Vineet Pandey

UP Native Slams Raj Thackeray Over Maharashtra Sacrifice

‘यूपी का रहने वाला हूं, लेकिन महाराष्ट्र के लिए अपना खून बहाया…’, राज ठाकरे और मनसे पर पूर्व मार्कोस कमांडो का तगड़ा अटैक 

महाराष्ट्र में इन हिंदी और मराठी भाषा को लेकर जबरदस्त विवाद चल रहा है। राज ठाकरे (Raj Thackeray) की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ता हिन्दी बोलने वाले उत्तर भारतियों के साथ मारपीट कर रहे हैं, जिसकी वजह से राज्य में तनाव बना हुआ है। इस विवाद पर 26/11 मुंबई हमले (26/11 Mumbai Attacks) में कई लोगों को बचाने वाले पूर्व मरीन कमांडो फोर्स (MARCOS) प्रवीण कुमार तेवतिया (Praveen Teotia) ने भी अपना पक्ष रखते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने मनसे प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) पर भाषा के नाम पर गंदी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कई सवाल पूछ हैं।  प्रवीण कुमार तेवतिया (Praveen Teotia) ने सोशल मीडिया पर राज ठाकरे (Raj Thackeray) से पूछा है कि मुंबई पर जब पाकिस्तानी आतंकियों ने हमला किया तब आपके ये योद्धा कहां थे, जो अब मराठी भाषा न बोलने वाले मासूम लोगों को पीटकर खुद को महाराष्ट्र का योद्धा बता रहे हैं। कमांडो प्रवीण तेवतिया ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक फोटो भी पोस्ट की है, जिसमें वो कमांडो की वर्दी पहने नजर आ रहे हैं, उनके बुलेटप्रूफ जैकेट पर UP लिखा हुआ है और गले में एके 47 गन लटक रही है।  I saved Mumbai on 26/11.I bleed for Maharashtra.I'm from UP. I saved the Taj Hotel.Where were Raj Thakre's so Called Warriors?Don't divide the Nation. Smiles don't require any Language. https://t.co/z8MBcdcTAW pic.twitter.com/uZAhM4e6Zq — Adv Praveen Kumar Teotia (@MarcosPraveen) July 5, 2025 मुंबई पर जब अटैक हुआ तब आप और आपके योद्धा कहां थे- तेवतिया प्रवीण तेवतिया (MARCOS) ने अपने पोस्ट में लिखा, “26/11 आतंकी हमले (26/11 Mumbai Attacks) के दौरान मैनें यहां के लोगों को बचाया था। मैं यूपी का रहने वाला हूं, लेकिन महाराष्ट्र के लिए अपना खून बहाने से पीछे नहीं हटा। मैंने और मेरे साथियों ने ताज होटल को बचाया। उस समय राज ठाकरे के ये तथाकथित योद्धा कहां थे? क्या उनको यह हमला नहीं दिख रहा था? राज ठाकरे आप खुद कहीं नहीं दिखे। उद्धव ठाकरे और उनके परिवार के कोई सदस्य भी नहीं दिखा। उस समय ठाकरे परिवार ने कुछ भी नहीं बोला, क्योंकि उस समय मुंबई में लोगों की जान बचाने वाले सेना के ज्यादातर जवान यूपी और बिहार जैसे दूसरे राज्यों के थे। इसलिए तुच्छ राजनीति के नाम पर हमारे देश को मत बांटो। मुस्कुान और खुशी के लिए किसी भाषा की जरूरत नहीं पड़ती।”  तेवतिया ने यह भी कहा कि, मैं भी यूपी से हूं और देश के पांचवें प्रधानमंत्री रहे चौधरी चरण सिंह के गांव से आता हूं। इसलिए, हमें राजनीति सिखाने की कोशिश मत करो। राजनीति और भाषा को अलग रखो। महाराष्ट्र के लोगों की तरह हमें भी मराठी भाषा पर गर्व है, लेकिन इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। अगर आप लोगों को राजनीति करनी है, तो युवाओं को नौकरी देने और विकास कार्यों पर करो। आप लोगों ने महाराष्ट्र के विकास के लिए अब तक क्या किया, यह जनता को बताओ। प्रवीण तेवतिया ने यह पोस्ट मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के एक वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए किया। सीएम फडणवीस इस वीडियो में भाषा के नाम पर राज्य में गुंडागर्दी और हिंसा फैलाने वालों को चेतावनी देते नजर आ रहे हैं।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कौन हैं शौर्य चक्र विजेता प्रवीण कुमार तेवतिया? बता दें कि प्रवीण तेवतिया यूपी के रहने वाले एक पूर्व मार्कोस कमांडो हैं। इन्होंने मुंबई आतंकवादी हमले के दौरान ताज होटल में चलाए गए आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान अपनी टीम का नेतृत्व किया था। ऑपरेशन के दौरान ये आतंकियों से सीधे भीड़ गए थे। दाेनों तरफ से हुई गोलीबारी में इन्हें चार गोलियां लगीं थी, लेकिन तब भी ये पीछे नहीं हटे और आतंकियों से लड़ते रहे। इनके और इनकी टीम के त्वरित कार्रवाई और अदम्य साहस के कारण ही ताज होटल में फंसे 150 से अधिक लोगों को बचाया गया था। प्रवीण तेवतिया को उनके इस बहादुरी भरे कार्य के लिए शौर्य चक्र पुरस्कार से नवाजा गया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Praveen Teotia MARCOS #RajThackeray #MNS #MaharashtraPolitics #MARCOSCommando #UPvsMaharashtra

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US Tariff Relief for 14 Nations Until August 1

अमेरिका से ट्रेड डील कर रहे देशों को 1 अगस्त तक टैरिफ से राहत, बांग्लादेश, म्यांमार और जापान समेत 14 देशों पर 25% से 40% टैक्स

