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Elon Musk Clashes with Minister

Elon Musk Clashes with Minister: कैबिनेट मीटिंग में ही भिड़े एलन मस्क और विदेश मंत्री, डोनाल्ड ट्रंप को देना पड़ा दखल

अमेरिकी राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में कई कड़े फैसले लिए जा रहे हैं। हालांकि उनके फैसलों का अमेरिका में जमकर विरोध भी हो रहा है। ट्रंप प्रशासन का एक ऐसा ही फैसला है सरकारी स्टाफ में कटौती का। उनके इस फैसले की आलोचना न सिर्फ अमेरिकी राजकर्मियों के संगठन बल्कि अन्य लोग भी कर चुके हैं। इस बीच उनके अपने इस फैसले के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सरकारी दक्षता विभाग के प्रमुख एलन मस्क के बीच नोकझोंक होने की खबर सामने आई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को ट्रंप की मौजूदगी में कैबिनेट बैठक के दौरान दोनों के बीच झड़प (Elon Musk Clashes with Minister) हुई। खैर, बाद में ट्रंप ने मस्क और रुबियो के बीच झड़प की बातों का खंडन किया है। मजे की बात यह कि एक तरफ जहां ट्रंप ने मस्क और रुबियो के बीच झड़प की बातों का खंडन किया है तो वहीं दूसरी ओर न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो और एलन मस्क के बीच स्टाफ कटौती के मुद्दे पर बहस हुई थी। गौर करने वाली बात यह कि रॉयटर्स ने भी इस बहस को रिपोर्ट किया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट की माने तो यह ड्रामा उस बैठक में हुआ, जिसमें ट्रंप ने अपने कैबिनेट प्रमुखों से कहा कि “उनकी एजेंसियों में स्टाफिंग और नीति पर अंतिम फैसला मस्क का नहीं, बल्कि उनका है।” ट्रंप प्रशासन को अपने ही मतदाताओं के गुस्से (Elon Musk Clashes with Minister) का करना पड़ा है सामना  प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह बैठक एजेंसी प्रमुखों से लेकर चीफ ऑफ स्टाफ, सूजी विल्स सहित व्हाइट हाउस के शीर्ष अधिकारियों तक मस्क ऑपरेशन के कठोर-बलपूर्ण दृष्टिकोण के बारे में की गई शिकायतों के बाद बुलाई गई थी। स्टाफ कटौती के इस फैसले के खिलाफ ट्रंप प्रशासन को अपने ही मतदाताओं के गुस्से (Elon Musk Clashes with Minister) का सामना करना पड़ा है। हालांकि शुक्रवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से रूबरू होते हुए ट्रंप से जब टाइम्स की रिपोर्ट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस बात से इनकार करते हुए कहा कि कोई टकराव नहीं। मैं वहां स्वयं मौजूद था।” उन्होंने आगे कहा कि “एलन मस्क मार्को रुबियो के साथ बहुत अच्छे से पेश आते हैं और वे दोनों शानदार काम कर रहे हैं।” इसे भी पढ़ें:-  नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप, 45 दिन बाद मैक्सिको-कनाडा को दी राहत बढ़ती बहस (Elon Musk Clashes with Minister) को देखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप को स्वयं करना पड़ा हस्तक्षेप   बैठक के दौरान मजे लेते हुए मस्क ने कहा कि “आपने किसी को भी नहीं निकाला है। आपका विदेश विभाग अभी भी फूला हुआ है।” मस्क के तीखे सवाल को सुनते ही रुबियो भड़क उठे। उन्होंने जवाब दिया कि मस्क को 1,500 विदेश विभाग के अधिकारियों की याद दिला दी जिन्होंने बायआउट किया था। मगर  मस्क प्रभावित नहीं हुए। खैर, रुबियो ने व्यंग्यात्मक रूप से पूछा कि “क्या मस्क चाहते हैं कि वे उन सभी लोगों को फिर से काम पर रखें ताकि वे उन्हें फिर से नौकरी से निकालने का दिखावा कर सकें?” इस बीच दोनों के बीच जैसे ही बहस (Elon Musk Clashes with Minister) बढ़ी वैसे ही राष्ट्रपति ट्रंप, जो पहले हाथ पर हाथ धरे देख रहे थे, आखिरकार उन्हें स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा। ट्रंप ने कहा कि “कैबिनेट सचिव कार्यभार संभालेंगे, जबकि मस्क की टीम केवल सलाह देगी।” बेशक यह ट्रंप का पहला महत्वपूर्ण संकेत था कि मस्क के प्रभाव पर सीमाएं लगाने के लिए तैयार थे। कहने की जरूरत नहीं, इसे देखकर यह कहा जा सकता है कि ट्रंप की सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हैरत की बात यह कि एक तरफ पूरी दुनिया को ट्रंप अपनी ताकत दिखाने में लगे हुए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ उनके मंत्री ही आपस लड़ रहे हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Elon Musk Clashes with Minister #ElonMusk #DonaldTrump #USPolitics #ForeignAffairs #TechVsPolitics #CabinetClash #MuskVsMinister #TrumpMediation #BreakingNews #PoliticalDrama

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India vs New Zealand match

India vs New Zealand match में मोहम्मद शमी पर रहेंगी सभी की निगाहें, रिकॉर्ड बहुत कुछ करते हैं बयां

