Vineet Pandey

turmoil of Maharashtra

महाराष्ट्र की राजनीतिक घमासान में एक दो नहीं 4-4 ‘संजय’ पर चर्चा, तीखी जुबानी जंग से लेकर हाथापाई तक 

महाराष्ट्र की राजनीति में एक तरफ जहां मराठी बनाम हिंदी भाषा का मुद्दा गर्म है, वहीं राज्य में संजय नाम के नेता भी सुर्खियों में हैं। एक तरफ जहां उद्धव ठाकरे गुट के मुख्य प्रवक्ता और राज्य सभा सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) अपने बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस से शिंदे गुट वाली शिवसेना में आए संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) भी विपक्ष पर तीखा पलटवार करने के कारण मीडिया में छाए रहते हैं। इन दोनों संजय के अलावा महाराष्ट्र में संजय नाम से दो और ऐसे नेता हैं, जो चर्चा में बने रहते हैं। ये हैं संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) और संजय गायकवाड़ (Sanjay Gaikwad)।  संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) राज्य सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री हैं और इस समय कैश कांड वीडियो को लेकर चर्चा में बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ संजय गायकवाड़ मुंबई के आकाशवाणी की कैंटीन में खराब खाने को लेकर मारपीट करने के चक्कर में चर्चित हो चुके हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में देखें तो ये चारों संजय इस समय एक दूसरे पर हमलवार हैं। संजय राउत (Sanjay Raut) जहां शिरसाट और गायकवाड़ को घेरने में जुटे हैं, तो वहीं संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) अपने बयानों से राउत पर प्रहार कर रहे हैं।  संजय राउत बनाम संजय शिरसाट और संजय निरुपम बता दें कि मंत्री संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) को आयकर विभाग ने संपत्ति में गड़बड़ी को लेकर नोटिस भेजा हुआ है। इस पर राजनीति अभी थमी भी नहीं थी कि संजय राउत (Sanjay Raut) ने शिरसाट के बेडरूम का एक वीडियो जारी किया। जिसमें शिरसाट कथित तौर पर नोटों से भरे एक बैग के पास सिगरेट पीते नजर आ रहे हैं। संजय राउत ने इस वीडियो के माध्यम से शिंदे की शिवसेना पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए घेरा है। वहीं संजय शिरसाट ने बैग में कपड़े होने का दावा करते हुए राउत पर मानहानि का केस करने की चेतावनी दी है।  वहीं दूसरी तरफ संजय निरुपम और संजय राउत (Sanjay Raut) भी एक दूसरे पर लगातार प्रहार करने में जुटे हैं। पिछले दिनों संजय राउत ने दावा किया था कि गुरु पूर्णिमा के दिन एकनाथ शिंदे अपने “गुरु” गृह मंत्री अमित शाह से मिलने दिल्ली गए थे। राउत के इस दावे को संजय निरुपम ने झूठा बातते हुए घेरा। निरुपम ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के दिन अमित शाह झारखंड में थे और वहां एक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे। यह सभी को पता है, लेकिन इसके बाद भी राउत ने गंदी राजनीति के लिए झूठ फैलाया। इसके लिए राउत को बिना किसी शर्त एकनाथ शिंदे से माफी मांगनी चाहिए। साथ ही राउत को चटुकार तक कह दिया। इसके बाद से ही दोनों में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।   इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ संजय गायकवाड़ भी भर रहे हुंकार बुलढाणा विधानसभा से विधायक संजय गायकवाड़ अपने कैंटीन प्रकरण को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। गायकवाड़ ने खराब खाने का आरोप लगाते हुए कैंटीन कर्मचारियों के साथ मारपीट की थी, जिसका वीडियो वायरल हो गया। गायकवाड़ के इस हरकत पर महराष्ट्र में खूब बवाल हुआ है। विवाद बढ़ने के बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कार्रवाई के लिए यह मामला विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर को रेफर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि स्पीकर इस मामले में क्या एक्शन लेते हैं। संजय गायकवाड़ अपनी हरकतों और बयानों को लेकर अक्सर कंट्रोवर्सी में रहते हैं। कैंटीन कर्मचारियों को पीटने के बाद गायकवाड़ ने विवादित बयान देते दक्षिण भारतीयों पर भी निशाना साधा था। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था साउथ इंडियन डांस और लेडीज बार चला मराठा संस्कृति को खराब कर रहे हैं। ऐसे लोगों को कैंटीन के ठेके नहीं मिलने चाहिए। Latest News in Hindi Today Hindi news  #Maharashtraelection #Election2025 #Mumbai #Devendrafadnavish

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Election Commission

बिहार में वोटर लिस्ट से कट सकते हैं 35 लाख से ज्यादा नाम,  वेरिफिकेशन प्रक्रिया में अब तक 88% मतदाताओं ने भरा गणना पत्र