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ग्लोबल टैरिफ (US Tariffs) बढ़ाने की अंतिम तारीख में एक बार फिर से बढ़ोत्तरी की है। ट्रंप ने इस तारीख को 9 जुलाई से बढ़ाकर अब 1 अगस्त कर दिया है। साथ ही बांग्लादेश और जापान समेत 14 देशों पर टैरिफ (US Tariffs) लागू करने की घोषणा भी की है। ट्रंप प्रशासन ने बताया कि टैरिफ से प्रभावित सभी देशों को हमारी तरफ से लेटर भेजकर औपचारिक रूप से इसकी जानकारी दे दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत समेत जिन देशों को 21 दिनों का अतिरिक्त मोहलत दी है, उनके साथ अमेरिका ट्रेड डील कर रहा है। कहा जा रहा है कि भारत और अमेरिका के बीच चल रहे ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) में सहमति बन चुकी है और आज इस संबंध में घोषणा हो सकता है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) इस सप्ताह कई देशों के साथ ट्रेड डील की घोषणा कर सकते हैं। अमेरिका और यूरोपीय यूनियन भी ट्रेड डील करने के काफी नजदीक पहुंच गए हैं। वहीं स्विटजरलैंड, पाकिस्तान और ताइवान समेत कई दूसरे देश भी अमेरिका के साथ ट्रेड डील करने की कोशिश कर रहे हैं।  अमेरिका ने लगाया 25% से लेकर 40% तक का भारी टैरिफ बता दें कि अमेरिका ने घोषणा की थी कि जिन देशों के साथ वह ट्रेड डील नहीं कर रहा है, उन पर 9 जुलाई को टैरिफ (US Tariffs) लगा देगा। हालांकि ट्रंप ने उससे दो दिन पहले ही इसकी घोषणा करते हुए बताया कि वह उन देशों को 1 अगस्त तक के लिए टैक्स से राहत दे रहे हैं, जिनके साथ ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) चल रही है। वहीं जिन देशों के साथ अमेरिका इस तरह का डील नहीं कर रहा है, उन पर 25% से लेकर 40% तक का भारी टैरिफ 9 जुलाई से लागू हो जाएगा। अमेरिका ने म्यांमार और लाओस पर सबसे ज्यादा 40% टैरिफ लगाया है। इसी तरह थाईलैंड और कंबोडिया 36%, बांग्लादेश और सर्बिया पर 35%, इंडोनेशिया पर 32%, साउथ अफ्रीका और बोस्निया एंड हर्जेगोविना पर 30% टैरिफ लगाया है। इसके अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, कजाकिस्तान और ट्यूनीशिया पर 25% टैरिफ लगाया है।  डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने पहली बार अप्रैल माह में दूसरे देशों से अमेरिका आने वाले सभी समानों पर 10% बेसलाइन टैक्स लगाने और 60 देशों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने का ऐलान किया था। ट्रंप के इस  घोषणा के बाद पूरी दुनिया में उथल-पुथल मच गई थी। शेयर और बॉन्ड बाजार भरभरा कर गिरने लगे थे, जिसके कारण ट्रंप ने अपने टैरिफ पॉलिसी को कुछ समय तक टालते हुए दूसरे देशों को 8 जुलाई तक अमेरिका के साथ ट्रेड डील करने का मौका दिया था।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ US ने ब्रिटेन, वियतनाम और चीन के साथ शुरुआती ट्रेड डील की अमेरिका अभी तक सिर्फ ब्रिटेन, वियतनाम और चीन के साथ ही ट्रेड डील कर पाया है। हालांकि, इन डील्स के बारे में अमेरिका द्वारा ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। चीन और वियतनाम के साथ हुए समझौते में तो किसी भी पक्ष ने यह नहीं बताया है कि किन शर्तों पर सहमति बनी है। वहीं, अमेरिका का अपने करीबी देशों जापान और साउथ कोरिया के साथ भी ट्रेड डील नहीं हो पाया है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार ट्रंप इन दोनों देशों के सबसे अहम प्रोडक्ट्स जैसे कि कार, स्टील और इलेक्ट्रॉनिक्स पर भारी टैक्स लगाना चाहते थे, जिसे ये देश मानने को तैयार नहीं थे। जिसकी वजह से अमेरिका इनके साथ ट्रेड डील नहीं कर पाया। वहीं भारत को लेकर ट्रंप ने कहा है कि भारत के साथ ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जल्द ही इसके बारे में घोषणा की जाएगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump #USTariffRelief #TradeDeal #BangladeshTrade #JapanUS #MyanmarTrade #ImportTax #TariffUpdate #GlobalTrade

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Uddhav Thackeray news

महाराष्ट्र में टूटेगा कांग्रेस-उद्धव ठाकरे का गठबंधन या रहेंगे साथ! बिहार चुनाव में क्या पड़ेगा असर?

