Owaisi's Absence

Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?: क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी?

साल के अंत में बिहार में चुनाव होने हैं। चुनाव भले ही साल के अंत में होने हैं लेकिन सरगर्मियां अभी से गई हैं। सभी राजनीतिक दल अभी से अपना-अपना नफा नुकसान देखने लगे हैं। इसी कड़ी में हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम असदुद्दीन ओवैसी भी अपनी पैठ जमाने के लिए इंडिया गठबंधन में शामिल होना चाहते (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) हैं। इसके चलते एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने बाकायदा लालू यादव को पत्र लिखा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर ऐसी कौन सी वजह है जो ओवैसी लालू के साथ हाथ मिलाना चाहते हैं? ओवैसी इंडिया गठबंधन में इसलिए भी शामिल होना हैं क्योंकि उनकी नजर मुस्लिम वोटों पर है। वैसे तो बिहार में हर बार की तरह इस बार भी सभी की नजर मुस्लिम वोटो पर है। हो भी क्यों न, बिहार में 50 से अधिक सीटों पर मुस्लिम वोटर्स काबिज जो हैं। बता दें कि मुस्लिम बिहार की कुल आबादी का 17 प्रतिशत है। ध्यान देने वाली बात यह कि बिहार में कभी भी मुस्लिम वोटर एकतरफा वोट कास्ट नहीं करते हैं। बिहार में मुस्लिम जेडीयू, आरजेडी को वोट करते रहे हैं। 2020 के विधानसभा में 76 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स इंडिया गठबंधन के साथ (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) थे आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक इंडिया गठबंधन को मुस्लिम वोट सबसे ज्यादा मिलता रहा है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को 87 प्रतिशत मुस्लिमों ने वोट किया था। जबकि 2020 के विधानसभा में 76 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स इंडिया गठबंधन के साथ (Will Owaisi’‘s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) थे। बात करें साल 2020 में हुए विधानसभा चुनाव की तो इस चुनाव में आरजेडी को ओवैसी की पार्टी ने काफी नुकसान पहुंचाया था। जिसका सीधा फायदा जेडीयू को हुआ था। जेडीयू पिछले चुनाव में मात्र 43 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। जिसके लिए वे चिराग पासवान की पार्टी को जिम्मेदार मानते हैं। हालांकि उनको जो सीटें मिली हैं उसमें सीमांचल का योगदान अधिक है। इसकी सबसे बड़ी वजह ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम थी। वैसे भी जिस राज्य में मुस्लिम आबादी अधिक होती है, वहां पर ओवैसी पहुंच जाते हैं और विपक्षी पार्टियों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाते हैं। कारण यही जो विरोधी दल उन्हें बीजेपी की बी भी कहते हैं। हालांकि ओवैसी और बीजेपी दोनों इसे सिरे से ख़ारिज करते हैं।  चुनाव के कुछ समय बाद ही ओवैसी के 5 में से 4 विधायक आरजेडी में शामिल हो गए (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) थे कहने की जरूरत नहीं, साल 2020 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों के बिखरने से एनडीए को फायदा हुआ था। हालांकि ये बात आरजेडी ख़ारिज करती है। ऐसा इसलिए कि आरजेडी के मुखिया लालू यादव को लगता है कि बिहार में अमूमन अधिकतर मुस्लिम वोटर्स उन्हीं की पार्टी को वोट करता है। दरअसल, लंबे समय से लालू यादव बिहार में एमवाई समीकरण को साधे हुए (Will Owaisi’‘s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) हैं। बड़ा कारण यही जो बिहार में उन्हें मुस्लिम वोटर्स के लिए किसी अन्य पार्टी से गठबंधन की जरूरत नहीं है। वो बात और है कि पिछली बार उन्हें कुछ सीटों का नुकसान हुआ था, लेकिन चुनाव के कुछ समय बाद ही ओवैसी के 5 में से 4 विधायक आरजेडी में शामिल हो गए थे। एक बड़ी वजह यह भी जो लालू यादव ओवैसी को बिहार में बड़ी चुनौती नहीं मानते।  इसे भी पढ़ें:-  मीरा रोड थप्पड़ कांड पर संजय निरुपम ने सरकार से की कार्रवाई की मांग, आखिर पुलिस क्यों नहीं ले रही है कोई एक्शन? ओवैसी यदि इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनते हैं तो मुस्लिम वोटर एक मुस्त होकर इंडिया गठबंधन को वोट (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) करेंगे वैसे भी बीजेपी कभी नहीं चाहेगी कि ओवैसी कभी इंडिया गठबंधन में शामिल हों। क्योंकि ओवैसी यदि इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनते हैं तो मुस्लिम वोटर एक मुस्त होकर इंडिया गठबंधन को वोट करेंगे। इसमें नुकसान बीजेपी का (Will Owaisi’s Absence Hurt Lalu in Bihar Elections 2025?) होगा। इसके अलावा बीजेपी के सहयोगी दल जेडीयू ने वक्फ बिल का सपोर्ट किया था। ऐसे में इस बार उससे मुस्लिम वोटर्स के छिटकने का भी डर है। इसके बावजूद दोनों पार्टियों ने मुस्लिम वोटर्स को रिझाने की रणनीति बना ली है। दरअसल, बिहार की 17 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स की आबादी में से 10 प्रतिशत पसमांदा यानी अति पिछड़े मुस्लिम हैं। जेडीयू का मानना है कि नए वक्फ कानून से पसमांदा मुस्लिमों को फायदा होगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि जेडीयू और बीजेपी का यह पैंतरा इंडिया गठबंधन के खिलाफ कितना कारगर सिद्ध होगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Owaisi’ #Owaisi #LaluYadav #BiharElections2025 #AIMIM #BiharPolitics #Mahagathbandhan #MuslimVotes #PoliticalAnalysis