बिहार में चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा कराया जा रहा मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण और सत्यापन कार्य (SIR) अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। आयोग की यह महत्त्वाकांक्षी पहल 24 जून 2025 को राज्यभर में गणना फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो 25 जुलाई तक चलेगा। मतलब अब इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मात्र 10 दिन और रह गए हैं। एसआईआर (SIR) के तहत अब तक 7 करोड़ 90 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाताओं में से 6 करोड़ 60 लाख 67 हजार 208 लोगों ने अपने गणना फॉर्म सफलतापूर्वक भरकर जमा करा दिए हैं। यह आंकड़ा कुल मतदाताओं का लगभग 88 फीसदी है, जो आयोग के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है। हालांकि, इस प्रक्रिया में जो सबसे चौकाने वाली सामने आई है, वह यह है कि अब तक के सर्वेक्षण और फॉर्म सत्यापन के आधार पर करीब 35 लाख 69 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट (Voter List) से हटाए जा सकते हैं। यह आंकड़ा उन मतदाताओं का है, जो सत्यापन के दौरान या तो मृत पाए गए या एक से ज्यादा स्थानों पर पंजीकृत मिले या फिर स्थायी रूप से किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो गए। मतदाता सूची से हट सकता है बिहार के 4.52% लोगों का नाम चुनाव आयोग (Election Commission) की वेबसाइट पर अब तक कुल 5 करोड़ 74 लाख से अधिक प्रपत्र अपलोड किए जा चुके हैं। दस्तावेजों के आधार पर बताया गया है कि सत्यापन के दौरान 1.59% मतदाता मृत पाए गए और 2.2% ने स्थायी रूप से अपने निवास स्थान बदल चुक हैं। इसके अलावा 0.73% मतदाता ऐसे भी मिले हैं जो एक से ज्यादा स्थानों पर पंजीकृत पाए गए। कुल मिलाकर आयोग को इन तीनों श्रेणियों में 4.52% मतदाता ऐसे मिले हैं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।   वहीं, अब भी करीब 11.82% मतदाता ऐसे हैं जिन्होंने अपने फॉर्म आयोग के पास जमा नहीं किए हैं। आयोग इन बचे हुए मतदाताओं तक पहुंचने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। तीसरे दौर में राज्यभर में एक लाख बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को फिर से मैदान में उतारा गया है ताकि घर-घर जाकर बचे हुए मतदाताओं से फॉर्म भरवाया जा सके। इस कार्य में चुनाव आयोग को विभन्न राजनीतिक दलों द्वारा तैनात 1.5 लाख बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) का भी सहयोग मिल रहा है।  मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण और सत्यापन कार्य (SIR) के लिए बिहार के सभी 261 विधानसभा क्षेत्र के 5,683 वार्डों में विशेष शिविर लगाया गया है। इन शिविरों का उद्देश्य सभी विधानसभा में  मतदाता फॉर्म का सत्यापन करना है। साथ ही जो मतदाता अस्थायी रूप से राज्य से बाहर गए हैं, उनके लिए भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि वे भी ऑनलाइन या अन्य माध्यमों से समय रहते अपना फॉर्म जमा कर सकें। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? आयोग 1 अगस्त को जारी करेगा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट चुनाव आयोग (Election Commission) के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के बाद 1 अगस्त 2025 को मतदाता सूची का ड्राफ्ट संस्करण प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद मतदाताओं को आपत्ति और सुधार के लिए कुछ दिन के लिए समय दिया जाएगा, ताकि अंतिम सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि न रह जाए। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइनल मतदाता सूची जारी कर विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी जाएगी।   बिहार में चल रही इस मतदाता सत्यापन प्रक्रिया को भाजपा समेत एनडीए गठबंधन के दल जहां लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान वैध मतदाताओं का नाम भी सूची से हटाया जा रहा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news  #ElectionCommission #Biharelection2025 #Voterlist #SIR #Biharassemblyelection

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विवाद में घिर गए हैं Sanjay Shirsat

नोटों से भरे बैग के पास बैठकर सिगरेट फूंकते दिखे महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट, वीडियो वायरल होने के बाद महाराष्ट्र का सियासी पारा चढ़ा 

महाराष्ट्र सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) एक बार फिर विवादों में हैं। संजय शिरसाट का एक वीडियो (Sanjay Shirsat Viral Video) सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो एक कमरे में बैठकर सिगरेट पीते हुए नजर आ रहे हैं और उनके बगल में एक बैग रखा है जो नोटों से भरा हुआ प्रतीत हो रहा है। इस यह वीडियो को शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने अपने एक्स अकाउंट पर जारी किया। जिसके बाद से ही राज्य की राजनीत में हलचल मचा हुआ है। संजय राउत (Sanjay Raut) ने इस वीडियो (Sanjay Shirsat Viral Video) को अपने अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा, “मुझे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) पर तरस आ रहा है! वे कितनी बार यूं ही बैठे-बैठे अपनी प्रतिष्ठा को तार-तार होते देखेंगे? लाचारी का दूसरा नाम है – फडणवीस!” संजय राउत (Sanjay Raut) ने यह टिप्पणी करते हुए भाजपा और शिंदे गुट को एक साथ घेरने की कोशिश की है। राउत के इस पोस्ट के बाद जब विवाद ने तूल पकड़ा तो मंत्री संजय शिरसाट भी सामने आए और सफाई दी कि वीडियो में दिख रहे बैग में नकदी नहीं बल्कि उनके कपड़े रखे थे। उन्होंने कहा कि संजय राउत द्वारा लगाया गया आरोप निराधार है और यह केवल उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की एक गहरी साजिश है। आयकर विभाग ने कुछ दिन पहले ही भेजा था नोटिस बता दें कि वीडियो सामने आने के ठीक एक दिन पहले संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat Viral Video) ने मीडिया के सामने स्वीकार किया था कि आयकर विभाग ने उन्हें नोटिस भेजा है। यह नोटिस 2019 से 2024 के बीच उनकी व्यक्तिगत संपत्ति में आई असामान्य वृद्धि के आधार पर जारी किया गया है। शिरसाट औरंगाबाद (पश्चिम) से विधायक हैं और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाली शिवसेना के प्रमुख नेता हैं।  शिरसाट ने आयकर विभाग के नोटिस की जानकारी देते हुए कहा, “कुछ लोगों ने मेरे खिलाफ आयकर विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। मुझे बीते बुधवार को जवाब देना था, लेकिन मैंने और अधिक समय मांगा है। मैं सही स्पष्टीकरण दूंगा, कुछ भी गलत नहीं किया है।” संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) ने शुरुआत में दावा किया था कि लोकसभा सांसद और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के बेटे श्रीकांत शिंदे को भी आयकर विभाग से नोटिस मिला है। हालांकि, बाद में उन्होंने इस बयान से यू-टर्न लेते हुए कहा, “मेरे जवाब को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि श्रीकांत शिंदे को नोटिस मिला है कि नहीं, इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।” आदित्य ठाकरे का तीखा सवाल शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) ने भी इस मुद्दे पर शिंदे गुट पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आज संजय शिरसाट एक वीडियो में अंडरवियर और बनियान में बैठे दिखते हैं, उनके पास नकदी से भरे बैग हैं। हम ’50 खोखे एकदम ठीक’ जैसी बातें सुनते हैं, लेकिन अब ये दृश्य वीडियो में साफ दिख रहा है। इतना पैसा कहां से आया? क्या कोई ऐसे ही नोटों की गड्डियां लेकर घूमता है? क्या मुख्यमंत्री फडणवीस (Devendra Fadnavis) इस पर कोई कार्रवाई करेंगे? क्या इसी तरह से राज्य को लूटने का धंधा चलता रहेगा?” इसे भी पढ़ें:- 40 बैंक खातों में 106 करोड़ रुपये, छांगुर बाबा की कुंडली खंगालने में जुटी ईडी विपक्ष का हमला और सरकार की चुप्पी यह वीडियो अब राज्य की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। विपक्ष इस पूरे मामले को सत्ता में बैठे लोगों की कथित भ्रष्टाचार से जोड़कर देख रहा है, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) या शिंदे गुट की तरफ से अभी तक इस पर कोई ठोस बयान नहीं आया है। राजनीतिक जानकार इस वीडियो को महाराष्ट्र में सत्ता पक्ष की साख पर बड़ा धब्बा मान रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इस एक वीडियो ने राज्य में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। अगर सरकार ने इस मुद्दे पर कार्रवाई नहीं की तो विपक्ष आगामी स्थानीय निकाय चुनाव में इसे बड़ा मुद्दा बनाकर राज्य सरकार को घेर सकता है। हालांकि सरकार की तरफ से जिस तरह की चुप्पी नजर आ रही है, उसे देखते हुए कम ही लगता है कि इस मामले में कोई कार्रवाई हो सकती है।  Latest News in Hindi Today Hindi Devendra Fadnavis #SanjayShirsat #ViralVideo #MaharashtraPolitics #CashBagControversy #PoliticalScandal