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) इस साल के अंत तक होनी है। जिसको लेकर राजनीतिक पार्टियां जोड़-तोड़ और गठजोड़ में जुटी हैं। इन सबके बीच एक घटना ने इंडिया गठबंधन (India Alliance) यानी (महाविकास आघाड़ी) में हलचल मचा दी है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) फिर से एक साथ आ गए हैं। दोनों ठाकरे बंधु बीते शनिवार को वर्ली में एक साथ मंच साझा किया, लेकिन इस भरत मिलाप से कांग्रेस (Congress) ने दूरी बनाए रखी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या इंडिया गठबंधन (India Alliance) यानी (महाविकास आघाड़ी) में फूट पड़ गया है? क्या कांग्रेस (Congress) महाराष्ट्र में अब भी शिवसेना यूबीटी साथ रहेगी?  एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाली शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने ठाकरे बंधुओं के मिलन के बाद कटाक्ष करते हुए महाविकास आघाड़ी (एमवीए) को नए नाम से संबोधित किया। निरुपम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि, ”यह एमवीए गठबंधन नहीं, बल्कि टीवीए यानी ठाकरे विकास आघाड़ी गठबंधन है।” संजय निरुपम ने कहा कि, महाराष्ट्र में कांग्रेस (Congress) को गठबंधन से घटाकर एक नया राजनीतिक गठबंधन बना है। पहले इस गठबंधन को एमवीए कहा जाता था यानी महा विकास अघाड़ी, लेकिन अब इसका नया नाम टीवीए रख देना चाहिए, क्योंकि यह ‘ठाकरे विकास अघाड़ी’ बन चुका है।  बिहारियों पर अत्याचार करने वालों के साथ कांग्रेस- केसी त्यागी  बिहार चुनावों (Bihar Assembly Elections) से ठीक पहले महाराष्ट्र में हुए इस गठबंधन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या कांग्रेस उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के साथ अभी भी गठबंधन में रहेगी या फर इनसे दूरी बना लेगी। इस नए गठबंधन पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेसी नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने निशाना साधा था। चव्हाण ने मीडिया से बातचीत में कहा था राज उद्धव अगर मराठी भाषा को लेकर सरकारी आदेश वापस लेने का श्रेय अकेले लेना चाहते हैं, तो हमें कोई परेशानी नहीं। लेकिन अगर वे राजनीतिक रूप से हमारे साथ आना चाहते हैं, तो इस पर सोचना पड़ेगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक हर्षवर्धन सपकाल ने भी कहा कि ठाकरे परिवार अगर साथ मिलकर सरकारी आदेश वापस लेने का जश्न मनाना चाहता हैं तो हमे कोई परेशानी नहीं, लेकिन भाइयों के बीच संभावित राजनीतिक गठबंधन पर अलग मत है। वहीं दूसरी तरफ जेडीयू नेता केसी त्यागी ने भी इंडिया गठबंधन पर हमला होगा। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता का सबसे ज्यादा उत्पीड़न मुंबई में होता है। वहां पर कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी गठबंधन में हैं, लेकिन बिहारियों के शोषण का विरोध नहीं कर रही है। जो बताता है कि कांग्रेस किस तरह से बिहारियों पर अत्याचार पर मौन सहमति दे रही है।   इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ उद्धव और राज के साथ दिखने पर बिहार में कांग्रेस को हो सकता है नुकसान  राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार में जल्द ही चुनाव होने हैं, ऐसे में उद्धव और राज ठाकरे के बिहार विरोधी स्वभाव को देखते हुए कांग्रेस अब उद्धव ठाकरे के साथ रहने से परहेज कर सकती है। अगर कांग्रेस अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की कोशिश करती है तो उसे हिंदी भाषी बिहार के आगामी चुनाव (Bihar Assembly Elections) में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। बता दें कि राज ठाकरे (Raj Thackeray) की राजनीति ही उत्तर भारतीयों का विरोध करने पर टिकी है। इनकी पार्टी के कार्यकर्ता आए दिन उत्तर भारतीयों को पीटने को लेकर चर्चा में रहते हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना भी इस मामले में मनसे के पाले में ही खड़ी नजर आती है। महाराष्ट्र में इसी साल के अंत तक स्थानीय निकाय चुनाव होने की संभावना है, ऐसे में यहां पर उत्तर भारतीयों का खिलाफ जहर उगलने की राजनीति अपने चरम पर पहुंच चुकी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Uddhav Thackeray #congress #shivsenaupta #uddhavthackeray #maharashtrapolitics #biharelections2025 #politicalnews #alliancebreak #indianpolitics

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PM Modi warns Pakistan against double standards on terrorism at BRICS summit

‘आतंकवाद पर दोहरा मापदंड बर्दाश्त नहीं, चुकानी पड़ेगी बड़ी कीमत…’, PM मोदी ने पाक को BRICS के मंच से जमकर धोया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) अपनी 8 दिवसीय विदेश यात्रा के 6 दिन ब्राजील पहुंचे हैं। पीएम मोदी (PM Modi) ने यहां रियो डी जनेरियो में चल रहे 17वें ब्रिक्स समिट (BRICS Summit) में हिस्सा लिया। इस समिट में उन्होंने आतंकवाद मानवता के समक्ष सबसे बड़ा खतरा बताते हुए पहलगाम आतंकी हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ”पहलगाम में जो अमानवीय और कायराना आतंकी हमला हुआ, उसे पूरी दुनिया ने देखा। यह सामान्य आतंकी हमला नहीं था, यह इंसानियत पर हमला था।”  पीएम मोदी (PM Modi) ब्रिक्स समिट (BRICS Summit) के पीस एंड सिक्योरिटी एंड रिफॉर्म ऑफ ग्लोबल गवर्नेंस सत्र में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने सभी देशों के बीच शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता जता, लेकिन साथ ही पड़ोसी मुल्क पर आतंकवाद के लिए निशाना भी साधा। पीएम मोदी ने कहा, ”दोहरे मापदंडों की इस दुनिया में कोई जगह नहीं है। अगर कोई देश आतंकवाद का भरण पोषण कर रहा है, तो उसे इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। आतंकियों पर कार्रवाई करने और उन पर प्रतिबंध लगाने में किसी को  कोई हिचक नहीं होनी चाहिए। आतंकवाद पर मौन सहमति को भारत जिस तरह से बर्दाश्त नहीं कर रहा है, उसी तरह सभी देशों को आतंकवाद पर निर्णायक फैसला लेना चाहिए।  पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत महात्मा गांधी और गौतम बुद्ध की धरती है और उनके द्वारा दिखाए गए शांति के मार्ग पर आगे बढ़ने को लेकर प्रतिबध है। हमारे सामने चाहे कितनी भी मुश्किल परिस्थितियां आएं, हमारे लिए शांति और मानवता का कल्याण ही सबसे बेहतरीन मार्ग रहेगा।  पहलगाम आतंकी हमले की ब्रिक्स देशों ने की निंदा  ब्रिक्स समिट (BRICS Summit) में भारत को बड़ी सफलता मिली है। इस समिट में शामिल सभी देशों ने एकजुट होकर कड़े शब्दों में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की है। ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के हर प्रारूप, सीमापार आतंकवाद और आतंकवाद व आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ प्रति जीरो टॉलरेस नीति बनाने के प्रति प्रतिबद्धता जताई। ब्रिक्स देशों की तरफ जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि, ”हम 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। हम आतंकवाद के हर प्रारूप के खिलाफ जीरो टॉलरेंस अपनाने का आग्रह करने के साथ आतंकवाद से निपटने के लिए दोहरे मापदंडों को भी पूरी तरह से खारिज करते हैं।”  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ ब्रिक्स सम्मेलन से इतर पीएम मोदी और जयशंकर ने की कई अहम द्विपक्षीय बैठकें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर पीएम मोदी और विदेश मंत्री डाॅ. एस जयशंकर (S Jaishankar) ने कई दूसरे देश के लीडरशिप के साथ अहम बैठकें की है। पीएम मोदी ने वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चीन्ह, मलयेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डिआज-कैनेल के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक की। इन बैठकों का लक्ष्य द्विपक्षीय रिश्ते को मजबूत बनाना और अहम मुद्दों पर विस्तार से बातचीत करना था।  वहीं दूसरी तरफ विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर (S Jaishankar) ने भी दूसरे देश के अपने समकक्षों के साथ बैठक की। एस जयशंकर (S Jaishankar) ने सबसे पहले रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने के साथ उसे और आगे ले जाने पर सहमति जताई। इसके अलावा जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ भी बैठक की। इस द्विपक्षीय मुलाकात में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर बातचीत हुई। बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर ईरानी विदेश मंत्री के साथ की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, ‘हमारी बातचीत हाल के अहम क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर केंद्रित रही।’ विदेश मंत्री जयशंकर ने मैक्सिको के विदेश सचिव जुआन रामोन डे ला फ़ुएंते के साथ भी अहम बैठक की। इस मुलाकात में देानों देशों के बीच स्वास्थ्य, डिजिटल, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष जैसे अहम मुद्दों पर साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।  Latest News in Hindi Today Hindi news BRICS Summit #PMModi #BRICSSummit #Pakistan #Terrorism #ModiSpeech #IndiaPakistan #BRICS2025

