Mahakaleshwar Temple

महाकाल का शृंगार: क्यों हर दिन बदलता है भगवान शिव का स्वरूप?

उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भगवान शिव के रूप महाकाल (Mahakaal) का प्रतिदिन विशेष शृंगार किया जाता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी छिपा होता है। आइए जानते हैं कि प्रतिदिन महाकाल का शृंगार अलग-अलग क्यों किया जाता है और इसके पीछे की क्या कहानी है। महाकाल का शृंगार: एक दिव्य परंपरा महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) में भगवान शिव के रूप महाकाल का शृंगार प्रतिदिन अलग-अलग तरीके से किया जाता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी छिपा होता है। महाकाल का शृंगार उनके विभिन्न रूपों और भावों को दर्शाता है, जो भक्तों को उनके दिव्य स्वरूप के करीब ले जाता है। शृंगार के पीछे का धार्मिक महत्व महाकाल का शृंगार (Mahakal Shringar) केवल सजावट नहीं है, बल्कि यह एक धार्मिक अनुष्ठान है। यह शृंगार भगवान शिव के विभिन्न रूपों और उनकी लीलाओं को दर्शाता है। प्रतिदिन अलग-अलग शृंगार करने के पीछे का उद्देश्य भक्तों को भगवान शिव (Lord Shiva) के विभिन्न रूपों के दर्शन कराना और उनकी कृपा प्राप्त करना है। महाकाल का अनूठा शृंगार 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन में विराजित बाबा महाकाल का हर दिन विभिन्न रूपों में शृंगार होता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि यह भगवान शिव (Lord Shiva) के विभिन्न रूपों को दर्शाता है। हर दिन अलग-अलग रूप में महाकाल के दर्शन करने से भक्तों को एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है। महाकाल के शृंगार के विभिन्न रूप इसे भी पढ़ें:- प्रेमानंद जी महाराज: गुरु दक्षिणा का सही अर्थ और महत्व महाकाल के शृंगार का महत्व उज्जैन स्थित महाकाल (Mahakaleshwar Temple) के मंदिर में हर दिन आरती के बाद बाबा को एक अलग रूप में सजाया जाता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि यह भगवान शिव के विभिन्न रूपों को दर्शाता है। हर दिन अलग-अलग रूप में महाकाल के दर्शन करने से भक्तों को एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है। महाकाल के शृंगार (Mahakal Shringar) का यह अनूठा तरीका भक्तों को भगवान शिव की विभिन्न लीलाओं और रूपों के बारे में जानने का अवसर प्रदान करता है। यह शृंगार न केवल भक्तों की आस्था को मजबूत करता है, बल्कि उन्हें भगवान शिव (Lord Shiva) के प्रति समर्पण और भक्ति का संदेश भी देता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Mahakaleshwar Temple #UddhavThackeray #BJP #ModiGovt #MaharashtraPolitics #ShivSena #LokSabhaElections #IndianPolitics #PoliticalAttack #MaharashtraNews #ModiVsOpposition

