Solar Eclipse 2025 First Surya Grahan Before Navratri

Solar Eclipse 2025: नवरात्रि से एक दिन पहले लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण

साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) 29 मार्च को लगने जा रहा है। यह सूर्य ग्रहण नवरात्रि से ठीक एक दिन पहले पड़ रहा है, जिसके कारण इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व और भी बढ़ गया है। सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से रोकता है। यह ग्रहण उत्तरी अमेरिका, मैक्सिको, कनाडा और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, लेकिन इसका सूतक काल मान्य होगा। सूर्य ग्रहण का समय और सूतक काल साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) 29 मार्च को लगेगा। यह ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 2 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगा और शाम 6 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगा। इस ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 53 मिनट रहेगी। यह चैत्र अमावस्या को लगने वाला खंडग्रास सूर्य ग्रहण होगा। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल केवल उन्हीं क्षेत्रों में मान्य होगा जहां ग्रहण दिखाई देगा। हालांकि, भारत में ग्रहण का धार्मिक प्रभाव अवश्य पड़ेगा। सूर्य ग्रहण का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) का विशेष महत्व है। सूर्य ग्रहण को अशुभ माना जाता है, और इस दौरान कई तरह के नियमों का पालन किया जाता है। ग्रहण के समय सूतक काल लग जाता है, जिसमें कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है। ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, और लोग घर में ही रहकर भगवान का नाम जपते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके दान-पुण्य किया जाता है। सूर्य ग्रहण का सूतक काल साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण चैत्र अमावस्या को लगेगा, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा। इस कारण इस ग्रहण का सूतक काल (Sutak Period) मान्य नहीं होगा। धर्म ग्रंथों के अनुसार, सूतक काल (Sutak Period) को अशुभ माना जाता है, और इस दौरान किसी भी शुभ कार्य को करने की मनाही होती है। सूर्य ग्रहण का सूतक काल आमतौर पर 12 घंटे पहले शुरू होता है, जबकि चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू होता है। हालांकि, चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। ऐसे में ग्रहण से जुड़े धार्मिक नियमों का पालन करना अनिवार्य नहीं होगा, और लोग अपनी दैनिक गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रख सकेंगे। पहला सूर्य ग्रहण कहाँ दिखाई देगा? 29 मार्च को लगने वाला सूर्य ग्रहण दक्षिण अमेरिका, आंशिक उत्तरी अमेरिका, उत्तरी एशिया, उत्तर-पश्चिम अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी ध्रुव, आर्कटिक महासागर और अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा। इसे भी पढ़ें:- कब और कहां लेंगे भगवान विष्णु कल्कि का अवतार? सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें? सूर्य ग्रहण के दौरान क्या न करें? सूर्य ग्रहण का वैज्ञानिक महत्व सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) एक खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से रोकता है, जिसके कारण सूर्य ग्रहण लगता है। सूर्य ग्रहण को वैज्ञानिक दृष्टि से अध्ययन करने के लिए खगोलविद विशेष उपकरणों का उपयोग करते हैं। सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य के वातावरण और उसकी गतिविधियों का अध्ययन किया जाता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Solar Eclipse Sutak Period #SolarEclipse2025 #SuryaGrahana2025 #EclipseNearNavratri #FirstEclipse2025 #AstronomyEvent #SolarPhenomenon #NavratriEclipse #EclipseTiming #CelestialEvent #SunEclipsE

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जूते-चप्पल को सही जगह पर रखकर बनाएं घर को सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र

हमारे जीवन में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व है। वास्तु के अनुसार घर की हर छोटी-बड़ी चीज का सही स्थान और दिशा हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। ऐसे में जूते-चप्पल, जो हमारे दैनिक जीवन का अहम हिस्सा हैं, उन्हें रखने के लिए भी वास्तु नियमों का पालन करना जरूरी है। अगर जूते-चप्पल को गलत जगह या गलत तरीके से रखा जाए, तो इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो सकता है और जीवन में अशांति आ सकती है। आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार जूते-चप्पल को घर में कहां और कैसे रखना चाहिए। जूते-चप्पल रखने का सही स्थान इसे भी पढ़ें:- सपने में सांप देखने का मतलब: डरने की नहीं, समझने की है जरूरत जूते-चप्पल रखने के कुछ अन्य वास्तु नियम नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news जूते-चप्पल #PositiveHomeVibes #VastuTips #HomeEnergy #GoodVibesOnly #OrganizedLiving #ClutterFreeHome #HomeHappiness #PositiveEnergy #VastuShastra #PeacefulLiving

