श्रद्धा और साधना के पर्व गुप्त नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह नवरात्रि वर्ष में दो बार माघ और आषाढ़ मास में पड़ती है। इस विशेष अवधि में देवी दुर्गा के दस गुप्त स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिन्हें दश महाविद्याएं कहा जाता है। इस साल गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 26 जून से हो रही है। इसी दिन सुबह 5:25 से 6:58 बजे के बीच घटस्थापना के लिए शुभ समय माना गया है। इस विशेष अवसर पर देशभर में मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने हेतु विधिवत पूजा-पाठ और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। गुप्त नवरात्रि की पूजा विधियां शारदीय नवरात्रि जैसी ही होती हैं, लेकिन इनका महत्व गुप्त साधना और विशेष अनुष्ठानों में होता है। आपको बता दें कि साल में कुल चार नवरात्रि होती हैं, चैत्र, शारदीय और दो गुप्त नवरात्रि। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि बड़े पैमाने पर सार्वजनिक रूप से मनाई जाती हैं, वहीं गुप्त नवरात्रियां विशेष रूप से तांत्रिक साधकों और आध्यात्मिक अनुयायियों द्वारा गुप्त रूप से मनाई जाती हैं।
गुप्त नवरात्रि का महत्व
गुप्त नवरात्रि साधकों के लिए वह समय होता है जब वे आंतरिक ऊर्जा जागरण, आत्मबल वृद्धि और सिद्धियों की प्राप्ति के लिए देवी के विशेष रूपों की साधना करते हैं। इन दिनों तांत्रिक क्रियाएं, यंत्र-साधना और बीज मंत्रों का जाप प्रमुख होता है। धार्मिक मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में साधना करने से मां दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं और भक्त को भौतिक व आध्यात्मिक लाभ दोनों देती हैं। माना जाता है कि इस दौरान साधक को अलौकिक शक्तियां प्राप्त हो सकती हैं।
कौन-सी हैं दस महाविद्याएं?
दस महाविद्याएं मां दुर्गा के दस शक्तिशाली रूप हैं, जो अलग-अलग गुणों, शक्तियों और तांत्रिक रहस्यों की प्रतीक मानी जाती हैं। आइए जानते हैं इन दस महाविद्याओं के नाम और उनका महत्व
1. मां काली – यह मां पार्वती का उग्र और शक्तिशाली रूप हैं, जो संसार से बुराई और नकारात्मकता का अंत करती हैं।
2. मां तारा – ज्ञान, मुक्ति और करुणा की देवी हैं। यह अपने भक्तों के सभी दुखों को हर लेती हैं।
3. त्रिपुर सुंदरी – सौंदर्य, प्रेम और शक्ति की देवी मानी जाती हैं। यह सुख, समृद्धि और सौंदर्य की प्रतीक हैं।
4. मां भुवनेश्वरी – सम्पूर्ण सृष्टि की संचालिका हैं। यह संसार को संभालती और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।
5. मां छिन्नमस्ता – आत्म-बलिदान और आत्मज्ञान की देवी हैं। यह भक्तों को ज्ञान, शक्ति और मुक्ति प्रदान करती हैं।
6. त्रिपुर भैरवी – यह देवी शक्ति और विनाश की अधिष्ठात्री हैं, जो भय से मुक्ति दिलाकर साहस प्रदान करती हैं।
7. मां धूमावती – ज्ञान और रहस्य की देवी हैं। कथा है कि भूख लगने पर उन्होंने भगवान शिव का भक्षण कर लिया, जिससे उन्हें विधवा स्वरूप में रहना पड़ा। इसलिए इनकी पूजा विवाहित स्त्रियां नहीं करतीं।
8. बगलामुखी देवी – शत्रुनाशिनी देवी हैं। यह अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उन्हें बाहरी खतरों से बचाती हैं।
9. मातंगी देवी – यह देवी विद्या, संगीत, कला और वाणी की अधिपति हैं। विद्यार्थी और कलाकार इनकी उपासना करते हैं।
10. कमलात्मिका (कमला) देवी – लक्ष्मी स्वरूपा देवी हैं, जो अपने भक्तों को धन, वैभव और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
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इन बातों का रखें विशेष ख्याल
- गुप्त नवरात्रि के दौरान मांस-मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन कतई ना करें। इस दौरान तंत्र साधना की जाती है, इसीलिए जरूरी है पवित्रता बनाएं रखें। अन्यथा इसका सेवन करने से रोग, दरिद्रता आ सकती है।
- गुप्त नवरात्रि के दौरान साफ सफाई का भी विशेष ख्याल रखें। अपवित्र और गंदे स्थान पर पूजा-अर्चना ना करने से बचें। तन, मन और स्थान को पवित्र करके ही पूजा पाठ करें। इसके अलावा अव्यवस्थित स्थान पर भी पूजा ना करें, ऐसा करने से आर्थिक हानि होने की संभावना है।
- गुप्त नवरात्रि के दौरान क्रोध और वाणी और अपशब्दों का उपयोग करने से बचें। इस दौरान किसी का अपमान ना करें, झूठ ना बोलें। ऐसा करने से कार्यों में मुश्किलें आ सकती है।
- गुप्त नवरात्रि के दौरान भूकर भी पूजा की सामग्री और माता की मूर्ति को गंदे हाथों से स्पर्श ना करें। इसके अलावा देवी मां और उनकी से जुड़ी किसी भी चीज का अनादर ना करें। अन्यथा ऐसा करने से घर में अशांति आ सकती है।
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