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Sheer Khurma Recipe

शीर कोरमा रेसिपी: ईद पर बनाएं ये आसान सी शीर कोरमा, मिलेगी तारीफ ही तारीफ 

शीर कोरमा एक खास मुगलई मिठाई है, जिसे खासतौर पर ईद और अन्य त्योहारों के अवसर पर बनाया जाता है, लेकिन ईद बिना शीर कोरमे की अधूरी मानी जाती है। यह एक तरह की मीठी सेंवई होती है, जिसे दूध, ड्राई फ्रूट्स और खोया के साथ मिक्स कर बनाया जाता है। इसका स्वाद बेहद लज़ीज़ और मलाईदार होता है, जो हर किसी को पसंद आता है। शीर कोरमा बनाने की विधि बेहद आसान है और इसे घर पर बड़ी आसानी से तैयार किया जा सकता है। आइए जानते हैं शीर कोरमा की रेसिपी (Sheer Khurma Recipe), जो है बिल्क आसान। शीर कोरमा (Sheer Khurma) बनाने के लिए आवश्यक सामग्री शीर कोरमा बनाने  (Sheer Khurma Recipe) के लिए आपको निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होगी-  सामग्री: ड्राई फ्रूट्स और मसाले: स्वाद बढ़ाने के लिए: शीर कोरमा बनाने की विधि  (Sheer Khurma Recipe), 1. सेंवई भूनना सबसे पहले एक कढ़ाई में घी गरम करें। इसमें सेंवई डालकर धीमी आंच पर सुनहरी होने तक भून लें। ध्यान रहे कि सेंवई जले नहीं, इसलिए इसे लगातार चलाते रहें।  और जब यह हल्की ब्राउन हो जाए, तो इसे प्लेट में निकालकर अलग रख दें। 2. दूध उबालना अब उसी कढ़ाई में दूध डालें और धीमी आंच पर दूध उबालें। दूध को बीच-बीच में चलाते रहें ताकि यह तले में लगे नहीं। जब दूध थोड़ा गाढ़ा हो जाए, तो इसमें खोया डालें और अच्छी तरह मिला लें। खोया दूध में पूरी तरह घुल जाना चाहिए। 3. ड्राई फ्रूट्स भूनना एक अलग छोटे पैन में थोड़ा सा घी डालें और उसमें बादाम, काजू, पिस्ता, किशमिश, खजूर और चिरौंजी को हल्का सा भून लें। इससे ड्राई फ्रूट्स का स्वाद और बढ़ जायेगा। 4. शक्कर और सेंवई मिलाना जब दूध अच्छी तरह उबल जाए, तो इसमें भूनी हुई सेंवई डालें और 5-7 मिनट तक पकने दें। इसके बाद इसमें शक्कर डालकर अच्छी तरह मिलाएं। 5. मसाले और ड्राई फ्रूट्स मिलाना अब इसमें पिसी हुई इलायची, भुने हुए ड्राई फ्रूट्स और केसर डालें। इसे धीमी आंच पर 10 मिनट तक पकने दें ताकि सभी फ्लेवर आपस में अच्छी तरह घुल-मिल जाएं। 6. अंतिम चरण अंत में इसमें गुलाब जल और कंडेंस्ड मिल्क डालकर मिला दें। इसे और 2-3 मिनट तक पकाकर गैस बंद कर दें। इसे भी पढ़ें:- कब और कहां लेंगे भगवान विष्णु कल्कि का अवतार? सर्विंग और सजावट शीर कोरमा को गर्म या ठंडा परोसा जा सकता है। इसे परोसते समय ऊपर से कटे हुए बादाम और पिस्ता छिड़कें, जिससे यह और आकर्षक लगे। कुछ खास टिप्स: शीर कोरमा  (Sheer Khurma) सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि एक पारंपरिक व्यंजन है जो त्योहारों और खास मौकों की मिठास बढ़ा देता है। इसकी खुशबू और स्वाद इसे बेहद खास बनाते हैं। अगर आप भी अपने परिवार और मेहमानों को कोई खास मिठाई खिलाना चाहते हैं, तो यह शीर कोरमा रेसिपी (Sheer Korma Recipe) जरूर ट्राई करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Sheer Khurma Recipe #SheerKorma #EidDesserts #EidSpecial #SheerKormaRecipe #EidMubarak #SweetDelights #FestiveDesserts #HomemadeSweets #EasyRecipes #IndianSweets