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सपने में सांप देखने का मतलब: डरने की नहीं, समझने की है जरूरत

सपने हमारे जीवन का एक रहस्यमय हिस्सा हैं, जो हमारे अवचेतन मन की भावनाओं और विचारों को प्रकट करते हैं। कई बार हमें सपने में सांप दिखाई देते हैं, जो हमें डरा सकते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सपने में सांप देखने का मतलब केवल डराने वाला नहीं होता है? यह सपना आपके जीवन में आने वाले बदलाव, चुनौतियों और अवसरों के बारे में संकेत दे सकता है। आइए, सपने में सांप देखने के अर्थ और इससे जुड़े संकेतों को विस्तार से समझते हैं। सपने में सांप देखने का सामान्य अर्थ सपने में सांप देखना एक आम बात है, लेकिन इसका अर्थ व्यक्ति के जीवन और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। सांप को प्रतीकात्मक रूप से परिवर्तन, शक्ति, कामुकता और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। सपने में सांप देखने का मतलब यह हो सकता है कि आपके जीवन में कोई बड़ा बदलाव आने वाला है या आपको किसी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, यह सपना आपके अंदर छिपी शक्तियों और भावनाओं को भी प्रकट कर सकता है। सपने में सांप देखने के प्रकार और उनके अर्थ सपने में सांप देखने का अर्थ इस बात पर निर्भर करता है कि सांप कैसा दिख रहा है और आपका उसके साथ क्या संबंध है। आइए, सपने में सांप देखने के विभिन्न प्रकार और उनके संभावित अर्थों को जानते हैं: यदि सपने में बहुत सारे सांप दिखाई दें, तो यह किसी आसन्न संकट का संकेत हो सकता है। हालांकि, यदि आप सपने में उन सांपों को मार देते हैं या उन्हें अपने पास से भगा देते हैं, तो इसका अर्थ है कि आप आने वाले संकट पर सफलतापूर्वक विजय प्राप्त कर लेंगे। यदि सपने में फन उठाए सांप दिखाई दे, तो यह संपत्ति प्राप्ति के संकेत देता है। सफेद सांप का दिखना और उसका काटना शुभ माना जाता है। वहीं, यदि सपने में सांप को बिल में जाते हुए देखा जाए, तो यह धन लाभ का संकेत होता है। अगर सपने में सांप के काटने से मृत्यु हो जाए, तो इसका अर्थ है कि व्यक्ति को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलेगा। सपने में सांप देखने का आध्यात्मिक अर्थ सपने में सांप देखने का आध्यात्मिक अर्थ भी बहुत गहरा हो सकता है। हिंदू धर्म में सांप को कुंडलिनी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। सपने में सांप देखना आपके अंदर छिपी कुंडलिनी शक्ति के जागरण का संकेत हो सकता है। यह सपना आपको आध्यात्मिक जागरण और आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जा सकता है। इसे भी पढ़ें:- कब और कहां लेंगे भगवान विष्णु कल्कि का अवतार? सपने में सांप देखने का मनोवैज्ञानिक अर्थ मनोविज्ञान के अनुसार, सपने में सांप देखना आपके अवचेतन मन की भावनाओं और विचारों को प्रकट करता है। यह सपना आपके डर, चिंता, या किसी छिपी हुई इच्छा को दर्शा सकता है। इसके अलावा, सांप को परिवर्तन और पुनर्जन्म का प्रतीक भी माना जाता है, जो आपके जीवन में आने वाले बदलावों की ओर इशारा कर सकता है। सपने में सांप देखने पर क्या करें? अगर आप सपने में सांप देखकर डर गए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले, इस सपने के संकेतों को समझने की कोशिश करें। यह सपना आपको किसी चुनौती, अवसर या आंतरिक भावना के बारे में संकेत दे रहा हो सकता है। इसके अलावा, आप मन को शांत करने के लिए ध्यान या प्रार्थना का सहारा ले सकते हैं। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news सपने में सांप देखना #DreamInterpretation #SnakeInDreams #SpiritualMeaning #DreamSymbolism #PsychologyOfDreams #DreamAnalysis #HiddenMessages #SnakeDreamMeaning #SpiritualAwakening #SubconsciousMind

