Ahmedabad Plane Crash, A Miracle Survival Story: जाको राखे साईंया मार सके ना कोय, किसी चमत्कार से कम नहीं है अहमदाबाद प्‍लेन क्रैश में जिंदा बचना

Ahmedabad plane crash,

गुरुवार को गुजरात के अमहदाबाद में हुए भयानक हादसे के बाद पूरी दुनिया सन्न है। हादसे का मंजर इतना खौफनाक है कि जिसने भी इसे देखा उसका कलेजा मुंह में आ गया। इस दर्दनाक हादसे ने देश के हर शख्स को गमगीन कर दिया।  एअर इंडिया का ड्रीमलाइनर प्लेन अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के चंद मिनटों बाद ही क्रैश हो गया। प्लेन में कुल 242 लोग सवार थे, जिसमें 230 पैसंजर्स, 10 क्रू और दो अनुभवी पायलट सवार थे। इस प्लेन क्रैश में अभी तक कुल 265 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है। जिस बिल्डिंग से प्लेन क्रैश हुआ, वहां मेडिकल कॉलेज के कई स्टूडेंट खाना खा रहे थे। वो भी इस हादसे का शिकार हो गए। प्लेन में सवार बस एक ही यात्री जीवित बचा। आपको जानकर यकीन नहीं होगा, जहाँ प्लेन क्रैश में किसी के जिन्दा बचने की कोई उम्मीद नहीं होती, ऐसे में वहां विश्‍वास रमेश का जिंदा बचना किसी चमत्‍कार से कम नहीं (Ahmedabad Plane Crash, A Miracle Survival Story) है। 

विश्‍वास रमेश का क्रैश में जिंदा बचना और खुद पैदल चलकर आना अपने आप में अविश्विनीय (Ahmedabad Plane Crash, A Miracle Survival Story) है

खैर, दमकल कर्मियों ने बताया कि विमान के क्रैश होने के बाद आग लगने से वहां का तापमान काफी बढ़ गया था। ऐसे में विश्‍वास रमेश का क्रैश में जिंदा बचना और खुद पैदल चलकर वहां से बाहर आना अपने आप में अविश्विनीय (Ahmedabad Plane Crash, A Miracle Survival Story) है। लेकिन विश्‍वास रमेश ने बताया कि उनकी आंखों के सामने लोग मर रहे थे। विमान में आग लग गई थी। फिर भी वह विमान से बाहर निकल आए और बच गए। बता दें कि विमान के बीजे हॉस्‍टल की छत पर क्रैश होने के बाद जोरदार धमाका हुआ था। इस हादसे में एकलौते बचे विश्‍वास रमेश ने डीडी न्‍यूज को बताया कि सब मेरी नजरों के सामने हुआ था, लेकिन मुझे खुद नहीं पता कि आखिर कैसे मैं जीवित बच गया हूं। थोड़े टाइम के लिए मुझे लगा था कि मैं भी मरने वाला हूं। लेकिन आंख खुली, तो मैं जिंदा था। मैंने अपनी सीट बेल्‍ट निकालने की कोशिश की। इसके बाद मैं वहां से निकल गया। मेरी आंखों के सामने एयरहोस्‍टेज और दूसरे लोग मर गए थे। विश्वास ने आगे बताया टेकऑफ के बाद 5-10 सेकंड के अंदर ही सबकुछ हो गया। विमान के टेक ऑफ होते ही ऐसा लगा कि सबकुछ रुक गया हो। मुझे लगा कि कुछ तो हुआ है। इसके बाद विमान में हरी और सफेद रंग की लाइट ऑन हो गई। इसके बाद ऐसे लगा कि पायलट ने विमान को ऊंचा उठाने के लिए रेस बढ़ाई है। इतने में ही विमान गिर गया। मुझे नहीं पता कि विमान कहां गिरा था।  

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विश्‍वास कुमार का इस हादसे में बचना किसी चमत्‍कार से कम (Ahmedabad Plane Crash, A Miracle Survival Story) नहीं हैं

बेशक इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि विश्‍वास कुमार का इस हादसे में बचना किसी चमत्‍कार से कम (Ahmedabad Plane Crash, A Miracle Survival Story) नहीं हैं। डीडी न्यूज़ से बात करते हुए उन्‍होंने बताया,मैं हॉस्‍टल पर गिरे विमान के हिस्‍से में नहीं था। मैं ग्राउंड पर गिरा था। वो हॉस्‍टल की छत नहीं थी। दूसरों के बारे में मुझे पता नहीं, लेकिन मैं जहां गिरा, वो जमीन थी। विमान जब नीचे गिरा और मैंने देखा कि थोड़ा-सा स्‍पेस है। इस स्‍पेस से मैंने निकलने की कोरिश की और मैं कामयाब हो गया। उन्होंने आगे बताया कि दूसरी साइड बिल्डिंग की दीवार थी। शायद वहां से कोई निकल नहीं सका होगा। सबसे ज्यादा नुकसान वहीं पर हुआ था। मैं जहां था, वहीं थोड़ा स्‍पेस था, इसलिए मैं निकल पाया, लेकिन मुझे नहीं पता कि मैं कैसे बच पाया. इसके बाद मैं वहां से पैदल चलकर बाहर आ गया. विमान में जब मैं फंसा हुआ था, तब वहां आग लग गई थी, तो इसकी वजह से मेरा एक हाथ भी जल गया। हादसे की जगह से बाहर आने के बाद मुझे एंबुलेंस हॉस्पिटल तक लेकर आई। यहां हॉस्पिटल में बहुत अच्‍छा इलाज हो रहा है। हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को जाकर घटनास्‍थल का जायजा लिया। इसके बाद वह इस हॉस्पिटल में पहुंचे। इस दौरान पीएम मोदी ने विश्‍वास रमेश से भी मुलाकात की। विश्‍वास ने बताया कि पीएम सर ने उनका हालचाल पूछा,बोले क्‍या हुआ था, कैसे हुआ, आप ठीक हो ना? 

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