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Ayodhya Ram Navami 2025

अयोध्या राम नवमी 2025: भगवान राम के जन्मोत्सव पर होगा भव्य आयोजन

राम नवमी (Ram Navami) हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। साल 2025 में राम नवमी 6 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस अवसर पर अयोध्या (Ayodhya) में भव्य आयोजन किया जाएगा, जहां लाखों भक्त भगवान राम के दर्शन करने और उनकी आराधना करने के लिए एकत्रित होंगे। अयोध्या में राम नवमी का त्योहार बहुत ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है, और इस बार भी यह आयोजन और भी भव्य होगा। राम नवमी 2025 की तिथि और मुहूर्त साल 2025 में राम नवमी 6 अप्रैल को मनाई जाएगी। नवमी तिथि 5 अप्रैल को रात 10:14 बजे से शुरू होगी और 6 अप्रैल को रात 10:28 बजे समाप्त होगी। इस दिन भगवान राम (Lord Ram) की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त निम्नलिखित है: श्रीराम जन्मोत्सव कार्यक्रमचैत्र शुक्ल नवमी, संवत् 2081दिनांक: 6 अप्रैल 2025, रविवार अयोध्या में राम नवमी का भव्य आयोजन अयोध्या (Ayodhya) में राम नवमी (Ram Navami) का त्योहार बहुत ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर अयोध्या में भव्य आयोजन किया जाएगा, जहां लाखों भक्त भगवान राम (Lord Ram) के दर्शन करने और उनकी आराधना करने के लिए एकत्रित होंगे।  इसे भी पढ़ें:- कब और कहां लेंगे भगवान विष्णु कल्कि का अवतार? राम नवमी का धार्मिक महत्व राम नवमी (Ram Navami) हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भगवान राम (Lord Ram) के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में जाना जाता है, और उनकी पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। राम नवमी के दिन भगवान राम की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। राम नवमी के दिन क्या करें? नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Ayodhya AyodhyaRamNavami2025 #RamNavamiCelebration #RamJanmotsav #LordRam #AyodhyaTemple #RamNavamiFestival #ShriRam #RamNavamiRituals #AyodhyaEvent #BhagwanRam

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Kalash Sthapana Time & Significance

चैत्र नवरात्रि 2025: कलश स्थापना का सही समय और महत्व, गलत मुहूर्त में करने से बचें

चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो देवी दुर्गा (Devi Durga) की आराधना के लिए मनाया जाता है। यह नवरात्रि चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है और नवमी तिथि तक चलती है। साल 2025 में चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू होगी और 7 अप्रैल तक चलेगी। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है, जो देवी दुर्गा के आगमन का प्रतीक है। लेकिन कलश स्थापना का सही समय और मुहूर्त जानना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि गलत मुहूर्त में कलश स्थापना करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। चैत्र नवरात्रि 2025 की तिथि और समय साल 2025 में चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) 30 मार्च से शुरू होगी। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाएगी, जो 30 मार्च को होगी। कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त निम्नलिखित है: कलश स्थापना का महत्व कलश स्थापना (Kalash Sthapana) नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। कलश को देवी दुर्गा (Devi Durga) का प्रतीक माना जाता है, और इसे स्थापित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। कलश स्थापना के दौरान जल, नारियल, आम के पत्ते और लाल कपड़े का उपयोग किया जाता है। कलश स्थापना के बाद देवी दुर्गा की पूजा की जाती है और नवरात्रि के नौ दिनों तक उनकी आराधना की जाती है। कलश स्थापना के दौरान क्या करें? इसे भी पढ़ें:- प्रेमानंद जी महाराज: गुरु दक्षिणा का सही अर्थ और महत्व चैत्र नवरात्रि और कलश स्थापना चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है, जो देवी दुर्गा के आगमन का प्रतीक है। कलश स्थापना के बाद नवरात्रि के नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। कलश स्थापना के दौरान सही मुहूर्त का चयन करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि गलत मुहूर्त में कलश स्थापना करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। कलश स्थापना (Kalash Sthapana) के नियम और विधि नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Chaitra Navratri #ChaitraNavratri2025 #KalashSthapana #NavratriMuhurat #NavratriPuja #NavratriSignificance #ChaitraNavratri #Ghatasthapana #HinduFestivals #NavratriVrat #NavratriWorship