9 मार्च को भारत और न्यूजीलैंड के (India and New Zealand) बीच आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का फाइनल मुकाबला दुबई को इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। टीम इंडिया के गेंदबाजों का बेहतरीन फॉर्म ही उसे जीत का प्रबल दावेदार बना रहा है। बता दें कि इस इस टूर्नामेंट में टीम इंडिया ने कुल 4 मुकाबले खेले हैं। बड़ी बात यह कि इन चारों मुकाबलों में टीम इंडिया अजेय रही है। दुबई की पिच पर न सिर्फ स्पिन गेंदबाजों ने अपना कमाल दिखाया बल्कि  भारतीय टीम के तेज गेंदबाजों ने भी अपनी धार-धार गेंदबाजी के बदौलत विरोधी टीम के बल्लेबाजों के परखच्चे उड़ाए। फाइनल मुकाबले में सब की नजर टीम इंडिया के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी पर रहेगी। ऐसा इसलिए कि शमी को टीम इंडिया की रीढ़ माना जाता है। बात करें उनके परफॉर्मेंस की तो इस टूर्नामेंट में शमी कुल 4 मैच खेल चुके हैं। इन चार मैचों में उन्होंने कुछ 8 विकेट झटके हैं। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं कि न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल मुकाबले में  गेंदबाजी का दारोमदार शमी के कंधों पर ही रहने वाला है।   वनडे में न्यूजीलैंड के (India vs New Zealand match) खिलाफ मोहम्मद शमी के रिकॉर्ड काफी बेहतरीन है गौरतलब हो कि लंबे अरसे बाद मोहम्मद शमी ने मैदान पर वापसी की थी। ऐसे में उनकी फिटनेस को लेकर सभी के मन में शंका जरूर थी कि क्या शमी अपना हंड्रेड परसेंट दे पाएंगे? लेकिन शमी ने पहले इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज और उसके फिर चैंपियंस ट्रॉफी में न सिर्फ अपने प्रदर्शन से खुद की फिटनेस को भी साबित किया बल्कि अपनी गेंदबाजी का लोहा भी मनवाया। तो वहीं बात करें वनडे में न्यूजीलैंड के (India vs New Zealand match) खिलाफ मोहम्मद शमी के रिकॉर्ड की तो न्यूजीलैंड के खिलाफ उनका रिकॉर्ड काफी बेहतरीन है। वनडे में उनका गेंदबाजी औसत 23.80 का है तो वहीं न्यूजीलैंड के खिलाफ उनका औसत 19.72 का रहा है।  इसे भी पढ़ें:-भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर फाइनल में बनाई जगह शमी ने न्यूजीलैंड के खिलाफ (India vs New Zealand match) वनडे फॉर्मेट में कुल खेले हैं 15 मुकाबले अब तक शमी ने न्यूजीलैंड के खिलाफ (India vs New Zealand match) वनडे फॉर्मेट में कुल 15 मुकाबले खेले हैं, जिसमें उन्होंने 19.72 के औसत से कुल 37 विकेट हासिल किए हैं। बड़ी बात यह कि इस दौरान शमी ने 2 बार जहां मैच में पांच विकेट हॉल लेने में कामयाब रहे, तो वहीं एक बार वो चार विकेट भी ले चुके हैं। बात करें न्यूजीलैंड के खिलाफ उनके सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन की तो न्यूजीलैंड के खिलाफ उनका सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन 57 रन देकर 7 विकेट रहा है। यह कारनामा उन्होंने वर्ल्ड कप 2023 के सेमीफाइनल मुकाबले किया था। रोहित शर्मा की कप्तानी में खेले गए वनडे में मोहम्मद शमी ने अब तक कुल 26 मैचेस खेले हैं। जिसमें उन्होंने 20.32 के औसत से कुल 50 विकेट झटके हैं। 5.32 का उनका इकॉनमी रेट रहा है। वनडे फॉर्मेट में अब तक वो कुल 107 मैच खेल चुके हैं। जिसमें उसमें उन्होंने 23.80 के औसत से कुल 205 विकेट टीम इंडिया के लिए झटके हैं। वनडे में कुल 6 बार वो पांच विकेट लेने में कामयाब रहे हैं, तो वहीं 10 बार 4 विकेट भी मैच में हासिल किए हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news India and New Zealand #MohammedShami #INDvsNZ #ShamiBowling #CricketStats #ODIRecords #TeamIndia #ShamiVsNZ #CricketNews #INDNZMatch #ShamiPerformance

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Aurangzeb tomb

औरंगजेब की कब्र खोद अवशेषों को अरब सागर में विसर्जित करने की मांग, हिन्दू सेना अध्यक्ष ने गृह मंत्रालय को लिखा पत्र

महाराष्ट्र में औरंगजेब (Aurangzeb) को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी अब राजस्‍थान तक पहुंच गई है। हिन्दू सेना के अध्यक्ष विष्‍णु गुप्ता (Vishnu Gupta) अब इस विवाद में कूदते हुए गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से विष्णु गुप्ता ने गृह मंत्रलाय से मांग की है कि औरंगजेब को बर्बर शासक घोषित किया जाए, उसके नाम वाली सभी सड़कों का नाम बदला जाए और उसकी कब्र खोदकर उसके अवशेषों को जलाकर अरब सागर में विसर्जित किया जाए। विष्‍णु गुप्ता (Vishnu Gupta) ने तीन मांगों वाले अपने इस पत्र को गृह मंत्रालय को भेजा है। इस पत्र में उन्होंने आगे लिखा, हिन्दुओं पर अत्याचार करने वाले औरंगजेब (Aurangzeb) का कुछ लोग प्रशंसा कर रहे हैं। जबकि इसके बारे में देश को पता होना चाहिए कि यह बर्बर शासक था। हमने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इसके अवशेषों को अरब सागर में बहाने की मांग की है। विष्‍णु गुप्ता ने कहा कि, जिस तरह से अमेरिका की सरकार ने आतंकवादी ओसामा बिन लादेन के साथ किया, उसी तरह महाराष्ट्र के संभाजीनगर में मौजूद औरंगजेब के कब्र को खोदकर अवशेषों को निकाला जाना चाहिए और उसे जला कर अरब सागर में विसर्जित कर देना चाहिए।  विष्‍णु गुप्ता ने अपने पत्र में और क्या लिखा? हिन्दू सेना अध्यक्ष विष्णु गुप्ता (Vishnu Gupta) ने पत्र में लिखा है कि “अनेक ऐतिहासिक अभिलेखों में औरंगजेब (Aurangzeb) की बर्बर कृत्य के बारे में बताया गया है। साथ ही उसने अपने इतिहास “मासिर-ए-आलमगीरी” में भी अपने हिन्दू विरोधी कृत्य को अच्छी तरह से प्रलेखित कराया है। उसके शासन में उसके लिए सैकड़ों हिंदू काम करते थे। फिर भी उसने हिंदू मंदिरों और मठों को नष्ट कराया। उन पर अत्याचार किया। उसने अपनी प्रजा के साथ दूसरे शासकों की बर्बर हत्या कराई। उसने गुरु तेग बहादुर सिंह, गोकुला जाट और छत्रपति संभाजी महाराज की भी बर्बर हत्या कराई।” विष्‍णु गुप्ता ने लिखा है “औरंगजेब ही वह शासक है जिसने अपनी गैर-मुस्लिम प्रजा से “जज़िया कर” वसूला। औरंगजेब कट्टरपंथी था और इसकी कट्टरता ने लाखों लोगों की जान ली। ऐसे अत्याचारी व्यक्ति को आदर्श नहीं बनाया जाना चाहिए।  इसे भी पढ़ें:- औरंगजेब ने भारत को ‘सोने की चिड़िया’ बनाया था, अबू आजमी के बयान पर बवाल; ठाणे में केस दर्ज अबू आजमी ने औरंगजेब पर दिया था विवादित बयान  बता दें कि, सपा विधायक अबू आजमी (Abu Azmi) ने बीते दिनों मुगल बादशाह औरंगजेब की जमकर तारीफ की थी। अबू आजमी ने कहा था “औरंगजेब के बारे में हमें गलत बताया जा रहा है। औरंगजेब ने अपने शासनकाल में कई मंदिर बनवाए थे और उसके समय में भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। वह हिन्दुओं के खिलाफ नहीं था” सपा विधायक के इस बयान पर महाराष्ट्र की सियासत अभी तक उबल रही है। महाराष्ट्र में अबू आजमी (Abu Azmi) पर अब तक जहां दो एफआईआर दर्ज हो चुके हैं, वहीं विधानसभा से भी बजट सत्र तक के लिए सस्पेंड कर दिया है। अबू आजमी को जल्द ही गिरफ्तार भी किया जा सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Aurangzeb #AurangzebTomb #HinduSeva #ArabianSea #MughalHistory #AurangzebDebate #IndiaPolitics #HinduSentiments #HistoryMatters #HomeMinistry #ReligiousDebate

