BJP विधायक जय देवी कौशल का गंभीर आरोप—‘मुझे मंदिर में पूजा करने से रोका गया’, जातिगत भेदभाव का दावा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंदिर के भूमिपूजन कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मलिहाबाद विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की विधायक जय देवी कौशल ने आरोप लगाया है कि काकोरी स्थित शीतला माता मंदिर के जीर्णोद्धार से जुड़े कार्यक्रम में उन्हें पूजा-अर्चना में शामिल नहीं होने दिया गया। विधायक ने इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या है पूरा मामला? मामला लखनऊ के काकोरी क्षेत्र स्थित शीतला माता मंदिर का है। मंदिर के जीर्णोद्धार और निर्माण कार्य को लेकर भूमिपूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में विधायक जय देवी कौशल के साथ भाजपा के कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी पहुंचे थे। जय देवी कौशल का आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान पूजा शुरू हो गई, लेकिन उन्हें उसमें विधिवत शामिल नहीं किया गया। उनके मुताबिक वह पूजा के दौरान खड़ी रहीं और उन्हें पूजा-अर्चना से जुड़े कई धार्मिक कार्यों में भाग लेने का अवसर नहीं मिला। विधायक का कहना है कि उन्हें ईंट छूने, रोली लगाने, अगरबत्ती जलाने और नारियल फोड़ने जैसे भूमिपूजन से जुड़े कार्यों से भी दूर रखा गया। विधायक ने लगाया जातिगत भेदभाव का आरोप जय देवी कौशल पासी समुदाय से आती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ हुआ व्यवहार उनकी जाति से जुड़ा हुआ था। विधायक ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार होता है तो यह सामाजिक समानता को लेकर कई सवाल खड़े करता है। जय देवी कौशल ने यह भी संकेत दिया है कि वह मामले को भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने उठाएंगी। मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए स्वीकृत हुई थी राशि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक शीतला माता मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए करीब ₹78 लाख की सरकारी राशि स्वीकृत कराए जाने में विधायक की भूमिका रही है। विधायक के पति और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने भी घटना पर नाराजगी जाहिर की है। रिपोर्टों के अनुसार एक अन्य धार्मिक स्थल के लिए भी लगभग ₹70 लाख की राशि स्वीकृत कराई गई थी। दोनों परियोजनाओं की रकम को मिलाकर कुछ रिपोर्टों में लगभग ₹1.5 करोड़ की राशि का उल्लेख किया गया है। ऐसे में विवाद इसलिए भी अधिक चर्चा में है क्योंकि विधायक ने मंदिर के विकास के लिए सरकारी धन स्वीकृत कराने में अपनी भूमिका का दावा किया है और उसी कार्यक्रम में स्वयं के साथ भेदभाव होने का आरोप लगाया है। परिवार ने भी जताई नाराजगी मामले पर जय देवी कौशल के बेटे विकास किशोर ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जाति के आधार पर किसी भी व्यक्ति या जनप्रतिनिधि के साथ भेदभाव को गलत बताया। उनका कहना है कि धार्मिक स्थल पूरे समाज की आस्था के केंद्र होते हैं और वहां किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति के आधार पर अलग व्यवहार नहीं होना चाहिए। राजनीतिक विवाद भी हुआ तेज विधायक के आरोप सामने आने के बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। विपक्ष की ओर से भी घटना को लेकर भाजपा पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि पूरे मामले में यह ध्यान रखना जरूरी है कि जातिगत भेदभाव के आरोप विधायक की ओर से लगाए गए हैं। घटना को लेकर संबंधित पुजारी या मंदिर प्रबंधन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। सामाजिक भेदभाव पर फिर उठे सवाल इस विवाद ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों पर सामाजिक समानता और जातिगत भेदभाव के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और धर्म, जाति तथा अन्य आधारों पर भेदभाव के खिलाफ संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसे में किसी सार्वजनिक धार्मिक कार्यक्रम में जाति के आधार पर भेदभाव का आरोप सामने आना संवेदनशील मामला माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा नेतृत्व, स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से मामले पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है। नोट: यह खबर विधायक जय देवी कौशल और उनके परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों तथा उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है।

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भारत में नई Telecom पाबंदी की तैयारी! 9 से ज्यादा SIM रखने वालों को नहीं मिलेगा नया कनेक्शन