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Budhaditya Yoga

29 मार्च को बन रहा है बुधादित्य योग, जानिए कौन सी राशियों की चमकेगी किस्मत

ज्योतिष शास्त्र में बुधादित्य योग (Budhaditya Yoga) को अत्यंत शुभ और दुर्लभ माना जाता है। यह योग तब बनता है जब बुध और सूर्य एक ही राशि में स्थित होते हैं। 29 मार्च 2025, शनिवार को यह शुभ योग बनने जा रहा है, जो वृषभ, वृश्चिक और मकर राशि के जातकों के लिए विशेष लाभकारी सिद्ध होगा। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कैसे यह योग आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है और किन उपायों से आप इसका अधिकतम लाभ उठा सकते हैं। क्या है बुधादित्य योग? बुधादित्य योग (Budhaditya Yoga) एक दुर्लभ खगोलीय संयोग है जो सूर्य और बुध के एक ही राशि में होने पर बनता है। ज्योतिष में बुध को बुद्धि, वाणी और व्यापार का कारक माना जाता है, जबकि सूर्य आत्मबल और प्रतिष्ठा का प्रतीक है। जब ये दोनों ग्रह मिलते हैं, तो यह योग धन, यश और सफलता के नए द्वार खोलता है। किन राशियों को मिलेगा लाभ? 1. वृषभ राशि (Taurus) प्रभाव: शुभ उपाय: 2. वृश्चिक राशि (Scorpio) प्रभाव: शुभ उपाय: इसे भी पढ़ें:- प्रेमानंद जी महाराज: गुरु दक्षिणा का सही अर्थ और महत्व 3. मकर राशि (Capricorn) प्रभाव: शुभ उपाय: बुधादित्य योग (Budhaditya Yoga) का अधिकतम लाभ कैसे उठाएं? नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Budhaditya Yoga #BudhAdityaYoga #AstrologyPredictions #March29Horoscope #LuckyZodiacSigns #AstroUpdate #Horoscope2024 #ZodiacLuck #PlanetaryAlignment #VedicAstrology #AstrologyTips

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Guru Dakshina Meaning & Importance

प्रेमानंद जी महाराज: गुरु दक्षिणा का सही अर्थ और महत्व

गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का एक अभिन्न अंग रही है। गुरु को ईश्वर के समान माना जाता है, क्योंकि वे ही शिष्य को अज्ञानता के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शिष्य अपने गुरु को गुरु दक्षिणा देकर उनका आभार व्यक्त करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुरु को सबसे अच्छी गुरु दक्षिणा क्या दे? प्रेमानंद जी महाराज, जो एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और विचारक हैं, इस विषय पर गहन ज्ञान और सीख प्रदान करते हैं। उनके अनुसार, गुरु दक्षिणा (Guru Dakshina) केवल धन या भौतिक वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आंतरिक भावना और समर्पण से जुड़ी हुई है। गुरु दक्षिणा का वास्तविक अर्थ प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Ji Maharaj) के अनुसार, गुरु दक्षिणा का वास्तविक अर्थ केवल धन या भौतिक वस्तुओं का दान नहीं है। गुरु दक्षिणा का मूल उद्देश्य गुरु के प्रति कृतज्ञता और समर्पण की भावना को व्यक्त करना है। गुरु शिष्य को ज्ञान, अनुशासन और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाते हैं, और शिष्य का कर्तव्य है कि वह इस ज्ञान को अपने जीवन में उतारे और उसे दूसरों तक पहुंचाए। गुरु दक्षिणा का सही अर्थ है गुरु के दिए हुए ज्ञान को अपने जीवन में लागू करना और उसे समाज के कल्याण के लिए उपयोग करना। गुरु दक्षिणा के रूप में क्या दें? इसे भी पढ़ें:- सीएम योगी ने अपने तीसरे टर्म को लेकर कही यह बड़ी बात, मचा सियासी हड़कंप  गुरु दक्षिणा का आध्यात्मिक महत्व प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Ji Maharaj) के अनुसार, गुरु दक्षिणा (Guru Dakshina) का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। गुरु दक्षिणा केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि यह शिष्य के जीवन में आंतरिक परिवर्तन लाने का एक साधन है। गुरु दक्षिणा देने का उद्देश्य शिष्य को आत्मनिरीक्षण करने और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करना है। गुरु दक्षिणा के माध्यम से शिष्य अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करता है। गुरु की इच्छा यह है कि शिष्य भगवत प्राप्ति के मार्ग पर चले। उन्होंने जो नाम दिया है, उसका नाम जप करें। यदि शिष्य गुरु के बताए मार्ग पर नहीं चलेंगे, तो गुरु प्रसन्न नहीं होंगे। गुरु की प्रसन्नता मन, वचन और कर्म से उनकी आज्ञा का पालन करने में है। गुरु की आज्ञा का पालन करना सबसे बड़ी सेवा है। गुरु की आज्ञा सभी के लिए एक ही है: भजन करो, अच्छे आचरण अपनाओ और भगवान को प्राप्त करो। गुरु दक्षिणा और आधुनिक समय आधुनिक समय में गुरु दक्षिणा (Guru Dakshina) का अर्थ बदल गया है। आजकल लोग गुरु दक्षिणा को केवल धन या भौतिक वस्तुओं तक सीमित मानते हैं। लेकिन प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Ji Maharaj) के अनुसार, गुरु दक्षिणा का वास्तविक अर्थ आंतरिक भावना और समर्पण से जुड़ा हुआ है। गुरु दक्षिणा के रूप में धन या भौतिक वस्तुएं देना गलत नहीं है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। शिष्य को गुरु के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण को व्यक्त करना चाहिए और उनके दिए हुए ज्ञान को अपने जीवन में उतारना चाहिए। शिष्य अपने गुरु के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण को व्यक्त करता है और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करता है। Latest News in Hindi Today Hindi News Premanand Ji Maharaj #PremanandJiMaharaj #GuruDakshina #SpiritualWisdom #HinduTradition #VedicTeachings #GuruShishyaBond #SpiritualGuide #IndianWisdom #PremanandMaharaj #DakshinaSignificance

