Chaitra Navratri

चैत्र नवरात्रि 2025: जौ न उगने पर क्या होता है? जानें इसके पीछे छिपे शुभ-अशुभ संकेत और वैज्ञानिक कारण

चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के पहले दिन घटस्थापना के साथ ही जौ बोने की परंपरा हिंदू धर्म में सदियों से चली आ रही है। यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि एक शुभ संकेतक भी है। मान्यता है कि नवरात्रि में बोए गए जौ के अंकुरण से घर की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और भाग्य का पता चलता है। लेकिन क्या होता है जब जौ नहीं उगते? क्या यह अशुभ संकेत देता है? आइए जानें इसके पीछे छिपे गहरे रहस्य और वैज्ञानिक व धार्मिक महत्व को। नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नवरात्रि (Navratri) के दौरान यदि जौ ठीक से नहीं उगते हैं, तो इसका मुख्य कारण घर या पूजा स्थल पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हो सकता है। यह नकारात्मक ऊर्जा विभिन्न कारणों से उत्पन्न हो सकती है, जैसे घर में वास्तु दोष, बुरी नजर या अन्य प्रकार की बाधाएं। जब किसी स्थान पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव होता है, तो आध्यात्मिक शक्ति कमजोर हो जाती है, जिससे जौ का अंकुरण सही तरीके से नहीं हो पाता। इस स्थिति को अशुभ संकेत के रूप में माना जाता है। आर्थिक परेशानियां जौ का अंकुरण समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक होता है। नवरात्रि के दौरान यदि जौ ठीक से नहीं उगते, तो यह आर्थिक समस्याओं का संकेत हो सकता है। मान्यता है कि जिन घरों में नवरात्रि के समय जौ सही तरीके से नहीं उगते, वहां भविष्य में आर्थिक संकट आ सकता है। यह स्थिति घर के आर्थिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है और धन संबंधी समस्याओं का जन्म ले सकती है। ग्रह दोष ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवरात्रि में जौ का ठीक से न उगना ग्रहों के दोष के कारण हो सकता है। विशेष रूप से शनि, राहु या केतु के अशुभ प्रभाव के कारण यह स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इन ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति घर में सुख, शांति और समृद्धि की कमी ला सकती है, जिससे जौ का अंकुरण सही से नहीं हो पाता। इसके अलावा, पितृ दोष भी जौ के सही से न उगने का कारण बन सकता है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि जौ ठीक से नहीं उगते हैं, तो यह परिवार के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है। इस स्थिति को देखा गया है कि यदि जौ न उगें, तो यह परिवार के किसी सदस्य की सेहत में खराबी का संकेत हो सकता है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिनकी तबियत पहले से ठीक नहीं है। यह चेतावनी देता है कि परिवार के सदस्य किसी शारीरिक या मानसिक बीमारी का सामना कर सकते हैं। इसे भी पढ़ें:- चैती छठ महापर्व 2025: सूर्य देव की पूजा और उपवास का पवित्र अवसर घर में क्लेश और मानसिक तनाव नवरात्रि (Navratri) में जौ का ठीक से न उगना पारिवारिक क्लेश, मानसिक तनाव और मानसिक असंतुलन का भी संकेत हो सकता है। यह स्थिति घर में झगड़ों और समस्याओं को जन्म दे सकती है। जब जौ ठीक से अंकुरित नहीं होते, तो यह घर में नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को दर्शाता है, जो परिवार के बीच मनमुटाव और क्लेश का कारण बन सकता है। नवरात्रि में जौ न उगने पर उपाय पंडित आचार्य उदित नारायण त्रिपाठी के अनुसार, अगर नवरात्रि (Chaitra Navratri) के दौरान जौ सही से न उगें, तो कुछ उपायों को अपनाकर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। सबसे पहले, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि नवरात्रि के दौरान पूजा और व्रत को सही विधि से संपन्न किया जाए। इसके साथ ही, कन्या पूजन करना भी एक प्रभावी उपाय माना जाता है। कन्या पूजन से माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जो घर में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करती है। इस विधि से न केवल जौ का अंकुरण सही से हो सकता है, बल्कि यह अन्य कई शुभ परिणाम भी ला सकता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Chaitra Navratri #ChaitraNavratri2025 #NavratriRituals #BarleyGrowth #JauSignificance #NavratriAstrology #HinduFestivals #SpiritualMeaning #AuspiciousOmens #ScientificFacts #HinduTraditions

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Kalash Sthapana Time & Significance

चैत्र नवरात्रि 2025: कलश स्थापना का सही समय और महत्व, गलत मुहूर्त में करने से बचें

चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो देवी दुर्गा (Devi Durga) की आराधना के लिए मनाया जाता है। यह नवरात्रि चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है और नवमी तिथि तक चलती है। साल 2025 में चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू होगी और 7 अप्रैल तक चलेगी। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है, जो देवी दुर्गा के आगमन का प्रतीक है। लेकिन कलश स्थापना का सही समय और मुहूर्त जानना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि गलत मुहूर्त में कलश स्थापना करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। चैत्र नवरात्रि 2025 की तिथि और समय साल 2025 में चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) 30 मार्च से शुरू होगी। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाएगी, जो 30 मार्च को होगी। कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त निम्नलिखित है: कलश स्थापना का महत्व कलश स्थापना (Kalash Sthapana) नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। कलश को देवी दुर्गा (Devi Durga) का प्रतीक माना जाता है, और इसे स्थापित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। कलश स्थापना के दौरान जल, नारियल, आम के पत्ते और लाल कपड़े का उपयोग किया जाता है। कलश स्थापना के बाद देवी दुर्गा की पूजा की जाती है और नवरात्रि के नौ दिनों तक उनकी आराधना की जाती है। कलश स्थापना के दौरान क्या करें? इसे भी पढ़ें:- प्रेमानंद जी महाराज: गुरु दक्षिणा का सही अर्थ और महत्व चैत्र नवरात्रि और कलश स्थापना चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है, जो देवी दुर्गा के आगमन का प्रतीक है। कलश स्थापना के बाद नवरात्रि के नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। कलश स्थापना के दौरान सही मुहूर्त का चयन करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि गलत मुहूर्त में कलश स्थापना करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। कलश स्थापना (Kalash Sthapana) के नियम और विधि नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Chaitra Navratri #ChaitraNavratri2025 #KalashSthapana #NavratriMuhurat #NavratriPuja #NavratriSignificance #ChaitraNavratri #Ghatasthapana #HinduFestivals #NavratriVrat #NavratriWorship

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Chaitra Navratri 2025 Why Maa Durga Chose Lion as Vehicle

चैत्र नवरात्रि 2025: मां दुर्गा ने शेर को क्यों चुना अपना वाहन? जानें पौराणिक कथा

चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो देवी दुर्गा की आराधना के लिए मनाया जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। देवी दुर्गा को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है, और उनका वाहन शेर है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मां दुर्गा ने शेर को ही अपना वाहन क्यों चुना? इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, जो देवी दुर्गा की शक्ति और उनके वाहन के महत्व को दर्शाती है। मां दुर्गा और शेर की पौराणिक कथा मां दुर्गा का शेर उनकी शक्ति और साहस का प्रतीक है। धार्मिक ग्रंथों, जैसे स्कंद पुराण और शिव पुराण में मां दुर्गा की शेर पर सवारी का वर्णन मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, मां पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने कठोर तपस्या की, जिससे उनका रंग सांवला पड़ गया। एक बार भगवान शिव ने हंसी-मजाक में मां पार्वती को “काली” कह दिया। यह बात मां पार्वती को अच्छी नहीं लगी, और वह कैलाश पर्वत छोड़कर तपस्या करने चली गईं। तपस्या के दौरान एक शेर शिकार करने के लिए मां पार्वती के पास पहुंचा। लेकिन, मां पार्वती गहरी तपस्या में लीन थीं। शेर ने सोचा कि जब उनकी तपस्या पूरी होगी, तो वह उन्हें शिकार बना लेगा। हालांकि, मां पार्वती की तपस्या कई वर्षों तक चलती रही, और शेर वहीं उनके पास बैठा रहा। जब मां पार्वती की तपस्या पूरी हुई, तो भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें “महागौरी” होने का वरदान दिया। मां पार्वती ने देखा कि शेर उनकी तपस्या के दौरान भूखा-प्यासा बैठा रहा। उन्होंने सोचा कि शेर को भी तपस्या का फल मिलना चाहिए। इसलिए, मां पार्वती ने शेर को अपना वाहन बना लिया। इस तरह, शेर मां दुर्गा की सवारी बन गया। शेर का महत्व शेर को जंगल का राजा माना जाता है, और यह शक्ति, साहस और निडरता का प्रतीक है। देवी दुर्गा ने शेर को अपना वाहन चुनकर यह संदेश दिया कि वह शक्ति और साहस की देवी हैं और वह बुराई का अंत करने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। शेर का वाहन होने के कारण देवी दुर्गा को “सिंहवाहिनी” भी कहा जाता है। इसे भी पढ़ें:-  भगवान विट्ठल की दिव्य धाम, जहां पीएम मोदी भी हो चुके हैं दर्शनार्थ चैत्र नवरात्रि 2025 की तिथि और समय साल 2025 में चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू होगी और 7 अप्रैल तक चलेगी। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाएगी, जो 30 मार्च को होगी।  चैत्र नवरात्रि का धार्मिक महत्व चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो देवी दुर्गा की आराधना के लिए मनाया जाता है। यह नवरात्रि वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है और नई शुरुआत, नवजीवन और उत्साह का प्रतीक मानी जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news  चैत्र नवरात्रि #ChaitraNavratri2025 #MaaDurga #NavratriFestival #DurgaMaa #Shakti #NavratriStory #HinduMythology #DurgaVehicle #NavratriSignificance #FestivalsOfIndia

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