नई दिल्ली: भारत में मोबाइल कनेक्शनों को लेकर सरकार ने नियमों के पालन को और सख्त करने की तैयारी कर ली है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि 24 अगस्त 2026 से उन ग्राहकों को नया SIM कनेक्शन जारी न किया जाए, जिनके नाम पर पहले से 9 मोबाइल कनेक्शन दर्ज हैं। यह कदम फर्जी SIM, डिजिटल फ्रॉड और मोबाइल कनेक्शनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया जा रहा है। 9 SIM की सीमा होगी लागू DoT के निर्देश के मुताबिक सामान्य तौर पर एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन की सीमा है। यदि किसी ग्राहक के नाम पर पहले से 9 SIM हैं और वह 10वां कनेक्शन लेने की कोशिश करता है, तो टेलीकॉम कंपनी को नया कनेक्शन देने से इनकार करना होगा। यह सीमा अलग-अलग कंपनियों के लिए अलग-अलग नहीं है। यानी Jio, Airtel, Vi या BSNL जैसे अलग-अलग ऑपरेटरों के कनेक्शन भी ग्राहक की कुल सीमा में शामिल होंगे। J&K और North-East में सिर्फ 6 SIM जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर के कुछ लाइसेंस्ड सर्विस एरिया में यह सीमा और कम है। वहां एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 6 मोबाइल कनेक्शन की अनुमति है। इन क्षेत्रों में अतिरिक्त मोबाइल कनेक्शनों को लेकर सुरक्षा कारणों से पहले से ज्यादा सख्त व्यवस्था लागू है। 24 अगस्त से टेलीकॉम कंपनियां करेंगी सख्ती DoT के 17 अगस्त के सर्कुलर के अनुसार, 24 अगस्त से टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को तकनीकी और संगठनात्मक उपाय लागू करने होंगे, ताकि 9 कनेक्शन की सीमा पूरी कर चुके ग्राहकों की पहचान की जा सके और उन्हें नया नंबर लेने से रोका जा सके। ग्राहक को यह भी बताया जाएगा कि उसके नाम पर पहले ही अधिकतम अनुमत मोबाइल कनेक्शन दर्ज हैं। Digital Intelligence Platform से होगी पहचान इस नियम को लागू करने के लिए DoT के Digital Intelligence Platform (DIP) का इस्तेमाल किया जाएगा। टेलीकॉम कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए subscriber data के आधार पर प्लेटफॉर्म उन लोगों की पहचान करने में मदद करेगा, जिनके नाम पर निर्धारित सीमा तक SIM पहले से मौजूद हैं। 23 अगस्त से निर्धारित सीमा तक पहुंच चुके ग्राहकों की representative photograph भी DIP पर उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था है, ताकि उनकी पहचान में मदद मिल सके। अगर आपके नाम पर 9 से ज्यादा SIM हैं तो? जिन लोगों के नाम पर पहले से निर्धारित सीमा से अधिक मोबाइल कनेक्शन हैं, उनके लिए भी व्यवस्था सख्त की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार अतिरिक्त कनेक्शनों में बाद में लिए गए नंबरों को पहले बंद करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसलिए लोगों के लिए जरूरी है कि वे समय रहते जांच करें कि उनके नाम पर कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं। सरकार का मकसद क्या है? DoT की यह कार्रवाई मुख्य रूप से फर्जी पहचान, SIM के दुरुपयोग, साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड को रोकने की दिशा में है। सरकार चाहती है कि एक पहचान पर बड़ी संख्या में मोबाइल कनेक्शन लेकर उनका इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों के लिए न किया जा सके। नई व्यवस्था से अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों में मौजूद कनेक्शनों को एक साथ ट्रैक करना भी आसान होगा। आम मोबाइल यूजर्स को घबराने की जरूरत नहीं ज्यादातर सामान्य मोबाइल यूजर्स के लिए इस नियम का सीधा असर नहीं पड़ेगा। समस्या मुख्य रूप से उन ग्राहकों के सामने आएगी जिनके नाम पर पहले से 9 या उससे अधिक मोबाइल कनेक्शन दर्ज हैं। अगर किसी व्यक्ति ने पुराने या इस्तेमाल में न आने वाले नंबर बंद नहीं कराए हैं, तो अपने नाम पर सक्रिय कनेक्शनों की जानकारी जांचना उपयोगी रहेगा। 30 नवंबर तक सिस्टम को मजबूत करने का लक्ष्य DoT ने टेलीकॉम कंपनियों को इस व्यवस्था से जुड़े सिस्टम और प्रक्रियाओं को 30 नवंबर 2026 तक व्यवस्थित करने का समय दिया है। इस दौरान DIP के जरिए पहचान और verification व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। इस नए कदम से भारत में SIM कार्ड की निगरानी और subscriber verification व्यवस्था पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त होने जा रही है। स्रोत: Department of Telecommunications, PTI, NDTV, India Today, ThePrint Jai Rashtra News

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Gaja Alternative Asset Management IPO को जोरदार रिस्पॉन्स! Subscription 4.54 गुना, GMP ₹17 पर