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Amavasya 2025 Zodiac Signs That Need to Stay Cautious

Amavasya 2025: किन राशियों को रहना होगा सावधान?

29 मार्च 2025, शनिवार को चैत्र अमावस्या (Amavasya) का योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में स्थित होते हैं, जिससे कुछ राशियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेषकर मेष, कर्क, तुला और मकर राशि के जातकों को सावधान रहने की आवश्यकता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि किन राशियों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और कौन से उपाय करके अमावस्या के दोषों से बचा जा सकता है। क्यों महत्वपूर्ण है 29 मार्च की अमावस्या? अमावस्या (Amavasya) का दिन पापों से मुक्ति का अवसर प्रदान करने वाला माना जाता है। इस दिन तर्पण, पिंडदान और दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। अमावस्या (Amavasya) पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर भी है, जब लोग श्रद्धापूर्वक श्राद्ध कर्म संपन्न करते हैं। इसके अलावा, अमावस्या की रात साधना, ध्यान और तंत्र-मंत्र क्रियाओं के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इसे आत्मा की शुद्धि और आंतरिक शांति प्राप्त करने का भी दिन माना जाता है। अमावस्या (Amavasya) का दिन चंद्रमा के अदृश्य होने के कारण अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। इस दिन पितृ दोष, शनि और राहु-केतु का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे कुछ राशियों के जातकों को आर्थिक, स्वास्थ्य और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सूर्य चंद्रमा का अमावस्या योग का ज्योतिषीय प्रभाव जब सूर्य और चंद्रमा एक साथ आते हैं, तो यह एक विशेष ऊर्जा का संयोग बनाता है, जिसका ज्योतिषीय दृष्टि से गहरा प्रभाव पड़ता है। इस समय व्यक्ति को मानसिक स्थिरता, आंतरिक शांति और समृद्धि का अनुभव हो सकता है। सूर्य और चंद्रमा की किसी विशेष राशि में स्थिति व्यक्ति के व्यक्तित्व, स्वास्थ्य और जीवन की दिशा को प्रभावित करती है। यदि यह योग जन्म राशि के लिए प्रतिकूल होता है, तो इससे मानसिक तनाव और भावनात्मक असंतुलन की संभावना बढ़ सकती है। किन राशियों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव? इसे भी पढ़ें:- कब और कहां लेंगे भगवान विष्णु कल्कि का अवतार? अमावस्या के दोषों से बचने के उपाय अमावस्या (Amavasya) के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। इस दिन व्रत रखने से मन की शुद्धि होती है और आत्मा को शांति मिलती है। यदि संभव हो, तो पितरों का तर्पण और श्राद्ध करना शुभ माना जाता है, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। गरीबों को दान देना और जल अर्पित करना भी इस दिन अत्यंत फलदायी होता है। प्रार्थना और ध्यान करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और आध्यात्मिक संतुलन बना रहता है। साथ ही, मौन व्रत धारण करने से आंतरिक शक्ति का अनुभव होता है, जिससे जीवन में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Amavasya #Amavasya2025 #ZodiacWarnings #AstrologyTips #LunarPhase #AmavasyaEffects #SpiritualGuidance #AmavasyaRemedies #Horoscope2025 #PlanetaryImpact #AstrologyPredictions