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Ram Navami 2025 date

राम नवमी 2025: कब मनाई जाएगी राम नवमी? नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग

राम नवमी (Ram Navami) हिंदू धर्म के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है, जो भगवान राम (Lord Ram) के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2025 में राम नवमी का पर्व 6 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान राम के जन्म की खुशी में पूरे देश में धूमधाम से उत्सव मनाया जाएगा। आइए जानते हैं राम नवमी 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त, योग और पूजा विधि के बारे में विस्तार से। राम नवमी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त वर्ष 2025 में राम नवमी का पर्व 6 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 5 अप्रैल की शाम 07:26 बजे से शुरू होगी और 6 अप्रैल की शाम 07:22 बजे तक रहेगी। राम नवमी (Ram Navami) का शुभ मुहूर्त (पूजा का समय) 6 अप्रैल को सुबह 11:12 बजे से दोपहर 01:39 बजे तक रहेगा। इस दौरान भगवान राम (Lord Ram) की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। राम नवमी का महत्व राम नवमी (Ram Navami) का त्योहार भगवान राम (Lord Ram) के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम और धर्म के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। उनके जीवन से हमें धर्म, कर्तव्य और नैतिकता का पाठ मिलता है। राम नवमी के दिन भगवान राम की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। राम नवमी 2025 के शुभ योग राम नवमी 2025 के दिन कुछ विशेष योग बन रहे हैं, जो इस त्योहार को और भी शुभ बना रहे हैं। राम नवमी पूजा विधि चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें। इस समय भगवान श्रीराम को प्रणाम करके दिन की शुरुआत करें। फिर घर की सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर घर को पवित्र बनाएं। घर के मुख्य दरवाजे पर तोरण लगाएं और रंगोली बनाएं।   रोजमर्रा के कामों से फ्री होने के बाद अभिजीत मुहूर्त में गंगाजल मिले पानी से स्नान करें। आचमन करके पीले या लाल रंग के कपड़े पहनें। इसके बाद सूर्य देव को जल चढ़ाएं।   अब पूजा घर में चौकी पर पीले कपड़े पर राम परिवार की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। भगवान राम का ध्यान करके उन्हें याद करें। पंचोपचार विधि से राम परिवार और हनुमान जी की पूजा करें। पूजा के दौरान राम स्तोत्र और राम चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती करें और भगवान श्रीराम से सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्रार्थना करें।राम नवमी के दिन क्या करें और क्या न करें इसे भी पढ़ें:- कब और कहां लेंगे भगवान विष्णु कल्कि का अवतार? राम नवमी का आध्यात्मिक महत्व राम नवमी का त्योहार न केवल भगवान राम (Lord Ram) के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, बल्कि यह हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर भी देता है। भगवान राम (Lord Ram) ने अपने जीवन में धर्म, कर्तव्य और नैतिकता का पालन किया और हमें भी उनके मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। राम नवमी के दिन उनकी पूजा करने से हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और हमें आत्मिक शांति मिलती है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Ram Navami #RamNavami2025 #ShriRam #RamNavamiFestival #RamNavamiDate #RamNavamiPuja #RamNavamiMuhurat #HinduFestivals #ShubhMuhurat #RamNavamiCelebration #LordRam

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Gangaur Vrat 2025 Date, Significance & Puja Vidhi

