योग भारतीय संस्कृति का अमूल्य उपहार है, जो न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मन को भी संतुलन प्रदान करता है। योग के तमाम आसनों में से सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) को सबसे बेहतर और संपूर्ण योगाभ्यास माना जाता है। आयुष मंत्रालय (Ayush Mantralaya) और योग से जुड़े जानकारों (Yoga Expert) के अनुसार नियमित और सही तरह से सूर्य नमस्कार करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को अत्यधिक लाभ मिलता है।
सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar)
सूर्य नमस्कार, जिसे सन सलुटेशन (Sun Salutation) भी कहा जाता है। सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) योग की एक शृंखलाबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें कुल 12 आसनों (postures) का समावेश होता है। ये आसन शरीर के विभिन्न अंगों को सक्रिय करते हैं और रक्त संचार (Blood Circulation) को बेहतर बनाते हैं। हर आसन के साथ विशेष श्वास प्रक्रिया जुड़ी होती है, जिससे फेफड़ों की क्षमता (Lungs Capacity) भी बढ़ती है। प्राचीन ग्रंथों और आधुनिक शोधों के अनुसार सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) को दिन की शुरुआत में सूर्योदय के समय करना सर्वोत्तम होता है, क्योंकि तब शरीर सबसे अधिक ऊर्जा ग्रहण करने की स्थिति में होता है।
सूर्य नमस्कार के 12 चरण (12 Stages of Surya Namaskar)
- प्रणामासन (Pranamasana)
- हस्त उत्तानासन (Hastauttanasana)
- पदहस्तासन (Padahastasana)
- अश्व संचालनासन (Ashwa Sanchalanasana)
- दण्डासन (Dandasana)
- अष्टांग नमस्कार (Ashtanga Namaskara)
- भुजंगासन (Bhujangasana)
- पर्वतासन (Parvatasana)
- अश्व संचालनासन (दूसरे पैर से)
- पदहस्तासन
- हस्त उत्तानासन
- प्रणामासन
क्या कहते हैं रिसर्च?
जर्नल ऑफ बॉडी वर्क एंड मूवमेंट थेरेपी 2011 (Journal of Bodywork and Movement Therapies 2011) के अनुसार लगातार 12 हफ्तों तक सूर्य नमस्कार करने से बॉडी फ्लेक्सिबल होती है, फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है और मेंटल हेल्थ भी बेहतर रहता है। रिसर्च के अनुसार सूर्य नमस्कार न केवल कैलोरी बर्न करता है बल्कि यह कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ के लिए भी लाभकारी है।
सूर्य नमस्कार के लाभ
1. संपूर्ण शरीर का व्यायाम- सूर्य नमस्कार (Sun Salutation) से शरीर के सभी मुख्य भाग जैसे पीठ, छाती, पेट, हाथ-पैर, गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर प्रभाव पड़ता है। यह एक प्रकार का फुल-बॉडी वर्कआउट है।
2. वजन घटाने में सहायक- रिसर्च के मुताबिक सूर्य नमस्कार की 12 पूर्ण चक्रों से लगभग 156 कैलोरी बर्न होती हैं। इसे नियमित करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है, जिससे वजन कम करने में मदद मिल सकती है।
3. हार्मोन बैलेंस करता है- सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) ग्रंथियों को सक्रिय करता है, विशेषकर थायरॉइड और पिट्यूटरी ग्रंथि। इससे हार्मोनल असंतुलन ठीक होता है, जो महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।
4. मानसिक तनाव में राहत- हर आसन में की जाने वाली गहरी सांसें और ध्यान, तनाव और चिंता को दूर करने में सहायक होती हैं। Harvard Health Publishing की एक रिपोर्ट के अनुसार, नियमित योग करने वाले लोगों में अवसाद और चिंता के लक्षणों में कमी देखी गई है।
5. पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है- पदहस्तासन और भुजंगासन जैसे आसन पेट के अंगों की मालिश करते हैं, जिससे कब्ज, एसिडिटी जैसी समस्याएं दूर होती हैं।
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सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) किसे नहीं करना चाहिए?
- उच्च रक्तचाप (High BP) और हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों को डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।
- गर्भवती महिलाओं को यह अभ्यास करने से बचना चाहिए।
- कमर या रीढ़ की हड्डी में गंभीर समस्या वाले लोग सावधानी से करें।
सूर्य नमस्कार (Sun Salutation) केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि यह एक आध्यात्मिक साधना है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा तीनों को संतुलन मिलता है। प्राचीन भारत से लेकर आधुनिक फिटनेस विशेषज्ञों तक, सभी इस योग अभ्यास की प्रभावशीलता को मान्यता देते हैं। यदि आप दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य से करना चाहते हैं, तो सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) को अपनी दिनचर्या में अवश्य शामिल करें। योग से जुड़े जानकारों के अनुसार अगर आप शुरुआत करना चाहते हैं, तो सप्ताह में 3 से 5 दिन करें और फिर धीरे-धीरे आप आप अपने योगाभ्यास को बढ़ा सकते हैं।
नोट: यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। किसी भी योगासन, चिकित्सा सलाह या इलाज के लिए डॉक्टर या योग से जुड़े जानकारों से सलाह लें।
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