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Air India Crash Report Reveals Pilot's

‘फ्यूल बंद क्यों किया…? एक पायलट ने दूसरे से पूछा और फिर…’,Air India विमान हादसे की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

अहमदाबाद से लंदन जा रहे एयर इंडिया-171 विमान की दुर्घटना (Air India-171 Plane Crash) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आ गई है। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआइबी) द्वारा जारी इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान (Air India-171 Plane Crash) ने जैसे ही टेकऑफ किया, महज 3 सेकंड के भीतर इसके दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच “कटऑफ” स्थिति में चले गए। इससे दोनों इंजनों को ईंधन मिलना बंद हो गया और वे काम करना बंद कर गए। परिणामस्वरूप, विमान 32 सेकंड के भीतर रनवे से करीब 0.9 नॉटिकल मील दूर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) द्वारा शुक्रवार देर रात जारी किए गए 15 पृष्ठों की इस प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया कि टेकऑफ के तुरंत बाद फ्यूल सप्लाई बाधित हो गई, जिससे विमान का थ्रस्ट (गति) गिरने लगी और विमान नीचे की ओर गिरने लगा। इस रिपोर्ट में पायलटों के बीच बातचीत का भी उल्लेख है। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) में दर्ज बातचीत के अनुसार, एक पायलट ने दूसरे से पूछा – “तुमने फ्यूल क्यों बंद किया?”, जिस पर दूसरे पायलट ने जवाब मिला – “मैंने नहीं किया।” हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह संवाद किस पायलट ने कहा। घटना के समय विमान को को-पायलट चला रहा था।  दोनों इंजन महज तीन सेकंड में बंद जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों इंजन महज तीन सेकंड में बंद हो गए। जिसके बाद रैम एयर टर्बाइन (RAT) (एक इमरजेंसी टर्बाइन) अपने आप सक्रिय हो गई। जिससे हाइड्रोलिक सिस्टम को अस्थायी ऊर्जा मिल सके। पायलटों ने इंजन को दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश की। इंजन-1 आंशिक रूप से ठीक हुआ, जबकि इंजन-2 स्टार्ट नहीं हो सका। विमान सिर्फ 32 सेकंड हवा में रहा और मेडिकल कॉलेज के एक हॉस्टल भवन से टकरा गया। हादसे में 241 यात्रियों की मौत हो गई जबकि एक यात्री चमत्कारिक रूप से बच गया। फ्यूल कंट्रोल स्विच की अहम भूमिका ड्रीमलाइनर 787 (Dreamliner 787 Crash) में मौजूद फ्यूल कंट्रोल स्विच “रन” और “कटऑफ” के बीच काम करते हैं। ये आमतौर पर थ्रॉटल लीवर के नीचे स्थित होते हैं और इन पर ब्रैकेट और लॉकिंग मैकेनिज्म होते हैं जिससे गलती से भी इन्हें छुआ नहीं जा सकता। यदि कोई चालक दल सदस्य इन्हें बदलना चाहे तो पहले एक धातु का लॉक उठाना होता है। रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच अपने आप कटऑफ मोड में शिफ्ट हो गए थे। लेकिन यह कैसे हुआ, यह अभी रहस्य बना हुआ है। रिपोर्ट में अन्य जांच बिंदु भी शामिल -ईंधन की गुणवत्ता जांच में किसी प्रकार का संदूषण नहीं पाया गया। -थ्रस्ट लीवर निष्क्रिय स्थिति में पाए गए, लेकिन ब्लैक बॉक्स के अनुसार टेकऑफ थ्रस्ट जारी था। -मौसम पूरी तरह साफ था, हल्की हवाएं थीं, कोई पक्षी टकराव नहीं हुआ। -विमान का वजन और संतुलन सीमा के भीतर था। कोई खतरनाक सामान onboard नहीं था। -दोनों पायलट अनुभवी थे, चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ थे और उनके पास ड्रीमलाइनर उड़ाने का पर्याप्त अनुभव था। इसे भी पढ़ें:- 40 बैंक खातों में 106 करोड़ रुपये, छांगुर बाबा की कुंडली खंगालने में जुटी ईडी फ्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर FAA ने दी थी चेतावनी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि, FAA ने पहले ही फ्यूल कंट्रोल स्विच में संभावित खराबी को लेकर एक चेतावनी जारी की थी, लेकिन एयर इंडिया ने उस विशेष विमान की समय पर जांच नहीं करवाई। विमान में तोड़फोड़ का कोई प्रमाण नहीं मिला, लेकिन तकनीकी चूक की आशंका जरूर जताई गई है। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू (K. Rammohan Naidu) ने कहा कि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कर रही है और AAIB स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। अमेरिकी विमानन विशेषज्ञ जान काक्स ने भी रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए कहा कि “फ्यूल स्विच को गलती से कोई भी नहीं हिला सकता, उनके चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था होती है।” बता दें कि, इस हादसे ने भारत की विमानन सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट की शुरुआती जानकारी बताती है कि यह दुर्घटना मानवीय त्रुटि, तकनीकी खराबी और एयरलाइन की मेंटेनेंस चूक के कारण हो सकती है, हालांकि विस्तृत जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है। जिसमें इस दर्दनाक हादसे के कारणों का पूरा खुलासा हो सकता है।  Latest News in Hindi Today Hindi एएआइबी K. Rammohan Naidu #AirIndiaCrash #PilotConversation #AviationNews #FlightAccident #DGCAReport #FuelCut #AirIndiaTragedY