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Women money saving tips

Women money saving tips: इस कारण पैसों की बचत करने में पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं अधिक होती हैं माहिर

पैसे बचाने के मामले में महिलाओं का कोई सानी (Women money saving tips) नहीं है। विशेषकर भारतीय महिलाओं के मामले में। उनके पास एमरजेंसी फंड होता ही है। किसी भी तरह की एमेर्जेंसी क्यों न हो। उनके पास मिल ही जाएंगे। पुरुषों के मामले में मामला उल्टा है। उनकी तनख्वाह महीने की पहली तारिख को होती है और 10 तारीख आते-आते उनका हाथ खाली हो जाता है। कहने का अर्थ यह कि सैलेरी मिलने के 15 दिन बाद उनका हाथ तंग हो जाता है। यह सच भी है। ऐसा नहीं है कि यह कोई हवा-हवाई बात है। कई रिसर्च और सर्वे में इस बात की पुष्टि भी की गई है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में बचत करने में ज्यादा आगे रहती हैं। खैर, हर घर और हर इंसान की यही शिकायत है कि कुछ दिन बात पैसे नहीं बचते। ऐसे में इस समस्या का एक ही समाधान है। और वह समाधान आपके अपने घर में ही है। विशेषकर विवाहित पुरुषों के मामले में। और वो समाधान है आपकी अपनी पत्नी। आपको करना कुछ नहीं है। बस आपको अपनी तनख्वाह अपनी पत्नी के हाथ में लेकर सौंपना है बस। एक बार अपनी सैलरी अपनी पत्नी को देकर देखिये, फिर कभी आपको पैसों की तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा। दरअसल, ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पैसों की बचत के मामले में महिलाएं, पुरुषों से हमेशा से ही आगे रहती हैं। कई रिसर्च और सर्वे में इस बात की पुष्टि भी की जा चुकी है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में बचत करने में सदैव आगे रहती हैं। यहां हम आपको उन कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी वजह से महिलाओं को पुरुषों की तुलना में पैसे बचाने में आगे रहती हैं।  दूर की सोचती हैं महिलाएं (Women money saving tips) महिलाएं एक कदम आगे बढ़कर दूर का सोचती हैं। इसके अलावा वो फाइनेंशियल प्लानिंग और बजट (Women money saving tips) बनाना पसंद करती हैं। एक बड़ी वजह यह भी जिस कारण उनमें बचत करने की आदत विकसित होती है। इसलिए जब वे कुछ दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करती हैं, तो पैसों की बचत करना आसान हो जाता है। एक रिसर्च के अनुसार, महिलाएं आर्थिक मामलों में मदद लेने से भी नहीं कतराती। इस कारण उन्हें बचत और निवेश के बारे में जानकारी मिलती रहती है।  पुरुषों की तुलना में अधिक अनुशासित होती हैं महिलाएँ  कहने की जरूरत नहीं कि पैसों की बचत (Women money saving tips) के लिए नियम और लिमिट तय करनी होती हैं। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि महिलाएँ पुरुषों की तुलना में अधिक अनुशासित होती हैं। इसलिए नियमों का पालन करना और ज़्यादा पैसे बचाना उनके लिए बड़ा आसान होता है। महलाओं का आर्थिक अनुशासन ही उन्हें पैसों की बचत करने में निपुण बनाता है।   इसे भी पढ़ें:- International Women’s Day :इतिहास, महत्व और 2025 की थीम अधिक जोखिम लेना नहीं करतीं पसंद  पुरुषों की तुलना में महिलाएं आमतौर पर आर्थिक बचत (Women money saving tips) से जुड़े मामलों में अधिक जोखिम लेना नहीं पसंद करतीं। कारण यही जो अकारण वे शेयर मार्केट, लॉटरी या अन्य जोखिम भरी स्कीमों के बजाय बचत खाता जैसे सुरक्षित निवेश के विकल्पों को चुनती हैं। जाहिर सी बात है जोखिम कम होने से नुकसान की गुंजाईश भी कम होती है।  पैसों का सदुपयोग करने में होती हैं निपुण  समय के साथ महिलाएं घर में हर किसी और हर चीज का बेहतर ख्याल रखकर बड़ी ज़िम्मेदार बन जाती हैं। जिस वजह से उनमें बचत करने की आदत पड़ जाती है। कारण यही जो हर घर में महिलाएं अपने परिवार के पैसों को मैनेज करने की जिम्मेदारी को बखूबी उठाती हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi Women money saving tips #moneytips #womensavings #financialfreedom #smartwomen #moneymatters #savemoney #financialindependence #wealthymindset #budgetingtips #moneygoals #financialwisdom #womenempowerment #investmenttips #financialgrowth #staytuned

