Nidhi Sinha

Kanwar Yatra

कांवड़ क्यों रखा जाता है कंधे पर? जानिए रावण और शिवभक्ति से जुड़ी पौराणिक कथा

सावन माह में उत्तर भारत की सड़कें उस भक्ति और श्रद्धा की दौड़ से गूंजती हैं, जब लाखों शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। हाथ में नहीं, बल्कि कंधे पर कांवड़ उठाए हुए। इस यात्रा की धार्मिक परंपरा तो स्पष्ट है—गंगा जल लेकर शिवलिंग पर अर्पित करना—लेकिन कांवड़ कंधे पर क्यों रखी जाती है? क्या इसमें कोई खास रहस्य छिपा है? रोचक रूप से, इसका संबंध मिलता है महर्षि अगस्त्य और लंकापति रावण से जुड़ी एक पौराणिक कथा से। आइये जानते हैं इस रहस्य की गहराई। कांवड़ यात्रा क्या है? कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) एक ऐसी पवित्र परंपरा है, जो सीधे भगवान शिव (Lord Shiva) की भक्ति से जुड़ी हुई है। यह यात्रा उन्हें प्रसन्न करने के उद्देश्य से की जाती है। यह केवल श्रद्धा की नहीं, बल्कि संयम, सहनशीलता और सामूहिक एकता की भी यात्रा है। कांवड़ यात्रा के माध्यम से व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक और आत्मिक रूप से भी शुद्ध होता है। इस दौरान कांवड़िए मांस-मदिरा से पूरी तरह दूर रहते हैं और सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं। तामसिक भोजन का त्याग किया जाता है और हर गतिविधि में अनुशासन का पालन होता है। कांवड़ यात्रा के ये 10 दिन किसी तपस्या से कम नहीं होते, जो न केवल भक्ति का मार्ग दिखाते हैं, बल्कि जीवन में संयम और साधना का महत्व भी सिखाते हैं। कांवड़ कौन और क्यों कंधे पर रखी जाती है? कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। कांवड़ को कंधे पर उठाकर चलना भक्तों के लिए एक प्रकार की तपस्या और आत्मानुशासन का रूप है। इस दौरान वे तमाम शारीरिक कष्टों और थकावट को सहते हैं, लेकिन उनकी भक्ति में कोई कमी नहीं आती। यह प्रतीक है उस दृढ़ निष्ठा का, जो यह दर्शाता है कि शिवभक्त अपने ईष्टदेव के लिए हर प्रकार की चुनौती और कठिनाई का साहसपूर्वक सामना कर सकते हैं। पौराणिक रहस्य: रावण, अगस्त्य और कांवड़ कांवड़ यात्रा की उत्पत्ति से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं, जिनमें सबसे प्रसिद्ध कथा लंकाधिपति रावण की मानी जाती है। रावण को भगवान शिव का अत्यंत भक्त बताया गया है। एक बार उसने शिव को प्रभावित करने के लिए कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास किया, जिससे शिवजी कुपित हो गए। अपनी भूल का एहसास होने पर रावण ने उन्हें प्रसन्न करने के लिए गंगाजल से अभिषेक करने का संकल्प लिया। ऐसा कहा जाता है कि रावण ही वह पहला भक्त था, जिसने गंगाजल को एक विशेष विधि से कांवड़ में भरकर लाया था और उसे कंधे पर उठाकर शिवजी तक पहुंचाया था। उसी परंपरा को निभाते हुए आज भी लाखों श्रद्धालु सावन मास में कांवड़ अपने कंधे पर लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। धार्मिक महत्व: ऐसा विश्वास किया जाता है कि कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) से जीवन के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। जब भक्त पवित्र गंगाजल को कांवड़ में भरकर अपने कंधों पर उठाकर चलते हैं, इसलिए कांवड़ यात्रा को एक आध्यात्मिक तपस्या का रूप माना जाता है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने पापों का प्रायश्चित करता है। इस यात्रा से शिवभक्तों को भगवान शिव की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है। साथ ही उनके जीवन में सकारात्मकता, मानसिक शांति और आत्मिक विकास की अनुभूति होती है। यह पावन यात्रा मोक्ष की ओर अग्रसर होने का भी एक साधन मानी जाती है। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? संकल्प और सेवा — कांवड़ यात्रा का सार कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) सिर्फ धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि स्वेच्छा के अनुसार किए गए तप, संयमित जीवन और दया-भावयुक्त सेवा का प्रतीक है: नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #KanwarYatra2025 #Sawan2025 #BolBam #HarHarMahadev #LordShiva #ShivBhakti #GangaJal

आगे और पढ़ें
ULFA-1

भारतीय सेना का म्यांमार में मिलिटेंट ग्रुप ULFA-1 पर ड्रोन हमला? 3 टॉप लीडर समेत कई आतंकी ढेर