नई दिल्ली: Gaja Alternative Asset Management के IPO को निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिली है। 21 अगस्त 2026 को IPO के तीसरे और आखिरी दिन इश्यू को करीब 4.54 गुना सब्सक्राइब किया गया, जबकि Grey Market Premium (GMP) घटकर ₹17 प्रति शेयर रह गया। 4.54 गुना सब्सक्रिप्शन से बढ़ा निवेशकों का भरोसा Gaja Alternative Asset Management का IPO 19 अगस्त को खुला था और 21 अगस्त को बंद हो रहा है। कंपनी ने कुल 2.53 करोड़ शेयरों का इश्यू पेश किया है। शुरुआती दो दिनों के बाद भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही और अंतिम दिन सब्सक्रिप्शन में तेजी देखने को मिली। IPO का प्राइस बैंड ₹152 से ₹160 प्रति शेयर तय किया गया है, जबकि एक लॉट में 93 शेयर हैं। इसके हिसाब से रिटेल निवेशक के लिए न्यूनतम निवेश करीब ₹14,880 बैठता है। GMP ₹17 पर पहुंचा Grey Market में भी IPO को लेकर शुरुआत में उत्साह देखने को मिला था। 19 अगस्त को GMP करीब ₹23 तक पहुंचा था, लेकिन इसके बाद इसमें लगातार गिरावट आई। 20 अगस्त को GMP करीब ₹18 और 21 अगस्त को ₹17 दर्ज किया गया। ₹160 के अपर प्राइस बैंड पर ₹17 का GMP लगभग 10.6% के संभावित प्रीमियम का संकेत देता है। हालांकि GMP अनौपचारिक बाजार का संकेतक है और इससे वास्तविक लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं होती। IPO से ₹550 करोड़ जुटाने की योजना कंपनी का IPO कुल करीब ₹550 करोड़ का है। इसमें ₹450 करोड़ का Fresh Issue और करीब ₹100 करोड़ का Offer for Sale शामिल है। Fresh Issue से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल कंपनी द्वारा अपने मौजूदा और नए Alternative Investment Funds में निवेश तथा कुछ कर्ज चुकाने के लिए किया जाना है। कंपनी क्या करती है? Gaja Alternative Asset Management एक India-focused alternative asset manager है। कंपनी विभिन्न वैकल्पिक निवेश फंडों के प्रबंधन और निवेश से जुड़ी गतिविधियों में काम करती है। कंपनी की वित्तीय सफलता काफी हद तक उसके managed funds और investments के प्रदर्शन से जुड़ी रहती है। इसी कारण IPO में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए business performance के साथ-साथ market और regulatory risks को समझना भी जरूरी है। IPO के बाद अगला पड़ाव Listing IPO की उपलब्ध समय-सारणी के अनुसार allotment 24 अगस्त, refund की शुरुआत और demat credit 25 अगस्त को तथा listing 26 अगस्त 2026 को प्रस्तावित है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि GMP में हालिया गिरावट के बावजूद कंपनी की listing कितने प्रीमियम पर होती है। निवेशकों के लिए जरूरी बात Gaja Alternative Asset Management IPO को अच्छी subscription मिली है, लेकिन GMP में लगातार गिरावट यह संकेत देती है कि grey-market sentiment शुरुआती स्तरों की तुलना में कमजोर हुआ है। इसलिए केवल GMP या subscription आंकड़ों के आधार पर निवेश का फैसला करना उचित नहीं होगा। कंपनी की वित्तीय स्थिति, IPO के उद्देश्य, valuation और अपने risk appetite को ध्यान में रखना जरूरी है। स्रोत: SEBI, Economic Times, India Infoline, RR Finance Jai Rashtra News

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SpiceJet को बड़ी राहत! Creditor से समझौते के बाद Insolvency केस में मिली अस्थायी राहत

