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CJP को लेकर कांग्रेस के रुख में बदलाव के संकेत? राहुल गांधी की हाई टी के लिए अभिजीत दिपके को मिला न्योता

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से आयोजित हाई टी बैठक के लिए कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके को आमंत्रित किए जाने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इसे कांग्रेस और CJP के बीच संवाद बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस निमंत्रण से दोनों के बीच किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन या रणनीतिक समझौते की पुष्टि नहीं होती। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं के साथ-साथ नागरिक समाज और छात्र संगठनों से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। राहुल गांधी की हाई टी बैठक का क्या था उद्देश्य? यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन मुद्दों पर अलग-अलग छात्र संगठनों, नागरिक समूहों और विपक्षी दलों ने अपनी आपत्तियां उठाई हैं। ऐसे में हाई टी बैठक को विभिन्न समूहों के बीच संवाद और संभावित समन्वय बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस और CJP के बीच पहले क्यों थी दूरी? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस के भीतर CJP को लेकर पहले कुछ आरक्षण थे। पार्टी के एक वर्ग में इस संगठन के आम आदमी पार्टी (AAP) से संभावित संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। हालांकि, हाल के विरोध प्रदर्शनों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच कांग्रेस की ओर से अभिजीत दिपके तक पहुंचने की खबर सामने आई है। यह घटनाक्रम दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावना दिखाता है, लेकिन कांग्रेस की आधिकारिक नीति में व्यापक बदलाव हुआ है या नहीं, यह स्पष्ट होने के लिए पार्टी की ओर से औपचारिक बयान जरूरी होगा। CJP के प्रदर्शनों पर राहुल गांधी का रुख राहुल गांधी हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शन कर रहे युवा नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को भी उठाया है। विपक्षी दलों और विभिन्न नागरिक समूहों की ओर से चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और विरोध प्रदर्शन के अधिकार जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई जा रही है। इन घटनाक्रमों के बीच CJP के नेता को आमंत्रित किया जाना विपक्षी नेताओं और स्वतंत्र रूप से सक्रिय युवा समूहों के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। अभिजीत दिपके ने क्या संकेत दिया? रिपोर्टों के अनुसार, अभिजीत दिपके ने कांग्रेस की ओर से संपर्क किए जाने पर आभार जताया। साथ ही, CJP की स्वतंत्र पहचान बनाए रखने पर भी जोर दिया। CJP खुद को किसी राजनीतिक दल के विस्तार के बजाय एक स्वतंत्र दबाव समूह के रूप में पेश करना चाहता है। ऐसे में कांग्रेस के साथ संवाद बढ़ने के बावजूद संगठन की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और भविष्य की रणनीति महत्वपूर्ण बनी रहेगी। विपक्षी एकजुटता के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम? CJP ने हाल के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और SIR विरोधी प्रदर्शनों के दौरान युवा कार्यकर्ताओं की भागीदारी के जरिए सार्वजनिक चर्चा में जगह बनाई है। कांग्रेस की ओर से दिपके को आमंत्रित किया जाना इस संभावना की ओर संकेत करता है कि विपक्षी दल पारंपरिक राजनीतिक संगठनों के साथ-साथ छात्र समूहों और नागरिक समाज की आवाजों से भी संवाद बढ़ाना चाहते हैं। हालांकि, किसी बैठक का निमंत्रण अपने आप में साझा राजनीतिक कार्यक्रम, चुनावी गठबंधन या भविष्य के संयुक्त आंदोलन का प्रमाण नहीं है। इसके वास्तविक राजनीतिक महत्व का आकलन आगे होने वाली बातचीत और दोनों पक्षों के आधिकारिक रुख से किया जा सकेगा। आगे क्या होगा? फिलहाल, कांग्रेस और CJP के बीच संपर्क बढ़ने की खबर ने राजनीतिक बहस को नया विषय दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह संवाद केवल एक बैठक तक सीमित रहता है या दोनों पक्ष चुनावी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी साथ काम करते हैं। Source – The Indian Express, Jansatta और The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP प्रदर्शन की आलोचना के बाद रणवीर शौरी को जान से मारने की धमकी, मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज