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PM Modi's Foreign Visit Row

पीएम मोदी की विदेश यात्रा पर सीएम मान के तंज से गरमाई सियासत, विदेश मंत्रालय ने बताया गैर-जिम्मेदाराना और अशोभनीय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) अपने विदेश यात्रा से वापस लौट आए हैं, लेकिन अब पीएम मोदी (PM Modi) के इस यात्रा पर राजनीति शुरू हो गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने इस हालिया विदेश यात्राओं पर तंज करके देश की राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री मान के विवादित बयान का एक तरफ जहां देश का बुद्धजीवी वर्ग आलोचना कर रहा है, वहीं भारत के विदेश मंत्रालय (Indian Foreign Ministry) ने भी कड़ा जवाब दिया है। विदेश मंत्रलाय के प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री मान का नाम लिए बिना उनके बयान को “गैर-जिम्मेदाराना, खेदजनक और अशोभनीय” करार दिया है। 10,000 की जनसंख्या वाले देशों की यात्राएं करते हैं और वहां उन्हें सबसे बड़ा अवॉर्ड मिल रहा है बता दें कि मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने हाल ही में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) की विदेश यात्राओं पर कटाक्ष करते हुए कहा था, “प्रधानमंत्री 140 करोड़ की आबादी वाले देश में कम रहते हैं, लेकिन वहां रहते नहीं हैं। 10,000 की जनसंख्या वाले देशों की यात्राएं करते हैं और वहां उन्हें सबसे बड़ा अवॉर्ड मिल रहा है। इतने लोग तो हमारे यहां पर जेसीबी से खुदाई देखने के लिए इकट्ठे हो जाते हैं।” उन्होंने यह टिप्पणी पीएम मोदी के ब्राजील, घाना, त्रिनिदाद-टोबैगो, अर्जेंटीना और नामीबिया दौरे के संदर्भ में की थी। सीएम मान (Bhagwant Mann) का यह बयान विपक्षी आलोचना के साथ-साथ राजनीतिक व्यंग्य के तौर पर सामने आया, लेकिन इसकी गूंज अब विदेश नीति के गलियारों तक पहुंच गई है। विदेश मंत्रालय ने दी कड़ी प्रतिक्रिया विदेश मंत्रालय (Indian Foreign Ministry) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से प्रेस ने जब इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “हमने ग्लोबल साउथ के मित्र देशों के साथ भारत के संबंधों पर राज्य के एक उच्च पदाधिकारी द्वारा की गई कुछ टिप्पणियां देखी हैं। ये टिप्पणियां गैर-जिम्मेदाराना, खेदजनक हैं और राज्य के किसी पदाधिकारी को शोभा नहीं देतीं।” हालांकि इस दौरान रणधीर जायसवाल ने सीधे भगवंत मान का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि वे किसे संबोधित कर रहे हैं। जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार खुद को इस तरह के हर उस अनुचित टिप्पणी से अलग करती है, जो दोस्त देशों के साथ हमारे संबंधों को कमजोर कर सकती हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी, विशेष रूप से राज्य स्तर के जिम्मेदार नेताओं द्वारा, विदेश नीति के गंभीर मसलों को स्थानीय राजनीति के चश्मे से देखने का प्रयास है, जो दीर्घकालिक रूप से राजनयिक रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकता है। क्योंकि पीएम मोदी की इस यात्रा का उद्देश्य ग्लोबल साउथ देशों के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना था। इन दौरों के दौरान ऊर्जा सहयोग, व्यापार, कृषि, डिजिटल इनोवेशन और वैश्विक मंचों पर समर्थन जैसे कई मुद्दों पर बातचीत हुई। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ भाजपा ने किया तगड़ा पलटवार   सीएम मान के बयान के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक बार फिर आमने-सामने आ गई हैं। भाजपा नेताओं ने भगवंत मान (Bhagwant Mann) की टिप्पणी को “राजनीतिक अपरिपक्वता” और “संविधानिक मर्यादा का उल्लंघन” बताया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने सीएम मान पर पलटवार करते हुए इसे शर्मनाक करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ”प्रधानमंत्री को विदेशों में मिलने वाला सम्मान 140 करोड़ भारतीय के लिए गर्व की बात है। चाहे सम्मान देने वाला कोई भी देश हो, जब भारत के नेतृत्व को वैश्विक मंच पर सम्मान मिलता है तो वो क्षण संपूर्ण भारत की प्रतिष्ठा का प्रतीक बनता है। लेकिन भगवंत मान जैसे कुछ लोग, जिनके लिए केजरीवाल और उनके जूतों की चाटुकारिता के अलावा सब कुछ छोटा है, वो इस सम्मान का मजाक बनाते हैं। सीएम मान के बयान पर विवाद बढ़ता देश आप (AAP) पार्टी के नेता सफाई देना शुरू कर चुके हैं। आप नेताओं का कहना है कि भगवंत मान का मकसद प्रधानमंत्री के विदेश दौरों की उपयोगिता और लागत को लेकर सवाल उठाना था, न कि भारत के कूटनीतिक रिश्तों को कमतर आंकना। Latest News in Hindi Today Hindi news Bhagwant Mann #PMModi #CMMann #ForeignVisit #MEA #Politics2025 #ModiVsMann #IndianPolitics #LatestNews #ModiAbroad #MEAStatement

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Maharashtra Passes Public Security

विरोध और मतभेद के बीच महाराष्ट्र में पास हुआ ‘लोक सुरक्षा विधेयक’: वामपंथी संगठनों पर शिकंजा, विपक्ष ने जताई शंका