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Kanya Pujan 2024 Auspicious Date & Maa Durga’s Blessings

5 या 6 अप्रैल? जानें कब करें कन्या पूजन, मिलेगा मां दुर्गा का आशीर्वाद

हिंदू धर्म में नवरात्रि (Navratri) का विशेष महत्व होता है। यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है—चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) और शारदीय नवरात्रि। इस साल चैत्र नवरात्रि 30 मार्च 2025 से शुरू होकर 7 अप्रैल 2025 तक चलेगी। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा (Lord Durga) के नौ रूपों की पूजा की जाती है, और अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है।  कन्या पूजन 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त इस साल चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) की अष्टमी 5 अप्रैल 2025 को और नवमी 6 अप्रैल 2025 को पड़ रही है। ऐसे में कन्या पूजन को लेकर लोगों के मन में सवाल है कि यह पूजा 5 अप्रैल को करनी चाहिए या 6 अप्रैल को। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी और नवमी तिथि के संधिकाल में कन्या पूजन (Kanya Pujan) करना सबसे शुभ माना जाता है। इस बार अष्टमी तिथि 5 अप्रैल को सुबह 06:03 बजे से शुरू होकर 6 अप्रैल को सुबह 05:13 बजे तक रहेगी। इसलिए, कन्या पूजन के लिए सबसे उत्तम समय 5 अप्रैल की संध्या या 6 अप्रैल की सुबह होगा। कन्या पूजन मुहूर्त 2025 (अष्टमी एवं नवमी तिथि विवरण) अष्टमी तिथि कन्या पूजन समय: नवमी तिथि कन्या पूजन समय: कन्या पूजन का धार्मिक महत्व कन्या पूजन (Kanya Pujan) हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, विशेषकर नवरात्रि (Navratri) के पावन अवसर पर। इस पूजन में 2 से 10 वर्ष की कुमारी कन्याओं को देवी दुर्गा (Lord Durga) के विभिन्न रूपों के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विभिन्न आयु वर्ग की कन्याओं को देवी के विशेष स्वरूपों से जोड़ा गया है। प्रत्येक आयु वर्ग की कन्या देवी के एक विशेष रूप का प्रतिनिधित्व करती है – दो वर्षीया कुमारी, तीन वर्षीया त्रिमूर्ति, चार वर्षीया कल्याणी, पांच वर्षीया रोहिणी, छह वर्षीया कालिका, सात वर्षीया चंडिका, आठ वर्षीया शाम्भवी, नौ वर्षीया दुर्गा और दस वर्षीया सुभद्रा के रूप में पूजनीय हैं। धर्मशास्त्रों में इन कन्याओं को साक्षात दैवीय शक्ति का अवतार माना गया है। दुर्गा सप्तशती सहित विभिन्न पवित्र ग्रंथों में कन्या पूजन के महत्व पर विशेष बल दिया गया है। यह अनुष्ठान नारी शक्ति और सृष्टि के सृजनात्मक पहलू का सम्मान है। नवरात्रि (Navratri) में कन्या पूजन करने से भक्तों को देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसे भी पढ़ें:- कब और कहां लेंगे भगवान विष्णु कल्कि का अवतार? कन्या पूजन विधि कन्या पूजन से जुड़ी विशेष मान्यताएं नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Kanya Pujan #KanyaPujan #Navratri2024 #MaaDurga #AuspiciousDay #FestivalVibes #NavratriRituals #HinduFestival

