प्लान कर रहे हैं, तो इन आदतों से बचना बहुत आवश्यक है। एल्कोहॉल और इनफर्टिलिटी में कनेक्शन (Connection between alcohol and infertility) के बारे में एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि स्मोकिंग (Smoking) करने से महिलाओं में एग्स को नुकसान होता और यूट्रस प्रभावित होता है। यही नहीं इससे फर्टिलाइज एग को इम्प्लांट करने में मुश्किल होती है। यह हार्मोन इंबैलेंस, एग की क्वालिटी का कम होना और पीरियड्स में समस्या जैसी परेशानियां का कारण भी बन सकते हैं।  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक पुरुषों में एल्कोहॉल और तंबाकू का प्रभाव एक्सपर्ट्स की मानें तो स्मोकिंग (Smoking) से पुरुषों में स्पर्म की संख्या कम होती है और इससे स्पर्म में डीएनए को नुकसान होता है। वहीं अगर पुरुष वेपिंग करते हैं तो इससे भी स्पर्म की क्वालिटी कम होती है, हॉर्मोन इंबैलेंस होता है और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस में बढ़ोतरी होती है। पुरुषों को एल्कोहॉल (Alcohol) का सेवन करने से भी बहुत नुकसान होता है। इससे उनमें टेस्टोस्टेरोन लेवल में कमी हो सकती है और स्पर्म और उसकी क्वालिटी में कमी आ सकती है। अगर संक्षेप में कहा जाए तो एल्कोहॉल (Alcohol), तंबाकू और वेपिंग आदि से न केवल महिलाओं और पुरुषों की फर्टिलिटी (Fertility) पर बुरा प्रभाव पड़ता है बल्कि कई अन्य समस्यांए भी हो सकती हैं। इससे कैंसर का जोखिम भी बढ़ सकता है। इनके उपयोग से इम्युनिटी कमजोर होती है और क्रोनिक इन्फ्लेमेशन जैसी समस्याएं होने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए, फर्टिलिटी (Fertility) संबंधी समस्याओं से बचाव का एक ही प्रभावी तरीका है इनका सेवन करने से बचें और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं।  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi  #fertility #alcoholrisk #tobaccodangers #infertility #healthtips #malehealth #femalehealth #reproductivehealth

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doctor’s take on tumor cases

इस वजह से ब्रेन ट्यूमर के मामलों में वृद्धि के बावजूद डॉक्टर इसे मान रहे हैं एक सकारात्मक संकेत

