Nidhi Sinha

Article 326 Election Commission's X Post Explained

क्या है Article 326? जिसे भारत के Election Commission ने X पर किया है पोस्ट 

भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 (Article 326) की तस्वीर साझा की है। यह पोस्ट राजनीतिक हलकों में खासा चर्चित हो गई है, विशेषकर बिहार में चल रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के संदर्भ में। इस समय बिहार में विपक्षी दलों राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस (Congress) और अन्य पार्टियों ने इस प्रक्रिया को लेकर कड़े सवाल उठाए हैं। अनुच्छेद 326: भारत में वयस्क मताधिकार की गारंटी भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) है, जिसकी गारंटी संविधान के अनुच्छेद 326 (Article 326) में दी गई है। यह अनुच्छेद कहता है कि भारत का प्रत्येक नागरिक, जो 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का है और निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास करता है, उसे मतदान (Voting) करने का अधिकार प्राप्त होगा। हालांकि, कुछ अपवाद भी हैं। यदि कोई व्यक्ति: तो उसे मतदान के अधिकार से वंचित किया जा सकता है। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि भारत में चुनाव स्वच्छ, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हों। आयोग की X पोस्ट: एक संवैधानिक संदेश भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) का अनुच्छेद 326 साझा करना केवल एक सामान्य पोस्ट नहीं, बल्कि यह राजनीतिक आलोचनाओं के जवाब में एक संविधान सम्मत जवाब था। आयोग यह दर्शाना चाहता है कि उसका पूरा काम संविधान की भावना और प्रावधानों के तहत हो रहा है। यह विशेष रूप से उन आरोपों के संदर्भ में था जो बिहार में चल रहे SIR अभियान को लेकर लगाए जा रहे हैं। आयोग की मंशा साफ है कि योग्य भारतीय नागरिकों को ही मतदाता सूची में स्थान देना, और अपात्र या फर्जी नामों को हटाना। यह प्रक्रिया लोकतंत्र की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। 𝗔𝗿𝘁𝗶𝗰𝗹𝗲 𝟯𝟮𝟲 𝗼𝗳 𝘁𝗵𝗲 𝗖𝗼𝗻𝘀𝘁𝗶𝘁𝘂𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗼𝗳 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮 #𝗕𝗶𝗵𝗮𝗿 #𝗦𝗜𝗥 #𝗘𝗖𝗜 pic.twitter.com/o0TCgDCYg9 — Election Commission of India (@ECISVEEP) July 9, 2025 बिहार में SIR अभियान: उद्देश्य और विवाद बिहार में 2025 के आगामी विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election 2025) की तैयारी के तहत निर्वाचन आयोग ने 25 जून से 26 जुलाई 2025 तक विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) अभियान की शुरुआत की है। इसका मुख्य उद्देश्य है: इस अभियान के अंतर्गत बिहार के लगभग 7.89 करोड़ मतदाताओं को शामिल करने के लिए गणना फॉर्म बांटे जा रहे हैं, जिन्हें उचित पहचान दस्तावेजों के साथ भरकर जमा करना होगा। विपक्ष की आपत्ति: समय और प्रक्रिया पर सवाल विपक्षी दलों का तर्क है कि यह प्रक्रिया मानसून और संभावित बाढ़ के समय में शुरू की गई है, जो अवास्तविक और गैर-व्यावहारिक है। इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में आवाजाही कठिन हो जाती है और गरीब, मजदूर वर्ग और अशिक्षित लोग जरूरी दस्तावेजों की कमी या जानकारी के अभाव में मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। यह लोकतांत्रिक समावेशन के मूल सिद्धांत के विपरीत माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कुछ विपक्षी नेताओं ने इस प्रक्रिया को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया है कि इसके जरिए कुछ खास वर्गों को मतदाता सूची से बाहर करने की कोशिश की जा रही है। इसे भी पढ़ें:- बिहार बंद के दौरान चुनाव आयोग पर जमकर बरसे राहुल-तेजस्वी, कही यह बात लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है पारदर्शिता चुनाव आयोग (Election Commission of India) पर यह जिम्मेदारी है कि वह जनता के विश्वास को बनाए रखे और यह केवल तभी संभव है जब उसकी प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी हो। मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इसका क्रियान्वयन इस तरह होना चाहिए कि कोई भी पात्र नागरिक वंचित न रह जाए। इस संदर्भ में डिजिटल साक्षरता बढ़ाना, स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार और सहायता केंद्रों की स्थापना जैसे कदम आवश्यक हो सकते हैं। इसके अलावा, राजनीतिक दलों को भी चाहिए कि वे मतदान अधिकारों के प्रति जनता को जागरूक करें, बजाय इसके कि केवल आलोचना करें। संविधान का अनुच्छेद 326 (𝗔𝗿𝘁𝗶𝗰𝗹𝗲 𝟯𝟮𝟲 𝗼𝗳 𝘁𝗵𝗲 𝗖𝗼𝗻𝘀𝘁𝗶𝘁𝘂𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗼𝗳 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮) भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है, जो हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार देता है। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission Of India) की जिम्मेदारी है कि वह इस अधिकार की रक्षा करे और उसे सशक्त बनाए। बिहार में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एक जरूरी और नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इसे स्थानीय परिस्थितियों और जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लागू करना चाहिए। आलोचनाएं यदि तथ्यपरक हों तो उन्हें दूर करना आयोग की जिम्मेदारी है, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचते हुए एक स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह वक्त है कि हर नागरिक अपने मताधिकार को समझे, जागरूक बने और लोकतंत्र को मजबूत करने में अपना योगदान दे। Latest News in Hindi Today Hindi news Election Commission of India #Article326 #ElectionCommission #RightToVote #IndianElections #IndianConstitution

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Bihar Youth Commission Formed,