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Trump limits Musk’s authority: एलन मस्क पर सख़्त हुए ट्रंप, कहा- आपको सरकारी कर्मचारियों को निकालने का कोई हक नहीं

जब से डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ ली है तब से ट्रंप और एलन मस्क दोनों ताबड़तोड़ एक के बाद एक चौंकाने वाले निर्णय ले रहे हैं। चाहे वो कनाडा और मैक्सिको समेत अन्य देशों पर टैरिफ लगाना हो या फिर अपने ही देश के सरकारी कर्मचारियों की छटनी करनी हो। बेख़ौफ़ होकर निर्णय ले रहे थे। लेकिन इस बीच स्थिति बदलते देर नहीं लगी। इस दरम्यान अनावश्यक हुई सरकारी कर्मचारियों की छंटनी के बाद बगावती सुर बुलंद होने लगे और असंतोष की भावना पनपने लगी। बगावती सुर बुलंद होता देख ट्रंप ने कहा कि “टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क केवल विभागों को सलाह देने तक (Trump limits Musk’s authority) सीमित हैं। और वे कर्मियों या नीतियों पर स्वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले सकते।” बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी कैबिनेट को स्पष्ट किया कि “बिलियनेयर सलाहकार एलन मस्क को संघीय विभागों के अध्यक्ष की तरह अधिकार नहीं दिए गए हैं। और न ही उन्हें सरकारी कर्मचारियों को निकालने का कोई अधिकार है। एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क केवल विभागों को सलाह देने तक सीमित हैं।”   इबोला रोकथाम के लिए फंडिंग को गलती से रद्द करना एक बड़ी चूक (Trump limits Musk’s authority) थी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एलन मस्क ने स्वीकार किया कि “पिछले सप्ताह ट्रंप की पहली कैबिनेट बैठक में इबोला रोकथाम के लिए फंडिंग को गलती से रद्द करना एक बड़ी चूक (Trump limits Musk’s authority) थी।” दरअसल, एलन मस्क और उनकी डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशियेंसी (डीओजेई) फेडरल कर्मचारियों की छंटनी सहित खर्चों में कटौती के उपायों पर काम कर रही है। गौर करने वाली बात यह कि मस्क के पास स्वयं सरकारी कर्मचारियों को निकालने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशियेंसी की पहल के चलते भारी संख्या में छंटनी और इस्तीफे हुए हैं। इस बीच जानकारी के लिए बता दें कि 20,000 से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। और तकरीबन 75,000 कर्मचारियों ने स्वेच्छा से इस्तीफा देने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इन छंटनियों का सबसे अधिक असर उन कर्मचारियों पर पड़ा है, जो प्रोबेशन की अवधि में थे। इसके पीछे की बड़ी वजह यह कि उनके पास नागरिक सेवा से जुड़े संरक्षण के अधिकार सीमित होते हैं। इस कारण उन्हें हटाना बेहद आसान होता है। इसे भी पढ़ें:-  नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप, 45 दिन बाद मैक्सिको-कनाडा को दी राहत एलन मस्क के अधिकारों को सीमित (Trump limits Musk’s authority) करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि इन नौकरियों में कटौती का प्रभाव कई एजेंसियों पर पड़ा है। जिनमें आंतरिक राजस्व सेवा (आईआरएस), ऊर्जा विभाग, दिग्गज मामलों का विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ़ वेटरन्स अफेयर्स) और अन्य शामिल हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति के नए निर्देश एलन मस्क के अधिकारों को सीमित (Trump limits Musk’s authority) करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। ट्रंप के आदेश के अनुसार डीओजेई और उसकी टीम सलाहकार की भूमिका में रहेंगे। लेकिन अंतिम फैसले लेने का अधिकार कैबिनेट सचिवों के पास ही होगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Trump limits Musk’s authority #TrumpVsMusk #ElonMusk #DonaldTrump #SpaceX #USPolitics #TechRegulation #MuskVsGovernment #TrumpNews #Tesla #XCorp

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Trump softens stance

Trump softens stance: नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप, 45 दिन बाद मैक्सिको-कनाडा को दी राहत