मुंबई, 14 अक्टूबर 2026: अभिनेता रणवीर शौरी ने दावा किया है कि दिल्ली में हुए कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन की आलोचना करने के बाद उन्हें ईमेल के जरिए जान से मारने की धमकियां मिलीं। अभिनेता ने कथित धमकी भरे संदेशों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर साझा किए और बाद में मुंबई पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी। CJP प्रदर्शन पर रणवीर शौरी ने क्या कहा था? रणवीर शौरी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए CJP प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा था कि राजनीतिक असहमति को सड़कों पर टकराव में बदलने के बजाय संसद, चुनाव और अदालतों जैसे लोकतांत्रिक संस्थानों के माध्यम से उठाया जाना चाहिए। उनकी टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसके बाद अभिनेता ने दावा किया कि उन्हें धमकी भरे ईमेल मिलने लगे। ईमेल में लोकेशन ट्रैक करने और हमले की धमकी का दावा अभिनेता द्वारा साझा किए गए स्क्रीनशॉट में कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के साथ उनकी लोकेशन ट्रैक करने और उन पर हमला करने की धमकियां दिखाई गईं। शौरी ने सोशल मीडिया पर साइबर सुरक्षा से जुड़े आधिकारिक मंच साइबर दोस्त और महाराष्ट्र साइबर सेल को भी टैग करते हुए अधिकारियों से मदद मांगी। मुंबई पुलिस में दर्ज कराई औपचारिक शिकायत रणवीर शौरी ने बाद में बताया कि उन्होंने इस मामले में पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है। इससे पहले मुंबई पुलिस ने उनके सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उनसे संपर्क संबंधी जानकारी सीधे संदेश के जरिए साझा करने को कहा था। फिलहाल, धमकी भरे ईमेल भेजने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। CJP प्रदर्शन को लेकर पहले से जारी है विवाद CJP हाल के दिनों में चुनाव आयोग और मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी राजनीतिक विवाद जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक, CJP के दो नेताओं को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच रणवीर शौरी की टिप्पणियों और उन्हें कथित तौर पर मिली धमकियों का मामला सामने आया है। धमकी भरे ईमेल की जांच अहम मामले में अधिकारियों के सामने ईमेल भेजने वाले की पहचान, डिजिटल रिकॉर्ड और संदेशों की प्रामाणिकता की जांच अहम होगी। हालांकि, धमकियों के पीछे किसका हाथ है, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, द टाइम्स ऑफ इंडिया, रॉयटर्स जय राष्ट्र न्यूज़

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शिवाजी पार्क में CJP के 2 अक्टूबर के प्रदर्शन को अनुमति नहीं, अभिजीत दीपके ने किया ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान

मुंबई: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को 2 अक्टूबर 2026 को मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मिली है। मुंबई पुलिस ने कहा कि मौजूदा अदालती आदेशों और महाराष्ट्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत वह शिवाजी पार्क में इस तरह के सार्वजनिक प्रदर्शन की अनुमति देने के लिए अधिकृत नहीं है। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयोग से जुड़े सुधारों की मांग को लेकर यह प्रदर्शन आयोजित करना चाहती थी। 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में होना था प्रदर्शन CJP ने गांधी जयंती के दिन मुंबई से अपने देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत करने की घोषणा की थी। संगठन की योजना शिवाजी पार्क में प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत अपनी मांगें उठाने की थी। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के लिए आवेदन 26 सितंबर को कार्यकर्ता अजिंक्य शिंदे की ओर से जमा किया गया था। इसके बाद शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन ने आयोजकों को लिखित जवाब भेजा। पुलिस ने 2013 के हाई कोर्ट आदेश का दिया हवाला मुंबई पुलिस ने अपनी प्रतिक्रिया में 4 जनवरी 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश और उसके बाद महाराष्ट्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का हवाला दिया। पुलिस का कहना है कि शिवाजी पार्क का इस्तेमाल मुख्य रूप से खेल गतिविधियों के लिए निर्धारित है और वहां सार्वजनिक कार्यक्रमों पर सीमाएं लागू हैं। आयोजकों ने मैदान के इस्तेमाल के लिए आवश्यक BMC अनुमति भी जमा नहीं की थी। ट्रैफिक और ‘साइलेंस जोन’ भी बना वजह पुलिस ने कहा कि शिवाजी पार्क एक आवासीय क्षेत्र और silence zone के अंतर्गत आता है। बड़े प्रदर्शन से ध्वनि प्रदूषण और यातायात जाम की स्थिति पैदा हो सकती है। पुलिस ने यह भी कहा कि भीड़ और ट्रैफिक के कारण आसपास के अस्पतालों तक मरीजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। आयोजकों को मुंबई में किसी दूसरे स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन करने की सलाह दी गई है। अभिजीत दीपके ने जताई नाराजगी CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुलिस के फैसले की आलोचना करते हुए इसे नागरिकों की आवाज दबाने की कोशिश बताया। दीपके ने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि संगठन को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं दिया जाता है तो CJP गांधी जयंती के दिन मुंबई में ‘जेल भरो आंदोलन’ करेगी। यह CJP का राजनीतिक आरोप और घोषित विरोध कार्यक्रम है। ‘2 अक्टूबर को आंदोलन होकर रहेगा’ अनुमति नहीं मिलने के बाद भी CJP ने प्रदर्शन का कार्यक्रम वापस लेने की घोषणा नहीं की है। दीपके ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कार्यकर्ता गिरफ्तारी देंगे। 28 सितंबर को उन्होंने दोबारा पोस्ट कर “Jail Bharo Andolan in Mumbai, October 2, Shivaji Park” का ऐलान किया। क्या हैं CJP की प्रमुख मांगें? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। इसके अलावा संगठन ने Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया रोकने और मतदाता सूची से जुड़ी पूर्व स्थिति बहाल करने की मांग भी रखी है। CJP ने 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में संस्थागत सुधार की भी मांग की है। ये संगठन की राजनीतिक मांगें हैं। चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद इस पूरे आंदोलन की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग की आंतरिक प्रक्रियाओं से जुड़ी एक जांच रिपोर्ट भी है। रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में विभिन्न प्रक्रियात्मक मुद्दों पर कई बार लिखित टिप्पणियां या आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग का कहना है कि अलग-अलग विचार किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और प्रमुख SIR फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। अब 2 अक्टूबर पर नजर मुंबई पुलिस ने आयोजकों को वैकल्पिक स्थान तलाशने की सलाह दी है, जबकि CJP ने शिवाजी पार्क से ही जेल भरो आंदोलन शुरू करने की घोषणा कर दी है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि 2 अक्टूबर को CJP अपने घोषित कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ती है या प्रशासन और आयोजकों के बीच किसी वैकल्पिक स्थल पर सहमति बनती है। फिलहाल शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए पुलिस की अनुमति उपलब्ध नहीं है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India / Mumbai Police जय राष्ट्र न्यूज़