महाराष्ट्र विधानसभा ने राजनीतिक विरोध और वैचारिक मतभेद के बीच बहुप्रतीक्षित ‘महाराष्ट्र लोक सुरक्षा विधेयक, 2025’ (Maharashtra Public Security Bill) को बहुमत से पास कर दिया है। यह विधेयक राज्य में वामपंथी उग्रवाद, माओवादी विचारधारा और सरकार विरोधी चरमपंथी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई के उद्देश्य से लाया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) द्वारा पेश किए गए इस बिल को लेकर जहां सत्ता पक्ष इसे राज्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का नया रास्ता बता रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने विधानसभा में लोक सुरक्षा विधेयक (Maharashtra Public Security Bill) पेश करते हुए कहा कि गडचिरोली और कोकण जैसे जिले शहरी और ग्रामीण नक्सलवाद से प्रभावित हैं, जो राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह विधेयक उन संगठनों पर सख्ती से कार्रवाई करेगा जो गुरिल्ला युद्ध और हिंसक विचारधारा के जरिए सामाजिक अस्थिरता फैलाना चाहते हैं।” सीएम फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने यह भी बताया किया कि यह कानून UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) जैसी केंद्रीय कानूनी व्यवस्थाओं की खामियों को पूरा करेगा, जो केवल आतंकवाद तक सीमित हैं। यह नया विधेयक चरमपंथी संगठनों की वैचारिक और संगठित गतिविधियों पर भी शिकंजा कसने का काम करेगा।  विधेयक में संशोधन के लिए आम जनता से मिले थे 12,500 सुझाव  बता दें कि महाराष्ट्र लोक सुरक्षा विधेयक, 2025′ (Maharashtra Public Security Bill) पहली बार जुलाई 2024 के मानसून सत्र में विधानसभा में प्रस्तुत किया गया था। उस समय विधेयक में ‘व्यक्ति और संगठन’ जैसे शब्दों के कारण यह विवादों में घिर गया था। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि यह विधेयक असहमति जताने वाले आम नागरिकों को भी निशाना बना सकता है। इसी के चलते विधेयक को एक संयुक्त समिति के पास भेजा गया। इस समिति में जयंत पाटिल, नाना पटोले, जितेंद्र आव्हाड, भास्कर जाधव और अंबादास दानवे जैसे वरिष्ठ विपक्षी नेता शामिल थे। समिति को इस विधेयक को लेकर आम जनता से 12,500 सुझाव प्राप्त हुए। समिति की सिफारिशों के आधार पर विधेयक में तीन अहम संशोधन किए गए। पहला- ‘व्यक्ति और संगठन’ शब्द हटाकर केवल ‘चरमपंथी विचारधारा वाले संगठन’ रखा गया। दूसरा- निगरानी के लिए हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय सलाहकार बोर्ड गठित करने का प्रावधान किया गया। तीसरा- जांच की जिम्मेदारी सब-इंस्पेक्टर की जगह अब डीएसपी स्तर के अधिकारियों को दी जाएगी। सरकार ने विधेयक को लेकर पत्रकार संगठनों से भी संवाद कर यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि यह कानून मीडिया की स्वतंत्रता या अभिव्यक्ति के अधिकारों को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करेगा। फडणवीस ने कहा कि सरकार किसी भी लोकतांत्रिक विचारधारा या आलोचना को दबाने की मंशा नहीं रखती। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ विपक्ष की आशंकाएं और विरोध बरकरार हालांकि, विपक्षी दलों ने संशोधन के बावजूद इस विधेयक को लेकर अपनी गंभीर शंकाएं और आपत्तियां दर्ज की हैं। एनसीपी विधायक भास्कर जाधव ने विधेयक को लेकर सवाल किया कि अगर यह कानून राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इतना जरूरी है, तो दूसरे भाजपा शासित राज्यों में इसे क्यों नहीं लाया गया? इसे लाने का मतलब सरकार के खिलाफ उठने वाली आवाज को दबाना है। वहीं जयंत पाटिल ने कुछ संशोधनों का स्वागत किया, लेकिन कहा कि “फडणवीस (Devendra Fadnavis) ध्यान रखें, पी चिदंबरम जिस कानून (PMLA) को लाए थे, वही बाद में उनके खिलाफ लागू हुआ।” एनसीपी विधायक नितिन राऊत ने भी विधयेक को लेकर आशंका जताई कि इस कानून का इस्तेमाल भविष्य में लोकतांत्रिक आंदोलनों, धरनों या मोर्चों पर लागू हो सकता है। उन्होंने कहा, “भीमा कोरेगांव मामले में ‘अर्बन नक्सल’ जैसे शब्दों का दुरुपयोग हुआ था। ऐसा न हो कि यह कानून भी राजनीति का हथियार बन जाए।”  राऊत ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि ‘चरमपंथी’ और ‘वामपंथी’ की परिभाषा क्या होगी। उन्होंने कहा कि राज्य का हर जागरूक नागरिक नक्सलवाद के खिलाफ है, लेकिन कानून का दायरा स्पष्ट होना चाहिए। विपक्ष के इन तमाम विरोध के बाद भी महाराष्ट्र लोक सुरक्षा विधेयक अब कानून बन गया है। सरकार इसे राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक मजबूत हथियार मान रही है। अब आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कानून वास्तव में शांति स्थापित करता है या असहमति को दबाने का माध्यम बनता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Devendra Fadnavis #Maharashtra #PublicSecurityBill #Opposition #Politics #LeftistGroups #AssemblyNews

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Chirag Paswan's Dual Strategy

बिहार में एनडीए के साथ भी और खिलाफ भी… चिराग पासवान आखिर किस तरह की राजनीति कर रहे?