Bihar Cabinet Meeting: ‘बिहार युवा आयोग’ का गठन और महिलाओं को मिलेगा 35% आरक्षण

बिहार सरकार ने राज्य के युवाओं और महिलाओं के भविष्य को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की अध्यक्षता में संपन्न हुई कैबिनेट मीटिंग (Cabinet Meeting) में कुल 43 एजेंडों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से कुछ फैसले न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाले समय में बिहार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को भी गहराई से प्रभावित करेंगे। कैबिनेट मीटिंग (Cabinet Meeting) में सबसे अहम घोषणा बिहार युवा आयोग (Bihar Yuva Aayog) के गठन को लेकर की गई, जिसे राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। यह आयोग न केवल युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगा, बल्कि उन्हें स्किल डेवलपमेंट की दिशा में मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी देगा। क्या है बिहार युवा आयोग (Bihar Yuva Aayog)? बिहार युवा आयोग (Bihar Yuva Aayog) राज्य के युवाओं को केंद्र में रखकर बनाया गया एक विशेष निकाय होगा, जिसका उद्देश्य युवाओं की जरूरतों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर काम करना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने X के पोस्ट में लिखा है कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि बिहार के युवाओं को बेहतर शिक्षा, ट्रेनिंग और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ‘बिहार युवा आयोग’ के गठन को मंजूरी दी गई है। यह आयोग सरकार को सुझाव देने के साथ-साथ युवाओं के हित में नीतियां बनाने में सहयोग करेगा। इस आयोग का काम न केवल प्रशिक्षण और रोजगार तक सीमित रहेगा, बल्कि यह युवाओं की सामाजिक, शैक्षणिक और मानसिक स्थिति का भी मूल्यांकन करेगा और सरकार को समय-समय पर सुझाव देगा कि किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। आयोग की कार्य और जिम्मेदारियां बिहार युवा आयोग (Bihar Yuva Aayog) के प्रमुख कार्य इस प्रकार होंगे: यह आयोग युवाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने और उन्हें एक सशक्त नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। महिलाओं के लिए ऐतिहासिक फैसला: 35% आरक्षण कैबिनेट की इस बैठक में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक और बड़ा फैसला लिया गया। अब से बिहार की मूल निवासी महिलाओं को सरकारी नौकरियों (Government Jobs) में 35% आरक्षण मिलेगा। यह आरक्षण सभी स्तरों और सभी विभागों की सीधी नियुक्तियों में लागू होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने कहा है कि बिहार की महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। उन्हें और अधिक सशक्त बनाने के लिए यह आरक्षण न केवल एक हक है, बल्कि एक ज़िम्मेदारी भी है, जिसे राज्य सरकार निभा रही है। इस फैसले का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, नौकरी के क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाना और उन्हें समाज में बराबरी का स्थान दिलाना है। यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही उस मांग के जवाब में आया है, जिसमें यह कहा जा रहा था कि बिहार की नौकरियों में आरक्षण का लाभ केवल राज्य की मूल निवासी महिलाओं को ही दिया जाए, न कि बाहरी राज्यों की महिला उम्मीदवारों को। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ क्या होगा असर? बिहार सरकार के ये दोनों फैसले बिहार युवा आयोग (Bihar Yuva Aayog) का गठन और महिलाओं को आरक्षण राज्य के सामाजिक ताने-बाने और आर्थिक विकास में नई जान फूंक सकते हैं। जहां एक ओर युवा आयोग उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर प्रदान करेगा, वहीं दूसरी ओर महिला आरक्षण से बेटियों को सरकारी नौकरियों में अधिक भागीदारी का मौका मिलेगा। राजनीति से जुड़े जानकार मानते हैं कि यह आयोग अगर ठीक तरीके से काम करता है, तो यह बिहार के युवा टैलेंट को राज्य में ही रोकने और ब्रेन ड्रेन को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। नीतीश कुमार की सरकार ने इस बार की कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में ऐसे निर्णय लिए हैं, जो सीधे तौर पर राज्य की युवा और महिला आबादी को सशक्त बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। ये फैसले केवल प्रशासनिक घोषणाएं नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य की दिशा तय करने वाले कदम हैं। अब देखना यह होगा कि इन योजनाओं को ज़मीन पर कितनी तेज़ी और ईमानदारी से लागू किया जाता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Bihar Yuva Aayog #BiharCabinet #YouthCommission #WomenReservation #BiharNews #ReservationForWomen #NitishKumar #BiharGovernment

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Elon Musk’s Astra Nova School

Astra Nova: एलन मस्क के स्कूल में पढ़ने के लिए 1 घंटे के लिए देने होंगे 1.88 लाख रुपये