नई दिल्ली: आर्थिक दबाव से जूझ रही एयरलाइन SpiceJet को insolvency मामले में फिलहाल बड़ी राहत मिली है। National Company Law Tribunal (NCLT) ने aircraft lessor Aviator ML 29641 Ltd के साथ हुए समझौते के बाद उसकी insolvency petition वापस लेने की अनुमति दे दी। हालांकि, एयरलाइन के खिलाफ बाकी insolvency मामलों का समाधान अभी नहीं हुआ है। ₹58.64 करोड़ के डिफॉल्ट से जुड़ा था मामला Aviator ML ने SpiceJet पर करीब ₹58.64 करोड़ के कथित डिफॉल्ट को लेकर Insolvency and Bankruptcy Code के तहत याचिका दायर की थी। मामला NCLT में लंबे समय से चल रहा था और सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रखा जा चुका था। अंतिम चरण में SpiceJet और Aviator ML के बीच समझौता हुआ, जिसके बाद lessor ने अपनी insolvency petition वापस लेने की मांग की। NCLT ने दी राहत, लेकिन लगाई ₹15 लाख की लागत NCLT ने बुधवार को Aviator ML को याचिका वापस लेने की अनुमति दी, लेकिन SpiceJet और Aviator ML दोनों पर ₹15-15 लाख की लागत भी लगाई। दोनों पक्षों को यह राशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में जमा करने का निर्देश दिया गया। ट्रिब्यूनल ने आखिरी समय में settlement की जानकारी देने के तरीके पर नाराजगी जताई। अदालत के सामने मामला आदेश के लिए सुरक्षित था और settlement की सूचना बाद में दी गई थी। सात और Insolvency मामलों की चुनौती बरकरार यह राहत SpiceJet के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे एयरलाइन की पूरी insolvency समस्या खत्म नहीं हुई है। कंपनी के खिलाफ अन्य aircraft lessors की सात insolvency petitions अभी भी लंबित हैं। NCLT के नए बेंच के सामने इन मामलों की fresh hearing होगी। इसका मतलब है कि SpiceJet को तत्काल insolvency प्रक्रिया में जाने से समय मिल गया है, लेकिन वित्तीय संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मौजूदा मैनेजमेंट के पास रहेगा नियंत्रण इस घटनाक्रम का एक बड़ा फायदा यह है कि फिलहाल SpiceJet का मौजूदा management एयरलाइन का संचालन जारी रख सकेगा। Reuters के मुताबिक fresh hearing का फैसला SpiceJet के लिए राहत है, जबकि creditors के लिए यह उनके debt-recovery प्रयासों में एक झटका माना जा रहा है। SpiceJet पर वित्तीय दबाव अभी कायम SpiceJet पिछले कुछ समय से गंभीर वित्तीय चुनौतियों से गुजर रही है। एयरलाइन की market share जून 2026 में घटकर करीब 1.9% रह गई, जबकि 2019 में यह करीब 15% थी। कंपनी को aircraft grounding, creditor disputes और अन्य वित्तीय दबावों का सामना करना पड़ रहा है। यानी एक creditor के साथ settlement ने SpiceJet को अस्थायी राहत जरूर दी है, लेकिन आगे की राह अभी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अब आगे क्या होगा? अब SpiceJet के खिलाफ बाकी insolvency petitions की सुनवाई नए NCLT bench के सामने होगी। कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बाकी creditors के साथ भी समझौते करना और अपने वित्तीय हालात को स्थिर करना होगी। फिलहाल Aviator ML मामले में राहत SpiceJet के लिए एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे insolvency संकट का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। स्रोत: Reuters, NCLT, Economic Times, Moneycontrol, Free Press Journal Jai Rashtra News

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भारत-जापान की बड़ी रणनीतिक साझेदारी! समुद्री सुरक्षा और Indo-Pacific सहयोग पर हुआ अहम समझौता

नई दिल्ली: भारत और जापान ने अपनी रणनीतिक और रक्षा साझेदारी को नई मजबूती देते हुए समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए Memorandum of Arrangement (MoA) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 20 अगस्त को नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी के बीच हुई वार्ता के दौरान हुआ। दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित Indo-Pacific को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारतीय नौसेना और जापानी Maritime Force के बीच बढ़ेगा सहयोग नए समझौते के तहत Indian Navy और Japan Maritime Self-Defense Force (JMSDF) के बीच सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। इसमें समुद्री क्षेत्र की जानकारी साझा करना, समुद्री गतिविधियों की निगरानी, खोज एवं बचाव और मानवीय सहायता तथा आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। इससे दोनों देशों की समुद्री स्थितियों को समझने और संभावित खतरों पर तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। Indo-Pacific में Freedom of Navigation पर जोर भारत और जापान ने Free and Open Indo-Pacific के अपने साझा दृष्टिकोण को दोहराया। दोनों देशों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, स्वतंत्र नौवहन और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप वैध समुद्री व्यापार को बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। यह सहयोग ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब Indo-Pacific क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। Joint Naval Shipbuilding पर भी बातचीत रक्षा सहयोग सिर्फ समुद्री निगरानी तक सीमित नहीं रहेगा। भारत और जापान ने नौसैनिक जहाजों के संयुक्त विकास और निर्माण की संभावनाओं पर भी चर्चा की है। जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमता को साथ लाकर Make in India के तहत रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। दोनों देशों ने जहाजों की मरम्मत और maintenance facilities के पारस्परिक इस्तेमाल पर भी आगे काम करने की बात कही है। Defence Technology में भी बढ़ेगा सहयोग भारत और जापान ने उन्नत रक्षा तकनीक में सहयोग तेज करने पर सहमति जताई है। दोनों पक्ष co-development और co-production के नए अवसर तलाशेंगे, जिससे भारत के defence manufacturing ecosystem और Japanese technology के बीच साझेदारी बढ़ सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जापानी कंपनियों को भारतीय defence companies और startups के साथ Make in India के तहत co-development और co-production में भागीदारी के अवसर तलाशने की बात कही है। Maritime Security में Piracy के खिलाफ भी सहयोग समुद्री सुरक्षा समझौते में piracy, armed robbery और अन्य transnational crimes से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की दिशा भी शामिल है। इससे Indian Ocean और Indo-Pacific के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा में दोनों देशों के बीच coordination मजबूत हो सकता है। चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच समझौता अहम भारत-जापान का यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब Indo-Pacific में चीन की बढ़ती सैन्य और समुद्री गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं। हालांकि दोनों देशों ने समझौते को किसी एक देश के खिलाफ गठबंधन के रूप में पेश नहीं किया है, लेकिन freedom of navigation, rules-based order और maritime security पर उनका साझा जोर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत-जापान रिश्तों में नया अध्याय भारत और जापान के बीच पहले से ही Special Strategic and Global Partnership है। अब नए maritime security framework, defence technology cooperation और संभावित joint shipbuilding के जरिए यह साझेदारी अधिक operational और practical दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच नौसैनिक अभ्यास, information sharing, ship repair, defence manufacturing और Indo-Pacific security में सहयोग और बढ़ने की उम्मीद है। स्रोत: PIB, DD India, PTI, Economic Times, Prime Minister’s Office Jai Rashtra News