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BJP and Terrorists Alike

भाजपा और आतंकवादी एक, दोनों धर्म पूछकर हमला करते हैं…कांवड़ यात्रा पर सपा नेता के बयाद से यूपी के सियासत में उबाल 

सावन महीने में होने वाली कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) अभी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन इस यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश में में सियासी पारा अभी से हाई हो गया है। कांवड़ मार्ग पर पड़ने वाली दुकान मालिकों के नाम और उनकी पहचान सार्वजनिक करने संबंधी राज्य सरकार के आदेश जारी होने के बाद से वार-पलटवार का दौर शुरू हो गया है। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (SP) और भाजपा (BJP) आमने-सामने हैं और एक दूसरे पर धर्म की राजनीति करने का आरोप लगा रही है। समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक रविदास मेहरोत्रा (Ravidas Mehrotra) ने तो भाजपा (BJP) पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए भाजपा (BJP) नेताओं की तुलना आतंकवादियों से कर दी। जिसके बाद विवाद और बढ़ गया है।   सपा (SP) के वरिष्ठ विधायक रविदास मेहरोत्रा (Ravidas Mehrotra) ने राज्य की योगी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) के रास्ते में आने वाले दुकानदारों से उनकी जाति और धर्म पूछना नजायज है। यह सरकार जिस तरह से कार्य कर रही है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि भाजपा और आतंकवादियों में कोई अंतर नहीं है। ये दोनों धर्म पूछकर आम जनता पर हमला करते हैं। सपा विधायक के इस विवादित बयान ने राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है। सपा विधायक के बयान पर भाजपा ने भी आक्रामक जवाब दिया है।  भाजपा ने राक्षस से की सपा की तुलना   भाजपा के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी (Rakesh Tripathi) ने कहा कि सपा के नेता मजहबी तुष्टीकरण से खास वर्ग को साधने के लिए जानबूझकर इस तरह के बयान दे रहे हैं। अखिलेश यादव ने अपने नेताओं को सनातन विरोधी बयान देने का निर्देश दे रखा है कि वो हिन्दुओं की आस्था पर हमला करें। जिससे पवित्र कांवड़ यात्रा में विघ्न डाला जा सके। यह उसी तरह का कार्य है, जैसे सतयुग में राक्षस् हमारे संतों के हवन-यज्ञ में विघ्न डालते थे। सपा को सनातन विरोधी यह प्रयास महंगा पड़ेगा। सरकार ने बताया क्यों नेम प्लेट जरूरी  विवाद बढ़ता देख राज्य सरकार ने भी पूरे मामले पर स्थिति साफ की है। राज्य सरकार ने बयान जारी कर बताया कि दुकानों पर उनके मालिक का नेम प्लेट लगाने का निर्देश सिर्फ कांवड़ यात्रा के लिए ही नहीं है। यह सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने, ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिए गया है। इस मामले में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि हर धर्म के त्योहार को शांतिपूर्वक संपन्न कराना हमारी सरकार का लक्ष्य है। जो व्यवस्था बनाई गई है वह किसी खास धर्म के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए है। विपक्ष इसका  अनावश्यक विरोध कर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रही है।  इसे भी पढ़ें:-  क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी? कांग्रेस भी भाजपा पर हुई हमलावर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Ravidas Mehrotra) ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि क्या दुकानदारों द्वारा लाइसेंस नंबर दिखाना पर्याप्त नहीं है? क्या नेम प्लेट लगाने की अनिवार्यता होनी चाहिए? यह भाजपा द्वारा एक खास धर्म के लोगों पर निशाना साधने का प्रयास है। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इसे राज्य की साझी विरासत पर हमला बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार राज्य की शांति को भंग करना चाहती है, इसीलिए इस तरह के नियम लागू किए जा रहे हैं। भाजपा के इन हरकतों को राज्य की जनता अच्छी तरह से पहचानती है। इसी तरह मौलाना तौकीर रजा ने भी कहा कि जब श्रद्धालु बड़ी संख्या में यात्रा करते हैं, तब खुले में मांस बिक्री का मैं भी विरोध करता हूं, लेकिन नेम प्लेट का उद्देश्य क्या है? यह राज्य सरकार को स्पष्ट करना चाहिए।  Latest News in Hindi Today Hindi news Ravidas Mehrotra #BJP #SPLeader #KanwarYatra #UPPolitics #ReligiousPolitics #Controversy #BreakingNews #IndiaNews

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PM Shehbaz’s Advisor Reveals 30-45 Sec Response Window

हमारे पास 30 से 45 सेकंड थे’, भारत के ब्रह्मोस मिसाइल हमले पर PM शहबाज के सलाहकार का बड़ा खुलासा

ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान भारत ने पाकिस्तान पर ब्रह्मोस मिसाइलें दागी (Brahmos Missile Attack On Pakistan) थी, जिसने पाकिस्तान घुटनों पर आकर सीजफायर की भीख मांगने लगा था। हालांकि सीजफायर होने के बाद पाकिस्तान अपने इस नाकामी को छुपाने में जुट गया, लेकिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) के प्रमुख सलाहकार राणा सनाउल्लाह (Rana Sanaullah) ने ही इस झूठ की पोल खोल दी है। राणा सनाउल्लाह (Rana Sanaullah) ने पाकिस्तानी मीडिया को दिए अपने एक इंटरव्यू में कहा, ”भारत ने जब हम पर ब्रह्मोस मिसाइल दागी, तो हमारे नेतृत्व के पास ये तय करने के लिए सिर्फ 30 से 45 सेकंड ही थे कि यह इन मिसाइलों में परमाणु हथियार है कि नहीं।  राणा सनाउल्लाह (Rana Sanaullah) ने इंटरव्यू के दौरान बताया कि, भारत ने जब ब्रह्मोस मिसाइल (Brahmos Missile Attack On Pakistan) रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर दागी, तो हमारे एयर डिफेंस सिस्टम हाई अलर्ट का संकेत भेजने लगा। जिसने पाकिस्तान के पूरे रक्षा तंत्र को ही हिलाकर रख दिया था। उस समय हमारे नेतृत्व के पास सिर्फ 30 से 45 सेकेंड यह तय करने के लिए थे कि इस मिसाइल में परमाणु हथियार है कि नहीं। यहां पर एक चूक महाविनाश ला सकती थी। सनाउल्लाह ने कहा कि, ”मैं यह नहीं कह रहा हूं कि भारत ने परमाणु हथियार का इस्तेमाल न करके अच्छा किया, लेकिन पाकिस्तान के लोग अगर गलति से इसे परमाणु हमला समझ लेते तो परमाणु युद्ध छिड़ सकता था।” ट्रंप ने निभाई युद्ध रूकवाने में अहम भूमिका- सनाउल्लाह    इंटरव्यू के दौरान राण सनाउल्लाह भले ही अपने डर को जाहिर करते हुए सच्चाई स्वीकार्य कर गए हों, लेकिन वो पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा फैलाने से नहीं चकू। अपने पाकिस्तानी आकाओं की तरह   सनाउल्लाह ने भी सीजफायर का क्रेडिट डोनाल्ड ट्रंप को देते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने और युद्ध रोकने में ट्रंप ने अहम भूमिका निभाई। ट्रंप ने अगर परमाणु युद्ध टालने में भूमिका निभा कर दुनिया को बड़े विनाश से बचाया है, तो दुनिया को भी उनके इस  भूमिका का निष्पक्ष आंकना कर उनकी सराहना करनी चाहिए। सनाउल्लाह (Rana Sanaullah) ने कहा कि इस बात को पाकिस्तान अच्छे से समझता है और इसीलिए पीएम शहबाज शरीफ ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देने के लिए नामित किया है। हालांकि, भारत ने सीजफायर में ट्रंप के किसी भी तरह के भूमिका से इंकार करते हुए कहा है कि सीजफायर के लिए पाकिस्तान ने अनुरोध किया था। भारत ने अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया था, इसलिए पाकिस्तान की तरफ से फोन कॉल आने के बाद युद्ध को रोका गया। इसे भी पढ़ें:-  मीरा रोड थप्पड़ कांड पर संजय निरुपम ने सरकार से की कार्रवाई की मांग, आखिर पुलिस क्यों नहीं ले रही है कोई एक्शन? भारत के हमले से खौफ में था पाकिस्तान नेतृत्व  बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान भारत ने 10 मई को ब्रह्मोस मिसाइलों से पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हमला किया था। भारत के हमले में नूर खान एयरबेस समेत पाकिस्तान के कई एयरबेस के रनवे, बंकर और हैंगर को भारी नुकसान हुआ। भारत के इस हमले से पाकिस्तान की सैन्य क्षमता बुरी तरह से प्रभावित हुई और पाकिस्तान के फाइटर जेट उड़ान तक नहीं भर पाए। सनाउल्लाह ने इंटरव्यू के दौरान भारत के इसी हमले का जिक्र करते हुए स्वीकार किया कि भारत के तरफ से हुए इस भीषण हमले से पाकिस्तान को दहशत फैल गया था। इसकी वजह से परमाणु संघर्ष की आशंका बढ़ गई थी।  पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने भी कुछ दिन पहले मीडिया से बातचीत में यह स्वीकार किया था कि भारत के हमले में पाकिस्तान के एयरबेस को बड़ा नुकसान हुआ था। भारत ने जब हमला किया तो हम भारत पर हमला करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन भारत ने चौकानें वाला हमला करके हमारी योजना को ध्वस्त कर दिया। पाकिस्तान की तरफ से एक के बाद एक इस तरह के बयान तब आ रहे हैं, जब पाकिस्तानी सेना इस युद्ध में अपनी जीत का दावा करते हुए किसी भी तरह के क्षति से इनकार कर चुकी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Rana Sanaullah #IndiaBrahMos #PakistanReaction #ShehbazSharif #BrahMosMissile #DefenseAlert #IndiaPakistanTensions #MissileStrike

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US House passes 'Big Beautiful Bill'

