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असम में बाढ़ का कहर, मृतकों की संख्या 100 पहुंची; लाखों लोग प्रभावित, राहत-बचाव अभियान जारी

गुवाहाटी: असम में लगातार बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई इलाकों में बाढ़ का पानी घरों, सड़कों और कृषि क्षेत्रों में फैल गया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक बाढ़ से मृतकों की संख्या 100 तक पहुंच गई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

भारी बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। कई प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।

मृतकों की संख्या 100 पहुंची

ताजा रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटों में दो और मौतों के बाद असम में बाढ़ से जुड़ी मौतों की संख्या 100 तक पहुंच गई है। अलग-अलग जिलों में बाढ़ और उससे जुड़े हादसों के कारण जान-माल का नुकसान हुआ है।

रिपोर्टों के अनुसार सिवसागर और कछार सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल हैं। कछार में 22 मौतों की रिपोर्ट सामने आई है, जबकि सिवसागर में 49 मौतें दर्ज होने की जानकारी दी गई है।

कई जिले बाढ़ की चपेट में

बाढ़ का असर असम के कई जिलों में देखने को मिल रहा है। प्रभावित जिलों में गोलाघाट, सिवसागर, होजाई, दरांग, लखीमपुर, जोरहाट, कार्बी आंगलोंग, चराईदेव, नगांव और बिस्वनाथ शामिल हैं।

कई स्थानों पर सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और निचले इलाकों में पानी भरने से सामान्य जनजीवन बाधित हुआ है।

एक लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

बाढ़ के कारण राज्य में एक लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की रिपोर्ट है। कुछ रिपोर्टों में प्रभावित आबादी का आंकड़ा करीब 1.37 लाख बताया गया है। गोलाघाट को सबसे अधिक प्रभावित जिलों में बताया गया है, जहां बड़ी संख्या में लोग बाढ़ की चपेट में हैं।

हालांकि व्यापक मानवीय प्रभाव इससे भी बड़ा बताया गया है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इस बाढ़ संकट के दौरान 7 लाख से अधिक लोग विस्थापित या प्रभावित हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।

ब्रह्मपुत्र समेत कई नदियों का बढ़ा जलस्तर

भारी मानसूनी बारिश के बीच ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर कई क्षेत्रों में खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बना हुआ है।

नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण निचले इलाकों में पानी फैलने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन लगातार जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है।

राहत और बचाव अभियान जारी

बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन और बचाव एजेंसियों की टीमें काम कर रही हैं। प्रभावित लोगों को भोजन, पानी और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने के साथ-साथ चिकित्सा सहायता देने के प्रयास भी जारी हैं।

कई लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार संकट के चरम पर करीब 3 लाख लोग सरकारी राहत शिविरों में पहुंचे थे, जबकि अब भी हजारों लोग राहत शिविरों और वितरण केंद्रों में रह रहे हैं।

सड़कों और बुनियादी ढांचे को नुकसान

बाढ़ का असर केवल लोगों के विस्थापन तक सीमित नहीं है। कई इलाकों में सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। कृषि भूमि में पानी भरने से किसानों को भी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

बाढ़ का पानी कम होने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने घरों की सफाई, क्षतिग्रस्त संपत्ति की मरम्मत और रोजमर्रा की जिंदगी दोबारा शुरू करने की बड़ी चुनौती होगी।

पशुधन और कृषि पर भी पड़ा असर

असम की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि और पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। बाढ़ के कारण खेतों में पानी भरने और पशुधन के नुकसान से ग्रामीण परिवारों की मुश्किलें बढ़ी हैं।

बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी कृषि क्षेत्र को हुए नुकसान का आकलन करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहेगा। पशुओं में बीमारी फैलने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य और पशुपालन विभागों के लिए भी स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।

पानी घटने के बाद भी चुनौती खत्म नहीं

कुछ क्षेत्रों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन इससे संकट पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

पानी घटने के बाद प्रभावित इलाकों में कीचड़, दूषित पानी, क्षतिग्रस्त सड़कें और घरों की सफाई जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसके अलावा विस्थापित परिवारों को सुरक्षित तरीके से वापस बसाना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी।

मानसून ने बढ़ाई मुश्किल

असम में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ की समस्या सामने आती है, लेकिन इस बार भारी बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर ने कई इलाकों में स्थिति को गंभीर बना दिया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक दक्षिण एशिया में मानसून के पैटर्न में बढ़ती अनिश्चितता और अत्यधिक बारिश की घटनाएं बाढ़ के जोखिम को और बढ़ा सकती हैं।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

अब प्रशासन का मुख्य फोकस प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना, राहत सामग्री पहुंचाना और बाढ़ का पानी कम होने के बाद पुनर्वास तथा नुकसान का आकलन करना है।

जिन इलाकों में अभी भी पानी भरा हुआ है, वहां लोगों को बिना आवश्यक सुरक्षा के वापस घरों में नहीं लौटने की सलाह दी जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और साफ पेयजल की उपलब्धता भी बेहद महत्वपूर्ण होगी।

निष्कर्ष

असम में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और मृतकों की संख्या 100 तक पहुंच गई है। कई जिलों में बाढ़ का पानी फैला हुआ है और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन तथा बचाव एजेंसियां राहत और बचाव अभियान में जुटी हैं।

हालांकि कुछ क्षेत्रों में पानी घटने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए असली चुनौती अब शुरू होगी। घरों, सड़कों और कृषि भूमि को हुए नुकसान की भरपाई तथा विस्थापित लोगों का पुनर्वास आने वाले दिनों में सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में रहेगा।

Source: Associated Press, Indian Express, NDTV, Business Standard

जय राष्ट्र न्यूज़

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