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) इस साल अक्टूबर-नवंबर माह में हो सकती है। चुनाव से पहले एनडीए (NDA) और महागठबंधन, दोनों अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटी हैं। लेकिन इन सबके बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान (Chirag Paswan) के बदले-बदले तेवरों ने सियासी हलकों में खलबली मचा दी है। एक तरफ जहां विपक्षी महागठबंधन के दल और वाम दल एकजुट होकर वोटर लिस्ट के गहन पुनरीक्षण के विरोध में सड़कों पर उतर एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं एनडीए (NDA) के अंदर चिराग पासवान (Chirag Paswan) की बयानबाजी जेडीयू (JDU) के लिए सिरदर्द बनती जा रही हैं। चिराग पासवान (Chirag Paswan) लगातार यह दोहरा रहे हैं कि उनकी पार्टी राज्य की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। आरा से लेकर सारण तक अपनी रैलियों में वह यही संदेश दे रहे हैं कि उनका गठबंधन बिहार की जनता से है, न कि किसी दल विशेष से। वहीं गोपाल खेमका हत्याकांड को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा। चिराग पासवान यह बयानबाजी ऐसे समय में कर रहे हैं, जब वे भाजपा (BJP) के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में अपनी पार्टी का विस्तार कर रहे हैं। आरा और सारण जैसे इलाकों में अभी एलजेपी (रामविलास) का कोई राजनीतिक आधार नहीं है। राजनीति में दबाव की रणनीति अपना रहे चिराग चिराग पासवान के इस आक्रामक रुख को राजनीतिक जानकार सीट शेयरिंग से पहले की दबाव बनाने वाली राजनीति के रूप में देख रहे हैं। चिराग पासवान विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) के लिए 40 से 60 सीटें मांग रहे हैं, लेकिन एनडीए (NDA) उन्हें 33 से 35 सीटें ही देना चाहती है। ऐसे में चिराग पासवान अब अपनी ही सहयोगी पार्टियों को घेरने में जुट गए हैं। राजनीतिक जानकारों यह सवाल जरूर कर रहे है कि विधानसभा में जहां पार्टी का कोई भी प्रतिनिधि नहीं है, वहां उसे इतनी सीटें एनडीए किस आधार पर दे दे मिलें? हलांकि यह बात जरूर है कि पिछले लोकसभा चुनाव में एलजेपीआर को पांच में से पांच सीटों पर जीत मिली थी, जो उनके संगठन और वोट बैंक को कुछ हद तक वैधता देती है। लेकिन विधानसभा चुनाव की प्रकृति और गणित अलग होती है। नीतीश कुमार के लिए बड़ी चुनौती  चिराग पासवान (Chirag Paswan) अपनी सभाओं में भाजपा (BJP) की आलोचना के बजाय जेडीयू की आलोचना कर रहे हैं। चिराग की यह कोई नई रणनीति नहीं है। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी जब चिराग एनडीए से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ रहे थे, तब वो पीएम मोदी की खुलकर तारीफ करते हुए खुद को उनका “हनुमान” बताते थे, लेकिन नीतीश कुमार को निशाने पर रखते थे। इस बार भी चिराग के 243 सीटों पर चुनाव लड़ने के दावे को जेडीयू पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग की पार्टी ने अकेले लड़ते हुए जेडीयू को 33 सीटों पर नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में जेडीयू के लिए यह एक राजनीतिक चुनौती भी है और चेतावनी भी। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ भाजपा के गढ़ में जनाधार बढ़ाने में जुटे चिराग  चिराग पासवान (Chirag Paswan) की सबसे ज्यादा सक्रियता भोजपुरी बेल्ट में दिखाई दे रही है, जहां भाजपा का परंपरागत जनाधार रहा है। लेकिन इन जिलों में भाजपा का प्रदर्शन पिछले चुनावों में कुछ कमजोर रहा। मसलन, भोजपुर की सात में से केवल दो सीटों पर ही भाजपा जीत पाई थी। इस स्थिति को चिराग एक अवसर के रूप में देख रहे हैं और यहां पर अपनी पार्टी के जनाधार का विस्तार करने में जुटे हैं। यह सक्रियता केवल मौजूदा विधानसभा चुनाव की रणनीति नहीं है, बल्कि इसका संबंध चिराग के दीर्घकालिक राजनीतिक भविष्य से भी है। बीजेपी के साथ रहकर वह केंद्र की सत्ता में हिस्सेदार बने रहना चाहते हैं, लेकिन बिहार में अपनी स्वतंत्र पहचान और महत्व भी बनाना चाहते हैं। चिराग पासवान की वर्तमान राजनीति को जानकार ‘दो नावों की सवारी’ की तरह देख रहे हैं। वे एनडीए में बने रहकर केंद्र में ताकतवर भूमिका निभा रहे हैं, वहीं बिहार में स्वतंत्र और आक्रामक राजनीति कर अपनी सौदेबाज़ी की ताकत बढ़ा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि चिराग की यह चाल एनडीए को मजबूती देती है या अंदर से कमजोर करती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Chirag Paswan #ChiragPaswan #BiharPolitics #NDA #LJP #BiharNews #IndianPolitics #RamVilasPaswan

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Sanjay Raut announces Uddhav and Raj Thackeray's

महाराष्ट्र निकाय चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे उद्धव और राज ठाकरे, संजय राउत का बड़ा ऐलान, कहा- कांग्रेस अकेले अपने दम पर लड़े

महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। कहा जा रहा था कि महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले इंडिया (INDIA) गठबंधन टूट जाएगा। इस बात पर अब शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने मुहर लगा दी है। राउत ने कहा है कि  BMC समेत सभी स्थानीय निकाय चुनाव शिवसेना (UBT) अब INDIA गठबंधन के साथ नहीं लड़ेगी। उनकी पार्टी यह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ लड़ेगी। कांग्रेस को यह चुनाव अपने दम पर लड़ना होगा। संजय राउत (Sanjay Raut) ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) करीब 20 साल बाद एक साथ आए हैं। दोनों भाईयों के बीच पिछले छह महीने से पर्दे के पीछे बातचीत चल रही थी। अब जब महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता और हिंदी भाषा को जबरन थोपे जाने का मुद्दा गरमा गया है, तो दोनों पार्टियों ने इस मोर्चे पर साथ मिलकर लड़ने का निर्णय लिया है। राउत ने कहा, “भाजपा सरकार जिस तरह मराठी भाषा और संस्कृति की अनदेखी कर रही है, उसके खिलाफ उद्धव और राज ठाकरे एकजुट हैं। इससे जनता का भी जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। इसलिए अब जनता खुद चाहती है कि शिवसेना (UBT) और MNS मिलकर निकाय चुनाव लड़ें।” दोनों भाईयों का मिलन कांग्रेस के लिए बड़ा झटका पत्रकारों ने जब संजय राउत (Sanjay Raut) से पूछा कि महाराष्ट्र में INDIA गठबंधन (जिसमें कांग्रेस, एनसीपी (SCP) और शिवसेना UBT शामिल हैं) का स्थानीय चुनावों में क्या रोल होगा, तो उन्होंने स्पष्ट कहा, “INDIA गठबंधन केवल लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए था। स्थानीय चुनावों की परिस्थितियां और रणनीति अलग होती हैं।” संजय राउत ने यह भी याद दिलाया कि 2017 के BMC चुनाव में भी शिवसेना ने भाजपा के साथ गठबंधन होते हुए भी अलग चुनाव लड़ा था और उसी चुनाव के नतीजों ने 2019 में शिवसेना-भाजपा गठबंधन को तोड़ने की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि स्थानीय चुनावों की परिस्थिति अलग होती है और पार्टियां अलग-अलग निर्णय लेती हैं। राउत के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस को मुंबई और अन्य निकाय चुनावों में अपने दम पर उतरना होगा। कांग्रेस पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह गठबंधन के मुद्दे पर कोई टकराव नहीं चाहती, लेकिन अंदरखाने उसे इस फैसले से झटका जरूर लगा है। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ BMC सहित सभी नगर निगमों में साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी संजय राउत ने यह भी बताया कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे की पार्टियां सिर्फ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में ही नहीं, बल्कि ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, नासिक, उल्हासनगर और संभाजीनगर (औरंगाबाद) जैसे नगर निगमों में भी मिलकर चुनाव लड़ सकती हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि शिवसेना परिवार ‘मराठी मानुष’ की राजनीति पर दोबारा केंद्रित हो रहा है। दोनों भाईयों का यह कदम बालासाहेब ठाकरे की उस राजनीति को वापसी लाने के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें क्षेत्रीय अस्मिता, हिंदुत्व और सड़कों पर आंदोलन का अनूठा मिश्रण होता था। माना जा रहा है कि उद्धव और राज ठाकरे इस शैली को फिर से अपनाकर भाजपा को निकाय चुनाव में चुनौती देना चाहते हैं। शिवसेना (UBT) और MNS ने हाल ही में महाराष्ट्र में हिंदी भाषा की अनिवार्यता के खिलाफ आंदोलन शुरू किया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार हिंदी को जबरन महाराष्ट्र पर थोपने की कोशिश कर रही है, जिससे मराठी पहचान खतरे में पड़ गया है। यह आंदोलन उत्तर भारतीय राजनीति में भी हलचल मचा रहा है, क्योंकि बिहार में भी इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में आरजेडी और कांग्रेस गठबंधन हिंदी अस्मिता को लेकर संवेदनशील है। Latest News in Hindi Today Hindi news Uddhav Thackeray #UddhavThackeray #RajThackeray #MaharashtraPolls #SanjayRaut #Congress #ShivSena #MNS #MaharashtraPolitics

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hindi marathi controversy

हिंदी-मराठी विवाद से गरमाई देश की सियासत, ठाकरे बंधुओं पर उत्तर भारतीय नेताओं का हमला, कांग्रेस ने बनाई विवाद से दूरी 

महाराष्ट्र में हिंदी और मराठी भाषा (Marathi Language Controversy) को लेकर एक बार फिर से राजनीतिक पारा चढ़ गया है। उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) की मराठी भाषा पर हालिया सक्रियता और बयानों ने जहां इस विवाद को राज्य में राजनीतिक हवा दी, वहीं हिंदी भाषी राज्यों के नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाओं ने इस मराठी भाषा विवाद (Marathi Language Controversy) को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया। जिसकी वजह से राजनीतिक दलों में टकराव बढ़ता जा रहा है, जबकि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना की सहयोगी कांग्रेस ने इस मुद्दे से दूरी बना रखी है।  बता दें कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा (Marathi Language Controversy) न बोलने वाले हिंदीभाषियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और उनके खिलाफ बोले जा रहे बयानों पर हिंदी पट्टी के कई नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey), बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव और यूपी के आजमगढ़ से भाजपा के पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने ठाकरे बंधुओं को खुली चुनौती दी है। ‘अगर उनमें हिम्मत है तो वे उर्दू, तमिल और तेलुगु भाषियों पर भी वही रवैया अपनाकर दिखाएं, जैसा वे हिंदीभाषियों के साथ कर रहे हैं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने तो राज (Raj Thackeray) और उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) पर सीधा हमला करते हुए यहां तक कह दिया कि, ”अगर उनमें हिम्मत है तो वे उर्दू, तमिल और तेलुगु भाषियों पर भी वही रवैया अपनाकर दिखाएं, जैसा वे हिंदीभाषियों के साथ कर रहे हैं। अपने घर में शेर बनना उनके लिए आसान है। आओ बिहार और उत्तर प्रदेश, हम भी देखेंगे तुम्हारी हेकड़ी। यह गुंडागर्दी अब नहीं चलेगी।” इस दौरान दुबे ने मराठी भाषा और महाराष्ट्र के स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करते हुए कहा कि हम मराठी संस्कृति का आदर करते हैं, लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए जो भाषा को हथियार बनाया जा रहा है, वह निंदनीय है। पप्पू यादव और निरहुआ ने राज ठाकरे को ललकार  सांसद पप्पू यादव ने भी राज ठाकरे (Raj Thackeray) पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज ठाकरे हिंदीभाषियों के खिलाफ खुलेआम हिंसा करवा रहे हैं। पप्पू यादव ने चेतावनी दी, “अगर उन्होंने यह गुंडई बंद नहीं की, तो मैं खुद मुंबई आकर उनको उनकी ही भाषा में जवाब दूंगा।“ पप्पू यादव का आरोप है कि राज ठाकरे भाजपा के इशारे पर यह सब कर रहे हैं ताकि इसी साल महाराष्ट्र में होने वाली BMC चुनाव में ध्रुवीकरण किया जा सके। भाजपा के पूर्व सांसद और भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने भी ठाकरे बंधुओं को ललकारते हुए कहा, “मैं खुद मुंबई में रहता हूं। अगर हिम्मत है तो मुझे निकालकर दिखाओ।” उनका यह बयान उत्तर भारतीयों की ओर से एक मजबूत प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है। उद्धव ठाकरे ने भी किया पलटवार हिन्दी भाषी राज्य के इन नेताओं के बयानों पर जब पत्रकारों ने उद्धव ठाकरे से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा, “दुबे, बिबे जैसे लोग केवल विवाद खड़ा करना जानते हैं। महाराष्ट्र की जनता सब जानती है। इनकी बातों को ज्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।” उद्धव ने इस दौरान यह भी कहा कि, उनका विरोध हिंदी भाषा से नहीं है, बल्कि हिंदी की जबरन थोपे जाने वाली अनिवार्यता से है। उन्होंने कहा, “हम खुद हिंदी में बात कर रहे हैं, हमारे सांसद भी हिंदी बोलते हैं। यह विवाद जबरन खड़ा किया गया है।” इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कांग्रेस की चुप्पी और संतुलित रुख इस पूरे विवाद पर जहां महाराष्ट्र से लेकर बिहार तक में हलचल मची हुई और पक्ष-विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर हैं। वहीं, कांग्रेस ने खुद को इस मुद्दे से अलग रखने का निर्णय लिया है। मुंबई में कांग्रेस के उत्तर भारतीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अवनीश सिंह (Nishikant Dubey) ने कहा कि मुंबई में वर्षों से उत्तर भारतीय समाज शांतिपूर्वक रह रहा है और यहां की संस्कृति में घुल-मिल चुका है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि राजनीतिक फायदे के लिए सामाजिक ढांचे को नुकसान न पहुंचाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह पर भाजपा की सरकार है, तो भाषा के नाम पर हो रही उकसाने वाली राजनीति पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी उन्हीं की बनती है। सरकार को चाहिए कि वह उन नेताओं पर कार्रवाई करे जो समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Nishikant Dubey #hindi #marathi #controversy #thackeray #uddhavthackeray #rajthackeray #northindianleaders #congress #politics #india