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असम में CJP नेता आशुतोष रांका हिरासत में, कई कार्यकर्ता भी पकड़े गए; देर रात रिहाई

गुवाहाटी: असम पुलिस ने 27 सितंबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका समेत करीब 35 नेताओं और कार्यकर्ताओं को गुवाहाटी में हिरासत में लिया। ये लोग पार्टी की पहली क्षेत्रीय स्वयंसेवक बैठक में शामिल होने वाले थे। हिरासत के बाद CJP नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे शांतिपूर्ण बैठक रोकने की कोशिश बताया। सभी हिरासत में लिए गए लोगों को रविवार रात करीब 10 बजे रिहा कर दिया गया। क्षेत्रीय बैठक से पहले हुई कार्रवाई CJP ने रविवार को गुवाहाटी में अपनी पहली Regional Volunteers’ Meeting आयोजित करने की योजना बनाई थी। बैठक पहले अथगांव के खड़गा चौधरी रोड स्थित एक निजी स्थल पर निर्धारित थी, लेकिन आयोजकों के मुताबिक बाद में कार्यक्रम की जगह बदलकर असम सचिवालय के सामने चौधरी टीला कर दी गई। बैठक शुरू होने से पहले ही पुलिस ने कई CJP नेताओं और स्वयंसेवकों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। आशुतोष रांका समेत करीब 35 लोग हिरासत में हिरासत में लिए गए लोगों में आशुतोष रांका के अलावा अंकित भारद्वाज, प्रेम आकाश और CJP के असम समन्वयक साहिल समेत कई कार्यकर्ता शामिल थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 35 लोगों को गुवाहाटी के काहिलीपाड़ा स्थित 10वीं असम पुलिस बटालियन परिसर में ले जाया गया। रांका ने हिमंत बिस्वा सरमा पर लगाया आरोप हिरासत के दौरान आशुतोष रांका ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर निशाना साधा। रांका ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार नहीं चाहती कि CJP असम के सरकारी स्कूलों, बाढ़, जमीन और काजीरंगा से जुड़े मुद्दों को उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बैठक निजी स्थान पर शांतिपूर्ण तरीके से होने वाली थी। ये रांका और CJP के राजनीतिक आरोप हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। CJP ने पुलिस कार्रवाई को बताया गलत CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि रांका और अन्य नेताओं को शुरुआत में अज्ञात स्थान पर ले जाया जा रहा था और वकीलों को भी उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा था। दीपके ने चेतावनी दी थी कि यदि नेताओं को रिहा नहीं किया गया तो वह खुद असम पहुंचेंगे। यह पार्टी का आरोप था। हिरासत के दौरान शुरू की भूख हड़ताल CJP के मुताबिक काहिलीपाड़ा पुलिस परिसर में रखे जाने के बाद हिरासत में लिए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। पार्टी ने इसे हिरासत के विरोध में उठाया गया कदम बताया। बाहर मौजूद समर्थकों ने भी रिहाई की मांग की। असम में किन मुद्दों को उठाने की थी तैयारी? CJP नेताओं के मुताबिक संगठन असम में सरकारी स्कूलों की स्थिति, बाढ़, जमीन से जुड़े मुद्दों और मतदाता सूची संशोधन पर चर्चा करना चाहता था। रिपोर्ट्स के अनुसार CJP नेताओं ने हाल में राज्य के कुछ विपक्षी नेताओं से भी मुलाकात की थी और असम में संगठन के विस्तार पर बातचीत की थी। पुलिस की विस्तृत आधिकारिक सफाई नहीं आई उपलब्ध प्रमुख रिपोर्ट्स में असम पुलिस की ओर से हिरासत के लिए कोई विस्तृत सार्वजनिक कानूनी कारण नहीं बताया गया है। CJP का दावा था कि बैठक निजी जगह पर शांतिपूर्ण तरीके से होनी थी, जबकि पुलिस ने कार्यक्रम स्थल तक पहुंच सीमित कर दी। इस कार्रवाई की कानूनी परिस्थितियों पर पुलिस की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है। रविवार रात सभी को किया गया रिहा करीब दिनभर हिरासत में रहने के बाद रविवार रात आशुतोष रांका और अन्य CJP नेताओं को छोड़ दिया गया। रांका ने सोशल मीडिया पर रिहाई की जानकारी देते हुए अपनी हिरासत को “illegal detention” कहा और बताया कि उन्होंने पुलिस से उन्हें उसी स्थान पर वापस छोड़ने के लिए कहा, जहां से उन्हें हिरासत में लिया गया था। “Illegal” शब्द रांका का दावा है; किसी अदालत ने इस हिरासत को अवैध घोषित नहीं किया है। असम में बढ़ी राजनीतिक हलचल आशुतोष रांका और CJP कार्यकर्ताओं की हिरासत के बाद असम में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। CJP इसे अपने संगठन और मुद्दों को उठाने से रोकने की कार्रवाई बता रही है। दूसरी ओर इस घटना पर राज्य सरकार या असम पुलिस की विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही हिरासत के आधिकारिक आधार को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सकेगा। source – The Indian Express / Times of India / Hindustan Times / India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC ज्ञानेश कुमार को CJP का 48 घंटे का अल्टीमेटम, इस्तीफा नहीं तो देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए उन्हें 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। पार्टी ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर देशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह अल्टीमेटम 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया था। 