म्यांमार में रहकर भारत के खिलाफ आतंकी घटनाओं को अंजाम देने वाले मिलिटेंट ग्रुप उल्फा (।) (ULFA) पर भारत ने ड्रोन हमला किया है। इस घटना में इस मिलिटेंट संगठन के टॉप लीडर्स समेत कई आतंकियों की मौत हुई है। यह दावा खुद इस मिलिटेंट संगठन ने किया है। उल्फा (I) (ULFA)  ने एक बयान जारी कर बताया कि भारतीय सेना (Indian Army) ने उसके कैंप पर ड्रोन से हमला किया है, जिसमें उसके टॉप लीडर्स को मौत हुई है। हालांकि भारतीय सेना (Indian Army) ने इस तरह के किसी भी ऑपरेशन को करने से इंकार करते हुए बताया कि उनकी तरफ से न तो सीमा पार कोई ऑपरेशन चलाया गया और न ही इस तरह के किसी ऑपरेशन के बारे में कोई जानकारी है।  उल्फा (I) (ULFA)  की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि भारतीय सेना ने म्यामांर में मौजूद उनके कैंप्स पर ड्रोन के जरिए हमला किया है। इस आतंकी संगठन ने बताया कि, यह हमला देर रात 2 से 4 के बीच उस समय हुआ, जब उसके टॉप लीडर्स कैंप में आराम कर रहे थे। इस ड्रोन अटैक में उल्फा (।) का लेफ्टिनेंट जनरल नयान मेधी उर्फ नायन एसोम, ब्रिगेडियर गणेश एसोम और कर्नल प्रदीप एसोम समेत कई आतंकियों की मौत हो गई। इसके अलावा 20 से ज्यादा आतंकी घायल हो गए। इस आतंकी संगठन की तरफ से जारी एक दूसरे बयान में यह भी दावा किया गया है कि भारतीय सेना ने ड्रोन के बाद मिसाइल से भी हमला किया।  भारतीय सेना ने कहा- हमने नहीं किया कोई हमला  उल्फा (I) का प्रवक्ता ईशान एसोम ने यह बयान जारी करते हुए जवाबी कार्रवाई तक की धमकी दी है। उसने कहा कि भारतीय सेना फाइटर जेट की मदद से लगातार ऐसे हमले कर रही है। हमने असम के लोगों को यह बता दिया है कि इस कायरता पूर्ण हमले का बदला लेने का हमें भी हक है। हम जल्द ही भार को उनके इस हमले का ठोस जवाब देंगे। एक तरफ जहां उल्फा (I) भारत पर हमले का आरोप लगाते हुए जवाबी कार्रवाई की धमकी दे रहा है। वहीं भारतीय सेना (Indian Army) इस तरह के किसी भी हमले से इंकार किया है। भारतीय सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने इस संबंध में मीडिया द्वारा पूछ गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि उनके पास सीमा पार इस तरह के किसी भी ऑपरेशन की कोई जानकारी नहीं है। भारतीय सेना ने इस तरह का कोई ऑपरेशन नहीं चलाया है।  वहीं असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने भी म्यांमार में उल्फा (I) के कैंप पर इस तरह के  किसी ड्रोन हमले से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई भी ऑपरेशन न तो असम की धरती पर हुआ है और न ही असम पुलिस इसमें किसी भी तरह से शामिल है। भारतीय सेना अगर ऐसा कोई ऑपरेशन करती तो उसके बारे में बयान जारी करती, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। शायद कुछ दिनों के बाद इस कथित हमले को लेकर ज्यादा जानकारी सामने आएगी।  इसे भी पढ़ें:- 7 Demanding Courses: ये हैं 7 डिमांडिंग कोर्स, जिसमें आप भी बना सकते हैं करियर भारत और असम सरकार ने 2003 में उल्फा (I) के साथ किया था समझौता  बता दें कि उल्फा (I) जहां पर भारतीय हमले का जिक्र किया है, वह म्यांमार का सगईंग क्षेत्र है। आंतरिक गृहयुद्ध से प्रभावित म्यांमार के इस क्षेत्र में कई नक्सल और मिलिशिया समूह रहते हैं। यह क्षेत्र भारतीय विरोधी आतंकी समूहों का भी ठिकाना बना हुआ है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र और असम की राज्य सरकार ने उल्फा (I) के साथ 2023 में पीस पैक्ट साइन किया था। जिसके बाद से ही इसके भारत विरोधी अभियान रूके हुए थे। हालांकि बीते दिनों प्रकाशित कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि उल्फा (I) चीन के समर्थन से फिर अपने आप को मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में इस आतंकी संगठन पर हमला होना बड़ी घटना है। Latest News in Hindi Today Hindi news  #IndianArmy #ULFA #Asam #CMHimantaBiswaSarma #ULFA1

आगे और पढ़ें
London Plane Crash

London Plane Crash: एयरपोर्ट पर उड़ान भरते ही आग के गोले में बदला विमान, आसमान में दिखा भीषण आग के साथ धुएं का गुबार

लंदन के साउथएंड एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही एक विमान दुर्घटनाग्रस्त (London Plane Crash) हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह एक छोटा व्यावसायिक विमान था और इसने रविवार की शाम 4 बजे एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। विमान दुर्घटना के बाद घटना स्थल से आसमान में आग की चपटों के काले धुएं का गुबार उठता देखा गया। जिससे आस-पास के इलाके के साथ एयरपोर्ट पर मौजूद यात्रियों में भी दहशत फैल गई। घटना के तुरंत बाद पुलिस, फायर ब्रिगेड और राहत टीमों ने बचाव का कार्य शुरू कर दिया। साथ ही एयरपोर्ट से विमानों का संचालन भी रोक दिया गया है। इस दुर्घटना (London Plane Crash) में कितने लोग हताहत हुए हैं, अभी इसकी कोई जानकारी नहीं है।   ब्रिटिश मीडिया ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि, वो एयरपोर्ट (Airport) के पास ही हॉकी खेल रहे थे। विमान ने जब टेकऑफ किया तो कुछ लोगों ने हाथ हिलाकर पायलट को हैलो भी कहा। इसके कुछ ही पल बाद विमान (London Plane Crash) नीचे आने लगा और फिर जमीन से आसामन की तरफ विशाल आग का गोला उठता हुआ देखा गया। दुर्घटना का शिकार हुए विमान की पहचान बी200 सुपर किंग एयर के रूप में हुई है। यह विमान साउथएंड एयरपोर्ट से नीदरलैंड के लेलीस्टेड जाने के लिए उड़ान भरी थी।  विमान में एक बड़ा करोबारी और उनके सहयोगियों का होने का दावा    मीडिया ने साउथएंड एयरपोर्ट के फ्लाइट राडार के उड़ान डेटा के आधार पर बताया कि, इस विमान ने शाम 4 बजे रनवे से उड़ान भरी थी, लेकिन कुछ ही पल में यह दुर्घटनाग्रस्त (London Plane Crash) हो गया। सोशल मीडिया पर इस घटना के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। ब्रिटेन की स्काई न्यूज ने एसेक्स पुलिस के हवाले से बताया कि, यह शाम 4 बजे के आसपास एक 12 मीटर लंबा व्यवसायिक विमान नीचे गिर गया। जिसके बाद एयरपोर्ट का संचालन बंद कर आपातकालीन सेवाओं को शुरू कर दिया गया। यह बचाव कार्य कई घंटों तक जारी रह सकता है। फिलहाल अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि घटना के समय विमान में कितने लोग सवार थे। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इस विमान में ब्रिटेन का एक बड़ा करोबारी अपने सहयोगियों के साथ सवार था। विमान गिरते ही जिस तरह से इसमें विस्फोट हुआ, उससे विमान में सवार किसी भी व्यक्ति के बचने की संभावना बेहद कम है।  साउथएंड वेस्ट और लेह के स्थानीय सांसद डेविड बर्टन-सैम्पसन ने इस घटना पर दुख जताते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए कहा, “मुझे साउथएंड एयरपोर्ट पर हुई दुर्घटना की जानकारी है। कृपया वहां से दूर रहें और आपातकालीन सेवाओं को अपना काम करने दें। मेरी संवेदनाएं इस दुर्घटना से प्रभावित हुए सभी संबंधित लोगों के साथ है।” इसे भी पढ़ें:- 7 Demanding Courses: ये हैं 7 डिमांडिंग कोर्स, जिसमें आप भी बना सकते हैं करियर अहमदाबाद विमान हादसे में 261 लोगों की मौत  बता दें कि बीते 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रहा एअर इंडिया का बोइंग ड्रीमलाइनर विमान एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही दुर्घटनाग्रस्त (Ahmedabad Plane Crash) हो गया था। भारत के सबसे भीषण विमान हादसों में से एक इस दुर्घटना में 12 सदस्यीय चालक दल और 241 समेत कुल 261 लोगों की मौत हो गई। वहीं विश्वास कुमार रमेश नाम का एक यात्री चमत्कारिक रूप से बच गया। इस विमान हादसे (Ahmedabad Plane Crash) में मरने वालों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी समेत 20 के करीब मेडिकल छात्र हैं। इस हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट हाल ही में आई है, जिसमें बताया गया है कि विमान के टेकऑफ करते समय फ्यूल सप्लाई बंद हो गई थी। हालांकि यह कैसे हुआ, इसको लेकर विस्तार से कोई जानकारी नहीं दी गई है। हादसे के कारणों के बारे में विस्तार से जानने के लिए अभी भी लोगों को विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है। Latest News in Hindi Today Hindi news  #AhmedabadPlaneCrash #PlanCrash #LondonPlaneCrash #Filght #London