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Vinayak Chaturthi 2025

Vinayak Chaturthi 2025: जानें तिथि, पूजा विधि और इस दिन का महत्व

भारतीय संस्कृति और परंपराओं में विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi) का विशेष महत्व है। यह त्योहार भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। गणेश जी को विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति के रूप में पूजा जाता है। विनायक चतुर्थी हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2025 में विनायक चतुर्थी 26 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन भक्तगण गणेश जी (Lord Ganesha) की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। विनायक चतुर्थी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi) का त्योहार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2025 में यह तिथि 26 अगस्त, सोमवार को पड़ रही है। चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 25 अगस्त 2025 को रात 10:15 बजे से होगा और इसका समापन 26 अगस्त 2025 को रात 08:32 बजे तक होगा। इस दिन गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) का व्रत रखा जाता है और शुभ मुहूर्त में गणेश जी की स्थापना की जाती है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:05 बजे से दोपहर 01:38 बजे तक रहेगा। विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi) का महत्व विनायक चतुर्थी का त्योहार भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती ने गणेश जी की रचना की थी। गणेश जी (Ganesh Ji) को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है। इस दिन गणेश जी की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले उनकी पूजा की जाती है। विनायक चतुर्थी के दिन गणेश जी की मूर्ति की स्थापना की जाती है और उन्हें विभिन्न प्रकार के भोग लगाए जाते हैं। इस दिन व्रत रखने का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और गणेश जी की पूजा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। विनायक चतुर्थी की पूजा विधि विनायक चतुर्थी के दिन गणेश जी (Ganesh Ji) की पूजा विधि-विधान से की जाती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद घर की साफ-सफाई करें। इसके बाद गणेश जी की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें। गणेश जी की मूर्ति को लाल कपड़े पर स्थापित करें और उन्हें फूल, अक्षत, रोली और चंदन से सजाएं। गणेश जी को मोदक, लड्डू और अन्य मिष्ठान्न का भोग लगाएं। इसके बाद गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें और गणेश जी की आरती करें। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा (एक प्रकार की घास) अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि दूर्वा अर्पित करने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। पूजा के बाद गणेश जी की मूर्ति को विसर्जित करना भी आवश्यक होता है। विसर्जन के समय भक्तगण “गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या” का जाप करते हैं और गणेश जी से अगले वर्ष फिर से आने का आग्रह करते हैं। इसे भी पढ़ें:- कब और कहां लेंगे भगवान विष्णु कल्कि का अवतार? विनायक चतुर्थी व्रत कथा विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi) के दिन व्रत कथा सुनने और पढ़ने का भी विशेष महत्व है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने स्नान करने से पहले अपने शरीर के मैल से एक बालक की रचना की और उसे अपना द्वारपाल बना दिया। उन्होंने बालक को आदेश दिया कि वह किसी को भी अंदर न आने दे। जब भगवान शिव वहां आए तो बालक ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इस पर क्रोधित होकर भगवान शिव ने बालक का सिर काट दिया। जब माता पार्वती को इस बात का पता चला तो वे बहुत दुखी हुईं। भगवान शिव ने उन्हें खुश करने के लिए एक हाथी के बच्चे का सिर बालक के धड़ पर लगा दिया और उसे जीवित कर दिया। इस तरह गणेश जी का जन्म हुआ और उन्हें सभी देवताओं में प्रथम पूज्य का दर्जा मिला। विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi) का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व विनायक चतुर्थी न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह त्योहार समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देता है। इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाकर गणेश जी की पूजा करते हैं और मिठाइयां बांटते हैं। गणेश उत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें नृत्य, संगीत और नाटक के माध्यम से गणेश जी की महिमा का गुणगान किया जाता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Vinayak Chaturthi 2025 #VinayakChaturthi #VinayakChaturthi #HinduFestival #Ganeshji

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Chanakya Niti

चाणक्य नीति के अनुसार किन जगहों पर जाने से बढ़ सकती मुसीबत?