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लद्दाख का वायरल VIDEO: सुरक्षा बलों से बहस करने वाली Gen-Z महिला ने भारतीय सेना से मांगी माफी

लद्दाख: लद्दाख के मिनामर्ग चेकपोस्ट पर सुरक्षा बलों के साथ बहस करते हुए वायरल हुई 25 वर्षीय महिला पर्यटक ने अब भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और लद्दाख पुलिस से माफी मांगी है। महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें वह सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताते हुए खुद को “Gen Z” बताते हुए सुरक्षाकर्मियों से बहस करती दिखाई दी थी। छह घंटे इंतजार के बाद हुआ था विवाद महिला के मुताबिक, घटना 26 जुलाई को मिनामर्ग चेकपोस्ट के पास हुई थी। उस समय सुरक्षा कारणों से सड़क को अस्थायी रूप से बंद किया गया था और वह तथा उसके साथ यात्रा कर रहे लोग कई घंटों तक इंतजार करते रहे। महिला ने NDTV से बातचीत में बताया कि करीब छह घंटे तक इंतजार और स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के कारण वह अपना आपा खो बैठी। उसने माना कि गुस्से में उसके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा गलत थी। “We are Gen Z” वाला VIDEO हुआ वायरल घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद महिला की टिप्पणी “We are Gen Z” काफी चर्चा में रही। वीडियो में वह सुरक्षा कर्मियों के साथ तीखी बहस करती नजर आई। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर उसे लेकर काफी आलोचना हुई। सेना के पूर्व अधिकारियों और कई यूजर्स ने संवेदनशील सीमा क्षेत्र में सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर इस तरह के व्यवहार पर सवाल उठाए। महिला ने सेना से मांगी माफी विवाद बढ़ने के बाद महिला ने अब सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उसने कहा कि उसका उद्देश्य भारतीय सेना या पुलिस का अपमान करना नहीं था और वह सेना का सम्मान करती है। उसने भारतीय सेना के साथ-साथ J&K Police और Ladakh Police से भी माफी मांगी और कहा कि उसकी टिप्पणी उस समय की निराशा और गुस्से का परिणाम थी। महिला ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए यह भी कहा कि उसे अपने व्यवहार पर पछतावा है और वह इस घटना के कारण मिले ध्यान के लिए ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहती थी। संवेदनशील इलाके में सुरक्षा व्यवस्था का मामला यह विवाद ऐसे इलाके में हुआ जहां सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है। लद्दाख का यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से संवेदनशील है और सैन्य गतिविधियों के कारण कई बार आम नागरिकों की आवाजाही अस्थायी रूप से प्रतिबंधित की जाती है। महिला ने अपने पक्ष में कहा कि अगर उन्हें सड़क बंद होने और इंतजार की वजह के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल जाती, तो शायद स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन करना भी यात्रियों की जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस वीडियो के वायरल होने के बाद यह मामला केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर Gen Z, नागरिक जिम्मेदारी और सेना के प्रति सम्मान को लेकर बहस शुरू हो गई। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी पहले महिला के व्यवहार पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ऐसी मानसिकता से जोड़ा था जिसमें लोग अपने प्रभाव या पहचान के आधार पर नियमों से ऊपर होने का भाव रखते हैं। माफी के बाद विवाद में नया मोड़ अब महिला की माफी के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। वायरल वीडियो में दिखाई गई घटना को लेकर आलोचना के बाद उसने स्पष्ट किया कि उसके शब्द गलत थे और उसने सेना तथा पुलिस का अपमान करने का इरादा नहीं रखा था। इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा निर्देशों का पालन और यात्रियों को स्पष्ट जानकारी देना दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। स्रोत: NDTV, Indian Express, Times of India, PTI Jai Rashtra News