इस साल 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति पद का पदभार संभालने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप बड़े एक्शन में दिख रहे थे। बता दें कि बीते 45 दिनों में ऐसा कोई दिन नहीं रहा, जब ट्रंप और उनके प्रशासन के लोगों ने टैरिफ शब्द का नाम न लिया हो। इसके चलते उन्होंने टैरिफ वार की धमकी अपने पड़ोसी मुल्कों कनाडा और मैक्सिको भी दी। लेकिन अब धीरे-धीरे उनके तेवर नरम (Trump softens stance) पड़ते जा रहे हैं। गुरुवार को उन्होंने पहले मैक्सिको और फिर कनाडा को टैरिफ से छूट देने की घोषणा कर दी। दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे टैरिफ वार के दौरान, कनाडा ने अमेरिका द्वारा दी गई छूट के बावजूद अपने जवाबी टैरिफ को हटाने से इंकार कर दिया है। गुरुवार को कनाडा के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयातित वस्तुओं पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को एक महीने के लिए टाल दिया है, लेकिन इसके बावजूद कनाडा द्वारा अमेरिका पर लगाए गए जवाबी टैरिफ अभी भी प्रभावी रहेंगे। इस दौरान कनाडा ने आरोप लगाया कि “राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ पहले लागू करके और फिर उन्हें हटाकर सोची समझी रणनीति के तहत अनिश्चितता और अव्यवस्था पैदा की। उनकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। कनाडा और मैक्सिको से आयातित उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ को महीने भर के लिए टाल (Trump softens stance) दिया था।  दरअसल, ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको से आयातित अधिकांश उत्पादों पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को एक महीने के लिए टाल (Trump softens stance) दिया था। हालांकि, कनाडा के एक अधिकारी ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका के खिलाफ लगाए गए उनके जवाबी टैरिफ अब भी लागू रहेंगे। ये टैरिफ लगभग $30 बिलियन (यूएस$21 बिलियन) मूल्य के हैं और इनमें अमेरिकी संतरे का रस, मूंगफली का मक्खन, कॉफी, जूते, सौंदर्य प्रसाधन, मोटरसाइकिल और कुछ प्रकार के कागज उत्पाद शामिल हैं। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आदेशों पर हस्ताक्षर करने से पहले घोषणा की कि “अधिकांश टैरिफ 2 अप्रैल से प्रभावी होंगे। फिलहाल कुछ अस्थायी और छोटे टैरिफ लागू हैं।” हालांकि इस बीच ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि “वह ऑटोमोबाइल पर 25 प्रतिशत टैरिफ में छूट को एक और महीने तक बढ़ाने पर विचार नहीं कर रहे हैं।” ट्रंप के आदेशों के अनुसार, 2020 में हुए (यूएसएमसीए) व्यापार समझौते के तहत मेक्सिको से होने वाले आयात को एक महीने के लिए 25 प्रतिशत टैरिफ से मुक्त रखा जाएगा। जानकारी के मुताबिक कनाडा से ऑटो से संबंधित आयात, जो व्यापार समझौते के नियमों का पालन करते हैं। उन्हें एक महीने के लिए 25 प्रतिशत टैरिफ से छूट मिलेगी। तो वहीं कनाडा से अमेरिकी किसानों द्वारा आयात किए जाने वाले पोटाश पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। बता दें कि यह वही दर है जिस पर ट्रंप कनाडाई ऊर्जा उत्पादों पर शुल्क लगाना चाहते हैं। इसे भी पढ़ें:-भारत समेत इन देशों के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप का सख्ती की घोषणा,  2 अप्रैल से होगा एक्शन कनाडा से लगभग 62 प्रतिशत आयातों पर अब भी नए टैरिफ (Trump softens stance) लागू हो सकते हैं व्हाइट हाउस के अधिकारी के मुताबिक, कनाडा से लगभग 62 प्रतिशत आयातों पर अब भी नए टैरिफ (Trump softens stance) लागू हो सकते हैं। इसके पीछे की वजह यह कि  वे यूएसएमसीए समझौते के मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इसी तरह, मेक्सिको से आयात होने वाले ऐसे उत्पादों पर भी कर लगाया जाएगा जो यूएसएमसीए के अनुरूप नहीं हैं, जैसा कि ट्रंप के आदेशों में कहा गया है। बता दें कि मंगलवार को ट्रंप ने अमेरिका के तीन प्रमुख व्यापारिक साझेदारों, क्रमश: कनाडा, मेक्सिको और चीन पर टैरिफ लगाकर एक नया व्यापारिक संघर्ष शुरू किया, जिसके जवाब में इन देशों ने भी प्रतिक्रिया दी। फिर क्या था इसके बाद इससे वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मच गई। खैर, इस बीच कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने गुरुवार को कहा कि “राष्ट्रपति द्वारा टैरिफ लागू करने और फिर उन्हें हटाने से हमारी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे अनिश्चितता और अराजकता बढ़ रही है।” इस दौरान उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “कनाडा इस स्थिति से नाखुश है और यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिकी जनता को इसका एहसास हो।” हालाँकि इस बीच ट्रूडो ने यह भी उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध जारी रहेगा।” खैर, इसका असर यह कि गुरुवार को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में बाजार गिरावट के साथ खुले। अमेरिकी निवेशक ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी से घबराए हुए हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump softens stance #DonaldTrump #TrumpNews #USPolitics #MexicoCanada #TradeRelations #TrumpUpdates #GlobalTrade #USA #PolicyChange #BreakingNews

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Nalanda woman murder

Nalanda woman murder: बिहार के नालंदा में महिला के साथ हैवानियत, पैरों में 10 कीलें ठोक सड़क किनारे फेका शव

बिहार के नालंदा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। जानकारी के मुताबिक हरनौत प्रखंड के सरथा पंचायत के बहादुरपुर गांव के पास नेशनल हाईवे 30A के किनारे बुधवार सुबह एक अज्ञात महिला का शव (Nalanda woman murder) मिलने से लोग दहशत में हैं। शव की हालत देख हर कोई हैरान है। महिला के बाएं हाथ पर पट्टी बंधी थी, और उसके पैर में तकरीबन 10 कीलें ठोकी हुई थी। कहने की जरूरत नहीं, इस क्रूरता ने लोगों को झकझोर दिया है। बता दें कि सुबह-सुबह सड़क किनारे गड्ढे में पड़े शव पर स्थानीय लोगों की नजर पड़ी। देखते ही देखते सैकड़ों की भीड़ घटनास्थल पर जमा हो गई। इस बीच ग्रामीणों ने तुरंत चंडी थाना पुलिस को सूचना दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लिया और जांच शुरू कर दी। थाना अध्यक्ष ने बताया कि “महिला की उम्र करीब 30-35 साल प्रतीत होती है, लेकिन उसकी पहचान अब तक नहीं हो सकी है। शव के पास कोई ऐसा सुराग भी नहीं मिला, जो उसकी शिनाख्त की जा सके।” महिला की हत्या (Nalanda woman murder) कहीं और हुई और शव कहीं और फेका गया  हालांकि पुलिस ने प्राथमिकी कर ली है। पुलिस को शक है कि महिला की हत्या (Nalanda woman murder) कहीं और हुई होगी और हत्यारे ने शव को यहां गड्ढे में फेंक दिया। पैर में कील और हाथ पर पट्टी ने इस मामले को और उलझा दिया है। बहरहाल, पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। इस बीच पुलिस इसे अंधविश्वास का मामला मानकर भी जाँच कर रही है। बता दें कि महिला नाइटी में थी। नाक में नथुनी, हाथों में चूड़ियां और पैरों में पायल एवं बिछिया थी। उसके हाथ में इंट्राकेट और बांह में पट्टी बंधी थी। संदेह यह भी जताया जा रहा है कि उसे मारने से पहले उसकी कहीं इलाज भी हुआ होगा। खैर, इस पूरे मामले पर चंडी थानाध्यक्ष सुमन कुमार ने बताया कि “प्रारंभिक जांच में लग रहा है कि महिला की पिटाई के बाद इलाज कराया गया था। लेकिन उसकी मौत हो गई। फिर इसके बाद शव को खेत में फेंक दिया गया। अभी तक शव की पहचान नहीं हुई है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ पता चल सकेगा।”  इसे भी पढ़ें:- धर्म विशेष के चार युवकों ने 14 साल की लड़की से 2 महीने तक की हैवानियत, जबरन खिलाया बीफ, डाला तेजाब महिला के दोनों पैर के तलवों में कुछ कील गड़े हुए थे (Nalanda woman murder)  हैरत की बात यह कि इस पूरे मामले में 24 घंटे बीत जाने के बाद भी शव की पहचान नहीं हो सकी है। गुरुवार को हिलसा डीएसपी सुमित कुमार ने बताया कि “बुधवार को चंडी थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि सड़क किनारे एक महिला का शव (Nalanda woman murder) पड़ा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। उसके बाद जांच की गई। महिला के दोनों पैर के तलवों में कुछ कील गड़े हुए थे। गर्दन पर राख का निशान था। सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है।” तो वहीं आरजेडी की प्रवक्ता एज्या यादव ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि “महिला अत्याचार और उत्पीड़न में बिहार शीर्ष राज्यों में है। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को शर्म है कि आती ही नहीं! उनके गृह जिला में घटित इस रूह कंपकंपाने वाले वीभत्स कांड और दरिंदगी से भी अगर किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता तो वह इंसान है नहीं! वैसे इस घटना को भी बेशर्म भाजपाई औरएनडीए के सत्तालोलुप लोग राम राज्य की मंगलकारी घटना ही बताएंगे और कहेंगे कि 15वीं शताब्दी में क्या होता था जी?”  Latest News in Hindi Today Hindi News Nalanda woman murder #NalandaMurder #JusticeForVictim #BiharCrime #WomenSafety #CrimeNews #NalandaHorror #BrutalMurder #BiharNews #StopViolence #IndianLaw