चाणक्य नीति (Chanakya Niti) भारतीय इतिहास और दर्शन का एक अमूल्य ग्रंथ है, जो जीवन के हर पहलू पर गहन ज्ञान प्रदान करता है। चाणक्य, जिन्हें कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता है, एक महान विद्वान, अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ थे। उनकी नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। चाणक्य ने अपनी नीतियों में कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताया है, जहां भूलकर भी नहीं जाना चाहिए। इन जगहों पर जाने से व्यक्ति को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि वे कौन सी जगहें हैं और क्यों इनसे दूर रहना चाहिए। चाणक्य नीति: वे 5 जगहें, जहां भूलकर भी कभी नहीं जाना चाहिए वरना झेलेंगे बड़ा नुकसान 1. जहां लोगों में संस्कार की कमी हो चाणक्य (Chanakya) ने कहा है कि ऐसी जगहों पर कभी नहीं जाना चाहिए जहां लोगों में संस्कार की कमी हो। संस्कार व्यक्ति के व्यक्तित्व और चरित्र को आकार देते हैं। ऐसी जगहों पर रहने से व्यक्ति के मन में नकारात्मक विचार पैदा हो सकते हैं और उसका चरित्र भी प्रभावित हो सकता है। चाणक्य के अनुसार, संस्कारहीन लोगों के साथ रहने से व्यक्ति का नैतिक पतन हो सकता है और उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए, ऐसी जगहों से दूर रहना चाहिए। 2. जहां रोजगार न हो चाणक्य (Chanakya) ने कहा है कि ऐसी जगहों पर कभी नहीं जाना चाहिए जहां रोजगार के अवसर न हों। रोजगार व्यक्ति के जीवन का आधार है और इसके बिना जीवन में स्थिरता नहीं आ सकती। ऐसी जगहों पर रहने से व्यक्ति को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और उसका जीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है। चाणक्य के अनुसार, रोजगार के अभाव में व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर हो सकता है और उसे मानसिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए, ऐसी जगहों से दूर रहना चाहिए। 3. जहां शिक्षा का माहौल न हो चाणक्य (Chanakya) ने कहा है कि ऐसी जगहों पर कभी नहीं जाना चाहिए जहां शिक्षा का माहौल न हो। शिक्षा व्यक्ति के जीवन को सही दिशा देती है और उसे सफलता की ओर अग्रसर करती है। ऐसी जगहों पर रहने से व्यक्ति का बौद्धिक विकास रुक सकता है और उसके जीवन में अज्ञानता का अंधकार छा सकता है। चाणक्य के अनुसार, शिक्षा के अभाव में व्यक्ति का भविष्य अंधकारमय हो सकता है और उसे सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, ऐसी जगहों से दूर रहना चाहिए। 4. जहां अपने न रहते हों चाणक्य (Chanakya) ने कहा है कि ऐसी जगहों पर कभी नहीं जाना चाहिए जहां अपने लोग न रहते हों। अपने लोगों का साथ व्यक्ति को मानसिक और भावनात्मक सहारा देता है। ऐसी जगहों पर रहने से व्यक्ति को अकेलापन और तनाव का सामना करना पड़ सकता है। चाणक्य के अनुसार, अपनों के बिना जीवन नीरस और अधूरा हो सकता है और व्यक्ति को मानसिक और भावनात्मक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, ऐसी जगहों से दूर रहना चाहिए। इसे भी पढ़ें:- सपने में सांप देखने का मतलब: डरने की नहीं, समझने की है जरूरत 5. जहां इज्जत न मिले चाणक्य ने कहा है कि ऐसी जगहों पर कभी नहीं जाना चाहिए जहां इज्जत न मिले। इज्जत व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा धन है और इसके बिना जीवन अधूरा है। ऐसी जगहों पर रहने से व्यक्ति का आत्मसम्मान घट सकता है और उसे सामाजिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। चाणक्य के अनुसार, इज्जत के बिना जीवन निरर्थक हो सकता है और व्यक्ति को हमेशा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए, ऐसी जगहों से दूर रहना चाहिए। चाणक्य नीति का महत्व चाणक्य नीति (Chanakya Niti) जीवन के हर पहलू पर गहन ज्ञान प्रदान करती है। यह न केवल व्यक्तिगत जीवन में बल्कि व्यावसायिक और सामाजिक जीवन में भी मार्गदर्शन प्रदान करती है। चाणक्य की नीतियां व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर करना सिखाती हैं और उसे सफलता की ओर अग्रसर करती हैं। चाणक्य ने जिन जगहों और स्थितियों से दूर रहने की सलाह दी है, उनका पालन करने से व्यक्ति अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त कर सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Chanakya Niti #5Places #ChanakyaNiti #Chanakya #Places

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