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Nitish Kumar boosts pension by ₹700

चुनाव से पहले नीतीश का मास्टरस्ट्रोक, पेंशन में 700 रुपये की बढ़ोतरी

बिहार सरकार (Bihar Government) की सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में एक बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत विधवाओं, वृद्धजनों और दिव्यांगों को दी जाने वाली मासिक पेंशन (Monthly Pension) की राशि को 400 रुपये से बढ़ाकर अब 1,100 रुपये कर दी गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) ने इस फैसले की घोषणा की है, जो कि चुनाव से पहले राज्य में करोड़ों वंचित वर्गों को सोच-समझकर लिया गया फैसला है।   पेंशन वृद्धि का उद्देश्य और सुविधा बढ़ी हुई वित्तीय सहायता बजट में बढ़त  राजनीतिक रणनीति यह घोषणा बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) से कुछ ही महीने पहले किया गया है। ऐसे में नीतीश सरकार (Nitish Government) के इस निर्णय को चुनावी रणनीति के साथ भी जोड़कर में देखा जा सकता है। विपक्षी नेता तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) ने हालांकि 1,500 रुपये तक पेंशन बढ़ाने की मांग की थी, वहीं भाजपा (BJP) की कांग्रेस और राजद (Congress and RJD) ने इस कदम की सराहना की है।  सामाजिक-आर्थिक प्रभाव क्या हैं इसके राजनीतिक परिदृश्य?  राजद (RJD) का प्रस्ताव कांग्रेस ने भी पैकेज का किया ऐलान  नीतीश सरकार का सम्पूर्ण दृष्टिकोण इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार क्या होंगी चुनौतियां?   बिहार सरकार (Bihar Government) द्वारा सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि में 700 रुपये की वृद्धि एक मजबूत और स्वागत योग्य कदम है, जो राज्य के गरीब, बीमार, बुजुर्ग और दिव्यांग वर्ग को आर्थिक राहत उपलब्ध कराएगा। यह कदम चुनावी रणनीति का भी एक हिस्सा प्रतीत होता है, लेकिन साथ ही यह वास्तविक आर्थिक सहायता भी प्रदान करता है। सरकारी बजट और सामाजिक योजनाओं की सक्रियता यह दर्शाती है कि बिहार में बड़ी संख्या में जरूरतमंदों तक सही समय पर सहायता पहुंचाना प्राथमिकता बना हुआ है। आगे जनता और प्रशासन दोनों को इस योजनाओं के कार्यान्वयन की पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करनी होगी, ताकि यह पहल सिर्फ घोषणा तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक बदलाव एवं सामाजिक न्याय का वाहन बने। Latest News in Hindi Today Hindi Tejaswi Yadav #NitishKumar #PensionHike #BiharElections2025 #PoliticalMasterstroke #BiharPolitics #SeniorCitizenBenefits