गणगौर व्रत 2025: जानें तारीख, महत्व और पूजा विधि

गणगौर व्रत हिंदू धर्म में महिलाओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए किया जाता है। गणगौर व्रत विशेष रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इसे करने से उन्हें अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं कि गणगौर व्रत 2025 में कब है, इसका क्या महत्व है और इसकी पूजा विधि क्या है। गणगौर व्रत 2025 की तारीख गणगौर व्रत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। साल 2025 में गणगौर व्रत 31 मार्च 2025, मंगलवार को पड़ रहा है। इस दिन महिलाएं गणगौर माता की विधि-विधान से पूजा करती हैं और व्रत का पारण करती हैं। गणगौर व्रत का महत्व गणगौर व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह व्रत मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इस व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा, कुंवारी कन्याएं भी यह व्रत करती हैं ताकि उन्हें मनचाहा वर प्राप्त हो सके। गणगौर व्रत का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह व्रत माता पार्वती के अपने मायके आगमन की कथा से जुड़ा हुआ है।  गणगौर व्रत की पूजा विधि गणगौर व्रत की पूजा विधि अत्यंत सरल और पवित्र मानी जाती है। यह व्रत 16 दिनों तक चलता है और इस दौरान महिलाएं विधि-विधान से गणगौर माता की पूजा करती हैं। आइए जानते हैं कि गणगौर व्रत की पूजा कैसे की जाती है: इसे भी पढ़ें:- भगवान विट्ठल की दिव्य धाम, जहां पीएम मोदी भी हो चुके हैं दर्शनार्थ गणगौर उत्सव क्यों मनाया जाता है? गणगौर पूजा महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखती है। यह देवी गौरी या माता पार्वती के प्रति सम्मान प्रकट करने और विवाह व प्रेम के आनंद को मनाने का पर्व है। खासतौर पर राजस्थान में, इसे वैवाहिक प्रेम और संपूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इस उत्सव में विवाहित और अविवाहित महिलाएं उत्साहपूर्वक भाग लेती हैं। वे शिव और पार्वती की मिट्टी की मूर्तियां बनाकर उन्हें सुंदर वस्त्र पहनाती हैं और श्रद्धापूर्वक उनकी पूजा करती हैं। महिलाएं वैवाहिक सुख और समृद्धि की कामना करते हुए उपवास रखती हैं। गणगौर के दिन पारंपरिक व्यंजन भी तैयार किए जाते हैं। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news गणगौर व्रत #GangaurVrat2025 #GangaurPuja #GangaurFestival #GangaurDate #HinduFestivals #GangaurSignificance #GangaurPooja #IndianTradition #FastingRituals #GangaurCelebration

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Gudi Padwa 2025 Date, History, Significance & Celebration

