Article 326 Election Commission's X Post Explained

क्या है Article 326? जिसे भारत के Election Commission ने X पर किया है पोस्ट 

भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 (Article 326) की तस्वीर साझा की है। यह पोस्ट राजनीतिक हलकों में खासा चर्चित हो गई है, विशेषकर बिहार में चल रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के संदर्भ में। इस समय बिहार में विपक्षी दलों राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस (Congress) और अन्य पार्टियों ने इस प्रक्रिया को लेकर कड़े सवाल उठाए हैं। अनुच्छेद 326: भारत में वयस्क मताधिकार की गारंटी भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) है, जिसकी गारंटी संविधान के अनुच्छेद 326 (Article 326) में दी गई है। यह अनुच्छेद कहता है कि भारत का प्रत्येक नागरिक, जो 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का है और निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास करता है, उसे मतदान (Voting) करने का अधिकार प्राप्त होगा। हालांकि, कुछ अपवाद भी हैं। यदि कोई व्यक्ति: तो उसे मतदान के अधिकार से वंचित किया जा सकता है। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि भारत में चुनाव स्वच्छ, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हों। आयोग की X पोस्ट: एक संवैधानिक संदेश भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) का अनुच्छेद 326 साझा करना केवल एक सामान्य पोस्ट नहीं, बल्कि यह राजनीतिक आलोचनाओं के जवाब में एक संविधान सम्मत जवाब था। आयोग यह दर्शाना चाहता है कि उसका पूरा काम संविधान की भावना और प्रावधानों के तहत हो रहा है। यह विशेष रूप से उन आरोपों के संदर्भ में था जो बिहार में चल रहे SIR अभियान को लेकर लगाए जा रहे हैं। आयोग की मंशा साफ है कि योग्य भारतीय नागरिकों को ही मतदाता सूची में स्थान देना, और अपात्र या फर्जी नामों को हटाना। यह प्रक्रिया लोकतंत्र की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। 𝗔𝗿𝘁𝗶𝗰𝗹𝗲 𝟯𝟮𝟲 𝗼𝗳 𝘁𝗵𝗲 𝗖𝗼𝗻𝘀𝘁𝗶𝘁𝘂𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗼𝗳 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮 #𝗕𝗶𝗵𝗮𝗿 #𝗦𝗜𝗥 #𝗘𝗖𝗜 pic.twitter.com/o0TCgDCYg9 — Election Commission of India (@ECISVEEP) July 9, 2025 बिहार में SIR अभियान: उद्देश्य और विवाद बिहार में 2025 के आगामी विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election 2025) की तैयारी के तहत निर्वाचन आयोग ने 25 जून से 26 जुलाई 2025 तक विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) अभियान की शुरुआत की है। इसका मुख्य उद्देश्य है: इस अभियान के अंतर्गत बिहार के लगभग 7.89 करोड़ मतदाताओं को शामिल करने के लिए गणना फॉर्म बांटे जा रहे हैं, जिन्हें उचित पहचान दस्तावेजों के साथ भरकर जमा करना होगा। विपक्ष की आपत्ति: समय और प्रक्रिया पर सवाल विपक्षी दलों का तर्क है कि यह प्रक्रिया मानसून और संभावित बाढ़ के समय में शुरू की गई है, जो अवास्तविक और गैर-व्यावहारिक है। इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में आवाजाही कठिन हो जाती है और गरीब, मजदूर वर्ग और अशिक्षित लोग जरूरी दस्तावेजों की कमी या जानकारी के अभाव में मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। यह लोकतांत्रिक समावेशन के मूल सिद्धांत के विपरीत माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कुछ विपक्षी नेताओं ने इस प्रक्रिया को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया है कि इसके जरिए कुछ खास वर्गों को मतदाता सूची से बाहर करने की कोशिश की जा रही है। इसे भी पढ़ें:- बिहार बंद के दौरान चुनाव आयोग पर जमकर बरसे राहुल-तेजस्वी, कही यह बात लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है पारदर्शिता चुनाव आयोग (Election Commission of India) पर यह जिम्मेदारी है कि वह जनता के विश्वास को बनाए रखे और यह केवल तभी संभव है जब उसकी प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी हो। मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इसका क्रियान्वयन इस तरह होना चाहिए कि कोई भी पात्र नागरिक वंचित न रह जाए। इस संदर्भ में डिजिटल साक्षरता बढ़ाना, स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार और सहायता केंद्रों की स्थापना जैसे कदम आवश्यक हो सकते हैं। इसके अलावा, राजनीतिक दलों को भी चाहिए कि वे मतदान अधिकारों के प्रति जनता को जागरूक करें, बजाय इसके कि केवल आलोचना करें। संविधान का अनुच्छेद 326 (𝗔𝗿𝘁𝗶𝗰𝗹𝗲 𝟯𝟮𝟲 𝗼𝗳 𝘁𝗵𝗲 𝗖𝗼𝗻𝘀𝘁𝗶𝘁𝘂𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗼𝗳 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮) भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है, जो हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार देता है। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission Of India) की जिम्मेदारी है कि वह इस अधिकार की रक्षा करे और उसे सशक्त बनाए। बिहार में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एक जरूरी और नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इसे स्थानीय परिस्थितियों और जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लागू करना चाहिए। आलोचनाएं यदि तथ्यपरक हों तो उन्हें दूर करना आयोग की जिम्मेदारी है, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचते हुए एक स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह वक्त है कि हर नागरिक अपने मताधिकार को समझे, जागरूक बने और लोकतंत्र को मजबूत करने में अपना योगदान दे। Latest News in Hindi Today Hindi news Election Commission of India #Article326 #ElectionCommission #RightToVote #IndianElections #IndianConstitution