26 सितंबर को समयसीमा समाप्त होने के बाद CJP ने अब 2 अक्टूबर से मुंबई से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। SIR विवाद को लेकर CJP ने खोला मोर्चा CJP ने यह कदम मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच उठाया है। पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। CJP का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाता अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। ये CJP के आरोप हैं और इन्हें किसी स्वतंत्र जांच में स्थापित तथ्य नहीं माना गया है। 48 घंटे में इस्तीफा देने की रखी मांग 24 सितंबर को CJP ने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर पद नहीं छोड़ते हैं तो संगठन देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगा। अभिजीत दिपके ने दिल्ली में फिर से बड़े प्रदर्शन की चेतावनी देते हुए इसे ‘Jantar Mantar 2.0’ तक ले जाने की बात कही थी। आगामी चुनाव रोकने की भी मांग CJP ने केवल CEC के इस्तीफे की मांग नहीं की। संगठन ने आगामी राज्य विधानसभा चुनावों को फिलहाल रोकने, SIR प्रक्रिया को वापस लेने और मतदाता सूची को पहले की स्थिति में बहाल करने जैसी मांगें भी रखीं। India Today के मुताबिक संगठन ने SIR से जुड़े रिकॉर्ड को स्वतंत्र निगरानी में रखने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून में बदलाव की मांग भी की। चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद यह अल्टीमेटम उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में विभिन्न मामलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची, Form 6, electoral database तक पहुंच और SIR प्रक्रिया से जुड़े विषय शामिल बताए गए। चुनाव आयोग ने क्या कहा? चुनाव आयोग ने इस विवाद पर कहा है कि एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और लिखित टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। 26 सितंबर को जारी स्पष्टीकरण में आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए कुछ पत्र किसी नीति विवाद से नहीं, बल्कि एक अधिकारी के कामकाज से जुड़े थे। SIR प्रक्रिया पर आयोग ने दी सफाई चुनाव आयोग के अनुसार 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था। बाद में अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी चरणबद्ध कार्यक्रमों को भी आयोग ने सामूहिक रूप से मंजूरी दी। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के दौरान नागरिकों को दस्तावेज जमा करने और मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए अतिरिक्त सुविधाएं दी जा रही हैं। 48 घंटे की समयसीमा खत्म, अब 2 अक्टूबर से आंदोलन CJP का दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम 26 सितंबर को खत्म हो गया। इसके बाद संगठन ने 2 अक्टूबर, गांधी जयंती से मुंबई में आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई का आजाद मैदान संभावित स्थल है, हालांकि प्रदर्शन के लिए पुलिस अनुमति अभी अंतिम रूप से सुनिश्चित नहीं हुई है। CJP का कहना है कि मुंबई से शुरू होने वाला आंदोलन बाद में देश के अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा। चुनाव आयोग विवाद पर राजनीतिक बहस तेज SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर CJP के अलावा कई विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग ने प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और अपने फैसलों को कानून और तय प्रक्रिया के अनुरूप बताया है। फिलहाल CJP का आंदोलन 2 अक्टूबर से शुरू करने की घोषणा की गई है। आगे इस विवाद का असर चुनावी और राजनीतिक बहस में किस तरह दिखाई देता है, इस पर नजर रहेगी। source – India Today / Hindustan Times / The Economic Times / The Statesman जय राष्ट्र न्यूज़

