उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) में आखिरकार करीब ढाई साल बाद न्याय की एक किरण दिखाई दी। 19 साल की मासूम अंकिता की हत्या (Ankita Bhandari Murder) के मामले में शुक्रवार को कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए तीनों आरोपियों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने यह फैसला 97 में से 47 गवाहों की गवाही और ढाई साल से अधिक की लंबी सुनवाई के बाद सुनाया।
इस मामले में दोषियों में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य भी शामिल है, जो भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा है। कोर्ट ने दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी की अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
अंकिता की हत्या: VIP सिस्टम का काला सच
घटना 18 सितंबर 2022 की है, जब पौड़ी जिले के यमकेश्वर स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर कार्यरत अंकिता की हत्या कर दी गई। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य, जो रिजॉर्ट का मालिक था, ने अपने दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के साथ मिलकर अंकिता को चीला नहर में धक्का दे दिया, जिससे उसकी डूबने से मौत हो गई।
जांच में सामने आया कि पुलकित अंकिता पर रिजॉर्ट में आने वाले खास मेहमानों को ‘स्पेशल सर्विस’ देने का दबाव बना रहा था। जब अंकिता ने इसका विरोध किया, तो उसे रास्ते से हटा दिया गया। यह न सिर्फ एक जघन्य अपराध था, बल्कि यह हमारे समाज में सत्ता और पैसे के दम पर महिलाओं को दबाने की मानसिकता को भी उजागर करता है।
भाजपा नेता के बेटे की करतूत
अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) में खास बात यह रही कि मुख्य आरोपी पुलकित आर्य भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा है। जब यह मामला सामने आया, तो प्रदेशभर में भारी आक्रोश फैला। जनता का गुस्सा इतना था कि सरकार को तत्काल पुलकित के पिता को पार्टी से बाहर निकालना पड़ा और इस केस की जांच के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन करना पड़ा।
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कोर्ट का फैसला, लेकिन सवाल अब भी बाकी
इस केस में अभियोजन पक्ष की ओर से 47 गवाहों की गवाही, तमाम सबूत और जांच के बाद कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया। यह फैसला निश्चित ही अंकिता के परिवार और समाज के लिए एक सुकून की बात है, लेकिन कुछ बड़े सवाल आज भी अनुत्तरित हैं।
1. वो VIP कौन थे?
अदालत ने दोषियों को सजा तो सुना दी, लेकिन अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि वे ‘वीआईपी मेहमान’ कौन थे, जिनके लिए अंकिता से ‘स्पेशल सर्विस’ की मांग की जा रही थी?
2. जांच में क्यों नहीं आई पूरी सच्चाई?
एसआईटी की जांच के बावजूद भी वह पूरा नेटवर्क या सिस्टम सामने नहीं आया, जो इस अपराध के पीछे काम कर रहा था। क्या जांच दबाव में की गई?
3. क्या राज्य सरकार अब आगे और कोई कार्रवाई करेगी?
क्या सरकार अब इन सवालों का जवाब देगी या केस का फैसला आने के बाद यह मुद्दा भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
अंकिता भंडारी (Ankita Bhandari) को इंसाफ मिला, लेकिन यह इंसाफ अधूरा है। जब तक उस वीआईपी संस्कृति पर लगाम नहीं लगती, जब तक महिलाओं को शोषण से सुरक्षित माहौल नहीं मिलता, तब तक इस तरह की घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी। कोर्ट के फैसले ने जरूर न्याय की उम्मीद जगाई है, लेकिन समाज को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई और अंकिता इस तरह से बलि न चढ़े। यह घटना सिर्फ एक लड़की की हत्या नहीं थी, बल्कि यह सिस्टम के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई की शुरुआत है।
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