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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर फिर सियासत तेज! घायल छात्र के साथ राहुल गांधी दिल्ली पुलिस स्टेशन पहुंचे

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर शुक्रवार, 21 अगस्त 2026, को राजनीतिक विवाद फिर तेज हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचब को साथ लेकर दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे और मामले में FIR दर्ज करने की मांग की। घायल छात्र को साथ लेकर थाने पहुंचे राहुल गांधी राहुल गांधी शुक्रवार को DCP कार्यालय पहुंचे। उनके साथ साहिल लोचब भी मौजूद थे, जिन्हें 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट जैसी चोटें लगी थीं। रिपोर्टों के मुताबिक राहुल गांधी ने पुलिस अधिकारियों से मामले की शिकायत दर्ज करने और कथित बल प्रयोग की जांच कराने की मांग की। FIR दर्ज नहीं होने पर धरने पर बैठे राहुल राहुल गांधी ने पुलिस स्टेशन के बाहर धरना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जब तक शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की जाती, तब तक वह वहां से नहीं हटेंगे। इस दौरान घायल छात्र और उसका परिवार भी उनके साथ मौजूद रहा। राहुल गांधी पहले भी इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और गृह मंत्री से जवाब मांग चुके हैं। पैलेट गन के इस्तेमाल पर आमने-सामने दावे इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर है। कांग्रेस का आरोप है कि छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और कुछ प्रदर्शनकारियों को पैलेट जैसी चोटें आईं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर चुकी है और कह चुकी है कि उसके पास ऐसी हथियार प्रणाली मौजूद नहीं है। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक और सीमित बल इस्तेमाल करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट की जांच भी जारी मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की परिस्थितियों और कथित अत्यधिक बल प्रयोग की जांच के लिए हाई-पावर विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। इससे यह मामला सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब न्यायिक निगरानी में भी जांच का विषय बन गया है। जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन को लेकर पुलिस अलर्ट इसी बीच दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर किसी नए विरोध प्रदर्शन या जुलूस की अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस ने लोगों से बिना अनुमति किसी सार्वजनिक सभा में शामिल न होने की अपील की है। इससे राजधानी में प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा और राजनीतिक तनाव दोनों बढ़ गए हैं। राहुल गांधी के कदम से बढ़ी राजनीतिक हलचल घायल छात्र को लेकर सीधे पुलिस स्टेशन पहुंचना राहुल गांधी की ओर से मामले को दोबारा राजनीतिक केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस इसे छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती और जवाबदेही का मुद्दा बना रही है, जबकि पुलिस अपने ऊपर लगे पैलेट गन के आरोपों से इनकार कर रही है। अब सबकी नजर FIR, पुलिस जांच और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट पर है। इन्हीं के जरिए यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान वास्तव में किस तरह के बल का इस्तेमाल हुआ था। स्रोत: Delhi Police, PTI, India Today, Outlook India, Times of India Jai Rashtra News

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22 भारतीयों वाले दो जहाज हाईजैक! यमन और सोमालिया के पास समुद्री डकैती से मचा हड़कंप

