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Indian-origin leaders shine in Canada Elections: कनाडा के आम चुनाव में बजा भारतीयों का डंका,  24 भारतवंशियों समेत इन नेताओं ने मारी बाजी

कनाडा में हुए आम चुनाव (Canada Elections 2025) में भारी संख्या में भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने बाजी (Indian-origin leaders shine in Canada Elections) मारी है। जानकारी के मुताबिक कनाडा चुनाव में 24 भारतीय मूल के कनाडाई उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। जीतने वालों में अधिकतर उम्मीदवार पंजाब से ताल्लुक रखते हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक तकरीबन 65 भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने चुनावी मैदान में ताल ठोका था। जिनमें से रिकॉर्ड 24 ने जीत हासिल की। बता दें कि चार साल पहले हुए चुनाव में 21 उम्मीदवार जीते थे। इस जीत की बड़ी बात यह कि भारतीय मूल के इस विजेताओं में इनोवेशन, साइंस और इंडस्ट्री मिनिस्टर अनीता आनंद भी शामिल हैं। उन्होंने ओकविले ईस्ट सीट पर जीत हासिल की। संभवतः इस जीत के बाद उन्हें कार्नी की नई कैबिनेट में उन्हें महत्वपूर्ण पद मिल जाए। कनाडा के संघीय चुनावों में गौर करने वाली बात यह कि न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के नेता और खालिस्तान समर्थक जगमीत सिंह को बर्नाबी सेंट्रल सीट पर करारी हार का सामना करना पड़ा और कनाडा में लिबरल की जीत हुई है।  भारतीय मूल के लोगों का कनाडा की राजनीति में किस तरह प्रभाव (Indian-origin leaders shine in Canada Elections) बढ़ रहा है कहने की जरूरत नहीं कनाडा के 2025 संघीय चुनाव (Indian-origin leaders shine in Canada Elections) में 24 भारतीय मूल के उम्मीदवारों की जीत यह बताती है कि भारतीय मूल के लोगों का कनाडा की राजनीति में किस तरह प्रभाव बढ़ रहा है। इस चुनाव में खास बात यह कि जस्टिन ट्रूडो का यार और खालिस्तानी एजेंडे को बढ़ावा देने वाला जगमीत सिंह हार गया। मजे की बात यह कि इस चुनाव में (Canada Elections 2025) ट्रूडो सरकार में किंगमेकर बताने वाला खालिस्तान समर्थक जगमीत सिंह और उसकी पार्टी की करारी हार हुई है। बता दें कि खालिस्तान समर्थक जगमीत सिंह को पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो के भारत विरोधी रुख के लिए जिम्मेदार कारणों में से एक माना जाता है। और तो और ट्रूडो अपनी अल्पमत सरकार को सत्ता में बनाए रखने के लिए जगमीत पर निर्भर थे। चूंकि जगमीत सिंह हार चुके हैं, तो ऐसे में उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी कनाडा में अप्रासंगिक हो गई है।  इसे भी पढ़ें:-   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी तीनों सेनाओं को खुली छूट, पाकिस्तान का सूखा हलक एक नजर डालते हैं जीते (Indian-origin leaders shine in Canada Elections) हुए भारतवंशियों पर   Latest News in HindiToday Hindi news  Canada Elections 2025 #CanadaElections2025 #IndianOriginLeaders #NRIinPolitics #CanadaPolitics #IndianDiaspora #PunjabiInCanada #CanadaElectionResults #DesiPower #IndianCanadians #GlobalIndians

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Mark Carney होंगे कनाडा के नये प्रधानमंत्री, क्या सुधरेंगे भारत से संबंध?