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NEET आंदोलन और ‘Cockroach Janta Party’ का प्रदर्शन बना राष्ट्रीय चर्चा का विषय

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज भी NEET परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शन में शामिल छात्रों, अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग दोहराई। इस बीच सोशल मीडिया पर ‘Cockroach Janta Party’ नाम से चल रहे विरोध अभियान ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया, जिससे यह मुद्दा पूरे दिन ट्रेंड करता रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। जंतर-मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की अपील की। क्या है पूरा मामला? हाल के दिनों में NEET परीक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर छात्रों और कई छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। इसी क्रम में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है। सोशल मीडिया पर ‘Cockroach Janta Party’ नाम से एक प्रतीकात्मक अभियान भी चर्चा में आया, जिसके माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने अपनी नाराज़गी और मांगों को रचनात्मक तरीके से सामने रखने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें प्रदर्शन में शामिल लोगों ने सरकार और संबंधित एजेंसियों के सामने कई मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं— सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड दिनभर #NEETProtest, #JantarMantar और #CockroachJantaParty जैसे हैशटैग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड करते रहे। बड़ी संख्या में छात्रों और नागरिकों ने अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना रहा। सरकार की प्रतिक्रिया सरकार की ओर से कहा गया है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। संबंधित एजेंसियां छात्रों की चिंताओं पर विचार कर रही हैं और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। आगे क्या? प्रदर्शनकारियों ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है, तो वे आगे भी शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे। वहीं प्रशासन ने जंतर-मंतर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। निष्कर्ष NEET परीक्षा को लेकर जारी आंदोलन और जंतर-मंतर पर हो रहा प्रदर्शन आज भी राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना रहा। सोशल मीडिया पर ‘Cockroach Janta Party’ अभियान के कारण यह मुद्दा और अधिक सुर्खियों में आया। अब सभी की नजर सरकार और संबंधित एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर बनी हुई है। Source: Reuters | PTI | Delhi Police जय राष्ट्र न्यूज़

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BJP का CJP पर पलटवार, युवाओं को लेकर शुरू हुई नई सियासी बहस