ब्रेन ट्यूमर (Brain Tumor) की शुरुआत दिमाग में असामान्य सेल्स की ग्रोथ के साथ होती है। यह ट्यूमर दिमाग या खोपड़ी के किस भी भाग में हो सकता है। आपको यह जान कर हैरानी होगी कि दिमाग में 120 विभिन्न तरह के ट्यूमर विकसित हो सकते हैं। यही नहीं, यह कैंसर कैंसरस और नॉनकैंसरस किसी भी तरह का हो सकता है और बच्चे व वयस्क दोनों को यह प्रभावित कर सकता है। डॉक्टरों का यह कहना है कि पिछले कुछ सालों में बेंगलुरु में ब्रेन ट्यूमर (Brain Tumor) के मामलों में लगभग 30 परसेंट वृद्धि हुई है। लेकिन, डॉक्टरों का यह मानना है कि ब्रेन ट्यूमर के मामलों में वृद्धि के बावजूद, यह एक सकारात्मक संकेत है जो दर्शाता है कि लोग अधिक जागरूक हो रहे हैं और समय पर चिकित्सा सहायता ले रहे हैं। आइए जानें बेंगलुरु में ब्रेन ट्यूमर के बढ़ते मामले (Increasing cases of brain tumors in Bengaluru) के बारे में विस्तार से। बेंगलुरु में ब्रेन ट्यूमर के बढ़ते मामले (Increasing cases of brain tumors in Bengaluru): पाएं जानकारी ऐसा माना गया है कि बेंगलुरु में ब्रेन ट्यूमर (Brain Tumor) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यह बढ़ोतरी  30% तक हो सकती है। लेकिन डॉक्टरों का यह भी मानना है कि बेंगलुरु में ब्रेन ट्यूमर के बढ़ते मामले (Increasing cases of brain tumors in Bengaluru) चिंता नहीं बल्कि एक सकारात्मक संकेत है। क्योंकि, लोग इससे लोग अधिक अवेयर हो रहे हैं, जिससे समय पर इस गंभीर समस्या का निदान और उपचार संभव हैं। दरअसल लोग अब इस रोग को लेकर अधिक अवेयर हैं तो समय पर डॉक्टर की सलाह ले रहे हैं और अपना उपचार करा रहे हैं। यानी, बढ़ते मामलों के बाद भी ट्रीटमेंट रेट में भी इम्प्रूवमेंट हो रही है। डॉक्टरों ने लोगों से यह भी कहा है कि वो ब्रेन ट्यूमर (Brain Tumor) के लक्षणों को जानें और समय पर एक्सपर्ट की सलाह लें। इससे इन मामलों में सुधार किया जा सकता है। आइए जानें ब्रेन ट्यूमर के लक्षण (Symptoms of Brain Tumor) क्या हो सकते हैं? इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक ब्रेन ट्यूमर के लक्षण (Symptoms of Brain Tumor) क्लेवलैंडक्लिनिक (clevelandclinic) के अनुसार ब्रेन ट्यूमर (Brain Tumor) चाहे कैंसरस हो या नहीं, लेकिन अगर यह इतने बड़े हो जाएं कि आसपास के टिशूज पर दवाब पड़े तो इससे ब्रेन फंक्शन प्रभावित हो सकता है। इस रोग से पीड़ित कुछ लोग कोई भी लक्षण का अनुभव नहीं करते हैं, खासतौर पर जब यह बहुत छोटे हों। इसके लक्षण ट्यूमर के स्थान, आकार आदि पर निर्भर करते हैं। ब्रेन ट्यूमर के लक्षण ब्रेन ट्यूमर के लक्षण (Symptoms of Brain Tumor) इस प्रकार हैं:  अगर रोगी कोई भी लक्षण का अनुभव करता है, तो उसे तुरंत मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए, ताकि समय पर निदान और उपचार हो सके। कई मामलों में इन लक्षणों को हलके में लेना किसी बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम का कारण बन सकता है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें Latest News in Hindi Today Hindi Symptoms of Brain Tumor #brainhealth #braintumor #medicalnews #healthupdate #neuroscience #positivesign #healthawareness

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Benefits of Sarvangasana

सर्वांगासन के बेनेफिट्स: थायरॉइड और स्ट्रेस को कहें अलविदा इस सरल और प्रभावी आसन के साथ

हेल्दी रहने के लिए सही आहार का सेवन करना और एक्सरसाइज करना बेहद जरूरी है। आजकल लोग योगा को भी प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि यह स्वस्थ रहने का आसान और प्रभावी तरीका है। ऐसे कई योगासन (Yogasana) हैं, जिन्हें करना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन माना गया है। ऐसा ही एक आसन है सर्वांगासन (Sarvangasana)। ऐसा माना गया है कि यह आसन (Aasan) थायरॉइड को कंट्रोल करने के साथ ही स्ट्रेस को भी कम करता है। इस आसन को “शोल्डर स्टैंड” के नाम से भी जाना जाता है। यही नहीं, अपने फायदों की वजह से इस योगासन (Yogasana) को “आसनों की रानी” भी कहा जाता है। आइए जानें क्या हैं सर्वांगासन के बेनेफिट्स (Benefits of Sarvangasana) और कैसे किया जा सकता है इसे? सर्वांगासन के बेनेफिट्स (Benefits of Sarvangasana): पाएं जानकारी आर्ट ऑफ लिविंग (Art of Living) के अनुसार यह एक ऐसा आसन है जिसमें पूरे शरीर को कंधे पर बैलेंस किया जाता है। इस शब्द में सर्व का अर्थ है सभी अंग और आसन यानी पोस्चर। सर्वांगासन के बेनेफिट्स (Benefits of Sarvangasana) इस प्रकार हैं:  कैसे करें सर्वांगासन (Sarvangasana) योगा के इस लाभदायक आसन (Aasan) को इस प्रकार किया जा सकता है: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। #Sarvangasana #BenefitsofSarvangasana #Yogasana #Aasan

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Things to keep in mind while choosing a school for your child

बच्चे के भविष्य की नींव रखें मजबूत: उनके लिए सही स्कूल चुनते हुए इन 5 बातों का रखें ध्यान