अमेरिक के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पास हुआ ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’, ट्रंप बोले-  लाखों लोगों को मिलेगा ‘डेथ टैक्स’ से आजादी 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने को अपने देश में बड़ी राजनीतिक जीत हासिल की है। ट्रंप का बहुचर्चित ”बिग ब्यूटीफुल बिल” (Big Beautiful Bill) हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से 218-214 के अंतर से पास हो गया। ट्रंप की रिपब्लिकन के दो सदस्य इस बिल के खिलाफ वोट किया, हालांकि ये दोनों पहले से ही बिल का विरोध कर रहे थे। अब इस बिल पर सिर्फ ट्रंप के हस्ताक्षर की जरूरत है, जिसके बाद यह लागू हो जाएगा।  अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में बिल पास होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इसकी घोषणा करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अभी-अभी रिपब्लिकन ने बिग ब्यूटीफुल बिल (Big Beautiful Bill) को पास कर दिया है, जो दिखाता है कि हमारी पार्टी अब पहले से कहीं ज्यादा एकजुट है। इस बिल पर मैं अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस (4 जुलाई) के खास मौके पर हस्ताक्षर करूंगा। बता दें कि अमेरिकी सीनेट ने भी इसी सप्ताह मंगलवार को इस बिल को पारित किया था।  बिल पर हस्ताक्षर के लिए ट्रंप करेंगे भव्य समारोह का आयोजन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने एक दूसरे पोस्ट में बिल पास होने पर खुशी जताते हुए कहा, ‘यह अमेरिका के लिए बेहद ऐतिहासिक दिन है। अमेरिका का दिशा और दशा बदलने वाले इस बिल पर हस्ताक्षर करने के लिए 4 जुलाई को शाम 4 बजे (अमेरिकी समयानुसार) व्हाइट हाउस में हस्ताक्षर समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस समारोह में अमेरिकी कांग्रेस के सभी सदस्यों और सभी सीनेटर को आमंत्रित किया गया है। हम सभी एकजुट होकर अमेरिका की स्वतंत्रता और इस बिल के पास होने का जश्न मनाएंगे। अमेरिका के लोग अब पहले से ज्यादा समृद्ध, सुरक्षित और गौरवान्वित महसूस कर रहे  होंगे।’ बिग ब्यूटीफुल बिल क्या है? डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपने इस बिल को अमेरिका की किस्मत बदलने वाला ड्रीम बिल बता चुके हैं। यह 869 पन्नों का बिल है और इसमें ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान लगाए गए टैक्स कटौती को और भी व्यापक तरीके से शामिल किया गया है। अमेरिकी लोगों को मिलने वाली आयकर छूट जारी रहेगी, साथ ही होटल टिप्स और ओवरटाइम वेतन पर लगने वाला टैक्स भी खत्म कर दिया गया है। लोगों को टैक्स में यह छूट 2028 तक मिलेगी। इसके अलावा बिल में कर्ज लेने की की सीमा बढ़ाकर 50 लाख डॉलर तक कर दिया गया है।  वहीं अवैध प्रवासियों को देश से बाहर निकालने और सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए भी बिल में कई गुना ज्यादा बजट का प्रावधान किया गया है। बिल में गोल्डन डोम मिसाइल शील्ड के लिए 25 अरब डॉलर का बजट रखा गया है। इससे अमेरिका का एयर डिफेंस सिस्टम मजबूत होगा। इसके अलावा मंगल मिशन के लिए 10 अरब डॉलर, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को रिटायर करने के लिए 32.5 करोड़ डॉलर रखे गए हैं। इसे भी पढ़ें:-ट्रंप का ऐलान, गाजा में 60 दिन का युद्धविराम होगा, इजरायल तैयार लेकिन हमास डेमोक्रेट्स ने बिल को बताया गरीब अमेरिकियों पर जानलेवा हमला डेमोक्रेट्स इस बिल का शुरूआत से विरोध कर रहे हैं। डेमोक्रेट्स का कहना है कि ट्रंप का यह  बिल देश के लाखों गरीब अमेरिकियों पर जानलेवा हमला है। इस बिल की वजह से मेडिकेड पर कई नए प्रतिबंध लगेंगे, जो फ्री स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। डेमोक्रेट्स का यह भी कहना है कि इस भारी भरकम बिल की वजह से अमेरिका पर कर्ज कई गुना बढ़ जाएगा। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलॉन मस्क (Elon Musk) भी इस बिल के विरोध में हैं। उन्होंने इस बिल को ‘बेहूदा’ बताते हुए कह चुके हैं कि अगर यह बिल पास हुआ तो वह अगल दिन ही नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। अब देखना यह होगा कि एलॉन मस्क (Elon Musk) कब नई पार्टी की घोषणा करते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump #Trump #BigBeautifulBill #DeathTax #USPolitics #HouseBill2025 #TaxReform #EstateTax #TrumpSpeech

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Thailand scam 2025

कंबोडियाई अंकल की धोखेबाजी में थाई प्रधानमंत्री सस्पेंड, किस विवाद से चर्चा में भारतीयों का ड्रीम डेस्टिनेशन थाईलैंड?

थाईलैंड…यह नाम सुनते ही ज्यादातर भारतीयों को नीले समुद्र तट, नाइट लाइफ और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड की याद आने लगती है। क्योंकि थाईलैंड छुट्टियां बिताने के लिए भारतीयों का पसंदीदा डेस्टिनेशन है। एक तो यह भारत से ज्यादा दूर नहीं और दूसरा यहां आने-जाने और रहने का खर्च कम। इसलिए थाइलैंड मिडिल क्लास भारतीयों का ड्रीम डेस्टिनेशन बन चुका है, लेकिन यह खूबसूरत देश इस समय अपने राजनीतिक उथल-पुथल और क्षेत्रीय तनाव के कारण चर्चा में है।  थाईलैंड की सबसे युवा प्रधानमंत्री पेटोंगटार्न शिनावात्रा (Patongtarn Shinawatra) को वहां की संवैधानिक कोर्ट ने एक लीक फोन कॉल विवाद के कारण सस्पेंड कर दिया है। दुनिया के किसी भी देश में कोर्ट द्वारा एक प्रधानमंत्री को ही सस्पेंड कर देना अपने आप में अभूतपूर्व उदाहरण है। कोर्ट के इस कार्रवाई के बाद फुमथम वेचायचाई (Phumtham Wechayachai) आज थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ले रहे हैं। इसकी जानकारी देते हुए थाईलैंड सरकार के प्रवक्ता जीरायु होंगसुब ने बताया कि फुमथम वेचायचाई (Phumtham Wechayachai) को महामहिम राजा शपथ दिलाएंगे। जिसके बाद वे कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर कार्य करेंगे आइए अब उस पूरे विवाद के बारे में जानते हैं, जिससे थाईलैंड की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है और पेटोंगटार्न शिनावात्रा का पीएम पद से सेस्पेंड कर दिया गया।  कंबोडियाई सीनेट अध्यक्ष ने कर ली फोन कॉल रिकॉर्ड  बता दें कि पेटोंगटार्न शिनावात्रा (Patongtarn Shinawatra) का जो फोन कॉल लीक हुआ है उसमें व कंबोडियाई सीनेट के अध्यक्ष हुन सेन (Hun Sen) बातचीत करते हुए अपने ही देश के सेना और सैन्य जनरलों की आलोचना करती सुनी जा सकती है। दोनों के बीच यह बातचीत 15 जून को हुआ था, जिसे अब लीक किया गया। हुन सेन (Hun Sen) ने अपने एक फेसबुक पोस्ट में इसकी जानकारी देते हुए बतया की उन्होंने इस बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया था। जिसे अब 80 से ज्यादा लोगों के साथ शेयर किया है। इस लीक कॉल रिकॉर्ड में सुना जा सकता है कि पेटोंगटार्न शिनावात्रा (Patongtarn Shinawatra) और हुन सेन एक ट्रांसलेटर के माध्यम से थाईलैंड-कंबोडिया बॉर्डर पर हुई सैन्य झड़प पर चर्चा कर रहे हैं। ये दोनों नेता बातचीत से घातक झड़प के बाद दोनों देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। पेटोंगटार्न इस कॉल में हुन सेन (Hun Sen) को अंकल संबोधित करते हुए कहती हैं कि वे थाईलैंड के सेना कमांडर की बात को न सुनें। थाई कमांडर ने सीमा विवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से कंबोडिया की आलोचना करते हुए उन्हें “विरोधी” कहा था। इस दौरान पेटोंगटार्न ने हुन सेन से यह भी कहा कि वह उन्हें बताएं कि वे इस समस्या के समाधान के लिए क्या चाहते हैं और वे उसका समाधान करेंगी। गौरतलब है कि हुन सेन को पेटोंगटार्न के पिता और थाईलैंड के पूर्व पीएम थाकसिन शिनावात्रा का बेहद पुराना मित्र कहा जाता है। हुन सेन के बेटे हुन मानेत इस समय कंबोडिया के पीएम हैं।  इसे भी पढ़ें:-ट्रंप का ऐलान, गाजा में 60 दिन का युद्धविराम होगा, इजरायल तैयार लेकिन हमास थाईलैंड-कंबोडिया सीमा झड़प में एक सैनिक की मौत  बता दें कि दोनों देश बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं और यहां की रहन सहन और खान पान लगभग एक जैसी है, लेकिन सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के बीच तनातनी हमेशा बनी रहती है। बीते मई माह में इन दो पड़ोसियों के बीच उस समय विवाद चरम पर पहुंच गया, जब एक थाई सैनिक की फायरिंग में कंबोडिया के एक सैनिक की मौत हो गई। इस विवाद को लेकर कंबोडिया की सेना ने बयान जारी कर कहा था कि बॉर्डर पर रुटीन पेट्रोलिंग कर रहे उनके जवानों पर थाईलैंड के सैनिकों ने फायरिंग कर दी थी। इस घटना में उसके एक जवान की मौत हो गई। वहीं थाई सेना का कहना है कि कंबोडिया के सैनिक पेट्रोलिंग के दौरान विवादित क्षेत्र में जबरदन घुस आए थे। थाईलैंड के जवान बातचीत के माध्यम से इस विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे, तभी कंबोडियाई सैनिकों ने गोली चला दी। जवाब में थाईलैंड आर्मी ने भी गोली चलाई। इस सैन्य झड़प के बाद दोनों देशों ने अपनी सीमा पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे दोनों देशों के नागरिकों का एक दूसरे के देश में आना-जाना लगभग बंद है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Patongtarn Shinawatra #thailandscam #thaipmsuspended #cambodianuncle #indiantravel #thailandcontroversy #travelnews2025 #tourismalert #thaipolitics