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Owaisi Slams EC

Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar: बिहार में चुनाव आयोग के इस प्रोसेस पर भड़के ओवैसी, कहा- “करोड़ों वोटर्स नहीं डाल सकेंगे वोट”

इस साल के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावी माहौल के मद्देनजर राजनीतिक हलकों में हलचल मची हुई है। यहाँ सबसे बड़ी चर्चा यहां पर वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चर्चा जोरों पर है। अमूमन सभी विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। इस कड़ी में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग की बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की योजना कर विरोध किया (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) है। न सिर्फ विरोध किया है बल्कि इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ओवैसी ने कहा कि “बूथ स्तर के अधिकारियों के लिए इतने कम समय में करोड़ों वोटर्स के रिकॉर्ड को अपडेट करना करीब-करीब असंभव है।” उन्होंने कहा, “आप चाहते हैं कि यह प्रक्रिया एक महीने में निपटा ली जाए। यह कैसे संभव है? आप इसे महज एक महीने में कैसे कर सकते हैं? इसके पीछे क्या तर्क है?” करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) जाएंगे और वे वोट डालने के अपने अधिकार से वंचित हो जाएंगे एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में ओवैसी ने यह चेतावनी भी दी कि इस संशोधन की वजह से वोटिंग लिस्ट से करोड़ों नाम छूट सकते हैं। ओवैसी ने कहा, “आप जल्दबाजी करके इन चीजों को रद्द नहीं कर सकते। अगर कल चुनाव होते हैं तो मुझे पूरा यकीन है कि इसमें कई नाम छूट जाएंगे। इसका दोष कौन लेगा? ऐसा करना अभी असंभव है और मेरी आशंका है कि हजारों नहीं, बल्कि लाखों, शायद करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) जाएंगे और वे वोट डालने के अपने अधिकार से वंचित हो जाएंगे।” खैर, इस बीच एआईएमआईएम चीफ ने लाल बाबू हुसैन केस का भी हवाला दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जिस व्यक्ति का नाम पहले से ही वोटर लिस्ट में है, उसे बिना नोटिस और उचित प्रक्रिया के हटाया नहीं जा सकता।  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  बीएलए के लिए एक महीने में इसे कर पाना कैसे संभव (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) होगा गौरतलब हो कि चुनाव आयोग की तरफ से एसआईआर की प्रक्रिया 24 जून को अधिसूचित की गई थी। इसकी कड़ी आलोचना करते हुए एआईएमआईएम चीफ ओवैसी ने कहा कि “इसमें वोटर्स को नुकसान (Owaisi Slams EC, Says Crores May Miss Voting in Bihar) होगा। बिहार के ज्यादातर युवा पलायन कर चुके हैं। वे आर्थिक और अन्य वजहों से केरल, मुंबई, हैदराबाद, पंजाब और दिल्ली आदि राज्यों में चले जाते हैं, इसी तरह सीमांचल का अधिकांश क्षेत्र बाढ़ की वजह से करीब छह महीने तक कटा रहता है। अब, आप इसे एक महीने में करना चाहते हैं।” यही नहीं, चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करते हुए ओवैसी ने कहा कि “बीएलए आपके घर कितनी बार आएगा? शायद वह एक बार, दो बार और तीन बार आएगा। यह काफी चौंकाने वाला है कि चुनाव आयोग ऐसा कर रहा है।” उन्होंने कहा कि बिहार में करीब 8 करोड़ वोटर्स हैं। बीएलए के लिए एक महीने में इसे कर पाना कैसे संभव होगा? यह मानवीय रूप से असंभव है।” ऐसा ही नहीं है कि ओवैसी ही नहीं बल्कि अन्य राजनीतिक दल भी इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के घटक दलों के नेताओं ने कल बुधवार को चुनाव आयोग से मुलाकात कर इस प्रक्रिया को कराने के समय से जुड़ी अपनी चिंताओं से अवगत कराया। उनका आरोप है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कराई जा रही इस कवायद की वजह से राज्य के 2 करोड़ लोग वोट डालने का अधिकार खो सकते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Owaisi #Owaisi #BiharElections #ElectionCommission #VotingRights #AIMIM #BiharNews #IndianPolitics