अपने बच्चे की हर पहली खास चीज माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण होती है जैसे उनका पहला दांत निकलना, पहली बार चलना या उनका पहली बार स्कूल (School) जाना। बच्चों का पहला स्कूल चुनना बहुत ही जरूरी निर्णय है। क्योंकि, यह वही जगह है जहां से बच्चे का शैक्षिक और व्यक्तिगत विकास होता है। इस निर्णय से बच्चे का भविष्य प्रभावित होता है। सिर्फ स्कूल (School) की बिल्डिंग को देखकर आप स्कूल के अच्छे या बुरे होने का अंदाजा नहीं लगा सकते हैं। बल्कि, इसके लिए कई अन्य चीजों का भी ध्यान रखना आवश्यक है। आइए जानिए अपने बच्चे के लिए स्कूल चुनते हुए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए (Things to keep in mind while choosing a school for your child)?  अपने बच्चे के लिए स्कूल चुनते हुए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए (Things to keep in mind while choosing a school for your child)? अगर आपका बच्चा स्कूल (School) जाने लायक हो गया है, तो आप अभी से तैयार हो जाएं और अपने एरिया के स्कूल के बारे में जानकारी लेना शुरू कर दें और बच्चे के लिए सही स्कूल (Right school for child) चुनते हुए कुछ खास बातों का ध्यान रखें।  सही लोकेशन अगर आप अपने बच्चे के लिए सही स्कूल (Right school for child) ढूंढ रहे हैं, तो सबसे जरूरी है स्कूल की सही लोकेशन। ध्यान रहे स्कूल अपने घर से अधिक दूर न हो। क्योंकि, आपका बच्चा स्कूल (School) के लिए अधिक सफर नहीं कर पायेगा और उसका अधिकतर समय स्कूल आने-जानें में निकल जाएगा। इससे वो बहुत जल्दी थक भी जाएगा। इसलिए, अपने बच्चे के लिए स्कूल चुनते हुए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए (Things to keep in mind while choosing a school for your child) में यह बहुत जरूरी है कि यह स्कूल घर के आसपास ही हो। शिक्षक विशेषज्ञता बच्चे के लिए सही स्कूल (Right school for child) को चुनते हुए यह भी ध्यान रखना चाहिए कि टीचर पूरी तरह से अपने कार्य में निपुण हों। क्योंकि शिक्षक बच्चे के ऐकडेमिक के साथ-साथ सोशल व इमोशनल डेवलपमेंट में भी मदद करते हैं। एक अच्छा टीचर वो है, जो बच्चों को सही और मजेदार तरीके से पढ़िए। इसलिए, ध्यान रखें कि टीचर एकेडेमिक रूप से योग्य हो और बच्चों के साथ भी उनका व्यवहार अच्छा हो। इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा ध्यान रहे कि आपके बच्चे के स्कूल (School) में वेंटिलेशन और लाइट पर्याप्त हो। इसके साथ ही वहां अच्छी कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय, आधुनिक प्रयोगशालाएं, खेल का मैदान आदि हों। इससे बच्चे को हर गतिविधि में भाग लेने की प्रेरणा मिलेगी। यही नहीं बच्चों की सुरक्षा का भी इसमें सही इंतजाम होना चाहिए जैसे सीसीटीवी (CCTV) सर्विलांस, सुरक्षा गार्ड, आग बुझाने के उपकरण आदि। एक्स्ट्रा-करीकुलर एक्टिविटीज  बच्चों के पूरे विकास के लिए एक्स्ट्रा-करीकुलर एक्टिविटीज बहुत जरूरी हैं। म्यूजिक, डांस, प्ले, गेम्स आदि एक्टिविटीज बच्चों की इंटेलिजेंस और क्रिएटिविटी को बढ़ावा देती हैं। इसलिए ऐसे स्कूल (School) को चुनना चाहिए जिनमें इन एक्टिविटीज को बढ़ावा दिया जाता है और बच्चों को इनके लिए प्रेरित किया जाता है।  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक करिकुलम और एकेडेमिक्स  स्कूल (School) के करिकुलम और एकेडेमिक्स और एजुकेशनल लेवल आदि पर भी ध्यान दें। इससे बच्चों को सही ज्ञान और स्किल्स मिलते हैं। बच्चों को पढ़ने के तरीके अच्छे होना बहुत जरूरी है। स्कूल की एजुकेशनल रेपुटेशन भी महत्वपूर्ण है, जो बच्चों के भविष्य के अवसरों को निर्धारित करती है। नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi Things to keep in mind while choosing a school for your child #Thingstokeepinmindwhilechoosingaschoolforyourchild #school #rightschoolforchild #rightschool