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Disha Salian Case

दिशा सालियान के साथ नहीं हुआ यौन हिंसा, आदित्य ठाकरे भी निर्दोष… महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट से बताई सच्चाई? 

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान केस (Disha Salian Case) में बड़ा मोड़ आ गया है। राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) को एक एफिडेविट दायर कर बताया है कि दिशा सालियान की मौत में किसी भी तरह के संदेह की संभावना नहीं है। क्योंकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृतक के साथ यौन या शारीरिक हमले का कोई सबूत नहीं मिला है। मेडिकल जांच में प्राइवेट पार्ट में न तो सीमन मिला और न ही कोई जख्म पाया गया। जिससे पता चलता है कि मृतका के साथ आखिरी क्षणों में कोई जबरदस्ती नहीं की गई। बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) में यह एफिडेविट राज्य सरकार की तरफ से मालवणी पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर शैलेन्द्र नागरकर ने दाखिल किया है। इस एफिडेविट में यह भी कहा गया है कि मृतका के पिता द्वारा दायर किया गए याचिका में लगाए गए आरोप बेवुनियाद और आधारहीन हैं। क्योंकि वैज्ञानिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इन आरोपों को लेकर कोई सबूत नहीं मिले। इस एफिडेविट में आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) का भी जिक्र करते हुए कहा गया है कि उन्हें बेवजह बदनाम करने के लिए इस याचिका को दायर किया गया है।  12वीं मंजिल से गिर कर हुई थर दिशा सालियान की मौत  बता दें कि दिशा सालियान (Disha Salian Case) की 9 जून, 2020 को मलाड की एक बड़ी इमारत की 12वीं मंजिल से गिर कर मौत हो गई थी। पुलिस का कहना है कि दिशा खुद वहां से कूदी, जबकि मृतका के पिता सतीश सालियान का दावा है कि उनकी बेटी का रेप करने के बाद उसकी हत्या की गई और इस पूरी मामले को राजनीतिक कारणों से दबाने की कोशिश की गई। इस मामले को लेकर दिशा के पिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर शिवसेना (UBT) के मुखिया उद्धव ठाकरे के बेटी आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) पर गंभीर आरोप लगाए हैं और मांग की है कि इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के साथ आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जाए।  दिशा सालियान की फ्रेंड्स और बॉयफ्रेंड ने क्या कहा दिशा के पिता के इस याचिका का जवाब पेश करते हुए राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) को बताया कि मृतका के पिता द्वारा जो आरोप लगाए हैं, वे आधारहीन हैं। क्योंकि पुलिस SIT की जांच में दिशा की फ्रेंड्स ने बताया कि वह अपने परिवारिक विवाद और बिजनेस डील नहीं पूरी होने के कारण काफी परेशान थी। दिशा सालियान (Disha Salian Case) के बॉयफ्रेंड रोहन रॉय ने भी पुलिस को दिशा के फ्लैट से गिरने की परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताया है। पुलिस के अनुसार, जिस दिन दिशा की मौत हुई, उस रात वह फ्लैट पर दोस्तों के साथ पार्टी कर रही थी। मौत से पहले दिशा बहुत ज्यादा नशे में थी। इन दावों की पुष्टि फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी ने भी की है। राज्य सरकार के जवाब में कहा गया है कि उस रात मौजूद सभी गवाहों के बयान एक जैसे हैं। इन सबूतों को देखते हुए कहा जा सकता है कि दिशा ने आत्महत्या करने के लिए खुद ही खिड़की से छलांग लगा दी थी।  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  आदित्य ठाकरे ने खुद को बताया निर्दोष दिशा सालियान केस में एक तरफ जहां राज्य सरकार ने आदित्य ठाकरे को निर्दोष बताया है, तो वहीं आदित्य ठाकरे ने खुद हाई कोर्ट में एक हस्तक्षेप याचिका दायर कर मामले की जल्द से जल्द सुनवाई करने की मांग की है। आदित्य ठाकरने ने अपनी याचिका में कहा कि हाई कोर्ट के पूर्व के आदेशों से उन पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वे महाराष्ट्र के एक बहुत ही प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से संबंध रखते हैं। जिसकी वजह से उन्हें और उनके परिवार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। इस केस से हमारा कोई लेना-देना नहीं है, जबरदन मुझ पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद इस केस की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। Latest News in Hindi Today Hindi news Bombay High Court #DishaSalianCase #AadityaThackeray #BombayHighCourt #MaharashtraGovernment #BreakingNews

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इटावा कांड के बाद ब्राह्मण विरोधी सियासत कहीं अखिलेश पर पड़ न जाए भारी! यूपी की राजनीति में ब्राह्मणों का कितना वर्चास्व?