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4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025: बिहार चुनाव में इन 4.96 करोड़ वोटरों को नहीं देना होगा कोई भी दस्तावेज

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने वोटर सूची की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने हेतु एक नया कदम उठाया है। इस कदम के तहत आयोग ने स्पष्ट किया है कि “2003 की मतदाता सूची में जिन लोगों के नाम हैं। उन्हें अपनी जन्मतिथि या जन्मस्थान प्रमाणित करने के लिए किसी अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत नहीं (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) होगी। बता दें कि इस सूची में राज्य के कुल लगभग 60% यानी 4.96 करोड़ से अधिक मतदाता शामिल हैं। इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग ने कहा कि बिहार की 2003 की वोटर लिस्ट दोबारा अपलोड होगी। इसमें जिनके नाम हैं, उन्हें जन्म प्रमाण नहीं देना होगा। बाकी 3 करोड़ को दस्तावेज देने होंगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। बता दें कि अक्टूबर-नवंबर 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं। बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटों पर 7.89 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। निर्वाचन आयोग के निर्देशों के मुताबिक, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि पुनरीक्षण के दौरान सभी पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल हों और कोई अपात्र व्यक्ति न रहे।  3 करोड़ मतदाताओं को 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से एक दस्तावेज के साथ जन्म तिथि या स्थान प्रमाणित करना (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) होगा चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, बिहार में 2003 की मतदाता सूची में शामिल 4.96 करोड़ मतदाताओं को जन्म तिथि या स्थान साबित करने के लिए दस्तावेज देने की जरूरत नहीं। लेकिन शर्त यह है कि वे पुनरीक्षण के बाद की मतदाता सूची का हिस्सा संलग्न करें। बाकी बचे 3 करोड़ मतदाताओं को 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से एक दस्तावेज के साथ जन्म तिथि या स्थान प्रमाणित करना (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) होगा। ऐसे में जिनके माता-पिता 2003 की सूची में हैं, उन्हें केवल अपनी जन्म तिथि/स्थान का दस्तावेज देना होगा, माता-पिता का नहीं। बाकी मतदाताओं की पहचान सत्यापित होने के बाद ही उनके नाम सूची में शामिल होंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक, यह दस्तावेज़ी प्रक्रिया राज्य के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में लागू होगी। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी पात्र नागरिक छूट न जाए और दस्तावेजों के बिना किसी को भी सूची में शामिल न किया जाए। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक मतदाता की पात्रता सत्यापित की जाएगी। इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न हो और कोई अयोग्य नाम सूची में न (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) रहे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि “इसका मकसद सभी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना और अपात्र लोगों को हटाना है।” मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि “यह निर्णय विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत लिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न हो और कोई अयोग्य नाम सूची में न (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) रहे। आयोग ने 2003 की मतदाता सूची को पुनः वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पुराने रिकॉर्ड का उपयोग किया जा सके।” जानकारी के लिए बता दें कि चुनाव आयोग जल्द ही 2003 की बिहार मतदाता सूची को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगा। जिससे 4.96 करोड़ मतदाता अपने नाम की पुष्टि कर सकें। इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे मतदाताओं को हटाने की साजिश करार दे दिया। विपक्षी दलों के आरोपों का जवाब देते हुए आयोग ने कहा कि “यह अनुच्छेद 326 का पालन करता है, जो पात्र नागरिकों को वोटिंग का अधिकार देता है। आयोग ने राजनीतिक दलों से बूथ स्तरीय एजेंट नियुक्त करने को कहा, ताकि मतदाता सूची में खामियां न रहें। अब तक 1,54,977 बीएलए नियुक्त हो चुके हैं।” Latest News in Hindi Today Hindi news 4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025 #BiharElection2025 #VotersWithoutID #ElectionCommission #BiharNews #VotingRights