गुढी पाडवा 2025: नववर्ष की शुरुआत का पावन पर्व, जानें इसका इतिहास और महत्व

महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में मनाए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है, जो हिंदू नववर्ष (Hindu New Year)  की शुरुआत का प्रतीक है। यह त्योहार न केवल नए साल की शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि इसमें ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व भी छिपा है। आइए जानते हैं कि गुढी पाडवा क्यों मनाया जाता है, इसका इतिहास क्या है और इसका क्या महत्व है। गुढी पाडवा का शुभ मुहूर्त ज्योतिषीय गणना के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 29 मार्च को शाम 4:27 बजे शुरू होकर 30 मार्च को दोपहर 12:49 बजे समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa) का पर्व 30 मार्च को मनाया जाएगा। गुढी पाडवा पर विशेष योगों का संयोग गुढी पाडवा (Gudi Padwa) के दिन इंद्र योग बन रहा है, जो शाम 5:54 बजे तक रहेगा। इस योग में किए गए शुभ कार्य सफल होते हैं और ब्रह्म देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही, इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जो 30 मार्च को शाम 4:35 बजे से शुरू होकर 31 मार्च की सुबह 6:12 बजे तक रहेगा। ज्योतिष में सर्वार्थ सिद्धि योग को शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके अलावा गुढी पाडवा के दिन पंचक का प्रभाव सुबह 6:13 बजे से शाम 4:35 बजे तक रहेगा। साथ ही, इस दिन बव, बालव और कौलव करण भी बन रहे हैं, जो इसे और अधिक महत्वपूर्ण बना देते हैं। गुढी पाडवा का इतिहास गुढी पाडवा (Gudi Padwa) दो शब्दों से मिलकर बना है—’गुड़ी’ का अर्थ ध्वज (फहराया जाने वाला पताका) है, जबकि ‘पड़वा’ संस्कृत शब्द ‘प्रतिपदा’ से लिया गया है, जो चंद्र मास के पहले दिन को दर्शाता है। गुढी पाडवा (Gudi Padwa) का इतिहास बहुत पुराना है और यह त्योहार कई ऐतिहासिक एवं पौराणिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। रामायण से संबंधित एक कथा के अनुसार, इस दिन भगवान राम ने लंका के राजा रावण को पराजित कर अयोध्या वापसी की थी। अयोध्या वासियों ने भगवान राम का भव्य स्वागत किया और इसी के साथ नए वर्ष की शुरुआत हुई। इसके अलावा, यह त्योहार शालिवाहन शक के प्रारंभ का प्रतीक भी माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन सम्राट शालिवाहन ने अपने शत्रुओं को पराजित कर नए साम्राज्य की स्थापना की थी। वहीं, हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गुड़ी पड़वा के दिन ही भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। इसलिए इसे नए साल (New Year) की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है। इसे भी पढ़ें:-  भगवान विट्ठल की दिव्य धाम, जहां पीएम मोदी भी हो चुके हैं दर्शनार्थ गुढी पाडवा कैसे मनाया जाता है? इस दिन की शुरुआत पारंपरिक स्नान और पूजा-अर्चना से होती है। लोग सुबह जल्दी उठकर अपने घरों की सफाई और सजावट करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और घर के दरवाजे पर विशेष गुड़ी ध्वज स्थापित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह ध्वज समृद्धि का प्रतीक है और बुराई पर अच्छाई की जीत दर्शाता है। गुढी  ध्वज को रंगीन रेशमी दुपट्टे से बनाया जाता है, जिसे बांस की छड़ी पर बांधा जाता है। इसके ऊपरी सिरे पर नीम के पत्ते, आम्र पुष्प और शक्कर की माला (साखर गाठी) लगाई जाती है। इसके साथ ही, उल्टे रखे कलश को इस ध्वज पर स्थापित किया जाता है, जो विजय का प्रतीक माना जाता है। पूजा के बाद, इस गुड़ी को घर के बाहर ऊंचे स्थान पर फहराया जाता है। परंपरागत रूप से, इस दिन लोग विशेष व्यंजन तैयार करते हैं, जिनमें कड़वे नीम के पत्ते और मीठे गुड़ का प्रयोग किया जाता है, जो जीवन में सुख-दुख के संतुलन का प्रतीक होता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Gudi Padwa #GudiPadwa2025 #HinduNewYear #FestivalsOfIndia #GudiPadwaCelebration #MaharashtrianFestival #ShubhMuhurat #GudiPadwaSignificance #NewYearFestival #GudiPadwaTradition #GudiPadwaHistory

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Mystery of the Split Shivling – Ancient Mythological Story