उत्तर प्रदेश की राजनीति को इन दिनों जातीय रंग में रंगी जा रही है। इटावा जिले के दांदरपुर इलाके में यादव कथावाचकों का सिर मुंडवा कर पिटाई करने और चुटिया काट के मूत्र का छिड़काव किए जाने की घटना के बाद से यहां कि सियासत यादव बनाम ब्राह्मण की हो चुकी है। जाति के इस सियायत में सबसे आगे समाजवादी पार्टी (SP) नजर आ रही है। सपा के मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) अभी तक पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए (PDA) की राजनीति करते नजर आ रहे थे, लेकिन इस घटना से वे पीडीए को भुला यादव समाज की राजनीति करते नजर आ रहे हैं।  यादव कथावाचकों के पक्ष में उतरे सपा (SP) प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने तो ब्राह्मण समाज को चेतावनी देते हुए यहां तक कह दिया कि कृष्ण भक्तों को अगर कथा कहने से रोका गया तो यह अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने ब्राह्मणों पर तंज कसते हुए कहा कि प्रभुत्ववादी और वर्चस्ववादी लोग घोषित करें कि वो पीडीए समाज द्वारा दिया गए दान और चढ़ावा को नहीं लेंगे। अखिलेश (Akhilesh Yadav) के इस बयानबाजी के बाद अहीर रेजिमेंट समेत कई यादव संगठनों ने अब ब्राह्मणों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इटावा की इस घटना के बाद सपा पार्टी जिस तरह से इसे जातीय रंग देने में जुटी है, उससे सियासी जानकार कहने लगे हैं कि, कहीं अखिलेश यादव का यह एंटी ब्राह्मण कार्ड उन पर ही बैकफायर ना कर जाए? आइये जानते हैं कि यूपी की राजनीति में ब्राह्मण समाज किस तरह की भूमिका निभाती है।    यूपी में ब्राह्मण वोटर 10 फीसदी, लेकिन सियासत में वर्चस्व उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या (Brahmin Voters In UP) करीब 10 फीसदी है, लेकिन इसके बाद भी राज्य (Akhilesh Yadav) की सियासत में ब्राह्मणों का वर्चस्व हमेशा से रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यूपी की करीब सभी विधानसभा सीटों पर कम से कम पांच से 10 हजार ब्राह्मण वोटर हैं, जो जीत-हार में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि, राज्य के करीब 30 जिलों की 100 विधानसभा सीटों पर ब्राह्मणों (Brahmin Voters In UP) का दबदबा है, जो सूबे की सत्ता तक पहुंचने के लिए जरूरी 202 के जादुई आंकड़े का लगभग आधा है। राज्य के वाराणसी, जौनपुर, गोरखपुर, बलिया, महराजगंज, गोंडा, बस्ती, अयोध्या, सुल्तानपुर, अमेठी, प्रतापगढ़, प्रयागराज, कानपुर, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई और झांसी जैसे जिले ब्राह्मणों के गढ़ माने जाते हैं।  जिसके साथ गए ब्राह्मण, उसकी बनी सरकार यूपी में ब्राह्मण वोटर संख्या (Brahmin Voters In UP) में भले ही कम नजर आते हों, लेकिन राज्य की सत्ता तक वही पहुंचता है, जिसके साथ ये रहते हैं। ब्राह्मण समाज शुरुआती दिनों में कांग्रेस के साथ रही, जिसकी वजह से यह पार्टी लंबे समय तक यूपी की सत्ता में रही। लेकिन 1989 में भाजपा ने जब राम मंदिर आंदोलन शुरू किया और मंडल-कमंडल की राजनीति शुरू हुई तो ब्राह्मण भाजपा के साथ आ गए, जिससे इसने भी राज्य में सत्ता का स्वाद चखा। लेकिन साल 2002 में ठाकुर-ब्राह्मण राजनीति शुरू होने के कारण यह समाज भाजपा से नाराज हो गया। इसी दौरान मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने ब्राह्मण सम्मेलनों के जरिये इस समाज को अपने साथ लाने की कोशिश की। मायावती की 2007 के विधानसभा चुनाव में 56 ब्राह्मणों को अपनी पार्टी का टिकट दिया और इसमें से 41 ब्राह्मण उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। साथ ही बसपा ने भी पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ राज्य में सरकार बनाई। इसके बाद सपा ने भी ब्राह्मणों को लुभाने की कोशिश की और साल 2012 में इस समाज के बदौलत बड़ी जीत के साथ सत्ता में आई। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव से ब्राह्मण समाज का एक बड़ा वर्ग भाजपा के पास चला गया और अभी तक इस पार्टी के साथ बना हुआ है।  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  अखिलेश के 5 विधायक और एक सांसद ब्राह्मण  यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में 52 ब्राह्मण जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे, इसमें से भाजपा के 46 विधायकों के बाद सबसे ज्यादा (5) ब्राह्मण विधायक सपा के पास हैं। इसके अलावा सपा के पास एक ब्राह्मण सांसद भी है। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav)बीते कुछ माह से ब्राह्मणों को पीडीए (PDA) के साथ जोड़कर नया गणित गढ़ने में जुटे थे, लेकिन इटावा की इस घटना के बाद अखिलेश यादव ब्राह्मणों के खिलाफ नजर आने लगे हैं। ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि इस घटना को जातीयता के रंग में रंगने से अखिलेश यादव को नफा होगा या नुकसान?  Latest News in Hindi Today Hindi news  Akhilesh Yadav #AkhileshYadav #EtawahCase #BrahminPolitics #UPElections #SamajwadiParty #BrahminVoteBank #UttarPradesh

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