Pakistani soldiers killed

बलूचिस्तान में भीषण जंग, BLA लड़ाकों के हमले में 23 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, 9 बलूच लड़ाकों की भी मौत

भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन के युद्ध के बाद भले ही युद्धविराम हो गया हो, लेकिन पाकिस्तानी सेना (Pakistani Army) पर बलूच विद्रोहियों का हमला लगातार जारी है। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक बार फिर से बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तानी सेना (Pakistani Army) पर बड़ा हमला बोला है। बलूचिस्तान के अलग-अलग इलाकों में बलूच विद्रोहियों द्वारा किए गए हमले में पाकिस्तानी सेना के 23 जवान मारे गए हैं। साथ ही इस मुठभेड़ में बलूच लिबरेशन आर्मी के भी 9 लड़ाकों की मौत हुई है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के प्रवक्ता जायंद बलूच ने इस संबंध में एक बयान जारी कर बताया कि एक बड़ी मुठभेड़ गोनी पारा इलाके में हुई। यहां पर पाकिस्तानी सेना (Pakistani Army) को अपने सैनिकों की मदद के लिए हेलीकॉप्टर से कमांडो तक उतारने पड़ गए।  मुठभेड़ में पाकिस्तानी सेना के अब तक 23 जवानों की हो चुकी है मौत  बीएलए (BLA) प्रवक्ता ने बताया कि उनके लड़ाके मस्तंग के इलाकों में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। जिससे सेना के साथ मुठभेड़ भी तेज हो रही है। इस इलाके में मंगलवार से भी बीएलए (BLA) लड़ाकों और पाकिस्तानी सेना के बीच झड़प हो रही है और अब तक 8 पाकिस्तानी सैनिक मारे जा चुके हैं और कई घायल हैं। इसके अलावा गोनी पारा समेत दूसरे इलाकों में भी तेज झड़प हो रही है। बीएलए प्रवक्ता ने दावा किया है कि मुठभेड़ में पाकिस्तानी सेना के अब तक 23 जवानों की मौत हो चुकी है और उसके सैकड़ों सैनिक घायल हैं। दोनों तरफ से भारी गोलाबारी अभी भी जारी है।  बलूच लड़ाके पाकिस्तानी सेना पर पड़ रहे हैं भारी  बता दें कि बलूचिस्तान में अलगाववादी सशस्त्र समूहों ने 6 जून से अपनी लड़ाई तेज कर दी है। ये लड़ाके मस्तंग इलाके में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। इन लड़ाकों को रोकने के लिए पाकिस्तानी सेना ने भारी संख्या में अपने जवानों को उतारा है, लेकिन इसके बाद भी बलूच लड़ाके पाकिस्तानी सेना पर  भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। पिछले दिनों बलूच लड़ाकों ने बलूचिस्तान के कई शहरों पर धावा बोलकर कब्जा जमा लिया था। साथ ही कई हाईवे को भी बंद कर दिया। इससे तिलमिलाई पाकिस्तानी सेना ने बलूच नागरिकों पर हमला किया और कई नागरिकों को अपने साथ उठा ले गई। बलूच नागरिक समूहों का दावा है कि पाकिस्तानी सेना ने पासनी और दश्त बालनिगोर जिले में छापेमार कार्रवाई करते हुए 9 बलूच लोगों को उठा ले गई, जो अब लापता हैं।  बलूचिस्तान में बलूच लोगों को पाकिस्तानी सेना द्वारा जबरन उठा ले जाना और फिर उन्हें गायब कर देना बड़ी समस्या रही है। यहां के हजारों लोग कई सालों से गायब हैं, जिसका सीधा आरोप पाकिस्तानी सेना पर है। इसे भी पढ़ें:- अमेरिका के लॉस एंजिलिस में हिंसा और लूटपाट के बीच लगा कर्फ्यू , मेयर ने की ट्रंप से ये अपील पाकिस्तान से आजादी की मांग कर रहे ये लड़ाके पाकिस्तानी सेना पर लगातार कर रहे हैं हमले  मानवाधिकार संगठन पाकिस्तानी सेना पर नागरिकों, छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गायब करने का आरोप लगाते हैं। पाकिस्तानी सेना के इस क्रूर कार्रवाई के कारण ही बलूचिस्तान में विद्रो हो रहा है। बलूचिस्तान में हजारों लोग अब हथियार उठा चुके हैं और पाकिस्तानी सेना से लड़ रहे। इस लड़ाई में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं, लेकिन बीएलए के लड़ाके हार मानने को तैयार नहीं। पाकिस्तान से आजादी की मांग कर रहे ये लड़ाके पाकिस्तानी सेना पर लगातार हमले कर रहे हैं। जिसकी वजह से इस राज्य में पाकिस्तान की पकड़ अब बेहद कमजोर हो चुकी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news बलूचिस्तान #balochistan #blaattack #pakistaninews #soldierskilled #balochfighters #breakingnews #pakistanviolence #conflictupdate #worldnews