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आंदोलन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया है कि कुछ लोग युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बयान के बाद CJP और BJP के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। क्या कहा BJP ने? BJP नेताओं ने कहा कि देश के युवाओं की वास्तविक समस्याओं का समाधान लोकतांत्रिक प्रक्रिया और नीतिगत सुधारों के माध्यम से होना चाहिए। पार्टी का दावा है कि कुछ संगठन युवाओं की भावनाओं का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार लगातार शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में काम कर रही है तथा युवाओं के लिए नई योजनाएं शुरू की गई हैं। CJP आंदोलन को लेकर बढ़ी चर्चा दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बाद CJP अचानक राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X, Instagram और YouTube पर आंदोलन से जुड़े वीडियो और पोस्ट तेजी से वायरल हो रहे हैं। युवाओं के बीच शिक्षा सुधार, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और रोजगार के अवसरों को लेकर चल रही चर्चा ने इस आंदोलन को और अधिक सुर्खियों में ला दिया है। CJP समर्थकों का जवाब BJP के बयान के बाद CJP समर्थकों ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका आंदोलन युवाओं की वास्तविक समस्याओं पर आधारित है। समर्थकों का कहना है कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। हालांकि CJP की ओर से BJP के आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल विश्लेषकों का मानना है कि CJP आंदोलन ने राजनीतिक दलों का ध्यान युवाओं से जुड़े मुद्दों की ओर आकर्षित किया है। आने वाले दिनों में यह विषय राष्ट्रीय राजनीति में और महत्वपूर्ण हो सकता है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, युवा मतदाता किसी भी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और ऐसे आंदोलनों का प्रभाव राजनीतिक रणनीतियों पर भी पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा #BJPvsCJP BJP और CJP के बीच बयानबाजी के बाद सोशल मीडिया पर #BJPvsCJP और #CJPProtest जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। हजारों लोग इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। आगे क्या? CJP पहले ही सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम दे चुका है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और राजनीतिक दल इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाते हैं। यदि आंदोलन का विस्तार होता है तो यह आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा विषय बन सकता है। Short Description दिल्ली में हुए CJP प्रदर्शन के बाद BJP ने आंदोलन पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि युवाओं को गुमराह किया जा रहा है, जबकि CJP समर्थक इसे युवाओं के अधिकारों की आवाज बता रहे हैं।

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CJP का बड़ा ऐलान: 7 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे देश में होगा आंदोलन

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP (Cockroach Janta Party) के विशाल प्रदर्शन के बाद संगठन ने सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए बड़ा ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जाएगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और नौकरी अभ्यर्थी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। क्या हैं CJP की मुख्य मांगें? CJP नेताओं ने कहा कि देशभर में लाखों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रियाओं और रोजगार के अवसरों को लेकर परेशान हैं। संगठन ने मांग की है कि शिक्षा और भर्ती से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय की जाए और युवाओं की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। अभिजीत दिपके का बयान CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को देशभर में विस्तार दिया जाएगा। सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा CJP प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X, Instagram और YouTube पर CJP से जुड़े हैशटैग तेजी से ट्रेंड करने लगे। लाखों लोगों ने आंदोलन से संबंधित वीडियो और पोस्ट साझा किए। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देशभर में बढ़ सकता है आंदोलन संगठन के नेताओं का दावा है कि कई राज्यों से समर्थन मिल रहा है और आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस अल्टीमेटम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। युवाओं के बीच बढ़ती लोकप्रियता हाल के दिनों में CJP युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। शिक्षा, रोजगार और परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर चल रहे अभियान को सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिला है।

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CJP का दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन: शिक्षा सुधार और भर्ती पारदर्शिता को लेकर उठी आवाज

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन ने देशभर में चर्चा पैदा कर दी है। बड़ी संख्या में छात्र, युवा और नौकरी अभ्यर्थी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। आंदोलन का मुख्य फोकस शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर रहा। जंतर-मंतर पर जुटे छात्र और युवा प्रदर्शन के दौरान प्रतिभागियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के लिए बेहतर अवसरों की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। अभिजीत दिपके ने रखा पक्ष CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि आंदोलन का उद्देश्य युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार के विषय पर व्यापक चर्चा और सुधार की आवश्यकता है। सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चा पिछले कुछ समय में CJP को सोशल मीडिया पर काफी ध्यान मिला है। विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर युवाओं द्वारा शिक्षा, रोजगार और परीक्षा संबंधी मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। इसी के चलते दिल्ली का यह प्रदर्शन भी व्यापक चर्चा का विषय बना। पुलिस और प्रशासन की व्यवस्था प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए। कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए। युवाओं के मुद्दे केंद्र में विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, रोजगार और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे लंबे समय से युवाओं के बीच चिंता का विषय रहे हैं। ऐसे में इन विषयों पर होने वाले आंदोलनों और चर्चाओं को व्यापक जनसमर्थन मिल सकता है। आगे क्या? CJP नेताओं का कहना है कि वे शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को आगे भी उठाते रहेंगे। वहीं, आने वाले दिनों में संगठन की गतिविधियों और संभावित कार्यक्रमों पर भी नजर रहेगी। jairashtranews.com

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