भगवद् गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आत्मबोध और कर्म का गूढ़ ज्ञान है। इसलिए इसे उपहार में देने से पहले यह समझना जरूरी है कि क्या सामने वाला व्यक्ति इसके महत्व और मर्यादा को समझता है या नहीं। हिंदू धर्मग्रंथों में श्रीमद् भगवद् गीता (Bhagavad Gita) को अत्यंत पवित्र और गूढ़ ग्रंथ माना गया है। यह ग्रंथ न केवल जीवन के कर्म-सिद्धांतों को समझाता है, बल्कि व्यक्ति को धर्म, कर्तव्य और मोक्ष के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। भगवद् गीता वह दिव्य संवाद है जो स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को दिया था, और जो आज भी हर जीवन की दिशा तय करने में सक्षम है।
शास्त्रों के अनुसार भगवद् गीता को यूं ही किसी को भी उपहार में देना उचित नहीं माना जाता
अक्सर देखा जाता है कि लोग धार्मिक भावनाओं से प्रेरित होकर भगवद् गीता (Bhagavad Gita) को गिफ्ट के रूप में दे देते हैं। कोई परीक्षा पास करता है, नया व्यवसाय शुरू करता है, नया घर लेता है या कोई धार्मिक कार्य होता है इन अवसरों पर गीता देना सामान्य परंपरा बन गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों के अनुसार भगवद् गीता को यूं ही किसी को भी उपहार में देना उचित नहीं माना जाता? जी हां, इसके पीछे आध्यात्मिक और कर्म के गहरे सिद्धांत जुड़े हुए हैं।
इन चीज़ों का दान सोच-समझकर करें
स्कंद पुराण में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि अपात्र को दान देना वर्जित माना गया है। सरल शब्दों में कहा जाए तो भगवद् गीता, रामायण, वेद, पुराण जैसे पवित्र ग्रंथ या देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें उन लोगों को नहीं देनी चाहिए जो इनकी उचित देखभाल न कर सकें या जो इनका सम्मानपूर्वक उपयोग न कर पाएं। भगवद् गीता (Bhagavad Gita) और भगवान की मूर्ति अत्यंत पूजनीय मानी जाती हैं, इसलिए इन्हें केवल उन्हीं व्यक्तियों को उपहार में देना चाहिए जो धार्मिक, सात्विक प्रवृत्ति के हों और जिनका आचरण शुद्ध हो। विशेष रूप से यह ध्यान रखना चाहिए कि वह व्यक्ति मांस और मदिरा का सेवन न करता हो, क्योंकि ऐसी आदतें भगवान के प्रति अनादर मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान ऐसे स्थान पर निवास नहीं करते जहाँ राक्षसी प्रवृत्ति या अपवित्रता का वातावरण हो।
क्यों नहीं देना चाहिए गीता हर किसी को?
धार्मिक ग्रंथों जैसे स्कंद पुराण आदि में दान की महत्ता का विस्तार से वर्णन मिलता है। उपहार देना भी एक प्रकार का पुण्य कर्म माना गया है, लेकिन धार्मिक ग्रंथों जैसे भगवद् गीता (Bhagavad Gita) को गिफ्ट में देना हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि जिसे दिया जा रहा है वह व्यक्ति कैसा है। यदि वह धार्मिक प्रवृत्ति का, सत्कर्म करने वाला और भगवान के प्रति श्रद्धा रखने वाला हो, तो उसे भगवद् गीता, देवी-देवताओं की मूर्तियां या धार्मिक पुस्तकें भेंट करना उचित और फलदायक माना जाता है।
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किस अवसर पर दें भगवद् गीता? समझें सही समय और महत्व
- जन्मदिन: जब कोई नया वर्ष अपने जीवन में प्रवेश कर रहा हो, तो गीता उसे सही दिशा देने का कार्य कर सकती है।
- विवाह: नवदंपति को जीवन मूल्यों और कर्तव्यों का बोध कराने के लिए गीता उत्तम उपहार है।
- गृह प्रवेश: नए घर में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिकता लाने के लिए गीता एक पवित्र भेंट मानी जाती है।
- प्रमोशन या नई नौकरी: करियर में नई शुरुआत करते समय गीता जीवन में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
- नया व्यापार आरंभ करते समय: व्यवसाय में नैतिकता और निर्णय क्षमता बढ़ाने में गीता सहायक हो सकती है।
कॉलेज में प्रवेश या नई शिक्षा की शुरुआत: युवा मन को सही दिशा और सोच देने के लिए गीता का ज्ञान अत्यंत उपयोगी होता है।
क्या करें अगर किसी को देना हो गीता?
यदि आप किसी को भगवद् गीता (Bhagavad Gita) देना चाहते हैं, तो पहले यह सुनिश्चित करें कि वह व्यक्ति इसके महत्व को समझता हो और उसका आदर करता हो। साथ ही गीता के साथ यह भी समझाएं कि यह ग्रंथ केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और जीवन सुधार का साधन है। इसके साथ गीता का उद्देश्य, भाव और उपयोग का तरीका बताना अत्यंत आवश्यक है।
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