Room turned into well: मध्य प्रदेश के शिवपुरी में लोगों ने इस वजह से घर के कमरे को ही बना दिया कुंआ 

Room turned into well

भारत भले ही विश्वगुरु बनने जा रहा है लेकिन यहाँ एक राज्य ऐसा भी है, जहाँ लोग पानी और जमीन की किल्लत के चलते अपने ही घरों को खोद रहे हैं। यह राज्य है भाजपा की शासन वाला मध्य प्रदेश, जहाँ मोहन यादव की सरकार है। यह इलाका केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के इलाके के तौर पर जाना जाता है। इस इलाके में कुछ ऐसी जगहें भी हैं जो पानी की समस्या से बुरी तरह से जूझ रही है। हालत ये हैं कि लोग अपने घरों के अंदर कमरों को खोद कर कुआं बना (Room turned into well) रहे हैं। राज्य सरकार भले ही विकास के लाख दावे कर ले, लेकिन स्थिति खोखले दावों के बिल्कुल विपरीत है। बता दें कि मध्य प्रदेश के गुना-शिवपुरी में लोग सिस्टम की बेरुख़ी से मजबूर होकर अब अपने घरों के भीतर ही कुएं यानि मिनी-बोरवेल खोद रहे हैं। सोचिये आधुनिक युग ये हाल है। जहाँ लोग आशियाने बनाने के बजाय घर के भीतर बोरवेल ही खोद रहे हैं। 

किल्लत ऐसी कि घर के कमरों को खोदकर पानी निकालने लगे (Room turned into well) हैं

दरअसल, यहाँ जिस बस्ती का जिक्र हो रहा है उसका नाम है लुधावली, यह वार्ड क्रमांक 16 और 17 के अंतर्गत आती है। जानकारी के मुताबिक लुधावली बस्ती में 100 से ज्यादा परिवार रहते हैं। वो रहते तो हैं, लेकिन उनके पास न जल है और न ही नल। यहां तक कि नगर पालिका ने ही कोई हेडपंप नहीं लगवाया। हैरत यह कि इस इलाके में न बोरवेल, न कुआं, न बावड़ी। बरसों इंतजार करने के बाद आखिरकार गाँव वालों ने आखिरकार यह फैसला कि अब पानी सरकार से नहीं, पाताल से लाना होगा। कारण यही जो, वे अपने ही घर के कमरों को खोदकर पानी निकालने लगे (Room turned into well) हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि यदि गांववालों को कुआं ही खोदना था, तो घर के बाहर खोद लेते। ये घर के कमरों को ही खोदने की क्या मजबूरी है? दरअसल, बाहर खोदने के लिए जमीन तो होनी चाहिए। जमीन होगी तब न बाहर खोदेंगे। घर के अलावा बाहर एक इंच जमीन न होने के कारण मजबूरीवश लोग अपने घर के कमरों को ही खोद रहे हैं। पानी और जमीन की किल्लत ऐसे कि यहां रहने वाले लोग छेनी और हथौड़ी की सहायता से खुद ही अपने घर के अंदर कमरे में कुआं खोदने लगे हैं। लोग कह रहे हैं कि “नेता आते हैं वादा करते हैं लेकिन फिर भूल जाते हैं।” कहने की जरूरत नहीं, शिवपुरी की लुधावली बस्ती में जो हो रहा है दरअसल, वो चेतावनी है कि आने वाले समय में राज्य में भयंकर सूखा पड़ सकता है। 

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बस्ती अवैध है, वहां कुछ नहीं कर सकते (Room turned into well) 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थानीय निवासी मनीषा जाटव कहती हैं कि “हमने तो अपने घर के कमरे में ही गड्ढा खोद (Room turned into well) दिया, अब ये गड्ढा ही हमारी उम्मीद है।  हो सकता है इसी से पानी निकले, या फिर आत्मसम्मान बहकर चला जाए।” वो आगे कहती हैं कि अब हम गंदा पानी पीएं, बीमार हों, मरे, इससे किसी को फर्क नहीं पड़ता। चुनाव के पहले नेता कहते हैं कि हम पानी देंगे, घर देंगे। लेकिन अफ़सोस चुनाव जीतते ही वो भूल जाते हैं। पानी न मिलने की बात पर नगर पालिका कहती है कि “बस्ती अवैध है, वहां कुछ नहीं कर सकते।” हैरत यह कि इन परिवारों की हालत पिछले 8 साल से जस की तस बनी हुई है। खैर, मजे की बात यह कि लुधावली बस्ती के बगल में ही गौशाला क्षेत्र है। वहां मानीखेड़ा डैम से पाइपलाइन आ चुकी है। गौर करने वाली बात यह कि वहां नल भी है और पानी भी। बता दें कि साल भर पहले चुनाव के दौरान जब पानी के संकट पर सवाल पूछा गया वर्तमान सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि “ग्वालियर-चंबल इलाके में बहुत कम वर्षा हुई है, यही सीजन है कि वाटर लेवल कम होता है। बोरिंग भी 700-800 फीट नीचे चली गई है। और पिछली बारिश की वजह से जो नदी-नाले भरने चाहिए थे, वे 30-40% कम वर्षा के चलते नहीं भर पाए। इस बार संकट जरूर है, लेकिन हम उसका समाधान निकालने की बात कर रहे हैं।”

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