आगे और पढ़ें
7 demanding courses 2025

7 Demanding Courses: ये हैं 7 डिमांडिंग कोर्स, जिसमें आप भी बना सकते हैं करियर

तेजी से बदल रही टेक्नोलॉजी के इस दौर में कार्य क्षेत्र में भी कई ऑप्शन लोगों को मिल रहे हैं। लेकिन ये समझना की किस क्षेत्र में करियर बनाना बेहतर होगा ये थोड़ा कठिन हो सकता है। इसलिए आज इस आर्टिकल में आने वाले समय में 7 ऐसे डिमांडिंग कोर्स (7 Demanding Courses) के बारे में जानेंगे जिसमें अगर इंट्रेस्ट हो तो करियर बनाना बेहतर हो सकता है। वहीं अगर आप अपने करियर को सुरक्षित और सफल बनाना चाहते हैं, तो यह आवश्यक है कि आप ऐसे कोर्स (Demanding Courses) का चयन करें जिनकी भविष्य में भारी मांग रहेगी। यहां हम आपको ऐसे सात कोर्सों के बारे में बता रहे हैं जिनकी आने वाले वर्षों में बहुत अधिक डिमांड रहने वाली है। 7 डिमांडिंग कोर्स (7 Demanding Courses)  1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (Artificial Intelligence and Machine Learning) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आने वाले समय की सबसे शक्तिशाली तकनीकों में से एक हैं। इन क्षेत्रों में कार्य करने के लिए गणित, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और डेटा एनालिसिस पर अच्छी पकड़ जरूरी है। AI या ML का उपयोग स्वास्थ्य सेवा, ई-कॉमर्स, बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में हो रहा है। इस कोर्स को करके छात्र डेटा साइंटिस्ट, मशीन लर्निंग इंजीनियर या AI स्पेशलिस्ट बन सकते हैं। 2. डेटा साइंस और डेटा एनालिटिक्स (Data Science and Data Analytics)  डेटा साइंस वह क्षेत्र है जिसमें बड़े-बड़े डेटा सेट का विश्लेषण कर के उपयोगी जानकारी निकाली जाती है। लगभग हर क्षेत्र में डेटा एनालिटिक्स की डिमांड बढ़ गई है अब चाहे वह बिज़नेस हो, हेल्थकेयर हो या फिर शिक्षा। इस कोर्स में स्टूडेंट्स स्टैटिक्स, प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (जैसे पायथन, R) और डेटा विज़ुअलाइज़ेशन टूल्स सीखते हैं। डेटा साइंस और डेटा एनालिटिक्स की डिमांड आने वाले समय में और ज्यादा बढ़ेगी। और इसलिए 7 डिमांडिंग कोर्स (7 Demanding Courses) में इसका नाम शामिल है। 3. साइबर सिक्योरिटी (Cyber Security)  इंटरनेट के ज़रिए बढ़ते व्यवसायों और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा एक प्रमुख चिंता का विषय है। इसी के चलते साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट (Cyber Security Expert) की मांग भी तेजी से बढ़ी है। इस कोर्स के तहत स्टूडेंट्स नेटवर्क सिक्योरिटी, एथिकल हैकिंग, क्रिप्टोग्राफी और सूचना सुरक्षा प्रबंधन जैसे विषयों का अध्ययन करते हैं। आने वाले समय में साइबर अपराधों से निपटने के लिए योग्य पेशेवरों की भारी मांग रहेगी। 4. डिजिटल मार्केटिंग (Digital Marketing)  ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता के साथ डिजिटल मार्केटिंग (Digital Marketing) एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। यह कोर्स SEO, सोशल मीडिया मार्केटिंग, कंटेंट मार्केटिंग, ईमेल मार्केटिंग, गूगल ऐड्स और वेब एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों को कवर करता है। स्टार्टअप से लेकर मल्टीनेशनल कंपनियां तक, सभी डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट की तलाश में रहती हैं। 5. सस्टेनेबल एनर्जी और एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग (Sustainable Energy and Environmental Engineering)  जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण जैसी वैश्विक समस्याओं को देखते हुए सस्टेनेबल एनर्जी का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए एनवायरनमेंटल साइंस, रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नोलॉजी, एनर्जी पॉलिसी और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर आधारित कोर्स किया जा सकता है। आने वाले वर्षों में ग्रीन एनर्जी सेक्टर में रोजगार के कई अवसर और मिलने की उम्मीद है। 6. जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) हेल्थ, फार्मिंग, फूड प्रोसेसिंग और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) की भूमिका अहम होती जा रही है। यह कोर्स बायोलॉजी, केमेस्ट्री, जेनेटिक्स और माइक्रोबायोलॉजी पर आधारित होता है। मेडिकल रिसर्च फार्मास्युटिकल कंपनियों और जैविक कृषि में इस क्षेत्र के पेशेवरों की भारी मांग है। इसे भी पढ़ें:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें? 7. UX/UI डिज़ाइन डिजिटल एप्लिकेशन और वेबसाइट की सफलता बहुत हद तक उनके डिज़ाइन और यूज़र अनुभव (User Experience) पर निर्भर करती है। इसलिए UX/UI डिजाइनिंग का क्षेत्र बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है। इस कोर्स में स्टूडेंट ग्राफिक डिजाइन, इंटरफ़ेस क्रिएशन, यूज़र रिसर्च और प्रोटोटाइपिंग सीखते हैं। टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियों में UX/UI डिजाइनर्स की बड़ी डिमांड है। इसलिए इसे भी 7 डिमांडिंग कोर्स (7 Demanding Courses) में शामिल किया गया है।   ऊपर बताए गए 7 कोर्स (7 Demanding Courses) न केवल आने वाले समय में नौकरी के बेहतरीन अवसर प्रदान करेंगे, बल्कि ये समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए करियर चुनते समय अपने रुचि के क्षेत्र के साथ-साथ बाजार की मांग को भी ज़रूर ध्यान में रखें। यदि आपको इन कोर्सों में से किसी एक को चुनने में कठिनाई हो रही है, तो आप अपने रूचि, कौशल और करियर लक्ष्यों के अनुसार किसी करियर काउंसलर (Career Counselor) से सलाह भी ले सकते हैं। क्योंकि करियर काउंसलर (Career Counselor) आपकी बातों को समझकर आपको सही सुझाव देंगे।  Latest News in Hindi Today Hindi news Cyber Security Expert #DemandingCourses #CareerGrowth #TopCourses2025 #HighSalarySkills #ProfessionalCourses