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RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise: इस बार आरजेडी 130 से 135 सीटों पर लड़ सकती है चुनाव, कांग्रेस को करना पड़ सकता है समझौता

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। समय नजदीक आता देख दोनों गठबंधन चुनाव की तैयारियों में में जुट गए हैं। जेडीयू की अगुवाई वाली एनडीए सरकार अपने कार्यों के प्रमोशन में व्यस्त है तो वहीं तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन में बैठकों का लम्बा सिलसिला जारी है। इस बीच खबर यह है कि 4 बैठकों के बाद सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तकरीबन फाइनल हो गया (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) है। खबर के मुताबिक तेजस्वी यादव ने सहनी और पशुपति पारस के लिए कांग्रेस और वामदलों के बीच लगभग सहमति बना ली है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक जो फॉर्मूले सेट हुआ है उसके मुताबिक 2020 की तुलना में कांग्रेस और आरजेडी इस बार कम सीटों पर चुनाव लड़ेंगी तो वहीं सीपीआई माले को पिछली बार की तुलना में इस बार अधिक सीटें मिलेंगी।  पिछले चुनाव में कांग्रेस 70 सीटों पर (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) लड़ी थी चुनाव  गौरतलब हो कि 12 जून को तेजस्वी यादव के घर इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर चौथी बैठक हुई (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) थी। जिसमें तेजस्वी ने सभी पार्टियों से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के नाम और सीटों का ब्योरा मांगा था। इस दौरान कांग्रेस ने अपनी सीटों की लिस्ट आरजेडी को दे दी है। कांग्रेस ने 2020 में जीती हुई 19 सीटों के अलावा 39 उन सीटों के नाम भी दिए हैं जिस पर वह पिछले साल दूसरे नंबर पर रही। इसके अलावा वामदलों की कुछ सीटों पर भी कांग्रेस ने चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की है। बता दें कि पिछले चुनाव में कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इस बार उसकी रणनीति इतनी ही सीटों पर चुनाव लड़ने की है। पिछली बार की हार की सफाई देते हुए कांग्रेस ने कहा कि वह इसलिए चुनाव हारे थे क्योंकि उन्हें अपनी परंपरागत सीटें सहयोगी दलों को देनी पड़ी थी। ऐसे में उम्मीद यह कि संभवतः इस बार वामदल कांग्रेस के लिए वे सीटें छोड़ दें। कांग्रेस को 55-60 सीटें दे सकते (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) हैं तेजस्वी यादव कांग्रेस के अलावा मुकेश सहनी 60 सीटों की मांग कर रहे हैं तो वहीं सीपीआई माले ने 40 सीटों की डिमांड रखी है। बड़ी बात यह कि सीपीआई और सीपीएम अभी लिस्ट नहीं सौंपी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि पशुपति पारस, सीपीआई माले और सहनी को किसके हिस्से की सीटें दी जाएँगी? पार्टी के करीबी सूत्रों के मुताबिक तेजस्वी कांग्रेस को इस बार मनपसंद सीटें दे सकते हैं। सहनी और माले को अधिक सीटें दी जा सके इसलिए तेजस्वी 70 सींटे तो नहीं लेकिन कांग्रेस को 55-60 सीटें दे सकते (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) हैं। रही बात आरजेडी की तो आरजेडी 130 से 135 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। बता दें कि पिछली बार आरजेडी 144 सीटों पर चुनाव लड़ी थी।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र सरकार का तुगलकी फरमान, स्कूलों में हिन्दी की अनिवार्यता की खत्म, अब होगी तीसरी भाषा सीटों का बंटवारा जीत के आधार पर करने का फैसला किया (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) है तेजस्वी यादव ने  इसके अलावा महत्वपूर्ण बात यह कि तेजस्वी यादव ने इस बार सीटों का बंटवारा जीत के आधार पर करने का फैसला किया (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) है। सभी दल जीत की संभावना के आधार पर साथ बैठेंगे और फिर सीटों का बंटवारा करेंगे। तेजस्वी यादव की नई रणनीति के मुताबिक अधिक मार्जिन से हार वाली सीटों पर उम्मीदवार बदला जा सकता है। फ़िलहाल अभी सींटों के बंटवारे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। उम्मीद है जल्द ही पार्टी सीटों के बंटवारे की घोषणा करेगी और सहयोगी दलों को सम्मानजनक सीटें देगी।  Latest News in Hindi Today Hindi RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise #RJD #Congress #BiharElections2025 #SeatSharing #TejashwiYadav #Mahagathbandhan #PoliticsNews

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Nishant Kumar

Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat: तो क्या इस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार?

