हिंदू धर्म में भगवान शिव (Lord Shiva) के रूप को लेकर कई रहस्यमयी और चमत्कारी कथाएं प्रचलित हैं। उन्हीं में से एक है बाबा बर्फानी, यानी अमरनाथ धाम में स्थित बर्फ से निर्मित स्वयंभू शिवलिंग की अद्भुत महिमा। हर साल लाखों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय मार्गों को पार कर इस चमत्कारी गुफा तक पहुंचते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस गुफा के बारे में सबसे पहले किसने जाना था? किस भाग्यशाली को भगवान शिव के बर्फ से बने इस अद्भुत रूप के सबसे पहले दर्शन हुए थे? इस सवाल का जवाब जितना रहस्यमय है, उतनी ही प्रेरणादायक है उससे जुड़ी प्राचीन कथा। सदियों पुरानी यह कथा बताती है कि कैसे एक साधारण गड़रिये को अमरनाथ की रहस्यमयी गुफा और स्वयंभू शिवलिंग के पहले दर्शन हुए। जानिए उस अद्भुत खोज की पूरी कहानी, जिसने एक तीर्थस्थल को जन्म दिया।
अमरनाथ यात्रा का महत्व
अमरनाथ यात्रा (AmarnathYatra) के दौरान श्रद्धालु हर साल लाखों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय मार्गों को पार कर इस चमत्कारी गुफा तक पहुंचते हैं और बाबा बर्फानी के दर्शन करते हैं। बड़ी बात यह कि जहां यह पवित्र शिवलिंग प्राकृतिक रूप से हिम से स्वयं उत्पन्न होता है। यह शिवलिंग अमरनाथ गुफा के भीतर स्थित है। गौर करने वाली बात यह कि इसकी आकृति चंद्रमा के घटने-बढ़ने के अनुसार बदलती रहती है। आपको बता दें कि अमरनाथ गुफा को ‘अमरेश्वर’ भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहां दर्शन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस गुफा में हिम से केवल शिवलिंग ही नहीं, बल्कि माता पार्वती और भगवान गणेश की आकृति भी बनती है, जिससे यह स्थान हिंदू आस्था का अत्यंत पावन और विशिष्ट तीर्थ बन जाता है। कारण यही लोग देश के कोने कोने से लाखों श्रद्धालु दर्शन करने हेतु यहाँ पहुँचते हैं।
सबसे पहले दर्शन किसे हुए थे?
ऐसे में बड़ा सवाल यह कि इस गुफा सबसे पहले दर्शन किसे हुए थे? तो पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ गुफा के सबसे पहले दर्शन महर्षि भृगु ने किए थे। एक कथा के अनुसार जब कभी कश्मीर की घाटी पूरी तरह जलमग्न होने वाली थी, तब महर्षि कश्यप ने नदियों और झीलों के माध्यम से पानी को बाहर निकालने का प्रयास किया। उसी समय महर्षि भृगु हिमालय क्षेत्र की यात्रा पर निकले हुए थे और उन्हें एक शांत स्थान की तलाश थी जहां वे ध्यान और तपस्या कर सकें। इस खोज में वे अमरनाथ (AmarnathYatra) की गुफा तक पहुंचे, जहां उन्हें हिम से निर्मित भगवान शिव (Lord Shiva) के स्वरूप बाबा बर्फानी के दर्शन हुए। तभी से यह गुफा एक पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो गई और आज भी हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं।
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अन्य लोककथा
एक अन्य लोककथा के मुताबिक, अमरनाथ गुफा का पहला दर्शन लगभग 15वीं सदी में बूटा मलिक नाम के एक चरवाहे ने किया था। मान्यता है कि एक दिन बूटा मलिक को एक साधु मिला, जिसने उसे कोयलों से भरा एक थैला दिया। जब वह अपने घर पहुंचा और थैला खोला, तो कोयलों की जगह उसमें सोने के सिक्के निकले। यह देखकर वह आश्चर्यचकित हो गया और उस साधु की खोज में वापस गया। उसी दौरान वह अमरनाथ की गुफा तक पहुंचा, जहां उसे हिम से निर्मित शिवलिंग के दर्शन हुए। ऐसा माना जाता है कि तभी से अमरनाथ यात्रा (AmarnathYatra) की परंपरा शुरू हुई। इसके अलावा, ‘राजतरंगिणी’ जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी अमरेश्वर शिवलिंग का उल्लेख मिलता है। इन उल्लेखों के अनुसार, 11वीं शताब्दी में कश्मीर की रानी सूर्यमती ने अमरनाथ मंदिर में त्रिशूल और अन्य पवित्र चिह्न अर्पित किए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि अमरनाथ गुफा का धार्मिक महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। अमरनाथ गुफा के दर्शन कर भक्तगण खुद को धन्य समझते हैं।
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