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14-Year-Old Girl Attacked with Acid

Girl attacked with acid: धर्म विशेष के चार युवकों ने 14 साल की लड़की से 2 महीने तक की हैवानियत, जबरन खिलाया बीफ, डाला तेजाब

बीतते समय के साथ-साथ लोगों की इंसानियत भी दम तोड़ती नजर आने लगी है। लोगों में दया नाम की चीज रह ही नहीं गई है। इसका ताजा उदाहरण देखने मिला है उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में, जहाँ एक दलित नाबालिग के साथ विशेष धर्म के चार लोगों ऐसी दरिंदगी की है कि सुनकर ही रौंगटे खड़े हो जाएँ। जानकारी के मुताबिक चार युवकों ने 14 साल की लड़की को जबरन अगवा कर दो महीने तक उसके साथ पहले तो सामूहिक दुष्कर्म किया। और फिर उसे तरह-तरह की यातनाएं दी। यही नहीं, उसके हाथ पर बने ॐ के टैटू को मिटाने के लिए उसपर तेज़ाब (Girl attacked with acid) उड़ेल दिया। अचरज की बात यह कि हैवानियत का यह नंगा नाच योगी की उस सरकार में घटित हुआ है जो महिला सुरक्षा को सर्वोपरि रखने का दंभ भर्ती है। हैवानियत का आलम यह था कि जब उस लड़की ने दरिंदों से कुछ खाने को माँगा तो दरिंदों ने उसे जबरन बीफ खिला दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार नाबालिग दलित लड़की के साथ यह दरिंदगी करीब 2 महीने तक चलती रही। इस बीच पीड़िता की मौसी ने इस मामले की शिकायत भगतपुर थाने में की। शिकायत के बाद पुलिस महकमें में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड सहिंता की धारा 137(2), 70(1), 123, 127(4), 299, 351(3), 124(1) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5 और 6 और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। यही नहीं, पुलिस ने इस घिनौने अपराध में शामिल मुख्य आरोपी सलमान को भी गिरफ्तार कर लिया है। जबकि अन्य की तलाश जारी है।  दो महीने तक बारी-बारी से उसके साथ सामूहिक (Girl attacked with acid) किया दुष्कर्म   पुलिस की माने तो पीड़िता की मौसी ने शिकायत में बताया कि 2 जनवरी 2025 को उसकी भाभी की 14 वर्षीय बेटी दर्जी से कपड़े सिलवाने के लिए बाजार जा रही थी। रास्ते में उसी गांव के रहने वाले राशिद, सलमान, जुबैर और आरिफ नामक युवकों ने उसे जबरदस्ती कार में खींच लिया। इसके बाद उसे नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश कर दिया। इसके बाद जब लड़की को होश आया तो वह एक कमरे में थी और उसके शरीर पर कोई कपड़े नहीं थे यानी वो पूरी तरह निर्वस्त्र थी। कमरे में अकेला पाकर आरोपियों ने दो महीने तक बारी-बारी से उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म  (Girl attacked with acid) किया। इस बीच दो महीने बाद पीड़िता जब बदतर हालत में घर लौटी, तो पीड़िता की मौसी ने बताया कि “लड़की के लापता होने के बाद उसकी काफी तलाश की गई लेकिन वह नहीं मिली। हमने 3 जनवरी को पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई लेकिन उसकी कोई खबर नहीं मिली।” इसके बाद लड़की किसी तरह 2 मार्च को घर पहुंची। उसकी हालत काफी खराब थी। जब भी उसे होश आता तो उसके साथ दुष्कर्म होता और जब भी वह खाना मांगती तो उसे गोमांस दिया जाता। उन्होंने आगे बताया कि “घर पहुंचने पर बेटी ने बताया कि आरोपियों ने उसके साथ दो महीने तक दरिंदगी की। जब भी वह होश में आती और खाना मांगती तो आरोपी उसे गोमांस खिला देते। जब भी नाबालिग पीड़िता मना करती तो उसे जबरदस्ती गोमांस खिला दिया जाता।” इसे भी पढ़ें:- इस वजह से हुई कांग्रेस कार्यकर्ता हिमानी नरवाल की हत्या, आरोपी ने खोले कई राज़ ओम का टैटू मिटाने के लिए आरोपियों ने डाला तेजाब (Girl attacked with acid)  बता दें कि शिकायत में कहा गया है कि “पीड़िता के हाथ पर ओम का टैटू बना हुआ था, जिसे आरोपियों ने तेजाब  (Girl attacked with acid) डालकर मिटा दिया। उसने उसके चेहरे पर तेजाब फेंकने की भी धमकी दी।” खैर, पिछले दो महीने से पीड़िता को प्रताड़ित करने के बाद आरोपियों ने उसे भोजपुर में छोड़ दिया और धमकी दी कि अगर उसने घर पर किसी को बताया तो उसे और उसकी चाची का अपहरण कर लिया जाएगा। इस पूरे मामले में एसपी (ग्रामीण) कुंवर आकाश सिंह ने कहा कि “3 मार्च को एक शिकायत मिली थी, जिसमें कहा गया था कि एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। जब वह बाजार गई थी, तो चार लोग उसे जबरन उठाकर ले गए। उसके साथ दो महीने तक दुष्कर्म किया गया। इस मामले में भगतपुर थाने में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।” यह तो ठीक लेकिन इन सब के बीच अहम बात यह कि जब दो महीने पहले ही पीड़िता की मौसी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी तो दो महीने तक योगी की पुलिस क्या कर रही थी? पुलिस ने आखिर क्यों दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई नहीं की? इन सब के बीच बड़ा सवाल यह कि एक दलित समाज की लड़की 2 महीने तक गायब रहती है और इस बीच न कोई दलितों का रहनुमा उसके सपोर्ट में दिखाई दिया और न ही जय भीम-जय मीम का भोंपू बजाने वाले नेताओं की भांड टोली ही दिखाई दी। मुख्य बात यह कि आखिर शासन और प्रशासन ऐसा क्या करे जिससे कि अपराधियों के मन में कानून का भय हो? क्या वजह है जो लोग बेख़ौफ़ होकर इस तरह के खौफनाक वारदात को अंजाम दे देते हैं? Latest News in Hindi Today Hindi News Girl attacked with acid #AcidAttack #JusticeForVictim #CrimeAgainstWomen #StopViolence #ForcedConversion #BeefControversy #ReligiousCrime #ProtectGirls #HumanRights #PunishTheGuilty