एलन मस्क को आमतौर पर उनकी कंपनियों Tesla, SpaceX और Neuralink के लिए जाना जाता है। लेकिन एलन मस्क सिर्फ टेक्निकल फिल्ड ही नहीं, बल्कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी एक बढ़िया काम किया है। एलन मस्क ने एक स्कूल की शुरुआत की है जिसका नाम है एस्ट्रा नोवा (Astra Nova), जो आज पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह स्कूल पारंपरिक शिक्षा प्रणाली से हटकर बच्चों को सोचने, समझने और रचनात्मक समाधान ढूंढने की कला सिखाता है। क्या है एस्ट्रा नोवा (Astra Nova)? एलन मस्क का एस्ट्रा नोवा स्कूल (Astra Nova School) अन्य स्कूलों से काफी अलग है। अलग इसलिए क्योंकि यह ऑनलाइन (Online), प्रोजेक्ट-बेस्ड स्कूल (Project based School) है जिसे 10 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए डिजाइन किया गया है। एस्ट्रा नोवा स्कूल की शुरुआत उस सोच के साथ शुरू गई है कि बच्चों को रट्टा मारने से ज्यादा जरूरी है उन्हें सोचने और समस्याओं को हल करने का तरीका सिखाना। एलन मस्क का यह स्कूल इसलिए भी खास है क्योंकि यहां न तो परीक्षा होती है, न ही ग्रेड मिलते हैं और न ही कोई रिपोर्ट कार्ड तैयार होता है। यह पूरी तरह से कांसेप्ट-ड्रिवन लर्निंग को बढ़ावा देता है। पढ़ाई का तरीका है बिल्कुल अलग एलन मस्क का एस्ट्रा नोवा (Elon Musk’s Astra Nova School) में पढ़ाई के लिए किसी भी तरह का सिलेबस नहीं दिया जाता। और छोटा-छोटे सेमेस्टर में अलग-अलग सब्जेक्ट्स पर फोकस किया जाता है। छात्रों को अलग-अलग प्रोजेक्ट्स दिए जाते हैं, जिनके ज़रिए वे तर्क, विश्लेषण और क्रिएटिव सोच को विकसित करते हैं। यहां एक खास क्लास होती है जिसे आर्ट ऑफ प्रोब्लेम सॉल्विंग (Art of Problem Solving) कहा जाता है। इस क्लास में छात्रों को असल जिंदगी की समस्याएं दी जाती हैं जैसे पर्यावरण संकट, टेक्नोलॉजी के दुष्प्रभाव, या सामाजिक मुद्दे और उन्हें इनका समाधान खुद ढूंढना होता है। यह उन्हें न सिर्फ आत्मनिर्भर बनाता है, बल्कि उनकी नेतृत्व क्षमता को भी विकसित करता है। एलन मस्क के स्कूल में किसी विषय को नजरअंदाज भी नहीं किया जाता है। इसलिए यहां एलजेब्रा, जियोमेट्री, और प्री-कैलकुलस जैसे कठिन विषयों को भी रोचक तरीके से पढ़ाया जाता है ताकि छात्र न सिर्फ समझें, बल्कि उसे असल ज़िंदगी में उपयोग करना भी सीखें। फीस है काफी महंगी एलन मस्क के स्कूल एस्ट्रो नोवा (Elon Musk’s Astra Nova School) की एक और खास बात इस स्कूल की फीस है। अलग-अलग रिपोर्ट्स के अनुसार इस स्कूल की एक घंटे की क्लास की फीस लगभग 1.88 लाख रुपये (2200 डॉलर) है। छात्र कम से कम 2 घंटे और अधिकतम 16 घंटे की क्लास ले सकते हैं। अगर कोई छात्र 16 घंटे का कोर्स करता है, तो टोटल फीस 30.20 लाख रुपये (35,200 डॉलर) तक पहुंच सकती है। यह फीस कई लोगों के लिए अत्यधिक हो सकती है, लेकिन जो माता-पिता अपने बच्चों को भविष्य के लिए विशेष रूप से तैयार करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बड़ा निवेश माना जा सकता है। एडमिशन प्रक्रिया इस स्कूल में पढ़ाई करने के लिए छात्र या उनके पेरेंट्स स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट astranova.org पर पूरी जानकारी पढ़ सकते हैं। वहां पर आवेदन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई है। चूंकि यह स्कूल ऑनलाइन है, इसलिए दुनिया के किसी भी कोने से इसमें भाग लिया जा सकता है। इसे भी पढ़ें:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें? क्यों है यह स्कूल खास? एस्ट्रो नोवा (Astra Nova) स्कूल बच्चों को सिर्फ पढ़ाने में ही नहीं, बल्कि बच्चों को सोचने और समझने के लिए वक्त देता है। एलन मस्क का मानना है कि आने वाला भविष्य ऐसी समस्याएं लेकर आएगा, जिनका हल आज की शिक्षा प्रणाली नहीं दे सकती। इसलिए बच्चों को ऐसे तैयार करना जरूरी है कि वे नई सोच, तकनीकी समझ और रचनात्मकता के साथ आगे बढ़ें। यही वजह है कि Astra Nova अब केवल एक स्कूल नहीं, बल्कि एक ग्लोबल एजुकेशन मॉडल के रूप में उभर रहा है। एलन मस्क का एस्ट्रो नोवा स्कूल (Elon Musk’s Astra Nova School) पारंपरिक शिक्षा से हटकर एक ऐसा रास्ता दिखाता है जो बच्चों को रचनात्मक, जिज्ञासु और स्वतंत्र विचारक बनाता है। हालांकि इसकी फीस हर किसी के बजट में नहीं हो सकती, लेकिन यह एक उदाहरण है कि भविष्य की शिक्षा कैसी हो सकती है। ऐसी शिक्षा जो बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं देती, बल्कि उन्हें दुनिया को बदलने का नजरिया सिखाती है। Latest News in Hindi Today Hindi Astra Nova #ElonMusk #AstraNova #ElonMuskSchool #FuturisticEducation #TechEducation #ExpensiveSchool #EducationNews

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26/11 Mumbai Terror Attack: 26/11 हमले का मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा ने किए कई अहम खुलासे 