बिहार में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। इसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar assembly Election) होने हैं। चुनावी माहौल के बीच सभी राजनीतिक दल अभी से चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। ऐसे में ये भी चर्चा होने लगी है कि कौन सा नेता किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेगा। इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में पदार्पण करने के कयास लगाए जा रहे हैं। बता दें कि निशांत कुमार के आगामी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी के नेता निशांत कुमार के चुनाव लड़ने पर जोर दे रहे हैं। वो चुनाव लड़े इसलिए जनता दल यूनाइटेड के कई विधायकों ने उनके लिए अपनी सीट तक छोड़ने के लिए तैयार (Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat) है। यही नहीं, नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाने वाले जेडीयू नेता और सांसद कौशलेंद्र कुमार ने निशांत कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने न सिर्फ बड़ा बयान दिया है बल्कि यह भी बताया है कि निशांत कुमार किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे।  अगर निशांत चुनाव लड़ते हैं तो नालंदा के लोग उन्हें जरूर (Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat) जिताएंगे बता दें कि सांसद कौशलेंद्र कुमार ने कहा, निशांत कुमार अगर राजनीति में आते हैं तो इससे हमलोग काफी खुश होंगे। निशांत कुमार के इस्लामपुर से चुनाव लड़ने की मांग उठ रही है। अगर निशांत चुनाव लड़ते हैं तो नालंदा के लोग उन्हें जरूर (Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat) जिताएंगे। हालांकि उन्होंने इस हेतु नीतीश कुमार से अपील भी की है। गौरतलब हो कि कौशलेंद्र कुमार ने नीतीश कुमार से आग्रह करते हुए कहा, निशांत कुमार को इस्लामपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का मौका दिया जाए। जीत का दंभ भरते हुए उन्होंने कहा कि जनता जीत का ताज पहनाकर ही भेजेगी। यही नहीं उन्होंने आगे कहा, निशांत में वह क्षमता है।  कम बोलना और केवल बात का जवाब देना उन्हें आता (Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat) है जदयू सांसद ने कहा कि नालंदा के लोग यह कहते हैं कि नीतीश कुमार के पुत्र को राजनीति में लाएं। मैं भी युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहता हूं। जदयू पार्टी की कमान थामने के सवाल पर सांसद ने कहा कि निशांत में वह क्षमता है। निशांत की तारीफ करते हुए जदयू सांसद ने कहा कि वो लोगों का आदर करना जानते हैं। अमूमन अन्य नेताओं के बच्चों में नहीं होता है, लेकिन वो मैनें निशांत में देखा है। कम बोलना, बड़ों का आदर करना और उन्हें प्रणाम करना निशांत का स्वभाव है। कम बोलना और केवल बात का जवाब देना उन्हें आता (Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat) है। बता दें कि आये दिन निशांत कुमार के चुनाव लड़ने की चर्चाएं होती रहती है। लेकिन निशांत कुमार ने कभी इसपर सहमति अबतक नहीं जतायी है।  इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार तेजस्वी यादव ने भी निशांत को राजनीति में आने की (Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat) दी है सलाह बड़ी बात यह कि तेजस्वी यादव ने भी निशांत को राजनीति में आने की सलाह (Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat) दी है। खैर, इस बीच राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने सोमवार को एक नये डिजिटल मंच की शुरुआत की और लोगों से ‘एक नया बिहार बनाने’ के लिए एक साथ आने का आग्रह किया। इस बीच तेजस्वी यादव ने कहा, राज्य के लोग बदलाव चाहते हैं। इस सरकार ने लोगों का विश्वास खो दिया है। वे चुनाव में एक नई सरकार चुनना चाहते हैं। हम उनकी आवाज बनेंगे। उन्होंने कहा, लोगों को आगे आना चाहिए और इस डिजिटल मंच के माध्यम से एक नया बिहार बनाने में हमारा साथ देना चाहिए। Latest News in Hindi Today Hindi Nitish Kumar’s son Nishant may contest from a key Bihar assembly seat #NishantKumar #NitishKumar #BiharElections2025 #JDU #BiharPolitics #AssemblyPolls #PoliticalNews

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AIMIM's Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections

AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections: RJD-कांग्रेस को बिहार चुनाव से पहले AIMIM की धमकी, महागठबंधन में शामिल करें वरना…! 