आगे और पढ़ें
Chirag Paswan's Bold Move in Bihar 2025 Polls

Chirag Paswan: राजनीतिक विरासत के युवा चेहरे की मजबूत दस्तक, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में LJP की भूमिका

जनता के बीच चिराग पासवान (Chirag Paswan) का नाम हमेशा से ही युवा ऊर्जा और राजनीतिक बदलाव का पर्याय रहा है। राम विलास पासवान के बेटे और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री, चिराग ने अपनी अगुआई में लोक जनशक्ति पार्टी (Lok Janshakti Party) को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में उनकी सक्रियता और रणनीति ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। युवा चेहरे की मजबूती चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि वह बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट (Bihar First and Bihari First) सोच को 2025 विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) में अगली पंक्ति की लड़ाई में बदलना चाहते हैं । उन्होंने आरा में नव संकल्प महासभा (Nav Sankalp Mahasabha) आयोजन किया, जिसमें उन्होंने घोषणा की कि वे खुद चुनाव लड़ेंगे, हालांकि अभी यह तय नहीं कि वे किस सीट से मैदान में उतरेंगे। उन्होंने यह भी कहा, “मैं बिहार से चुनाव नहीं लड़ूंगा, बल्कि बिहार के लिए लड़ूंगा।”   243 सीटों की चुनौती छपरा में आयोजित विशाल रैली में चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी सभी 243 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है। उनका मानना है कि इस कदम से एनडीए गठबंधन (NDA alliance) को मजबूती मिलेगी, लेकिन इससे बीजेपी–जेडीयू गठबंधन (BJP-JDU Alliance) को सीट शेयरिंग में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है  LJP(RV) की रणनीति और गठबंधन समन्वय चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने खुद को नए बिहार के एजेंट के रूप में प्रस्तुत करते हुए, दलित–पिछड़ा वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करने की योजना बनाई है। उन्होंने नालंदा में बहुजन भीम संकल्प समागम (Bahujan Bhim Sankalp Samagam) की शुरुआत की जिसका मकसद जनता के बीच मजबूत पैठ बनाना है। BJP उन्हेंNDA में सीटों के लिए दबाव बनाते हुए देख रही है – 30 से 40 सीटों की उनकी मांग चर्चा में है। जेडीयू भी सतर्क है और गठबंधन पर फिर से बातचीत की संभावना संकेत दे रहा है। नीतीश–चिराग का गठबंधन राजनीतिक समीकरण के मुताबिक, चिराग ने संकेत दिए हैं कि यदि NDA सहयोगी बने रहें, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ही मुख्यमंत्री का चेहरे होंगे।  हालांकि उनका इरादा सिर्फ मुख्यमंत्री बनने का नहीं है बल्कि दलित, युवा और पिछड़े वर्गों की आवाज़ बनकर उनकी परेशानियों को दूर करना है। युवा और दलित वोट बैंक आकर्षित चिराग पासवान (Chirag Paswan) की अपील में यह स्पष्ट झलकता है कि वे युवा और दलित मतदाताओं को सबसे पहले प्राथमिकता देंगे। बिहार में दलित लगभग 19% आबादी बनाते हैं, और इस समूह पर उनकी पकड़ मजबूत होती दिख रही है । दलित वर्ग को जोड़ने के लिए उनके बहुजन–भीम समूह अभियान पीछे नहीं रहे। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ  नई रणनीतिक योजना उनकी रणनीति में शामिल हैं: चिराग पासवान बिहार की राजनीति में अब तक केंद्र में रहे युवा नेता के रूप में सामने आए हैं – उन्होंने दिल्ली वाली राजनीति से ध्यान हटाकर बिहार की जमीन पर आकर मजबूत स्वरुप अपनाया है। उनका बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट (Bihar First and Bihari First) विजन बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। 2025 के विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) तक चिराग का राजनीतिक जोर बढ़ा हुआ दिखता है। अगर वे गठबंधन और सीट वितरण की कवायद में संतुलन बनाए रखते हुए, अपनी रणनीति को धरातल पर ला पाए, तो बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में उनका हस्ताक्षर आनेवाला है। चिराग पासवान (Chirag Paswan) केवल चुनाव लड़ने की तैयारी नहीं कर रहे, वे बिहार में राजनीतिक नवप्रवर्तन लाना चाहते हैं। उनका युवा नेतृत्व, ‘दलित–युवा’ आधारित नीतियां और गठबंधन की चालबाजी 2025 के चुनावी समीकरण को नए स्वरूप देने वाली है। Latest News in Hindi Today Hindi news Chirag Paswan #ChiragPaswan #BiharElection2025 #LJP #YouthLeader #BiharPolitic