26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों (26/11 Mumbai Terror Attack) की भयावह यादें आज भी भारतवासियों के मन में ताजा हैं। इस हमले में 166 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। यह हमला पाकिस्तान-आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar E Taiba) द्वारा सुनियोजित रूप से अंजाम दिया गया था। इस हमले से जुड़े कई किरदारों के नाम सामने आ चुके हैं, जिसमें से एक प्रमुख नाम तहव्वुर हुसैन राणा (Tahawwur Hussain Rana) का भी है। हाल ही में इस मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा किए गए पूछताछ में राणा ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे हमलों की साजिश का अंदाजा मिलने के साथ-साथ पाकिस्तान की भूमिका भी सामने आई है। पाकिस्तानी सेना का ‘भरोसेमंद’ व्यक्ति तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) इस समय राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कस्टडी में है और उससे मुंबई क्राइम ब्रांच (Mumbai Crime Branch) ने अप्रैल 2025 में गहन पूछताछ की। राणा ने दावा किया कि वह कभी पाकिस्तानी सेना का भरोसेमंद व्यक्ति था। उसने यह भी बताया कि 1990 में इराक द्वारा कुवैत पर हमले के समय उसे सऊदी अरब में एक गुप्त सैन्य मिशन पर भेजा गया था। इससे साफ होता है कि उसे पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) के भीतर एक महत्वपूर्ण भूमिका मिली थी। राणा ने बताया कि उसने 1986 में रावलपिंडी स्थित आर्मी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया और फिर क्वेटा में सेना के डॉक्टर के रूप में तैनात हुआ। इसके अलावा उसने पाकिस्तान के संवेदनशील इलाकों जैसे सिंध, बलूचिस्तान, बहावलपुर और सियाचिन-बालोतरा सेक्टर में भी सेवा दी। कट्टर विचारधारा और पुराने बयान मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राणा मानसिक रूप से अभी भी अपने पुराने बयानों पर अडिग है। वह जानकारी तो दे रहा है, लेकिन उसकी बातचीत में उसकी कट्टरपंथी विचारधारा की झलक साफ दिखती है। उसकी बातों से यह भी समझा जा सकता है कि वह अब भी भारत के खिलाफ नकारात्मक भावनाएं रखता है। अन्य साजिशकर्ताओं से संबंध 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले (26/11 Mumbai Terror Attack) का आरोपी तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) ने पूछताछ में माना कि वह 26/11 के अन्य प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल साजिद मीर, मेजर इकबाल और अब्दुल रहमान पाशा को जानता था। ये तीनों पाकिस्तान से ताल्लुक रखते हैं और लश्कर-ए-तैयबा  (Lashkar E Taiba) के अहम सदस्य है। भारत में हुए सबसे बड़े आतंकी हमले में इन सभी की भूमिका को पहले ही दस्तावेजी तौर पर दर्ज किया जा चुका है। डेविड हेडली से जुड़ी जानकारियां 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले (26/11 Mumbai Terror Attack) का आरोपी तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) ने अमेरिकी-पाकिस्तानी नागरिक डेविड हेडली के बारे में भी कई खुलासे किए। उसने बताया कि हेडली ने 2003-2004 के दौरान लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar E Taiba) के तीन प्रशिक्षण शिविरों में भाग लिया था। हालांकि वह इन कोर्सों के नाम स्पष्ट रूप से नहीं बता सका। जब मुंबई में खुले इमिग्रेशन सेंटर के विचार पर सवाल किया गया, तो राणा ने दावा किया कि यह विचार उसका था, न कि हेडली का। उसने यह भी कहा कि उसने हेडली को जो पैसे भेजे, वे व्यवसायिक खर्चों के लिए थे। हालांकि, वह यह स्वीकार करता है कि मुंबई में दफ्तर होने के बावजूद ग्राहकों को आकर्षित करने में समस्याएं आ रही थीं। सैन्य करियर और बर्खास्तगी 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले (26/11 Mumbai Terror Attack) का आरोपी तहव्वुर राणा ने अपने सैन्य करियर के बारे में बताते हुए कहा कि सियाचिन पोस्टिंग के दौरान उसे पल्मोनरी एडिमा (फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर स्थिति) हो गई थी, जिससे वह लंबे समय तक ड्यूटी पर नहीं लौट सका। इस कारण उसे पाकिस्तानी सेना द्वारा भगोड़ा घोषित कर दिया गया और बाद में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। अमेरिका से भारत तक का सफर तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) मूल रूप से पाकिस्तान का निवासी है लेकिन बाद में कनाडा की नागरिकता ले ली थी और अमेरिका में बस गया था। वह एक व्यवसायी के रूप में अमेरिका में कार्य कर रहा था। राणा की अमेरिका में गिरफ्तारी के बाद भारत ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की थी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अप्रैल 2024 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राणा की अपील खारिज कर दी और उसका भारत प्रत्यर्पण सुनिश्चित हुआ। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले (26/11 Mumbai Terror Attack) का आरोपी तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) से हुई पूछताछ भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए बेहद अहम है। उसके बयानों से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियों की भूमिका 26/11 जैसे हमलों में कितनी गहरी है। राणा जैसे व्यक्ति, जो पहले डॉक्टर थे और सेना में सेवा कर चुके थे, किस प्रकार आतंकवाद की ओर मुड़े, यह न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कट्टरपंथ कैसे शिक्षित और प्रशिक्षित लोगों को भी प्रभावित कर सकता है। आने वाले समय में तहव्वुर राणा  (Tahawwur Rana) से और भी खुलासे होने की संभावना है, जो इस हमले से जुड़े शेष रहस्यों से पर्दा उठा सकते हैं। साथ ही, यह भारत के लिए वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के खिलाफ ठोस सबूत भी प्रस्तुत कर सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news  #TahawwurRana #MumbaiTerrorAttack #Kasab #MumbaiAttack

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भारतीयों के लिए सुनहरा मौका: UAE का न्यू गोल्डन वीजा (New Golden Visa) मिलना हुआ आसान

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इंडियन सिटीजन के लिए एक बड़ी सौगात पेश की है। अब इंडियन प्रोफेशनल के लिए यूएई का वीजा (UAE Visa) पाना पहले से कहीं ज्यादा सरल हो गया है। यूएई सरकार (UAE Government) ने भारतीयों के लिए न्यू गोल्डन वीजा योजना की शुरुआत की है, जो खासकर योग्य प्रोफेशनल्स को आकर्षित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इस योजना के तहत अब न केवल बड़े निवेशक और उद्योगपति, बल्कि सामान्य प्रोफेशनल्स, डिजिटल क्रिएटर्स, शिक्षक, प्रोफेशर और हेल्थकेयर से जुड़े लोग भी इस खास न्यू गोल्डन वीजा (New Golden Visa) का लाभ उठा सकते हैं। क्या है न्यू गोल्डन वीजा (New Golden Visa)? न्यू गोल्डन वीजा (New Golden Visa) एक लाइफटाइम रेजीडेंसी वीजा (Residence Visa) है, जिसका मतलब है कि वीजा धारक को बार-बार वीजा रिन्यू कराने की जरूरत नहीं होगी। यह वीजा UAE में स्थायी निवास, व्यवसाय और पारिवारिक सुविधाओं के साथ आता है। इसका उद्देश्य वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करना और UAE की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विकास में उनका योगदान सुनिश्चित करना है। किन-किन पेशों के लोगों को मिलेगा लाभ? इस योजना के अंतर्गत अब सिर्फ पैसे वाले व्यक्ति ही नहीं, बल्कि कई अन्य वर्गों के भारतीय नागरिक भी पात्र होंगे। जैसे-  इस प्रकार न्यू गोल्डन वीजा (New Golden Visa) सिर्फ अमीरों तक सीमित न रहकर अब वास्तविक कौशल और योग्यता रखने वाले भारतीय नागरिकों के लिए भी खुल गया है। भारत को क्यों मिली प्राथमिकता? भारत और UAE के बीच 2022 में CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) लागू हुआ था, जिसके चलते दोनों देशों के आर्थिक और सामाजिक संबंध और भी प्रगाढ़ हुए हैं। इसी सहयोग के तहत भारत को इस वीजा योजना के पायलट प्रोजेक्ट में प्राथमिकता दी गई है। यूएई सरकार (UAE Government) ने भारत को पहला ऐसा देश बनाया है जहां इस योजना को सबसे पहले लागू किया जा रहा है। वीजा अप्लाई करने का तरीका  इस पूरी प्रक्रिया को Rayad Group के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। यह ग्रुप UAE सरकार द्वारा अधिकृत है और आवेदन की जांच कर उन्हें आगे भेजता है। Rayad Group आपकी प्रोफाइल को निम्नलिखित मापदंडों पर जांचता है: क्रिमिनल रिकॉर्ड और मनी लॉन्ड्रिंग स्टेटस सोशल मीडिया गतिविधियाँ और ऑनलाइन व्यवहार आपका UAE की अर्थव्यवस्था या संस्कृति में योगदान (जैसे स्टार्टअप, इनोवेशन, एजुकेशन, हेल्थकेयर आदि में) जांच प्रक्रिया के बाद, यदि आप योग्य पाए जाते हैं तो आपका आवेदन UAE सरकार को भेजा जाता है। Rayad Group का अनुमान है कि अगले तीन महीनों में 5,000 से ज्यादा भारतीय इस वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। न्यू गोल्डन वीजा (New Golden Visa) के लिए आवेदन कैसे करें? आप निम्न माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं: न्यू गोल्डन वीजा फीस कितनी है? इस वीजा के लिए आवेदकों को AED 1,00,000 यानी लगभग 23.3 लाख रुपये का भुगतान करना होगा। यह राशि लाइफटाइम रेजीडेंसी की सुविधा के साथ दी जाती है, जो दीर्घकालिक निवेश के इच्छुक पेशेवरों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इसे भी पढ़ें:- कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट? क्या-क्या मिलेंगे फायदे? न्यू गोल्डन वीजा  (New Golden Visa) धारकों को निम्नलिखित प्रमुख लाभ मिलते हैं: पहले यह वीजा किनके लिए था? जब 2019 में गोल्डन वीजा (Golden Visa) लॉन्च किया गया था, तब यह केवल करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी में निवेश करने वाले अमीर व्यक्तियों के लिए था। लेकिन 2022 से इसमें बदलाव कर इसे ज्यादा समावेशी बना दिया गया है। अब सामान्य लेकिन योग्य प्रोफेशनल्स को भी इसमें जगह दी जा रही है। संयुक्त अरब अमीरात का न्यू गोल्डन वीजा (New Golden Visa) भारतीयों के लिए वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान बनाने का अवसर है। यह न केवल पेशेवरों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाने का माध्यम बनेगा, बल्कि भारत-UAE संबंधों को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। यदि आप एक योग्य और मेहनती पेशेवर हैं, तो यह वीजा आपके सपनों को नई उड़ान देने का सुनहरा अवसर हो सकता है। लेकिन ध्यान रखें कि UAE गोल्डन वीजा (UAE Golden Visa) अप्लाई करने से पहले फेक वेबसाइट या फ्रॉड करने वाले लोगों की मदद ना लें। Latest News in Hindi Today Hindi New Golden Visa #uaegoldenvisa #goldenvisaforindians #uaevisa2025 #indiansinuae #uaeimmigration #uaeopportunity

