अपने निडर और निर्भीक फैसलों के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश सरकार ने राजस्व मामलों की जांच को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। फैसले के मुताबिक उत्तर प्रदेश में अब लेखपाल की रिपोर्ट ही अंतिम नहीं मानी (Naib Tehsildar to Handle Revenue Complaints in UP) जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जनता दर्शन में आ रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए लेखपाल स्तर की जांच पर परिवर्तन किया है। इस फैंसले के बाद अब राजस्व संबंधी शिकायतों की जांच लेखपाल नहीं बल्कि नायब तहसीलदार करेंगे। जानकारी के मुताबिक अपर मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नायब तहसीलदार से नीचे कोई अधिकारी राजस्व मामलों की जांच नहीं करेगा। शिकायतकर्ता को सुनने के बाद ही नायब तहसीलदार अपनी रिपोर्ट देंगे। और नायब तहसीलदार की ही रिपोर्ट मानी जाएगी।
यूपी की जनता लेखपाल की मनमानी से (Naib Tehsildar to Handle Revenue Complaints in UP) थी त्रस्त
दरअसल, बिगत कई महीनों से शिकायतें मिल रही थी कि लेखपाल स्तर की जांच में पारदर्शिता का अभाव है और कई बार पीड़ित पक्ष को सुना ही नहीं जाता। शिकायत यह भी थी (Naib Tehsildar to Handle Revenue Complaints in UP) कि कई बार लेखपाल रसूखदारों और प्रधानों के झांसे में आकर शिकायतकर्ता को सुने बगैर मनमाने ढंग से रिपोर्ट बना देता था। कई बार शिकायत करने के बावजूद लेखपाल अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे थे। ये हाल अमूमन यूपी के सभी जिलों में था। यूपी की जनता लेखपाल की मनमानी से त्रस्त थी। जनता इस कदर त्रस्त थी कि बार-बार मुख्यमंत्री कार्यालय में इस बाबत शिकायत की गई। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है कि अब केवल रिपोर्ट नहीं, सुनवाई के बाद होगा न्याय। कहने की जरूरत नहीं, सीएम ऑफिस, जनता की समस्याओं के प्रति गंभीर हो गया है, इस वजह से अब किसी की रिपोर्ट से नहीं, सुनवाई से न्याय होगा। उपजिलाधिकारी (एसडीएम) स्तर पर अंतिम निर्णय और समाधान होगा।
अब लेखपाल (लेखपाल) के बजाय नायब तहसीलदार इन शिकायतों की जांच (Naib Tehsildar to Handle Revenue Complaints in UP) करेंगे

बता दें कि उत्तर प्रदेश में राजस्व संबंधी शिकायतों की जांच की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब लेखपाल (लेखपाल) के बजाय नायब तहसीलदार इन शिकायतों की जांच (Naib Tehsildar to Handle Revenue Complaints in UP) करेंगे। यह निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा लिया गया है, ताकि राजस्व मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाई जा सके। जानकारी के लिए बता दें कि पहले, राजस्व संबंधी शिकायतों मसलन: वारासत, आय प्रमाण पत्र, जमीन विवाद, निवास प्रमाण पत्र आदि की प्रारंभिक जांच लेखपाल किया करते थे। लेकिन अब यह जिम्मेदारी नायब तहसीलदार को सौंपी दी गई है। अपर मुख्य सचिव (राजस्व) एसपी गोयल ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नायब तहसीलदार से नीचे का कोई अधिकारी राजस्व शिकायतों की जांच नहीं करेगा।
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लेखपालों पर अक्सर रिश्वतखोरी और पक्षपात के आरोप लगते रहे (Naib Tehsildar to Handle Revenue Complaints in UP) हैं
दरअसल, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार को कम करना। न सिर्फ भ्रष्टाचार को कम करना है बल्कि शिकायतों के निपटारे में पारदर्शिता भी लाना है। बता दें कि लेखपालों पर अक्सर रिश्वतखोरी और पक्षपात के आरोप लगते रहे (Naib Tehsildar to Handle Revenue Complaints in UP) हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या इस फैसले से भ्रष्टाचार पर नकेल कस सकेगी? क्या समय रहते सभी शिकायतों का निपटारा हो पाएगा? इसके अलावा साथ ही बड़ा सवाल यह भी क्या नायब तहसीलदार के स्तर पर जांच होने से जवाबदेही बढ़ेगी और शिकायतों का निपटारा अधिक विश्वसनीय हो सकेगा? देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय पर यह आदेश क्या रंग लाता है और जनता की शिकायतों का किस हद तक समाधान होता है। कहने की जरूरत नहीं, इस फैसले से लोगों में न्याय की उम्मीद जगी जरूर है। कम से कम लेखपालों की मनमानी से लोगों को निजात मिल जाएगी।
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