दो भागों में विभाजित शिवलिंग की बड़ी अद्भुत है पौराणिक कहानी

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित काठगढ़ महादेव मंदिर अपनी विशिष्टता के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग दुनिया में सबसे प्राचीन शिवलिंगों में से एक है। इस मंदिर की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि यहां का शिवलिंग दो भागों में विभाजित है, जिसमें एक हिस्सा मां पार्वती का प्रतीक माना जाता है और दूसरा भगवान शिव (Lord Shiva) का। आइए, जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा। युद्ध की शुरुआत की पौराणिक कथा शिव पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा (Lord Brahma) और भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। दोनों स्वयं को सर्वोच्च मानते हुए एक-दूसरे का अपमान करने लगे। जब यह विवाद बढ़ने लगा और युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गई, तब दोनों ने अपने दिव्यास्त्र निकाल लिए। यदि ये अस्त्र चलाए जाते, तो संपूर्ण सृष्टि प्रलय में समा जाती। इस संकट से जगत की रक्षा करने के लिए भगवान शिव (Lord Shiva) ने अपनी माया रची। अचानक दोनों देवताओं के बीच एक अग्निमय लिंग प्रकट हुआ, जिसकी ज्वालाएं आकाश तक फैल गईं। इस दृश्य को देखकर ब्रह्मा और विष्णु आश्चर्यचकित रह गए और उस लिंग के रहस्य को जानने का प्रयास करने लगे। भगवान ब्रह्मा (Lord Brahma) ने उस लिंग का ऊपरी सिरा खोजने के लिए आकाश की ओर उड़ान भरी, जबकि भगवान विष्णु (Lord Vishnu) ने उसका आधार खोजने के लिए धरती के नीचे जाना शुरू किया। लाखों वर्षों तक प्रयास करने के बाद भी दोनों देवता लिंग का आदि या अंत नहीं खोज पाए। थक-हारकर वे वापस उसी स्थान पर लौट आए, जहां उन्होंने इस दिव्य लिंग को देखा था। वहां उन्हें अचानक “ॐ” की पावन ध्वनि सुनाई देने लगी। इस दिव्य ध्वनि को सुनकर वे समझ गए कि यह कोई अलौकिक शक्ति है। तब दोनों ने इस शक्ति की आराधना करनी शुरू कर दी। भगवान शिव (Lord Shiva) उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर लिंग से प्रकट हुए और कहा कि वे दोनों ही समान रूप से पूज्यनीय हैं, इसलिए व्यर्थ में श्रेष्ठता का विवाद न करें। उन्होंने दोनों देवताओं को सद्बुद्धि का आशीर्वाद दिया और पुनः शिवलिंग के रूप में उसी स्थान पर स्थापित हो गए। इसी कारण शिवलिंग की पूजा का महत्व बढ़ गया। इसे भी पढ़ें:- 22 या 23 मार्च, कब है यह शुभ तिथि? जानें पूजा विधि और महत्व काठगढ़ महादेव शिवलिंग की अनोखी मान्यता कालांतर में यह दिव्य शिवलिंग काठगढ़ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसकी अनोखी विशेषता यह है कि इसके दो भागों के बीच की दूरी समय के साथ घटती-बढ़ती रहती है। गर्मियों के दौरान यह दो अलग भागों में विभक्त हो जाता है, जबकि सर्दियों में पुनः जुड़कर एकाकार रूप धारण कर लेता है। ईशान संहिता के अनुसार, यह शिवलिंग फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात प्रकट हुआ था। चूंकि भगवान शिव का यह दिव्य लिंग शिवरात्रि के दिन प्रकट हुआ था, इसलिए यह मान्यता प्रचलित है कि इसकी संरचना चंद्रमा की कलाओं के अनुसार प्रभावित होती है। जैसे-जैसे चंद्रमा घटता-बढ़ता है, वैसे ही शिवलिंग के दो भाग भी एक-दूसरे के करीब आते और दूर जाते हैं। शिवरात्रि के पावन दिन यह दोनों भाग एकाकार हो जाते हैं, जिसे शुभ संकेत माना जाता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Lord Shiva #ShivlingMystery #ShivlingHistory #MythologicalStory #LordShiva #AncientLegends #HinduMythology #DivineMiracle #ShivaTemple #SacredStories #SpiritualHeritage

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Astrology Remedies Simple Tips to Boost Your Luck