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Shri Ram Mandir Ayodhya

Shri Ramayana Yatra Tour Package: IRCTC की ‘श्री रामायण यात्रा’

बारिश के मौसम में अगर आप कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) आपके लिए एक बेस्ट ट्रेवल पैकेज लेकर आया है। IRCTC द्वारा इस वर्ष श्री रामायण यात्रा नाम की विशेष ट्रेन टूर पैकेज (Shri Ramayana Yatra Tour Package) का आयोजन किया जा रहा है, जो धार्मिक आस्था से जुड़े लोगों के लिए एक सुनहरा अवसर है। यह यात्रा 25 जुलाई 2025 से शुरू होगी और कुल 17 दिनों की होगी, जिसमें देशभर के 30 प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा कराई जाएगी। आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा  श्री राम मंदिर अयोध्या (Shri Ram Mandir Ayodhya) के उद्घाटन के बाद से ही धार्मिक पर्यटन को देशभर में जबरदस्त गति मिली है। IRCTC भी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है और यह  श्री रामायण यात्रा नाम की विशेष ट्रेन टूर पैकेज (Shri Ramayana Yatra Tour Package) उसी का हिस्सा है। यह पांचवीं बार है जब यह विशेष यात्रा आयोजित की जा रही है। इसके माध्यम से रामभक्तों को भगवान श्रीराम (Lord Shri Ram) के जीवन से जुड़े विभिन्न स्थलों का दर्शन करने का अवसर मिलेगा। यात्रा का मार्ग और प्रमुख स्थल श्री रामायण यात्रा (Shri Ramayana Yatra) की शुरुआत दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से होगी और यह भारत गौरव डीलक्स एसी पर्यटक ट्रेन से संचालित की जाएगी। ट्रेन अयोध्या से होकर नंदीग्राम, सीतामढ़ी, जनकपुर, बक्सर, वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट, नासिक, हम्पी और रामेश्वरम होते हुए  फिर दिल्ली लौटेगी। ट्रेन में मिलने वाली सुविधाएं भारत गौरव डीलक्स एसी पर्यटक ट्रेन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। इसमें दो रेस्टोरेंट, एक एडवांस  किचन, कोच में शॉवर क्यूबिकल, सेंसर आधारित वॉशरूम, फुट मसाजर, CCTV कैमरा, और सुरक्षा गार्ड की सुविधा उपलब्ध है। यात्रियों के आराम और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है। पैकेज शुल्क और व्यवस्थाएं इस रामायण यात्रा टूर के लिए विभिन्न श्रेणियों के अनुसार किराया तय किया गया है: इस पैकेज में यात्रियों को 3-स्टार होटलों में ठहरने की व्यवस्था, शुद्ध शाकाहारी भोजन, दर्शनीय स्थलों पर ले जाने की सुविधा और यात्रा बीमा भी शामिल है। यह टूर पूरी तरह से सुविधाजनक है, जिसमें यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो सकती है। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? क्यों है यह यात्रा खास? श्री रामायण यात्रा (Shri Ram Mandir Ayodhya) न केवल धार्मिक आस्था को बल देती है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और आध्यात्मिक विरासत को जानने का एक अद्भुत अवसर भी प्रदान करती है। यह यात्रा उन लोगों के लिए आदर्श है जो भगवान राम के जीवन से जुड़े स्थलों को स्वयं जाकर अनुभव करना चाहते हैं। इसके माध्यम से यात्रियों को यह समझने का मौका मिलता है कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का एक अहम हिस्सा है। अगर आप इस मानसून में कुछ अलग, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो IRCTC की श्री रामायण यात्रा (Shri Ramayana Yatra) आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक यादगार और समृद्ध अनुभव भी है जो जीवन भर आपके साथ रहेगा। टिकट जल्दी भरने की संभावना है, इसलिए यदि आप इस यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो जल्द से जल्द अपनी सीट आरक्षित करा लेना बेहतर रहेगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Shri Ram Mandir Ayodhya #ShriRamayanaYatra #IRCTCTourPackage #RamayanaCircuit #SpiritualTour #RamayanaTrain

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Instagram Earnings How and When You Start Making Money

Instagram: इंस्टाग्राम से कमाई कैसे और कब शुरू होती है कमाई?