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Election Commission replies to Rahul Gandhi’s comments

ECI Replies to Rahul, Fadnavis Slams His Remarks: राहुल गाँधी को चुनाव आयोग का जवाब, कहा- चुनाव नियमों के अनुसार होते हैं, देवेंद्र फडणवीस ने घेरा 

रायबरेली से कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने  भाजपा पर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में धांधली करने का आरोप लगाया था। उनके द्वारा धांधली के लगाए गए आरोपों पर चुनाव आयोग ने ईमेल भेजकर जवाब दिया (ECI Replies to Rahul, Fadnavis Slams His Remarks) है। जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनाव पूरी तरह संसद द्वारा पारित कानूनों और निर्धारित नियमों के मुताबिक ही कराए जाते हैं। चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस या उसके उम्मीदवारों को किसी प्रकार की आपत्ति थी, तो उसे चुनाव याचिका के माध्यम से हाई कोर्ट में चुनौती दी जानी चाहिए थी। आयोग ने राहुल गांधी को आश्वासन दिया कि यदि उनके पास अभी भी कोई मुद्दा है तो वे लिखित में भेज सकते हैं। यहाँ तक कि आयोग ने व्यक्तिगत बैठक के लिए भी समय निर्धारित करने की विकल्प दिया।  महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव विकेंद्रीकृत प्रणाली के तहत (ECI Replies to Rahul, Fadnavis Slams His Remarks) जाते हैं कराए  बता दें कि आयोग ने 12 जून को ईमेल के जरिए भेजे गए पत्र में कहा कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव विकेंद्रीकृत प्रणाली के तहत कराए (ECI Replies to Rahul, Fadnavis Slams His Remarks) जाते हैं। इसमें 1 लाख से अधिक बूथ लेवल ऑफिसर, 288 चुनाव पंजीकरण अधिकारी, 139 सामान्य पर्यवेक्षक, 41 पुलिस पर्यवेक्षक, 71 व्यय पर्यवेक्षक और 288 निर्वाचन अधिकारी शामिल होते हैं। इसके अलावा, राज्यभर में राजनीतिक दलों द्वारा 1,08,026 बूथ स्तर के एजेंट नियुक्त किए गए, जिनमें से 28,421 एजेंट तो कांग्रेस के ही थे। आयोग ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर फैली चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जाती हैं।   राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर (ECI Replies to Rahul, Fadnavis Slams His Remarks) उठाए सवाल  इस बीच मंगलवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने एक बार फिर विधानसभा चुनाव में वोटर टर्नआउट में बढ़ोतरी को लेकर चुनाव आयोग और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) पर सवाल (ECI Replies to Rahul, Fadnavis Slams His Remarks) उठाए। राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्वाचन क्षेत्र में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच महज पांच महीने में मतदाताओं की संख्या में 8 फीसदी का इजाफा हुआ है। मीडिया को हजारों ऐसे मतदाता मिले, जिनके पास आधिकारिक आवासीय पता भी नहीं था। राहुल गांधी ने गंभीर आरोप लगाया था कि यह एक तरह की वोट चोरी है।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? राहुल गांधी महाराष्ट्र में वोटर्स की संख्या को लेकर लगातार सवाल उठा (ECI Replies to Rahul, Fadnavis Slams His Remarks) रहे हैं गौरतलब हो कि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) महाराष्ट्र में वोटर्स की संख्या को लेकर लगातार सवाल उठा (ECI Replies to Rahul, Fadnavis Slams His Remarks) रहे हैं। इस बीच सीएम देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने कांग्रेस नेता पर पलटवार किया है। राहुल गांधी के आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में हार का राहुल गांधी का दर्द दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन आप कब तक हवा में तीर चलाते रहेंगे? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि महाराष्ट्र में 25 से ज़्यादा ऐसे निर्वाचन क्षेत्र हैं, जिनमें लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच मतदाताओं की संख्या में 8 फीसदी का इजाफा हुआ है। देवेंद्र फडणवीस ने आगे कहा कि महाराष्ट्र में 25 निर्वाचन क्षेत्रों में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान मतदान प्रतिशत में 8 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है और कई स्थानों पर कांग्रेस को जीत भी मिली है।  असलम शेख, विकास ठाकरे, नितिन राऊत जैसे पुराने सहयोगीयों से, इस ट्वीट से पहले एक बार बात कर लेते- मुख्यमंत्री फडणवीस  फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने उदाहरण देते हुए कहा कि मेरे दक्षिण-पश्चिम नागपुर निर्वाचन क्षेत्र से सटे पश्चिम नागपुर निर्वाचन क्षेत्र में मतदान प्रतिशत में 7 प्रतिशत (27,065) की वृद्धि हुई है और वहां से कांग्रेस के विकास ठाकरे चुने गए (ECI Replies to Rahul, Fadnavis Slams His Remarks) हैं। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सहयोगी दलों से भले ही नहीं, लेकिन अपनी ही पार्टी के असलम शेख, विकास ठाकरे, नितिन राऊत जैसे पुराने सहयोगीयों से, इस ट्वीट से पहले एक बार बात कर लेते, तो अच्छा होता। कम से कम कांग्रेस में संवाद के अभाव का इतना बुरा प्रदर्शन नहीं होता।  Latest News in Hindi Today Hindi news ECI Replies to Rahul, Fadnavis Slams His Remarks #eci #rahulgandhi #fadnavis #electioncommission #india2025 #politicsnews #rahulvsfadnavis