नई दिल्ली: अरब सागर और हिंद महासागर से जुड़ी समुद्री सुरक्षा को लेकर शुक्रवार को बड़ी चिंता सामने आई। यमन और सोमालिया के तट के पास दो अलग-अलग घटनाओं में दो कमर्शियल जहाजों को समुद्री डाकुओं ने हाईजैक कर लिया। दोनों जहाजों पर कुल 22 भारतीय नागरिक सवार थे। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल दोनों जहाजों के भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं। Gulf of Aden में 16 भारतीयों वाला टैंकर हाईजैक पहली घटना 20 अगस्त को Gulf of Aden में हुई। Eritrea-flagged oil products tanker MT Sibu 1 को यमन के तट से करीब 30 nautical miles दूर हथियारबंद समुद्री डाकुओं ने अपने कब्जे में ले लिया। जहाज पर कुल 20 क्रू सदस्य थे, जिनमें 16 भारतीय नागरिक शामिल हैं। बाकी क्रू में एक-एक Syrian, Sudanese और Iraqi नागरिक थे, जबकि एक सदस्य की राष्ट्रीयता की पुष्टि नहीं हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार करीब छह हथियारबंद समुद्री डाकू जहाज पर चढ़े और उन्होंने उसका नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। Somalia के Puntland तट पर दूसरा जहाज कब्जे में दूसरी घटना 17 अगस्त को Somalia के Puntland तट के पास हुई। Cameroon-flagged cargo vessel M/V LUTUF को समुद्री डाकुओं ने हाईजैक किया। इस जहाज पर कुल 10 क्रू सदस्य थे, जिनमें 6 भारतीय नागरिक शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक हथियारबंद हमलावर दो छोटी नावों से जहाज तक पहुंचे और उस पर कब्जा कर लिया। इस तरह दोनों घटनाओं को मिलाकर 22 भारतीय नागरिक समुद्री डकैती की घटनाओं से प्रभावित जहाजों पर मौजूद थे। भारतीय क्रू की सुरक्षा पर क्या अपडेट? भारतीय अधिकारियों की शुक्रवार को उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों जहाजों पर मौजूद भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। हालांकि, जहाजों की मौजूदा स्थिति और आगे की घटनाक्रम पर भारतीय अधिकारी लगातार नजर बनाए हुए हैं। MT Sibu 1 मामले में संबंधित Recruitment and Placement Service Licence एजेंसी को घटना की रिपोर्ट और आगे के अपडेट e-Navik online marine casualty reporting system के जरिए जमा करने को कहा गया है। समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता लगातार दो अलग-अलग घटनाओं ने Horn of Africa और Gulf of Aden में commercial shipping की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह क्षेत्र वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां से Red Sea तथा Suez Canal की ओर जाने वाले प्रमुख समुद्री मार्ग जुड़े हैं। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में piracy के साथ-साथ क्षेत्रीय संघर्ष और जहाजों पर हमलों का खतरा भी बना हुआ है। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला? भारत दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापारिक देशों में शामिल है और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक international merchant vessels पर काम करते हैं। ऐसे में किसी भी समुद्री सुरक्षा संकट का सीधा असर भारतीय seafarers की सुरक्षा पर पड़ सकता है। भारतीय नौसेना पहले भी Gulf of Aden और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में commercial shipping की सुरक्षा तथा संकट में फंसे भारतीयों की मदद के लिए अभियान चला चुकी है। दो घटनाओं ने बढ़ाई चिंता एक ही सप्ताह में Somalia और Yemen के पास दो जहाजों का हाईजैक होना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में piracy का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। खासकर भारतीय क्रू सदस्यों की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम को भारत के लिए और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। फिलहाल राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार सभी 22 भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं। आगे भारतीय अधिकारियों और संबंधित अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई पर नजर रहेगी। स्रोत: PTI, Hindustan Times, Business Standard, The Statesman Jai Rashtra News

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BJP विधायक जय देवी कौशल का गंभीर आरोप—“मुझे मंदिर में पूजा करने से रोका गया”

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के काकोरी स्थित शीतला माता मंदिर में जीर्णोद्धार और भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान विवाद खड़ा हो गया है। मलिहाबाद से BJP विधायक जय देवी कौशल ने आरोप लगाया है कि उन्हें मंदिर में पूजा-अर्चना और आरती में शामिल होने से रोका गया। विधायक ने इसे जातिगत भेदभाव का मामला बताते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से शिकायत करने की बात कही है। विधायक ने लगाए जातिगत भेदभाव के आरोप जय देवी कौशल के मुताबिक, वह मंदिर के जीर्णोद्धार कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं। उनका आरोप है कि वहां पूजा की व्यवस्था होने के बावजूद उन्हें अनुष्ठान में बैठने नहीं दिया गया और वह खड़ी रहीं। विधायक ने दावा किया कि उन्हें अगरबत्ती जलाने और नारियल चढ़ाने तक की अनुमति नहीं दी गई। विधायक का कहना है कि उनके साथ ऐसा व्यवहार उनकी पासी समाज की पृष्ठभूमि के कारण किया गया। उन्होंने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि वह मामले को BJP के शीर्ष नेतृत्व के सामने रखेंगी। मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए बजट दिलाने का दावा रिपोर्टों के अनुसार, जय देवी कौशल के प्रयासों से काकोरी के शीतला मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए करीब ₹78 लाख की राशि स्वीकृत हुई थी। उनके पति और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने भी घटना पर नाराजगी जताई है। उनके मुताबिक, एक अन्य मंदिर के निर्माण के लिए भी करीब ₹70 लाख की राशि स्वीकृत हुई थी। इसी वजह से विधायक और उनके समर्थकों ने सवाल उठाया है कि जिस विकास कार्य के लिए सरकारी बजट स्वीकृत कराने में विधायक की भूमिका रही, उसी कार्यक्रम में उन्हें पूजा में शामिल होने से क्यों रोका गया। मंदिर के पुजारी ने आरोपों को बताया गलत विवाद के बीच मंदिर के पुजारी शैलेंद्र बाजपेई ने विधायक के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मंदिर में किसी के साथ जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता और सभी वर्गों के लोग यहां पूजा-अर्चना करते हैं। पुजारी के अनुसार, भूमिपूजन और धार्मिक अनुष्ठान निर्धारित पूजा पद्धति और परंपरा के अनुसार कराया गया था। इसलिए विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों को मंदिर की सामान्य व्यवस्था से जोड़ना सही नहीं है। मामला राजनीतिक चर्चा में आया विधायक के आरोप और मंदिर पक्ष की सफाई के बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ जय देवी कौशल इसे जातिगत भेदभाव बता रही हैं, वहीं मंदिर प्रबंधन आरोपों से इनकार कर रहा है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच स्वतंत्र जांच या आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है, इसलिए जातिगत भेदभाव के आरोपों को अभी आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। BJP नेतृत्व तक पहुंचेगा मामला जय देवी कौशल ने कहा है कि वह इस पूरे मामले की शिकायत BJP के वरिष्ठ नेतृत्व और आलाकमान से करेंगी। अब नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या मामले की कोई औपचारिक जांच कराई जाती है। यह घटना उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों पर समान प्रवेश, सामाजिक भेदभाव और राजनीतिक प्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर नई बहस को जन्म दे सकती है। स्रोत: आजतक, लाइव हिन्दुस्तान, अमर उजाला, UP Tak, दैनिक जागरण Jai Rashtra News