आगे और पढ़ें
8th Pay Commission Update

8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को सरकार से मिल सकती है गुड न्यूज़

सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बार फिर अच्छी खबर सामने आ रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) जल्द लागू किया जा सकता है, जिससे सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को फायदा मिलेगा। वेतन आयोग हर कुछ सालों में सरकार द्वारा गठित एक समिति होती है, जो सरकारी कर्मचारियों (Government Employee) के वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं की समीक्षा कर बदलाव की सिफारिश करती है। इस बार की सबसे खास बात यह है कि सिर्फ बेसिक सैलरी (Basic Salary) ही नहीं, बल्कि भत्तों (Allowance) में भी बदलाव पर चर्चा की जा रही है।  बेसिक सैलरी में सकती है बढ़ोतरी    हर वेतन आयोग का मुख्य आकर्षण बेसिक सैलरी का बढ़ना होता है। 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) में जहां फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, वहीं इस बार उम्मीद की जा रही है कि इसे बढ़ाकर 3.68 या उससे भी अधिक किया जा सकता है। इससे कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में सीधी बढ़ोतरी होगी। उदाहरण के लिए यदि किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 35,400 रुपये है, तो 8वें वेतन आयोग के बाद यह 90,000 रुपये तक पहुंच सकती है। बेसिक सैलरी में यह बढ़ोतरी न केवल पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी सेवाओं को प्रभावित करेगी, बल्कि HRA, DA और अन्य भत्तों की गणना में भी इसका सीधा प्रभाव देखने को मिलेगा। HRA यानी मकान किराया भत्ता – कम दर, लेकिन अधिक राशि सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में HRA एक अहम भूमिका निभाता है। 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) में शहरों को X, Y और Z कैटेगरी में वर्गीकृत किया गया था और उनके अनुसार HRA की दरें क्रमशः 24%, 16% और 8% तय की गई थीं। हालांकि महंगाई भत्ता (DA) के बढ़ने के साथ यह दरें क्रमशः 30%, 20% और 10% तक पहुंच गई थीं। 8वें वेतन आयोग के साथ DA फिर से 0% से शुरू होगा, जिससे HRA की दरें भी रीसेट होकर 24%, 16% और 8% हो सकती हैं। हालांकि, बेसिक सैलरी (Basic Salary) में संभावित बढ़ोतरी के चलते वास्तविक HRA राशि पहले से कहीं अधिक हो जाएगी। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 90,000 रुपये होती है, तो X कैटेगरी में उसका HRA 21,600 रुपये होगा, जो पहले की तुलना में दुगना से भी अधिक है। पेंशनर्स के लिए बेहतर मेडिकल सुविधा सरकारी पेंशनर्स की एक बड़ी चिंता चिकित्सा सुविधाएं होती हैं। वर्तमान में अधिकांश पेंशनर्स को 1000 रुपये प्रति माह फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (Medical Allowance) मिलता है, जो महंगाई और दवाइयों के बढ़ते खर्च को देखते हुए बहुत कम है। साथ ही, सभी पेंशनर्स CGHS (Central Government Health Scheme) के दायरे में नहीं आते। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) में यह संभावना जताई जा रही है कि मेडिकल अलाउंस को 2000 से 3000 रुपये प्रति माह तक बढ़ाया जा सकता है। यह वृद्ध पेंशनर्स के लिए एक बड़ी राहत होगी और स्वास्थ्य देखभाल से जुड़ी समस्याओं को कुछ हद तक कम कर सकेगा। इसे भी पढ़ें:- कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट? यात्रा भत्ता (TA) में भी बदलाव की उम्मीद यात्रा भत्ता (Travel Allowance) सरकारी कर्मचारियों के लिए आवश्यक सुविधा है, खासतौर पर उन लोगों के लिए जो रोजाना लंबी दूरी तय करके कार्यालय पहुंचते हैं। अभी तक TA की गणना DA के अनुसार की जाती रही है। लेकिन 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के लागू होने के बाद जब मौजूदा DA को बेसिक सैलरी में मर्ज किया जाएगा, तब TA के फॉर्मूले में भी बदलाव तय है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, सार्वजनिक परिवहन के खर्च और रोजमर्रा की यात्रा में आ रही कठिनाइयों को देखते हुए TA में अच्छी-खासी बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है। इससे कर्मचारियों का दैनिक खर्च संतुलित हो सकेगा। कर्मचारियों और पेंशनर्स की बढ़ती उम्मीदें हर वेतन आयोग के साथ कर्मचारियों की उम्मीदें भी बढ़ जाती हैं। खासकर जब महंगाई लगातार बढ़ रही हो और रोजमर्रा की ज़रूरतें महंगी होती जा रही हों, तो आय में स्थायी वृद्धि एक बड़ी आवश्यकता बन जाती है। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से यह उम्मीद की जा रही है कि वह न केवल वेतन और भत्तों (Salary and Allowance) में सुधार लाएगा, बल्कि कर्मचारियों और पेंशनर्स की जीवनशैली को भी बेहतर बनाएगा। 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के लिए आर्थिक राहत और स्थिरता की उम्मीद है।  Latest News in Hindi Today Hindi Allowance #8thPayCommission #GovtEmployees #PensionersUpdate #PayHike #SalaryRevision