ज्योतिष उपाय: इन आसान तरीकों से चमकाएं अपनी किस्मत

ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर व्यक्ति अपनी किस्मत को चमका सकता है और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त कर सकता है। ये उपाय न केवल आसान हैं, बल्कि इन्हें करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। आइए जानते हैं कि ज्योतिष के कौन-से उपाय हैं, जो आपकी किस्मत को चमका सकते हैं। जो लोग कर्ज के कारण दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी परेशान हैं, उन्हें उत्तर दिशा की ओर मुंह करके “अंगारक महाभाग भगवन् भक्तवत्सल त्वां नमामि ममाशेषम् ऋणमाशु विनाशय” मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके साथ ही भगवान शिव पर शमी के पत्ते चढ़ाएं। यह उपाय कर्ज से मुक्ति दिलाने में मददगार साबित होता है। देह से जुड़ी गंभीर पीड़ा अक्सर राहु के कारण होती है। यदि कुंडली में राहु 6वें, 8वें या 12वें भाव में हो, तो जातक को बीमारियों से जल्दी छुटकारा नहीं मिलता। इस समस्या से निजात पाने के लिए भोले नाथ की पूजा करना बहुत ही सरल और प्रभावी उपाय है। राहु की पीड़ा दूर करने के लिए भगवान शिव की आराधना करें और उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास करें। जब शनि ग्रह अष्टम भाव में हो और जातक को धन या कुटुंब सुख से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हो, तो महादेव के समीप घी का दीपक जलाएं और उन्हें राम नाम सुनाएं। इस उपाय से जीवन में नई ऊर्जा का संचार होगा और खुशियों का आगमन होगा। मंगल का संबंध भूमि और खून से होता है। यदि भूमि में कोई दोष हो, तो मंगल ग्रह इसके लिए जिम्मेदार होता है। मंगल दोष से बचने के लिए नित्य गुड़हल के फूल की माला हनुमान जी को अर्पित करें। इससे मंगल ग्रह शुभ फल देगा और अमंगल से बचाव होगा। वैवाहिक जीवन में विसंगतियों से बचने के लिए जातक को गाय को देखकर मन ही मन प्रणाम करना चाहिए। यदि गाय न मिले, तो ऐसा चित्र देखें जिसमें गाय अपने बच्चे के साथ हो। इससे वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। यदि कुंडली में शनि और राहु लग्न में पिशाच योग बना रहे हों, तो जातक को जन्म से ही परिवार में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोगों के जीवन में कई बार पिशाच बाधा होती है और हर क्षेत्र में संघर्ष होता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए किसी ऐसे शिवालय में जाएं जहां प्रतिदिन रुद्राभिषेक होता हो। वहां उत्तर दिशा की ओर मुंह करके 10 माला महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। 150 दिनों तक इस उपाय को करने से लाभ मिलेगा। इसे भी पढ़ें:- 22 या 23 मार्च, कब है यह शुभ तिथि? जानें पूजा विधि और महत्व हर सुबह जागने के बाद अपनी हथेलियों को देखें और फिर उन्हें अपने चेहरे पर धीरे से स्पर्श करें। मान्यता है कि हथेली के अग्रभाग में मां लक्ष्मी, मध्य भाग में मां सरस्वती और कलाई के निकट भगवान विष्णु का वास होता है। इसलिए, सुबह हथेली देखने को शुभ माना जाता है। अपने घर के पास किसी तालाब, नदी या झील में प्रतिदिन मछलियों को आटे की गोलियां डालकर खिलाएं। यह एक सरल उपाय है जो मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने में सहायक माना जाता है। घर से बाहर जाते समय अपने माता-पिता और बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद अवश्य लें। ऐसा करने से नकारात्मक ग्रह दशा में सुधार होता है और परिस्थितियां आपके पक्ष में बनती हैं। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news ज्योतिष शास्त्र #AstrologyTips #JyotishUpay #LuckBooster #VastuRemedies #SuccessMantra #SpiritualGuidance #KarmaHealing #FengShuiTips #PositiveEnergy #WealthAttraction

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Gangaur Vrat 2025 Date, Puja Vidhi & Significance