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PM Modi’s Spiritual Connect with Maa Ganga

मुझे मां गंगा ने गोद ले लिया है…मुखबा में पूजा-अर्जना के बाद बोले पीएम मोदी, बना दिया अनोखा रिकॉर्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) चारधाम शीतकालीन यात्रा का संदेश लेकर आज उत्तराखंड के सीमांत गांव उत्तरकाशी (Uttarkashi) पहुंचे हैं। यहां पर वो मां गंगा (Ganges) के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा पहुंच पूजा अर्चना की और करीब बीस मिनट तक गर्भगृह में बिताया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने अपने नाम एक रिकॉर्ड भी दर्ज करा लिया। वो पहले ऐसे प्रधानमंत्री बन गए हैं, जो मां गंगा के शीतकालीन पूजा स्थल पर पहुंचे।   प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) का उत्तराखंड से गहरा लगाव है। उनका यह लगाव उनके कार्यशैली में भी झलकता है। उनके नाम पर उत्तराखंड से ही जुड़ी एक और उपलब्धि है। वह देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जो भारत-तिब्बत(चीन) सीमा के पास चमोली जनपद के पहले गांव माणा और पिथौरागढ़ जिले के सीमावर्ती गांव गुंजी गये थे।   मां गंगा के आशीर्वाद से काशी तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हुआ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) अपने एक दिवसीय दौरे पर उत्तरकाशी (Uttarkashi) आए हैं। यहां पर वो सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए कई योजनाएं भी लेकर आए हैं। पीएम मोदी मुखबा मंदिर में दर्शन के बाद हर्षिल में ट्रैकिंग व बाइक रैली को फ्लैग ऑफ भी किया। हर्षिल में लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि, मुझे मां गंगा ने गोद ले लिया है। मां गंगा (Ganges) के आशीर्वाद से ही मुझे उत्तराखंड की सेवा का मौका मिला और काशी तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हुआ। पीएम ने इस दौरान बाबा केदारनाथ का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी कृपा और शक्ति से ही मैं यह घोषणा कर सका कि यह दशक उत्तराखंड का होगा। मेरे शब्द अब सच्चाई में बदल रहे हैं।  इसे भी पढ़ें:- पीओके भारत को मिलते ही ‘ख़त्म हो जाएगा कश्मीर विवाद’, एस जयशंकर ने लंदन में बताया भारत का खास प्लान जादूंग गांव फिर से होगा आबाद, दुनिया के दूसरे सबसे ऊंचे ट्रेक का शिलान्यास  पीएम मोदी ने जादूंग घाटी में दुनिया के दूसरे सबसे ऊंचे ट्रेक जनकताल और नीलापानी घाटी के मुलिंगना पास का शिलान्यास भी किया। यह दोनों ट्रेक 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद से ही बंद हैं। इनके शुरू होने से घाटी में पर्यटन के नए आयाम खुलेंगे और सीमावर्ती क्षेत्र का विकास होगा। बता दें कि, सीमावर्ती गांव जादूंग सुरक्षा के लिहाज से काफी अहम है। राज्य की भाजपा सरकार ने केंद्र की मदद से अब इस गांव को फिर से आबाद करने की योजना बनाई है। यहां पर पुराने टूटे हुए घरों की मरम्मत कर होमस्टे बनाया जाएगा। साथ ही मूलभूत सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि इस खूबसूरत जगह पर पयर्टन को बढ़ावा देना है। पर्यटक यहां पर आएंगे तो रोजगार भी बढ़ेगा और गांव छोड़कर जा चुके लोग फिर वापस आएंगे। इस योजना की जिम्मेदारी गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) को सौंपी गई है। प्रधानमंत्री के आज के दौरे से वीरान पड़े जादूंग गांव को पर्यटन स्थल के रूप नई पहचान मिलने की उम्मीद है।  Latest News in Hindi Today Hindi news PM Modi #PMModi #MaaGanga #ModiInMukbha #GangaAarti #CharDhamYatra #Kedarnath #HinduSpirituality #Uttarakhand #GangaBlessings #IndiaNews

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Champions Trophy

Champions Trophy: डेविड मिलर के शतक के बावजूद साउथ अफ्रीका फाइनल से बाहर, क्या फाइनल में भारत के सामने टिक पाएगा न्यूजीलैंड?