आज की डिजिटल वर्ल्ड में इंस्टाग्राम सिर्फ एक फोटो और वीडियो शेयर करने वाला प्लेटफॉर्म नहीं रहा। भारत में लाखों यूज़र्स इस ऐप का इस्तेमाल न सिर्फ सोशल नेटवर्किंग के लिए कर रहे हैं, बल्कि इसे एक फुल-टाइम करियर में भी बदल चुके हैं। सवाल यह है कि इंस्टाग्राम से कमाई आखिर कैसे होती है? क्या सिर्फ फॉलोवर्स और लाइक्स काफी हैं या इसके पीछे कुछ और शर्तें भी होती हैं? क्या Instagram खुद पैसे देता है? YouTube की तरह Instagram का कोई व्यापक और सीधा मोनेटाइजेशन सिस्टम नहीं है जिसमें विज्ञापनों से सीधे पैसे मिलते हों। लेकिन Instagram ने अब कुछ सीमित देशों जैसे अमेरिका, यूके और कनाडा में क्रियेटर मॉनेटाइजेशन (Creator Monetization) फीचर्स लॉन्च किए हैं, जैसे: Badges in Live: जब क्रिएटर्स लाइव आते हैं तो फैंस छोटे पेमेंट करके बैज खरीद सकते हैं। Reels Bonus: इंस्टाग्राम कुछ यूज़र्स को उनके रील्स के प्रदर्शन पर बोनस देता है। Affiliate Program: इसमें आप किसी प्रोडक्ट का लिंक शेयर कर सकते हैं और बिक्री पर कमीशन कमा सकते हैं। भारत में ये फीचर्स धीरे-धीरे रोल आउट हो रहे हैं, लेकिन अभी तक हर किसी को उपलब्ध नहीं हैं। फिर भी भारतीय क्रिएटर्स मुख्य रूप से ब्रांड डील्स, स्पॉन्सरशिप और एफिलिएट मार्केटिंग के जरिए कमाई कर रहे हैं। कितने फॉलोवर्स पर मिलने लगते हैं पैसे? इंस्टाग्राम से कमाई सिर्फ फॉलोवर्स की संख्या पर निर्भर नहीं करती, बल्कि आपकी  engagement rate (यानि आपके पोस्ट पर कितने लाइक्स, कमेंट्स, व्यूज़ आ रहे हैं) पर निर्भर करती है। इंफ्लुएंसर टाइप फॉलोवर्स अनुमानित कमाई/पोस्ट अगर आप अच्छा और सही कंटेंट दिखा रहे हैं, तो 5,000 फॉलोवर्स पर भी ब्रांड आपसे संपर्क कर सकते हैं। कुछ नैनो इंफ्लुएंसर्स महीने में 15,000 – 50,000 रुपये तक कमा रहे हैं। क्या सिर्फ लाइक्स से पैसे मिलते हैं? सीधे तौर पर लाइक्स से पैसे नहीं मिलते। लेकिन लाइक्स, कमेंट्स और व्यूज़ आपकी इंगेजमेंट रेट को दर्शाते हैं, जो ब्रांड्स को बताता है कि आपका कंटेंट लोगों तक पहुंच रहा है और पसंद भी किया जा रहा है। ब्रांड्स इस डेटा को देखकर तय करते हैं कि वे आपको प्रमोशन के लिए कितना पेमेंट करेंगे। इसलिए, सिर्फ फॉलोवर्स बढ़ाने से कुछ नहीं होगा, इंगेजमेंट पर भी काम करना ज़रूरी है। कमाई के अन्य तरीके इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले भारत में Instagram मार्केट की स्थिति भारत में इंस्टाग्राम इंफ्लुएंसर मार्केट बहुत तेजी से बढ़ रहा है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार-  चुनौतियाँ और सावधानियाँ इंस्टाग्राम अब सिर्फ एक सोशल मीडिया ऐप नहीं, बल्कि एक करियर प्लेटफ़ॉर्म बन चुका है। लेकिन इसमें सफल होने के लिए आपको केवल दिखावे से आगे बढ़कर, कंटेंट की गुणवत्ता, नियमितता और ट्रस्ट पर काम करना होगा। Latest News in Hindi Today Hindi  इंस्टाग्राम #instagram #earnfrominstagram #instaincome #instagrammonetization #socialmediaincome #contentcreator #influencermarketing

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Rahul Gandhi Slams Centre on US Tariff Policy Deadline

अमेरिकी टैरिफ नीति पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर तीखा हमला: क्या भारत झुकेगा ट्रंप की डेडलाइन के आगे?