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Yoga for High BP

High Blood Pressure के लिए यह 4 योगासन, ब्लड सर्कुलेशन और हार्ट हेल्थ को बनाएंगे दुरुस्त

हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) यानी हायपरटेंशन (Hypertension) वो समस्या है, जिसमें रोगी का ब्लड प्रेशर सामान्य से अधिक होता है। अगर इसे सही समय पर कंट्रोल न किया जाए, तो यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है जैसे हार्ट अटैक या स्ट्रोक आदि। हाई ब्लड प्रेशर  (High blood pressure) को कंट्रोल करने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल का पालन करना बहुत आवश्यक है। नियमित रूप से योगा करना न केवल हमारे बॉडी बल्कि माइंड हेल्थ के लिए भी फायदेमंद पाया गया है। ऐसा भी पाया गया है कि योगा करने से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। आइए हाई ब्लड प्रेशर के लिए योगासन (Yogasana for high blood pressure) के बारे में। हाई ब्लड प्रेशर के लिए योगासन (Yogasana For High Blood Pressure) आर्ट ऑफ लिविंग के अनुसार हायपरटेंशन (Hypertension) को बेहद खतरनाक माना जाता है क्योंकि अधिकतर रोगियों में इसका कोई लक्षण नजर नहीं आता। इसके निदान के लिए नियमित चेकअप बहुत जरूरी है। हाई ब्लड प्रेशर के लिए योगासन (Yogasana for high blood pressure) इस प्रकार हैं:  उत्कटासन (Utkatasana) उत्कटासन में करने वाले की पोजीशन चेयर जैसी लगती है, इसलिए इसे चेयर पोज भी कहा जाता है। इस आसन को करने से कई मसल ग्रुप्स की एक्सरसाइज होती है और हाइपरटेंशन को मैनेज करने में मदद मिलती है। इस करने से ब्लड फ्लो बढ़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर को रेगुलर रहने में मदद मिलती है। यही नहीं, इससे हार्ट रेट बढ़ता है और स्ट्रेस भी कम होता है। यानी, उत्कटासन को करने से हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) को कंट्रोल करने में आसानी होती है। भद्रासन (Bhadrasana) भद्रासन यानी बटरफ्लाई पोज करने से हाई ब्लड प्रेशर को मैनेज करने में मदद मिलती है क्योंकि इसे करने से स्ट्रेस कम होता है और शांत रहने में आसानी होती है। स्ट्रेस को हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) के रिस्क फैक्टर्स में से एक माना जाता है। भद्रासन करना भी बेहद सरल है। इसके लिए आपको इस तरह से योगा मैट पर बैठना है कि आपके पैरों के तलवे साथ जुड़े हों। अब अपने पैरों को हाथों को पकड़ें और अपने घुटनों को ऊपर-नीचे करें। भद्रासन को करते हुए अपनी पीठ सीधी होनी चाहिए। ताड़ासन (Tadasana) हाइपरटेंशन का कारण कई चीजें हैं जैसे खराब लाइफस्टाइल, जेनेटिक्स और अंडरलायिंग हेल्थ कंडीशंस आदि। ताड़ासन यानी माउंटेन पोज एक आसान योगासन (Yogasana) है, जो हायपरटेंशन (Hypertension) को कम करने में मदद करता है। हालांकि यह आसन सीधे तौर पर ब्लड प्रेशर को कम नहीं करता है लेकिन ताड़ासन करने से स्ट्रेस कम होती है, शांति मिलती है और संपूर्ण कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ में सुधार होता है जिससे ब्लड प्रेशर को मैनेज करने में मदद मिलती है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक त्रिकोणासन (Trikonasana) त्रिकोणासन यानी ट्राइएंगल पोज करने से ब्लड सर्कुलेशन सुधरती है, स्ट्रेस कम होती है और रिलेक्स रहने में मदद मिलती है। यानी, हायपरटेंशन (Hypertension) की समस्या से राहत मिल सकती है। लेकिन, इस बात का ध्यान रखें कि इस आसन को सही से करना बेहद जरूरी है। अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर है,(High blood pressure) तो इस योगासन (Yogasana) को शुरू करने से पहले हेल्थ एक्सपर्ट और योग इंस्ट्रक्टर से बात करना न भूलें। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi  #highbloodpressure #yogasanaforhighbloodpressure #yogaasana, #hypertension #Trikonasana #Tadasana #Bhadrasana #Utkatasana

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