गणगौर व्रत 2025: मार्च में कब है यह शुभ त्योहार? जानें पूजा विधि और महत्व

गणगौर व्रत हिंदू धर्म में महिलाओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहार है, जो माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए किया जाता है। साल 2025 में गणगौर व्रत (Gangaur Vrat) मार्च महीने में मनाया जाएगा। आइए जानते हैं कि गणगौर व्रत 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि क्या है। गणगौर व्रत 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 31 मार्च को सुबह 9:11 बजे आरंभ होगी और 1 अप्रैल को सुबह 5:42 बजे समाप्त होगी। इस दौरान, गणगौर व्रत 31 मार्च को रखा जाएगा। गणगौर व्रत का महत्व गणगौर व्रत (Gangaur Vrat) का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए किया जाता है। इसके अलावा, कुंवारी लड़कियां भी इस व्रत को करती हैं ताकि उन्हें मनचाहा वर प्राप्त हो। गणगौर व्रत (Gangaur Vrat) माता पार्वती (Mata Parvati) और भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है। यह व्रत माता पार्वती के भगवान शिव (Lord Shiva) से विवाह की कथा को दर्शाता है और उनकी भक्ति और समर्पण को प्रदर्शित करता है। गणगौर व्रत की पूजा विधि गणगौर व्रत क्यों मनाया जाता है? गणगौर उत्सव महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह देवी गौरी या पार्वती (Devi Parvati) के प्रति सम्मान प्रकट करने और विवाह व प्रेम का उत्सव मनाने का प्रतीक है। खासतौर पर राजस्थान में, देवी पार्वती को वैवाहिक प्रेम और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व में विवाहित और अविवाहित महिलाएं श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग लेती हैं। वे शिव और पार्वती की मिट्टी की मूर्तियां बनाकर उन्हें सुंदर वस्त्र पहनाती हैं और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करती हैं। वैवाहिक सुख की कामना के लिए महिलाएं पूरे दिन उपवास रखती हैं। इस दिन पारंपरिक व्यंजन भी तैयार किए जाते हैं। मां पार्वती के मंत्र नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Gangaur Vrat #GangaurVrat2025 #GangaurFestival #GangaurPuja #HinduFestivals #GangaurMata #GangaurSignificance #IndianTraditions #VratFestival #MarchFestivals #GangaurPujaVidhi

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Kalashtami 2025 Date, Puja Vidhi & Spiritual Significance

कालाष्टमी 2025: 22 या 23 मार्च, कब है यह शुभ तिथि? जानें पूजा विधि और महत्व

हिंदू धर्म में कालाष्टमी (Kalashtami) का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव के रुद्र रूप कालभैरव को समर्पित है और इसे हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। साल 2025 में कालाष्टमी 22 और 23 मार्च को पड़ रही है, लेकिन इसकी सही तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों में उलझन है। आइए जानते हैं कि कालाष्टमी 2025 कब है, इसकी शुभ तिथि और पूजा के नियम क्या हैं। कालाष्टमी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 22 मार्च को सुबह 4:23 बजे आरंभ होगी और 23 मार्च को सुबह 5:23 बजे समाप्त होगी। काल भैरव देव की पूजा निशा काल में की जाती है, इसलिए चैत्र माह की कालाष्टमी 22 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन निशा काल में पूजा का शुभ समय देर रात 12:04 बजे से 12:51 बजे तक रहेगा। शुभ योग ज्योतिषीय दृष्टि से फाल्गुन माह की कालाष्टमी (Kalashtami) पर वरीयान और शिववास योग का संयोग बन रहा है। शिववास योग में काल भैरव की पूजा करने से साधक को दोगुना फल प्राप्त होता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं। इसके अतिरिक्त, इस दिन बालव और कौलव करण का भी विशेष योग बन रहा है। कालाष्टमी का महत्व कालाष्टमी (Kalashtami) का व्रत भगवान शिव (Lord Shiva) के कालभैरव (Kaalbhairav) रूप को समर्पित है। कालभैरव को भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है, जो समय के स्वामी और काल के नियंत्रक हैं। इस व्रत को रखने से व्यक्ति को समय और मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। कालाष्टमी का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी होता है, जो शनि, राहु और केतु जैसे ग्रहों की अशुभ स्थिति से परेशान हैं। इस व्रत को रखने से ग्रहों की अशुभ स्थिति का प्रभाव कम होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। इसे भी पढ़ें:-  भगवान विट्ठल की दिव्य धाम, जहां पीएम मोदी भी हो चुके हैं दर्शनार्थ कालाष्टमी पूजा के नियम नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news  Kalashtami #Kalashtami2025 #KaalBhairav #KalbhairavPuja #HinduFestivals #KalashtamiDate #ShubhMuhurat #PujaVidhi #SpiritualRituals #KalashtamiSignificance #Devotional

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