ट्रूडो ने जनवरी में ही पार्टी को देश के नया प्रधानमंत्री चुनने को कह दिया था। हालांकि अब जाकर कनाडा के नए प्रधानमंत्री के नाम पर मुहर लगी है। मार्क कार्नी, जी हाँ मार्क कार्नी (Mark Carney) कनाडा के अगले प्रधानमंत्री होंगे। कनाडा के पीएम की रेस में उनका नाम सबसे आगे चल रहा था। वर्तमान पीएम जस्टिन ट्रूडो के उत्तराधिकारी के रूप में मार्क कार्नी के नाम ठप्पा लगा दिया है। रविवार को सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी ने उन्हें अपना नेता चुना। दरअसल, ट्रूडो के खिलाफ अपने ही नेताओं ने मोर्चा खोल लिया था, जिसके बाद ट्रूडो ने इस्तीफे का ऐलान किया था। खैर, नाम के ऐलान के कार्नी जस्टिन ट्रूडो की जगह लेंगे। वैसे तो मार्क कार्नी कनाडा की राजनीति से दूर रहे हैं, लेकिन इस बीच इस बीच उन्हें मौके कई बार मिले। साल 2012 में ही उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने वित्त मंत्री बनने का मौका दिया था, लेकिन उनके प्रस्ताव को उन्होंने नकार दिया था। बता दें कि कार्नी एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं औऱ वह दुनिया के दो बड़े देशों में गवर्नर रह चुके हैं। मार्क कार्नी (Mark Carney) को राजनीति का कोई अनुभव नहीं है बात करें मार्क कार्नी की तो वे (Mark Carney) 59 वर्ष के हैं। 16 मार्च, 1965 को नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज़ के फ़ोर्ट स्मिथ में जन्मे कार्नी का पालन-पोषण एडमॉन्टन, अल्बर्टा में हुआ था। मार्क कार्नी एक प्रसिद्ध कनाडाई आर्थिक विशेषज्ञ हैं। कार्नी को केंद्रीय बैंकिंग और वैश्विक वित्तीय स्थिरता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए जाना जाता है। उन्होंने साल 2008 से साल 2013 तक बैंक ऑफ कनाडा और 2013 से 2020 तक बैंक ऑफ इंग्लैंड का संचालन भी किया है। यही नहीं कार्नी गोल्डमैन सैक्स के पूर्व कार्यकारी भी रहे हैं। साल 2003 में बैंक ऑफ कनाडा के डिप्टी गवर्नर नियुक्त होने से पहले उन्होंने न्यूयॉर्क, लंदन, टोक्यो और टोरंटो में 13 साल तक काम किया। उन्हें राजनीति का कोई अनुभव नहीं है।उन्हें विशेष रूप से आर्थिक संकट के दौरान स्थिरता बनाए रखने, केंद्रीय बैंकों की भूमिका को पुनः परिभाषित करने में माहरत हासिल है। रही बात उनकी शिक्षा की तो साल 1988 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर और डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। इसे भी पढ़ें:- भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 पर जमाया कब्जा, न्यूजीलैंड को हराकर रचा इतिहास मार्क कार्नी (Mark Carney) रिश्ते बेहतर होने की उम्मीद है  ऐसे में बड़ा सवाल यह कि भारत के प्रति मार्क कार्नी (Mark Carney) का क्या रुख होगा। क्योंकि जस्टिन ट्रूडो ने अपने कार्यकाल के दौरान भारत के साथ संबंधों को बदतर करने में कोई कोर असर नहीं छोड़ी थी। हालांकि मार्क कार्नी रिश्ते बेहतर होने की उम्मीद है। दरअसल,कार्नी ही वह शख्स हैं, जिन्होंने हाल ही में कहा था कि “भारत के साथ रिश्ते फिर से मजबूत करने चाहिए।” यहां जानकारों की माने तो मार्क कार्नी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पसंद नहीं करते। वो बात और है कि उन्होंने कभी खुल कर मुख़ालफ़त नहीं की। कनाडा पर ट्रंप की बदनीयत के बाद कार्नी के सामने न सिर्फ इकोनॉमी को मजबूत करने बल्कि देश के लोगों का भरोसा जीतने की भी चुनौती होगी। इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता कि कनाडा इस समय कई संकटों से घिरा है। जिसमें अमेरिका की ओर से टैरिफ वॉर सबसे ऊपर है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Mark Carney #MarkCarney #CanadaPM #CanadaIndiaRelations #JustinTrudeau #Diplomacy #GlobalPolitics

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