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प्रेस क्लब में ‘मोदी चालीसा’ का अनावरण; VIDEO वायरल होते ही मचा बवाल, आयोजकों से अलग हुआ प्रेस क्लब

नई दिल्ली: दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा में आयोजित एक कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी के कटआउट के सामने आरती और ‘मोदी चालीसा’ का पाठ करते लोग दिखाई दे रहे हैं। कार्यक्रम में ‘जय जय मोदी’ और ‘हर हर मोदी’ जैसे नारे भी लगाए गए। वीडियो में क्या दिखा? सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में नरेंद्र मोदी की तस्वीर/कटआउट को भगवान राम के स्वरूप में दिखाया गया है। मंच पर इसी तस्वीर के सामने आरती की गई और ‘भगवान श्री नरेंद्र मोदी चालीसा’ का पाठ किया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने धार्मिक अंदाज में नारे भी लगाए। वीडियो वायरल होने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं और प्रेस क्लब परिसर में हुए इस आयोजन को लेकर सवाल उठने लगे। बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड से जुड़े पदाधिकारी रहे मौजूद रिपोर्टों के मुताबिक कार्यक्रम में बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष राजन सिंह प्रमुख रूप से मौजूद थे। राजन सिंह इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर पटना में मंदिर बनाने की घोषणा को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। आयोजन में ‘मोदी चालीसा’ को प्रस्तुत करने के साथ उसका पाठ भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को भगवान श्रीराम के स्वरूप में प्रदर्शित करने वाली तस्वीर भी दिखाई गई। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने किया किनारा विवाद बढ़ने के बाद प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम उसकी ओर से आयोजित नहीं किया गया था। क्लब के अनुसार, एक संगठन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए हॉल किराये पर लिया था, लेकिन वहां आयोजित गतिविधि ने बुकिंग की शर्तों का उल्लंघन किया। जानकारी मिलते ही क्लब अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर कार्यक्रम को रुकवा दिया। इस स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा आयोजन प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं था। VIDEO वायरल होने के बाद राजनीतिक बहस ‘मोदी चालीसा’ के वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर राजनीतिक और वैचारिक बहस शुरू हो गई है। आलोचक इसे राजनीतिक व्यक्तिपूजा का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि समर्थकों की ओर से इसे प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और समर्थन से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, प्रेस क्लब की ओर से कार्यक्रम से दूरी बनाए जाने के बाद विवाद का केंद्र अब आयोजकों द्वारा क्लब की बुकिंग की शर्तों के कथित उल्लंघन और कार्यक्रम की प्रकृति पर है। सोशल मीडिया पर क्यों ट्रेंड कर रहा है मामला? प्रधानमंत्री की तस्वीर के सामने आरती, धार्मिक शैली में ‘मोदी चालीसा’ का पाठ और ‘जय जय मोदी’ जैसे नारों वाले वीडियो ने कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर काफी ध्यान आकर्षित किया। इसी वजह से यह मामला आज की Trending Political News में शामिल हो गया है। फिलहाल प्रेस क्लब ने साफ कर दिया है कि उसने इस आयोजन का समर्थन या आयोजन नहीं किया था और नियमों के उल्लंघन के बाद कार्यक्रम को रोक दिया गया। स्रोत: प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, लाइव हिन्दुस्तान, द लल्लनटॉप, अमर उजाला Jai Rashtra News

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