आगे और पढ़ें
Odisha Government Run by Adani

ओडिशा की सरकार अडानी चलाते हैं: राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Congress Leader Rahul Gandhi) ने शुक्रवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में संविधान बचाओ अभियान के तहत एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला, खासकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उद्योगपति अडानी समूह (Adani Group) को लेकर। उन्होंने सामाजिक न्याय, जातीय जनगणना, महिलाओं की सुरक्षा और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की और जनता से इन सवालों को लेकर सतर्क रहने की अपील की। ओडिशा सरकार पर सीधा हमला राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने अपने भाषण की शुरुआत ओडिशा की सरकार (Odisha Government) को आड़े हाथों लेते हुए की। उन्होंने आरोप लगाया कि आज राज्य की सत्ता वास्तव में आम जनता के हाथ में नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के हाथ में है। उन्होंने दावा किया, ओडिशा की सरकार अब अडानी चला रहे हैं। राहुल गांधी ने जगन्नाथ यात्रा (Jagannath Yatra) का उदाहरण देते हुए कहा कि जब लाखों लोग भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने के लिए एकत्र होते हैं, तो उसी दौरान अडानी और उनके परिवार के लिए रथ रोक दिए जाते हैं। उन्होंने इसे जनता के विश्वास के साथ धोखा बताया और कहा कि यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार अब जनहित में नहीं, बल्कि पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है। सामाजिक न्याय और जातीय जनगणना की मांग राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने जातीय जनगणना (Caste Census) को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक देश में हर जाति और वर्ग की सटीक जनसंख्या का आंकलन नहीं होगा, तब तक सामाजिक न्याय केवल एक नारा ही रहेगा। उन्होंने ने कहा कि सबसे पहला काम जातीय जनगणना है, जिससे गरीबों, दलितों, पिछड़ों को अपनी सच्ची शक्ति का अहसास होगा। महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल अपने संबोधन में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने ओडिशा में महिलाओं की स्थिति पर चिंता जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि ओडिशा में अब तक 40,000 से अधिक महिलाएं गायब हो चुकी हैं और हर दिन औसतन 15 बलात्कार के मामले सामने आते हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह इन गंभीर मुद्दों की अनदेखी कर रही है और जनता को केवल चुनावों के समय याद करती है। बिहार चुनाव और वोटर लिस्ट विवाद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने बिहार में आगामी चुनावों को लेकर भी बीजेपी और चुनाव आयोग (Election Commission) पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जैसे महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों (Assembly Election) के दौरान चोरी हुई, वैसे ही बिहार में भी साजिश रची जा रही है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था न रहकर बीजेपी की विंग की तरह काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में एक करोड़ नए वोटर लिस्ट (New Voter List) में जुड़ गए जिनकी जानकारी किसी को नहीं है और इसी तरह की प्रक्रिया बिहार में भी अपनाई जा रही है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि हमने चुनाव आयोग से बार-बार वोटर लिस्ट (Voter List) और वीडियोग्राफी की मांग की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बिहार में अगर कोई चुनाव चोरी करने की कोशिश करेगा, तो INDIA गठबंधन (India Alliance) मिलकर इसका मुकाबला करेगा। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का समर्थन इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Congress President Mallikarjun Kharge) भी मौजूद थे। उन्होंने भी केंद्र सरकार (Union Government) पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार देश के संसाधन जल, जंगल और जमीन को चुनिंदा पूंजीपतियों को सौंप रही है। उन्होंने कांग्रेस के 55 वर्षों के शासन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान देश में सैकड़ों सार्वजनिक उपक्रम (PSUs) बनाए गए, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को मजबूती मिली। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का यह दौरा केवल एक राजनीतिक रैली नहीं था, बल्कि यह एक रणनीतिक संदेश भी था सामाजिक न्याय, पारदर्शी चुनाव और गरीबों-अनुसूचित जाति-जनजाति के अधिकारों के लिए संघर्ष। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी (Congress Party) अब भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) के बाद संविधान बचाओ की मुहिम को अगली दिशा देने को तैयार है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने अपने भाषण में बार-बार यह दोहराया कि अब वक्त आ गया है कि जनता जागरूक हो, संगठित हो और अपने हक के लिए आवाज़ बुलंद करे। Latest News in Hindi Today Hindi news Mallikarjun Kharge #RahulGandhi #Adani #OdishaPolitics #BreakingNews #IndianPolitics #OdishaNews

