आजकल के जमाने के जिंदगी एक दौड़ की तरह हो कर रह गयी है, जिसमें हर कोई पहले नंबर पर आना चाहता है। पहले पढ़ाई, फिर कैरियर उसके बाद नौकरी और इसी में पूरी जिंदगी निकल जाती है। इसी दौड़ में लोग आजकल अधिक उम्र के होने पर शादी के बारे में सोच रहे हैं और इससे उनके परिवार की शुरुआत भी देरी से होती है। इसका सीधा असर होता है महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर।
ऐसे में एक ऐसा टेस्ट है, जिससे यह पता चल सकता है कि महिला के शरीर में कितने एग बचे हैं और वो कितने समय तक हेल्दी रहेंगे? इसके साथ ही अगर उनके अंडाशय में कोई समस्या है, तो उसका पता भी इससे चल सकता है। इस टेस्ट का नाम है एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) या एएमएच टेस्ट (AMH test)। आइए जानें इसके बारे में विस्तार से।
क्या है एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test)?
क्लीवलैंड क्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) यानी एएमएच टेस्ट (AMH test) से खून में एंटी मुलेरियन हार्मोन (Anti mullerian hormone) की मात्रा को मापा जाता है। सभी लोगों में इन हॉर्मोन्स का उत्पादन होता है, लेकिन डॉक्टर महिलाओं में इस टेस्ट का उपयोग करते हैं। एंटी मुलेरियन हार्मोन (Anti mullerian hormone) गर्भाशय में भ्रूण के सेक्स ऑर्गन्स के विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह हॉर्मोन लेवल मेल फीटस में अधिक होते हैं, है क्योंकि यह उन्हें महिला प्रजनन अंगों के विकास से रोकता है। फीमेल फिट्स को अपने विकास के लिए कम मात्रा में इन हॉर्मोन्स की जरूरत होती है।
एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) को कब कराया जाता है?
डॉक्टर यह जानने के लिए एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) की सलाह दे सकते हैं कि ओवेरियन मास कहीं ग्रैनुलोसा सेल ट्यूमर तो नहीं है। इसके साथ ही इसका का उपयोग इन चीजों को जांचने के लिए भी किया जा सकता है:
- क्या रोगी में उपचार काम कर रहा है?
- क्या रोगी में ट्यूमर वापस आ गया है या नहीं?
एंटी मुलेरियन टेस्ट से क्या पता चलता है?
एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) से पता चलता है कि महिला में कितने एग बचे हैं और यह कब तक हेल्दी रह सकते हैं? इससे पता चल सकता है कि महिला के पास गर्भवती होने के लिए कम समय है या नहीं। इस टेस्ट से यह भी पता चल सकता है कि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) की तैयारी के लिए ओवरीज को कई अंडों को फर्टिलाइज करने के लिए स्टिमुलेट करने वाले इंजेक्टेबल फर्टिलिटी ड्रग्स के प्रति महिला कितने अच्छे से रिस्पॉन्ड कर सकती है या नहीं।
एंटी मुलेरियन टेस्ट से क्या पता नहीं चलता है?
एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) यानी एएमएच टेस्ट (AMH test) को एग काउंट से कनेक्ट किया जाता है। इससे फर्टिलिटी (उपचार के साथ या बिना) या मेनोपॉज से गुजरने के समय का पता नहीं लगता है। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि एंटी मुलेरियन हॉर्मोन (Anti mullerian hormone) लेवल सामान्य सीमा में होनी चाहिए। कुछ अन्य फैक्टर भी गर्भधारण करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं, जैसे:
- उम्र मेडिकल कंडीशन, स्मोकिंग आदि
- स्पर्म काउंट और मोटिलिटी
- नियमित रूप से ओव्लयूटिंग न होना, फैलोपियन ट्यूब का ब्लॉक होना, पेल्विक स्कारिंग, एंडोमेट्रियोसिस और फाइब्रॉएड जैसी गर्भाशय संबंधी असामान्यताएं।
उम्र के अनुसार कितना एंटी मुलेरियन हॉर्मोन लेवल अच्छा है?
एंटी मुलेरियन हॉर्मोन (Anti mullerian hormone) लेवल एक उम्र के बाद कम हो सकता है, इसलिए 30, 40 और 50 की उम्र में ओवेरियन रिजर्व क्षमता में कमी आना सामान्य बात है। इन हॉर्मोन्स का लेवल इस प्रकार होना अच्छा माना गया है:
- 25 साल: 3.0 ng/mL
- 30 साल: 2.5 ng/mL
- 35 साल: 1.5 ng/ mL
- 40 साल: 1 ng/mL
- 45 साल: 0.5 ng/mL
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यह भी ध्यान रखना चाहिएअधिक एंटी मुलेरियन हॉर्मोन (Anti mullerian hormone) लेवल हमेशा अच्छी बात नहीं होती। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के रोगियों में में यह लेवल अधिक हो सकता है।
यह एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) आसानी से घर पर किया जा सकता है। हालांकि, घर पर किए जाने वाले टेस्ट सुविधाजनक होते हैं, लेकिन इसके बाद सलाह के लिए डॉक्टर से बात करें।
नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें।
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