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Anil Chauhan

CDS जनरल अनिल चौहान की चेतावनी: चीन-पाकिस्तान-बांग्लादेश का संभावित गठजोड़ भारत के लिए बड़ा खतरा

भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान (Anil Chauhan) ने एक थिंक-टैंक कार्यक्रम में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय हालात भारत के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश में बढ़ती नजदीकी पर कहा कि यह संभावित रणनीतिक गठजोड़ अगर होता है, तो भारत की सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है। जनरल अनिल चौहान (Anil Chauhan) ने कहा कि आज की दुनिया एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। पुराने वैश्विक संतुलन की जगह एक नई व्यवस्था आकार ले रही है, जिसमें अमेरिका की भूमिका पहले से अधिक जटिल होती जा रही है। ऐसे में भारत जैसे विकासशिल देश को अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पहले से कहीं ज्यादा सजग और सशक्त रहना होगा। उन्होंने जोर दिया कि अब सुरक्षा केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि आर्थिक, व्यापारिक और तकनीकी क्षेत्रों में भी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। अब आर्थिक ताकत ही असली ताकत CDS ने कहा कि किसी भी देश की असली ताकत उसकी आर्थिक मजबूती और लचीलापन है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा केवल बॉर्डर सिक्योरिटी नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़ी होती है। जब तक देश की आंतरिक स्थिति मजबूत नहीं होगी और आर्थिक आधार स्थिर नहीं रहेगा, तब तक बाहरी खतरों से निपटना मुश्किल होगा।” उन्होंने कहा कि, भारत जैसे विविधता भरे देश में आंतरिक स्थिरता बनाए रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं। जनरल अनिल चौहान (Anil Chauhan) ने इस दौरान विशेष रूप से सामाजिक एकता पर बात करते हुए कहा कि हमारे देश की ताकत उसकी विविधता है, लेकिन यही विविधता अगर सामाजिक अस्थिरता में बदल जाए, तो यह बाहरी ताकतों के लिए अवसर बन सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को अपने सामाजिक ढांचे को मजबूत रखने की आवश्यकता है ताकि आंतरिक सुरक्षा कमजोर न पड़े। बड़े खतरे को देखते हुए हमें एकजुट रहने की जरूरत है। सामाजिक रूप से ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए, जिसका फायदा दुश्मन उठा सके।  चीन-पाकिस्तान-बांग्लादेश का संभावित गठजोड़ बड़ा खतरा- CDS CDS चौहान (Anil Chauhan) ने इस दौरान चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश में बढ़ती नजदीकी को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि तीनों देशों के इस संभावित गठजोड़ को लेकर भारत को सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर इन देशों के बीच आपस में किसी भी स्तर पर रणनीतिक तालमेल बनता है, तो वह भारत के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है। उन्होंने खासतौर पर बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि अगर वहां अस्थिरता बढ़ती है और भारत में शरण ले रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की स्थिति बदतर होती है, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। इसे भी पढ़ें:- आरसीबी के तेज गेंदबाज यश दयाल पर यौन शोषण का केस दर्ज ‘ऑपरेशन सिंदूर’ था भारत की निर्णायक कार्रवाई CDS चौहान ने इस बातचीत के दौरान ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह वह क्षण था जब परमाणु संपन्न दो राष्ट्र सीधे सैन्य टकराव में आए। उन्होंने बताया कि भारत ने इस संघर्ष में पाकिस्तान की परमाणु धमकियों को झूठा साबित करते हुए निर्णायक बढ़त हासिल की। यह पूरी दुनिया के लिए एक सबक था कि केवल परमाणु हथियारों की धमकी देकर कोई देश अपनी नापाक हरकतों को छिपा नहीं सकता। जनरल चौहान ने कहा कि अब युद्ध केवल सीमा पर नहीं लड़े जाते, बल्कि साइबर हमले, ड्रोन, हाइपरसोनिक मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक हथियार के जरिए लड़े जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के पास इन सभी क्षेत्रों में कोई पूर्ण सुरक्षा प्रणाली नहीं है, इसलिए भारत को बहुआयामी सुरक्षा नीति अपनानी होगी। Latest News in Hindi Today Hindi Anil Chauhan #IndiaSecurity #CDSAnilChauhan #ChinaPakistanBangladesh #BorderThreat #StrategicAlliance #IndiaDefence

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