आगे और पढ़ें
India’s Growing Population

Population Of India: भारत की बढ़ती जनसंख्या और बढ़ती चनौतियां  

भारत की जनसंख्या 2025 (India Population 2025) में 1.46 अरब (146 करोड़) तक पहुँच चुकी है, जिससे भारत दुनिया का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश बन गया है। संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत की जनसंख्या (India Population) चीन से भी ज्यादा है। यह जनसंख्या वृद्धि भारत के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय ढाँचे पर गहरा प्रभाव डाल रही है। यह स्थिति एक ओर देश को युवा शक्ति के रूप में वैश्विक मंच पर आगे बढ़ने का अवसर देती है, वहीं दूसरी ओर यह कई जटिल चुनौतियाँ भी उत्पन्न करती है। जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारण भारत में जनसंख्या (Population Of India) वृद्धि के पीछे कई कारण हैं। इनमें प्रमुख हैं: अवसर: युवा शक्ति और संभावनाएँ भारत की कुल आबादी (Population of India) में लगभग 65% लोग 35 वर्ष से कम उम्र के हैं। यह डेमोग्राफिक डिविडेंड (Demographic Dividend) भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। यदि इस युवा आबादी को अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार के पर्याप्त अवसर मिलें, तो भारत न केवल आर्थिक रूप से तेज़ी से प्रगति कर सकता है, बल्कि वैश्विक नवाचार और प्रौद्योगिकी में अग्रणी बन सकता है। आईटी, स्टार्टअप और सेवा क्षेत्र ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ भारत की युवा शक्ति ने पहले ही अपना प्रभाव दिखाया है। वैश्विक स्तर पर भारतीय इंजीनियर, डॉक्टर और पेशेवर हर क्षेत्र में बेहतर कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में यदि इस जनशक्ति का सही दिशा में उपयोग किया गया, तो यह भारत को विकसित राष्ट्र की ओर ले जा सकती है। चुनौतियाँ: संसाधनों पर दबाव इसे भी पढ़ें:- 40 बैंक खातों में 106 करोड़ रुपये, छांगुर बाबा की कुंडली खंगालने में जुटी ईडी समाधान की दिशा में प्रयास भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारें जनसंख्या स्थिरीकरण (Population stabilization) और संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण के लिए कई योजनाएँ चला रही हैं। परिवार नियोजन, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, नई शिक्षा नीति (NEP) और कौशल विकास योजनाएं भी युवा आबादी को सशक्त बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। टेक्नोलॉजी और नवाचार भी इस संकट को अवसर में बदलने में मदद कर सकते हैं। डिजिटल इंडिया (Digital India), स्टार्टअप इंडिया (Startup India) और मेक इन इंडिया (Make In India) जैसी योजनाएं न केवल रोजगार सृजन में सहायक हैं, बल्कि देश को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर कर रही हैं। भारत की 1.46 अरब की जनसंख्या (Population of India) एक ऐतिहासिक पड़ाव है। यह आँकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि एक संभावनाओं से भरी तस्वीर है। यदि इस विशाल मानव संसाधन का सुनियोजित ढंग से उपयोग किया जाए, तो भारत 21वीं सदी में विश्व की अगुवाई कर सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि नीति निर्माताओं, समाज और हर नागरिक को मिलकर सतत विकास की दिशा में प्रयास करना होगा। Latest News in Hindi Today Hindi Demographic Dividend #IndiaPopulation #PopulationGrowth #OverpopulationIndia #IndiaChallenges #PopulationCrisis

आगे और पढ़ें
India Women vs England

Indian Women Cricket Team ने इंग्लैंड को हराकर रचा इतिहास, T20 सीरीज 3-1 से की अपने नाम

भारतीय महिला क्रिकेट टीम  (Indian Women Cricket Team) ने 2025 की पांच मैचों की टी20 सीरीज (T20 Series) में एक यादगार जीत दर्ज करते हुए इंग्लैंड को चौथे मुकाबले में 6 विकेट से हराकर सीरीज में 3-1 की बढ़त हासिल कर ली है। यह मैच बुधवार को मैनचेस्टर के प्रतिष्ठित ओल्ड ट्रैफर्ड स्टेडियम में खेला गया, जिसमें भारतीय महिला क्रिकेट टीम  (Indian Women Cricket Team) ने न सिर्फ इंग्लैंड को उनके घर में शिकस्त दी, बल्कि अपनी विदेशी धरती पर बहु-मैच द्विपक्षीय T20 सीरीज (Multi-match bilateral T20 series) में पहली बार जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। पुराने आंकड़े तोड़े, नया इतिहास बनाया इससे पहले भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ कभी भी विदेशी सरजमीं पर बहु-मैच वाली T20 सीरीज (Multi-match bilateral T20 Series) नहीं जीती थी। भारत और इंग्लैंड (India vs England) के बीच पहला टी20 मुकाबला 2006 में डर्बी में हुआ था, जिसमें भारत को जीत मिली थी, लेकिन इसके बाद से अब तक भारत को सभी विदेशी T20 सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही भारत ने लंबे समय से चले आ रहे हार के सिलसिले को तोड़ा है। मैच का संक्षिप्त हाल मैच की शुरुआत इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने के फैसले के साथ हुई। मेज़बान टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में सात विकेट खोकर 126 रन बनाए। भारत की ओर से एन चारिणी और राधा यादव ने शानदार गेंदबाजी की और दो-दो विकेट चटकाए, जबकि अमनजोत कौर और दीप्ति शर्मा को एक-एक सफलता मिली। इंग्लैंड के लिए सोफिया डंकली ने सबसे ज्यादा 22 रन बनाए। एलिस कैप्सी ने 18, टैमसिन ब्यूमॉन्ट ने 20 और पेज स्कोलफील्ड ने 16 रनों की छोटी लेकिन अहम पारियां खेलीं। अंतिम ओवरों में सोफी एक्लेस्टोन  ने 16 और इसी वोंग  ने 11 ररन तेजी से बनाये, जिससे इंग्लैंड की टीम (England Team) 126 के स्कोर तक पहुंच सकी। भारतीय बल्लेबाज़ों का दमदार प्रदर्शन 127 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय महिला टीम (Indian Women Cricket Team) की शुरुआत धमाकेदार रही। सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा ने आक्रामक अंदाज़ में रन बनाना शुरू किया और पहले विकेट के लिए 56 रनों की साझेदारी की। शेफाली ने मात्र 19 गेंदों में 31 रन बनाए, जिसमें छह चौके शामिल थे। मंधाना ने भी 31 गेंदों में 32 रन बनाकर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। जेमिमा रोड्रिग्स और कप्तान हरमनप्रीत कौर (Captain Harmanpreet Kaur) ने तीसरे विकेट के लिए 48 रनों की साझेदारी कर इंग्लैंड की वापसी की सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। हरमनप्रीत 25 रन बनाकर आउट हुईं, लेकिन जेमिमा ने नाबाद रहते हुए टीम (T20 Series) को लक्ष्य तक पहुंचा दिया। उन्होंने 22 गेंदों में 24 रन बनाए, जबकि ऋचा घोष सात रन बनाकर नाबाद रहीं। सीरीज का अंतिम मुकाबला यह जीत भारत के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक रही, लेकिन अब सभी की निगाहें 12 जुलाई को बर्मिंघम में होने वाले पांचवें और अंतिम मुकाबले पर टिकी हैं। भले ही भारत सीरीज पहले ही अपने नाम कर चुका हो, लेकिन क्लीन स्वीप के इरादे से टीम पूरी ताकत झोंकने को तैयार है। वहीं, इंग्लैंड की टीम सम्मान बचाने के लिए उतरेगी। टीम इंडिया की रणनीति की जीत इस मुकाबले में भारत की जीत का श्रेय उनके संतुलित प्रदर्शन को जाता है। गेंदबाजी में जहां स्पिनर्स ने दबाव बनाया, वहीं बल्लेबाजी में संयम और आक्रामकता का अच्छा संतुलन देखने को मिला। कोचिंग स्टाफ और सपोर्ट टीम की रणनीति और खिलाड़ियों की फॉर्म ने मिलकर टीम को ऐतिहासिक सफलता दिलाई। इसे भी पढ़ें:- IPL का पहला खिताब जीतने के बाद विराट कोहली और विजय माल्या ने कही यह बात महिला क्रिकेट को मिली नई पहचान इस जीत के साथ भारतीय महिला क्रिकेट (Indian Women Cricket Team) ने यह भी साबित किया है कि वे अब विश्व स्तर पर किसी भी टीम को चुनौती देने में सक्षम हैं। लगातार बेहतर प्रदर्शन से न केवल महिला खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि भारत में महिला क्रिकेट (Women’s Cricket) की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ रही है। यह जीत सिर्फ एक मैच की नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम के उभरते आत्मबल और क्षमता की कहानी है। यह संकेत है कि अब वक्त आ गया है, जब महिला क्रिकेट (Women’s Cricket) को पुरुषों के बराबर सम्मान और समर्थन मिलना चाहिए। Latest News in Hindi Today Hindi news T20 Series #IndiaWomen #T20Series #HistoricWin #CricketNews #INDvsENG