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Pakistan occupied Balochistan

पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन

बलूचिस्तान (Balochistan) क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का सबसे बड़ा राज्य है और यह आकार के मामले में जर्मनी के बराबर है, लेकिन आबादी के मामले में यह राज्य विरान है। यहां की आबादी मात्र डेढ़ करोड़ है, जो जर्मनी से सात करोड़ कम है। लेकिन इस राज्य की जो सबसे बड़ी खूबी है, वह है कि यह राज्य प्राकृतिक संसाधनों से भरा पूरा है। यहां की खदानों में सोना, तांबा और तेल जैसे कई चीजें मौजूद हैं। पाकिस्तान (Pakistan) इन्हीं संसाधनों का इस्तेमाल कर देश की जरूरतों को पूरा कर रहा है। लेकिन इतना सबकुछ होते हुए बलूचिस्तान (Balochistan) सबसे पिछड़ा राज्य है। यहां के 70 फीसदी लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे मामलों में यह राज्य न केवल पाकिस्तान (Pakistan) बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में सबसे पीछे हैं। इसी गरीबी और पिछड़ेपन के कारण ही बलूचिस्तान में पाकिस्तान (Pakistan) के खिलाफ नफरत बढ़ती जा रही है। बलूच लोग अपने हक की मांग को लेकर विद्रोह कर रहे और आए दिन पाकिस्तानी सेना पर हमले कर रहे हैं।  कैसे और शुरू हुआ बलूचिस्तान में विद्रोह भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद से ही बलूचिस्तान (Balochistan) का इतिहास विद्रोह भरा रहा है। बंटवारे के समय चार अगस्त 1947 को दिल्ली में एक बैठक हुई थी। इसमें कलात के शासक मीर अहमद खान, जवाहर लाल नेहरू और जिन्ना के साथ ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन भी शामिल हुए थे। इस बैठक में फैसला लिया गया था कि कलात, लास बेला, खरान और मकरान को मिलाकर एक आजाद बलूचिस्तान बनाया जाएगा और 11 अगस्त को बलूचिस्तान को अलग देश घोषित कर दिया गया। बलूचिस्तान को आजाद घोषित करने के करीब एक माह बाद 12 सितंबर को इंग्लैंड ने एक प्रस्ताव पारित किया। जिसमें कहा गया कि बलूचिस्तान आर्थिक और सुरक्षा के लिहाज से अलग देश बनने की हालत में नहीं है।  पाकिस्तान ने 1948 में बलूचिस्तान पर हमला कर जबरदस्ती कब्जा कर लिया जिसके बाद जिन्ना ने अहमद खान से बलूचिस्तान का पाकिस्तान में विलय करने को कहा। लेकिन कलात के शासक ने यह बात नहीं मानी। जिसके बाद पाकिस्तान ने 1948 में बलूचिस्तान पर हमला कर जबरदस्ती कब्जा कर लिया। लेकिन बलूचों ने हार नहीं मानी और पाकिस्तान के खिलाफ बगावत शुरू हो गई। यह संघर्ष तभी से जारी है। बलूचों का कहना है कि यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर उनका हक है, लेकिन पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर अवैध कब्जा कर रखा है और वो इस कब्जे को हटाने के लिए लड़ रहे हैं। इस लड़ाई में अब तक हजारों बलूच मारे जा चुके हैं और हजारों गायब हो चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी बलूच हार मानने को तैयार नहीं और पाकिस्तानी सेना पर लगातार जवाबी हमले कर रहे हैं।  इसे भी पढ़ें:- अमेरिका ने बनाया छठी पीढ़ी का सबसे एडवांस फाइटर जेट, खूबियां सुन कांप जाएगा चीन! ट्रंप ने उठाया राज से पर्दा  औरंगजेब को भी बलूचों के सामने होना पड़ा था नतमस्तक  भारतीय राजा शेरशाह सूरी ने मुगल शासक हुमायूं को युद्ध में हरा दिया था, जिसके बाद उसने भागकर ईरान में शरण ली थी। साल 1545 में जब शेरशाह सूरी की मौत हुई तो हुमायूं फिर भारत लौट आया और बलूचों की मदद से ही साल 1555 में उसने दिल्ली पर कब्जा किया था। साल 1659 में जब औरंगजेब मुगल बादशाह बना तो बलूच सरदारों ने उसके खिलाफ विद्रोह छेड़ दिया और साल 1666 में बलूचों ने औरंगजेब की सेना को हराकर कलात और क्वेटा पर कब्जा कर दिया। इन इलाकों को औरंगजेब दोबारा कभी नहीं जीत पाया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Balochistan #BalochFreedom #PakistanOccupiedBalochistan #Balochistan #BalochRights #FreeBalochistan #BalochHistory #AurangzebRule #PakistanCrackdown #BalochStruggle #HumanRights

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