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Congress Leader Rahul Gandhi) ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर सीधा हमला किया है। इस बार उनके निशाने पर है भारत और अमेरिका (India and America) के बीच चल रहा टैरिफ विवाद। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Union Commerce Minister Piyush Goyal) पर आरोप लगाया कि वे अमेरिका के दबाव में आकर राष्ट्रीय हितों से समझौता कर सकते हैं। राहुल गांधी का ट्वीट और आरोप राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा है कि पीयूष गोयल (Piyush Goyal) चाहे जितना सीना ठोक लें, मेरी बात लिख लीजिए, मोदी ट्रंप की टैरिफ डेडलाइन (Tariff Deadline) के सामने चुपचाप झुक जाएंगे। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब भारत और अमेरिका (India and America) के बीच व्यापार शुल्क (Tariff) को लेकर काफी तनाव बना हुआ है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि सरकार अमेरिकी दबाव के सामने आत्मसमर्पण कर सकती है। क्या है टैरिफ विवाद? इस पूरे विवाद की जड़ अमेरिका की वह नीति है जिसके तहत ट्रंप प्रशासन (Trump Government) ने लगभग 100 देशों पर जवाबी टैरिफ लगाए थे, जिनमें भारत पर 26% तक का शुल्क शामिल था। अमेरिका ने हालांकि इन टैरिफ को 90 दिनों के लिए टाल दिया था, लेकिन यह छूट अब 9 जुलाई को समाप्त होने जा रही है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच व्यापार डील को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी बाजार व्यवस्था को अधिक खुला करे और अमेरिकी उत्पादों (American Products) पर लगने वाले शुल्कों में कटौती करे। वहीं भारत की कोशिश है कि वह व्यापार संतुलन को बनाए रखते हुए अपने घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा करे। सरकार का पक्ष: भारत किसी दबाव में नहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Union Commerce Minister Piyush Goyal) ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भारत अपने व्यापार समझौते केवल अपनी शर्तों पर करता है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका, यूरोपीय संघ, न्यूजीलैंड, चिली और ओमान जैसे कई देशों के साथ वार्ता जारी है, लेकिन भारत तभी समझौता करेगा जब वह राष्ट्रहित में हो। पीयूष गोयल ने यह भी कहा है कि हम किसी डेडलाइन के दबाव में आकर फैसले नहीं करते। जब कोई डील देश के लिए लाभदायक होती है, तभी उसे मंजूरी दी जाती है। विपक्ष क्यों उठा रहा है सवाल? राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ही नहीं, बल्कि विपक्ष के अन्य नेता भी लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि सरकार अमेरिकी दबाव में क्यों दिख रही है। विपक्ष का कहना है कि जब ट्रंप प्रशासन ने भारत पर टैरिफ लगाया, तब भारत ने पर्याप्त रूप से आक्रामक प्रतिक्रिया नहीं दी। राहुल गांधी ने इसे सरकार की कमजोरी बताते हुए कहा कि यह आत्मनिर्भरता के दावों के खिलाफ है। इसे भी पढ़ें:-  क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी? क्या होगा 9 जुलाई के बाद? अब जब टैरिफ में दी गई 90 दिनों की छूट 9 जुलाई को खत्म हो रही है, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत का अगला कदम क्या होगा। अगर अमेरिका दोबारा टैरिफ लागू करता है और भारत उसके सामने कोई रियायत देता है, तो विपक्ष को सरकार को घेरने का एक और मौका मिल जाएगा। वहीं, अगर भारत अमेरिकी दबाव को नकारता है, तो दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में तनाव और बढ़ सकता है। भारत की रणनीति क्या हो सकती है? भारत के लिए यह स्थिति बेहद नाजुक है। एक ओर उसे अमेरिका जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार के साथ संबंध मजबूत रखने हैं, वहीं दूसरी ओर उसे घरेलू उद्योगों और किसान वर्ग के हितों की रक्षा भी करनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को ऐसे समझौते करने चाहिए जो दीर्घकालिक रणनीति और आत्मनिर्भरता को ध्यान में रखते हुए किए जाएं। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के आरोपों ने एक बार फिर से टैरिफ नीति और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों (India-US trade relations) को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब यह सरकार पर निर्भर करता है कि वह इस दबाव से कैसे निपटती है। क्या वह अमेरिकी समयसीमा के आगे झुकती है या एक मजबूत और संतुलित निर्णय लेती है। आने वाले दिनों में इसका असर न सिर्फ भारत की विदेश नीति पर, बल्कि देश की आंतरिक राजनीति पर भी पड़ सकता है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Narendra Modi #RahulGandhi #USTariffPolicy #TrumpDeadline #IndiaUSRelations #ModiGovt #TradePolicy #RahulVsModi

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Krishna Janmbhoomi Case HC Rejects Plea

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद: हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिका खारिज की, मामला सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ा

मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद (Shri Krishna Janmabhoomi and Shahi Idgah dispute) एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह बनी है इलाहाबाद हाई कोर्ट का एक महत्वपूर्ण फैसला, जिसमें अदालत ने हिंदू पक्ष की उस अर्जी को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करने की मांग की थी। इस निर्णय से जहां मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत मिली है, वहीं हिंदू पक्ष अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। यह मामला संवेदनशील धार्मिक भावनाओं और ऐतिहासिक विवाद से जुड़ा होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है। क्या थी याचिका? हिंदू पक्ष की ओर से यह याचिका वकील महेंद्र प्रताप सिंह ने दायर की थी, जो खुद इस मुकदमे में वादी हैं। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) में सूट नंबर 13 के अंतर्गत एक एप्लीकेशन (A-44) दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि शाही ईदगाह मस्जिद (Shahi Idgah Mosque) को अदालत की सभी कार्यवाहियों में विवादित ढांचा के रूप में संबोधित किया जाए। इस आवेदन में कोर्ट के स्टेनोग्राफर को निर्देश देने की भी अपील की गई थी कि जब तक मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक मस्जिद का उल्लेख केवल विवादित ढांचे के रूप में किया जाए। लेकिन अदालत ने इस प्रार्थना पत्र को अस्वीकार कर दिया। मुस्लिम पक्ष को मिली राहत हाई कोर्ट (High Court) के इस फैसले से मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत मिली है। मुस्लिम पक्ष की ओर से इस आवेदन पर लिखित आपत्ति भी दायर की गई थी, जिसमें इस मांग को असंवैधानिक और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली बताया गया। अदालत ने यह स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी कि इस स्तर पर मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करना उचित नहीं है।  अब सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी हिंदू पक्ष के वकील महेंद्र प्रताप सिंह ने फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए बताया कि वे कोर्ट के डिटेल्ड ऑर्डर का अध्ययन करने के बाद इस मामले को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में ले जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि उनका लक्ष्य केवल ऐतिहासिक तथ्यों की सत्यता को न्यायिक रूप से स्थापित करना है और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद यह विवाद भारत के सबसे पुराने और संवेदनशील धार्मिक विवादों में से एक माना जाता है। मथुरा में स्थित 11 एकड़ भूमि को लेकर यह विवाद है, जिसमें से 2.37 एकड़ जमीन पर शाही ईदगाह मस्जिद (Shahi Idgah Mosque) स्थित है और शेष हिस्सा श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के पास है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने 1669-70 में प्राचीन केशवदेव मंदिर को नष्ट कर इस मस्जिद का निर्माण करवाया था। उनका कहना है कि यही वह स्थान है जहां भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) का जन्म हुआ था। इसलिए वे चाहते हैं कि मस्जिद को हटाकर उस स्थान को पूरी तरह से मंदिर के रूप में पुनर्स्थापित किया जाए। वहीं मुस्लिम पक्ष इस दावे को नकारता है। उनका कहना है कि मस्जिद का निर्माण पूरी तरह वैध और कानूनी रूप से मान्य है और वह जमीन उन्हें किसी विवाद के तहत नहीं दी गई थी। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? ऐतिहासिक और कानूनी संदर्भ यह मामला पहली बार 1968 में सुर्खियों में आया था, जब श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट और शाही ईदगाह ट्रस्ट के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने अपने-अपने अधिकारों को मान्यता दी थी और विवाद खत्म करने का प्रयास किया गया था। लेकिन हाल के वर्षों में इस समझौते को चुनौती (Shri Krishna Janmabhoomi and Shahi Idgah dispute) दी जा रही है और कई नए मुकदमे दायर किए गए हैं। 2020 के बाद से कई नए याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह मांग की है कि पुराने समझौते को रद्द कर मंदिर भूमि को पूरी तरह से हिंदू ट्रस्ट (Hindi Trust) को सौंपा जाए। इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) द्वारा याचिका A-44 को खारिज किए जाने से यह स्पष्ट है कि अदालत फिलहाल कोई पूर्वग्रह या भावनात्मक आधार पर फैसला नहीं लेना चाहती। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की ओर बढ़ रहा है, जहां इसे संविधान, इतिहास और कानून के परिप्रेक्ष्य में देखा जाएगा। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर न्यायपालिका की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यह न केवल न्याय सुनिश्चित करती है बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी बनाए रखने में अहम योगदान देती है। आने वाले समय में यह देखना रोचक होगा कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस ऐतिहासिक विवाद पर क्या रुख अपनाता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Shri Krishna Janmabhoomi #KrishnaJanmbhoomi #ShahiEidgah #SupremeCourt #HighCourtVerdict #HinduMuslimDispute