आगे और पढ़ें
Thane School Girls Humiliated Over Periods Check

ठाणे स्कूल में पीरियड्स जांच के नाम पर छात्राओं का अपमान 

ठाणे के शाहपुर इलाके में एक स्कूल में जो कुछ हुआ, उसने समाज की सोच और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल प्रशासन ने केवल एक खून के धब्बे के आधार पर दस से अधिक छात्राओं के कपड़े उतरवाकर यह जांचने की कोशिश की कि कौन सी लड़की पीरियड्स (Menstrual Cycle) में है। इस घटना के बाद छात्रों के माता-पिता में भारी आक्रोश फैल गया, जिसके चलते पुलिस ने स्कूल की प्रिंसिपल, एक आया, चार शिक्षकों और दो ट्रस्टियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। बाथरूम में खून के धब्बे से शुरू हुआ मामला मामला मंगलवार का है जब स्कूल के बाथरूम में खून के धब्बे दिखाई दिए। इसके बाद यह बात टीचरों तक पहुंची। हैरानी की बात यह रही कि छात्राओं के पीरियड्स (Menstrual Cycle) की जानकारी पूछ कर ली जा सकती थी, लेकिन जिस तरह से स्कूल की प्रिंसिपल (School Principal) समेत अन्य स्टाफ की मानसिक सोच अमानवीय और असंवेदनशील है। स्कूल की प्रिंसिपल समेत अन्य स्टाफ ने क्लास 5 से 10 तक की सभी लड़कियों को एक बड़े हॉल में बुलाया, जहां एक बड़ी स्क्रीन पर बाथरूम में मिले खून के धब्बे दिखाए गए। इसके बाद लड़कियों से पूछा गया कि कौन-कौन पीरियड्स (Menstrual Cycle) में है। जिन्होंने हाथ उठाया, उनके नाम लिख लिए गए। लेकिन जिन लड़कियों ने हाथ नहीं उठाया, उन्हें एक-एक कर बाथरूम में ले जाया गया और आया द्वारा उनकी जबरन जांच कराई गई। इस दौरान कई छात्राओं को न केवल मानसिक तनाव (Mental Stress) से गुजरना पड़ा, बल्कि उनके आत्मसम्मान को भी गहरी चोट पहुंची। एक छात्रा की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी बेटी से प्रिंसिपल ने जबरदस्ती पूछताछ की कि वह पीरियड्स में नहीं होते हुए पैड क्यों पहन रही है। जब छात्रा ने जवाब देने की कोशिश की, तो प्रिंसिपल ने उसे झूठा ठहराया और जबरन उसका अंगूठा लेकर एक कथित बयान पर निशान भी लिया। माता-पिता का गुस्सा फूटा घटना के बाद जब छात्राएं घर पहुंचीं तो कई लड़कियां रोते हुए अपने माता-पिता से मिलीं और पूरा वाकया बताया। बुधवार को गुस्साए अभिभावकों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है। पुलिस की ओर से बताया गया है कि सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। इसके साथ ही पुलिस छात्राओं की गवाही ली जा रही है और आगे की जांच जारी है। इसे भी पढ़ें:- आरसीबी के तेज गेंदबाज यश दयाल पर यौन शोषण का केस दर्ज स्कूल की लापरवाही  यह घटना केवल एक स्कूल की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि किशोरियों के यौन स्वास्थ्य और निजता को लेकर कितनी असंवेदनशीलता अब भी मौजूद है। मासिक धर्म (Menstrual Cycle) कोई अपराध नहीं है और इसे लेकर शर्म या अपमान की भावना पैदा करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक शैक्षणिक संस्थान जो बच्चों के भविष्य की नींव रखता है, वह बच्चों की गरिमा को इस हद तक कुचल सकता है। बच्चों की मानसिक स्थिति, आत्मसम्मान और विश्वास को झकझोरने वाला यह मामला कहीं न कहीं स्कूल प्रशासन की विफलता और सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करता है। अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या शिक्षा मंत्रालय को ऐसे मामलों पर तुरंत हस्तक्षेप कर एक गाइडलाइन जारी नहीं करनी चाहिए?   Latest News in Hindi Today Hindi Menstrual Cycle #ThaneSchool #PeriodsCheck #GirlsRights #SchoolControversy #StudentAbuse

आगे और पढ़ें
Translate »