लाहौर में खेले गए चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) के दूसरे सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड ने टूर्नामेंट के इतिहास में 362 रन का सबसे बड़ा स्कोर खड़ा किया था। साउथ अफ्रीकी टीम के सारे दिग्गज बल्लेबाज एक के बाद एक आउट होते चले गए। लेकिन बीच मिलर डटे रहे। इस दौरान चौके के साथ उन्होंने 46 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। 50वें ओवर में जैमीसन पर दो चौके और एक छक्के के बाद आखिरी गेंद पर दो रन के साथ 67 गेंद में शतक पूरा किया। इधर डेविड मिलर की सेंचुरी पूरी हुई तो उधर साउथ अफ्रीका चैंपियंस ट्रॉफी से बाहर हो गया। बेशक उन्होंने शतकीय पारी खेली लेकिन उनकी इस पारी का विशेष लाभ नहीं हुआ। क्योंकि उनकी टीम फाइनल से बाहर हो चुकी थी। इस तरह साउथ अफ्रीकी टीम का चैंपियंस ट्रॉफी जीतने का सपना चकनाचूर हो गया। 67 गेंद में 10 चौके और चार छक्के की मदद से 100 रन की नाबाद पारी खेलने वाले डेविड मिलर अपनी टीम को बुधवार रात न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में जीत नहीं दिला पाए। गौर करने वाली बात यह कि जब मिलर ने हेलमेट उतारा तो उनकी आंखों में आंसू थे। चेहरे पर निराशा साफ़ झलक रही थी। इस हार का गम डेविड मिलर के चेहरे पर साफ देखा जा सकता था। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब साउथ अफ्रीका आईसीसी के टूर्नामेंट से बाहर हुआ है। साल 2024 के टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में सूर्यकुमार यादव के कैच ने साउथ अफ्रीका को अपना पहला आईसीसी खिताब जीतने नहीं दिया था।  चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) टूर्नामेंट के इतिहास का है सर्वोच्च स्कोर  बता दें कि पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की टीम ने साउथ अफ्रीका को 362 रन का पहाड़ सा लक्ष्य दिया था। न्यूजीलैंड की टीम की तरफ से रविंद्र ने  101 गेंदों में 13 चौके और एक छक्के की मदद से 108 रन तो विलियमसन ने 94 गेंदों में 10 चौके और दो छक्के की मदद से 102 रन बनाए। दूसरे विकेट के लिए दोनों के बीच हुई 164 रन की साझेदारी की। इसके अलावा ग्लेन फिलिप्स ने नाबाद 49 रन बनाए। इस तरह न्यूजीलैंड ने छह विकेट पर 362 रन बनाए। गौर करने वाली बात यह कि यह चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) टूर्नामेंट के इतिहास का सर्वोच्च स्कोर है। खैर, 363 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए सेंटनर 43 रन पर तीन विकेट झटके तो ग्लेन फिलिप्स 27 रन पर दो विकेट चटकाए। इस तरह साउथ अफ्रीका की टीम न्यूजीलैंड की धार-धार गेंदबाजी के सामने नौ विकेट पर 312 रन ही बना सका। साऊथ अफ्रीका के बाहर जाने के बाद चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में भारत और न्यूजीलैंड की टीमें आमने-सामने होंगी।  भारतीय टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) के सेमीफाइनल के मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को दी थी पटखनी  बता दें कि भारतीय टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) के सेमीफाइनल के मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को हराया था। रविवार को भारत और न्यूजीलैंड की टीमें फाइनल में भिड़ेंगी। ऐसे में बड़ा सवाल क्या रोहित शर्मा की कप्तानी वाली भारतीय टीम चैंपियंस ट्रॉफी जीत पाएगी? महत्वपूर्ण सवाल यह कि इस खिताबी मुकाबले में किस टीम का पलड़ा भारी है? बात करें भारत और न्यूजीलैंड के बीच वनडे में हुए मुकाबलों की तो अब तक वनडे फॉर्मेट में दोनों के बीच 119 बार भिड़ंत हो चुकी है। जिसमें भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को 61 बार पटखनी दी है तो वहीं न्यूजीलैंड की ने टीम इंडिया को 50 बार हराया है। इसके अलावा दोनों टीमों के बीच 7 मैच बेनतीजा रहे हैं। गौरतलब हो कि पिछले दिनों चैंपियंस ट्रॉफी के ग्रुप स्टेज मैच में भारत और न्यूजीलैंड का आमना-सामना हुआ। इस मैच में भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को 44 रनों से मात दी थी। खैर, चैंपियंस ट्रॉफी में भारत और न्यूजीलैंड की 2 भिड़ंत हो चुकी है। गौर करने वाली बात यह कि चैंपियंस ट्रॉफी 2000 के फाइनल में न्यूजीलैंड ने भारत को हराया था। इस तरह चैंपियंस ट्रॉफी टूर्नामेंट में दोनों टीमों का पलड़ा बराबर रहा है।  इसे भी पढ़ें:-भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर फाइनल में बनाई जगह चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) में भारतीय टीम का प्रदर्शन लाजवाब रहा है रही बात चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) में भारतीय टीम के प्रदर्शन की तो चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद ही शानदार रहा है। रोहित शर्मा के नेतृत्व में टीम इंडिया ने  ग्रुप स्टेज मैच में बांग्लादेश, पाकिस्तान और न्यूजीलैंड को हराया तो वहीं सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को बाहर का रास्ता दिखाया है। इस तरह अब तक भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में अजेय रही है। बात करें न्यूजीलैंड की तो न्यूजीलैंड ने बांग्लादेश के अलावा पाकिस्तान को पटखनी दी है। इसके अलावा सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका को हराया। इस टूर्नामेंट में न्यूजीलैंड की टीम को सिर्फ भारत के खिलाफ ही हार का मुंह देखना पड़ा है। Latest News in Hindi Today Hindi news Champions Trophy #INDvsNZ #DavidMiller #SouthAfricaCricket #NZCricket #TeamIndia #CricketFinal #KohliVsWilliamson  #ChampionsTrophy  #ChampionsTrophy2025  #ChampionsTrophyFinal

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