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Congress Sanitary Pad Scheme Sparks Controversy in Bihar Polls

बिहार चुनाव में महिलाओं को साधने की कोशिश: कांग्रेस की ‘सैनिटरी पैड स्कीम’ पर उठा विवाद

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। सभी राजनीतिक दल अपने-अपने चुनावी वादों और अभियानों के ज़रिए जनता को लुभाने की कोशिश में लगे हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी (Congress Party) ने राज्य की महिलाओं को साधने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। पार्टी ने माई बहिन मान योजना (Maai Bahin Maan Yojana) के तहत महिलाओं के बीच 5 लाख सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) बांटने की योजना बनाई है। हालांकि यह स्कीम अब राजनीतिक विवाद का कारण बन गई है और विपक्ष खासतौर से बीजेपी (BJP) ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। महिलाओं को जागरूक करने का दावा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार (Rajesh Kumar, State Congress President) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस योजना की घोषणा करते हुए कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान को ध्यान में रखते हुए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रदेश की 5 लाख महिलाओं तक मुफ्त सैनिटरी नैपकिन (Sanitary Pads) पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जो कि महिला कांग्रेस की अगुवाई में वितरित किए जाएंगे। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की महिलाओं को मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है, जो आज भी एक बड़ा सामाजिक मुद्दा बना हुआ है। विवाद की वजह: पैकेट पर राहुल गांधी की तस्वीर इस सामाजिक अभियान पर विवाद तब शुरू हुआ जब वितरित किए जाने वाले सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) के पैकेट पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तस्वीर छपी हुई पाई (Rahul Gandhi photo on Sanitary Pads) गई। इससे इस योजना की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठने लगे। बीजेपी (BJP) ने इसे प्रचार का एक तरीका बताया है और कांग्रेस (Congress) पर चुनावी लाभ के लिए महिलाओं की समस्याओं का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। बीजेपी प्रवक्ता कुंतल कृष्णा ने मीडिया से कहा कि यह कांग्रेस की चापलूसी की पराकाष्ठा और मानसिक दिवालियापन का प्रमाण है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की तस्वीर सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) के पैकेट पर लगाकर कांग्रेस ने यह साबित कर दिया है कि वह अपने नेताओं को कहां स्थापित करना चाहती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर कांग्रेस केवल चुनावी स्टंट कर रही है। ‘माई बहिन मान योजना’ क्या है? कांग्रेस पार्टी की ‘माई बहिन मान योजना (Maai Bahin Maan Yojana) एक ऐसी सामाजिक और चुनावी पहल है, जिसके तहत पार्टी ने महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने का वादा किया है। यह राशि विशेष रूप से वंचित, ग्रामीण और कामकाजी महिलाओं को दी जाएगी। इस योजना को पार्टी ने महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया है और कहा है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है, तो इस योजना को लागू किया जाएगा। स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी सामाजिक आवश्यकता भारत जैसे विकासशील देश में विशेषकर बिहार जैसे राज्य में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता अब भी एक वर्जित विषय बना हुआ है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार बिहार में केवल 30% महिलाएं ही सैनिटरी नैपकिन का नियमित इस्तेमाल करती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा और भी कम है। ऐसे में यदि कोई राजनीतिक पार्टी महिलाओं तक मुफ्त सैनिटरी नैपकिन पहुंचाने का कार्य करती है, तो वह निश्चित रूप से एक ज़रूरी सामाजिक कदम कहा जा सकता है, बशर्ते इसमें राजनीतिक लाभ की मंशा हावी न हो। क्या है विशेषज्ञों की राय? स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यों से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि मासिक धर्म से जुड़ी स्वच्छता और शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है, लेकिन इसे राजनीतिक प्रचार के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करना निंदनीय है।  कांग्रेस की 5 लाख सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) बांटने की योजना एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल हो सकती थी, यदि इसे केवल महिलाओं की मदद और जागरूकता तक सीमित रखा जाता। लेकिन राजनीतिक छवि निर्माण के प्रयासों ने इस योजना को विवादों में ला खड़ा किया है। यह स्पष्ट है कि बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में महिलाएं एक बड़ा वोट बैंक बनकर उभरी हैं और सभी पार्टियां उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही हैं। सवाल यह नहीं है कि सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) बांटे जाएं या नहीं, सवाल यह है कि क्या महिलाओं की गरिमा को बनाए रखते हुए, उन्हें राजनीति से ऊपर रखकर सहायता प्रदान की जाएगी? चुनावी लाभ से परे जाकर महिलाओं के लिए सोचने का वक्त अब आ गया है। Latest News in Hindi Today Hindi Rahul Gandhi Sanitary Pads #BiharElections2025 #CongressScheme #SanitaryPadControversy #WomenVoters #PoliticalDebate

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