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने इस साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस (Congress) के महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है। एआईएमआईएम (AIMIM) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने इसकी जानकारी (AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections)देते हुए कहा कि, ‘उनकी पार्टी बिहार चुनाव में वोटों का बिखराव रोकना चाहती है। इसीलिए उनकी पार्टी ने  आरजेडी (RJD) के दूसरी पंक्ति के नेताओं के माध्यम से नेता तेजस्वी यादव को गठबंधन का प्रस्ताव भेजा है। अब फैसला तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी को करना है।’ अख्तरुल ईमान ने मीडिया से इस बातचीत में चेतावनी देते हुए कहा, अगर महागठबंधन उनके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता, तो उनकी पार्टी थर्ड फ्रंट बनाने के लिए जल्द ही अन्य छोटे दलों से बातचीत करेगी। इस दौरान अख्तरुल ईमान ने आरजेडी (RJD) पर ‘पीठ में खंजर घोंपने’ का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि साल 2020 के विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम (AIMIM) राज्य की सीमांचल क्षेत्र में मौजूद अमौर, जोकीहाट, कोचाधामन, बैसी और बहादुरगंज सीट को जीता था। लेकिन चुनाव के दो साल बाद आरजेडी ने उनके 5 में से 4 विधायकों को तोड़ कर अपने पार्टी में मिला लिया। इस धोखबाजी को पार्टी भूली नहीं है।  2020 विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने किया था शानदार प्रदर्शन बता दें कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने (AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections) शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 सीटें जीत ली थी। एआईएमआईएम को यह सफलता सीमांचल के मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में मिली थी। इसके बाद से ही एआईएमआईएम को बिहार की सियासत में एक उभरती ताकत के तौर पर देखा गया। एआईएमआईएम ने सीधे तौर पर आरजेडी के परंपरागत मुस्लिम-यादव वोट बैंक में सेंध लगाई थी। इसलिए आरजेडी को सबसे ज्यादा परेशानी हुई और उसने एआईएमआईएम विधायकों को तोड़ने की मुहीम शुरू कर दी। आरजेडी ने दो साल बाद ही जून 2022 में एआईएमआईएम के 5 में से 4 विधायकों को तोड़कर अपने पार्टी में शामिल कर लिया।  इसे भी पढ़ें:- PMCH में दलित लड़की की मौत पर राहुल गांधी ने बिहार की डबल इंजन सरकार पर साधा निशाना, कही यह बात एआईएमआईएम के उभरने से आरजेडी और कांग्रेस को दीर्घकालिक तौर पर नुकसान होगा इस बार विधानसभा चुनाव में अगर एआईएमआईएम और आरजेडी अलग-अलग लड़ती हैं, तो इसका सीधा फायदा भाजपा को (AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections) होगा। इसलिए एआईएमआईएम ने चुनाव से पहले ही महागठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव भेज दिया। हालांकि अभी तक इस प्रस्ताव पर आरजेडी और कांग्रेस (Congress) की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है। बताया जा रहा है कि विपक्षी महागठबंधन के अंदर सीट बंटवारे को लेकर पहले सही तनाव है, ऐसे में अगर एआईएमआईएम को भी गठबंधन में शामिल कर लिया गया, तो सीट बंटवारे का मुद्दा और भी जटिल हो जाएगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एआईएमआईएम को महागठबंधन में शामिल किया जाता है तो इससे फौरी तौर पर मुस्लिम वोटों को एकजुट करने में फायदा मिल सकता है, लेकिन एआईएमआईएम के उभरने से आरजेडी और कांग्रेस को दीर्घकालिक तौर पर नुकसान होगा। दरअसल, आरजेडी और कांग्रेस (Congress) के कोर वोट बैंक मुस्लिम मतदाता है और एआईएमआईएम का वोट बैंक भी यही है। ऐसे में एआईएमआईएम राज्य में जितनी मजबूत होगी, उतनी ही आरजेडी और कांग्रेस के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाएगी। ऐसे में महागठबंधन बिहार के अंदर अभी एआईएमआईएम से दूरी बनाकर ही रखना चाहता है।  Latest News in Hindi Today Hindi news AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections BiharElections2025 #AIMIM #RJD #Congress #Mahagathbandhan #Owaisi #PoliticalNews #IndiaPolitics

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