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Aadhar Card Link ToVoter ID

चुनाव आयोग का बड़ा कदम: वोटर आईडी को आधार कार्ड से लिंक करने का फैसला

भारत में लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण अंग यानी चुनाव हमेशा पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर देते हैं। लेकिन समय-समय पर चुनावों में फर्जी मतदान, फेक वोटर आईडी (Voter ID) और अन्य धोखाधड़ी के मामलों की रिपोर्ट सामने आती रही हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए चुनाव आयोग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए वोटर आईडी कार्ड (Voter ID Card) को आधार कार्ड से लिंक करने का फैसला लिया है। इस कदम से न केवल चुनावों की पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि फर्जी वोटिंग और फेक वोटर आईडी की समस्या पर भी रोक लगेगी। बैठक में लिया गया फैसला मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चुनाव आयोग (Election Commission) के मुख्य चुनाव आयुक्त, ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें चुनाव आयोग के अन्य सदस्य डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी शामिल थे। इस बैठक में केंद्रीय गृह सचिव, विधायी विभाग के सचिव, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव, यूआईडीएआई के सीईओ और चुनाव आयोग के तकनीकी विशेषज्ञ भी मौजूद थे। इस बैठक के दौरान निर्णय लिया गया कि वोटर आईडी को आधार कार्ड से जोड़ने का काम संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत किया जाएगा, जो भारतीय नागरिकों को मतदान का अधिकार देता है। आधार कार्ड और वोटर आईडी लिंकेज का उद्देश्य भारत में प्रत्येक नागरिक के पास एक आधार कार्ड (Aadhar Card) होता है, जो उसकी पहचान को प्रमाणित करता है। वहीं, वोटर आईडी भी नागरिक को मतदान करने का अधिकार प्रदान करता है। लेकिन चुनावी प्रक्रिया में फर्जी वोटिंग और फेक वोटर आईडी का मामला हमेशा से एक गंभीर मुद्दा रहा है। इस लिंकिंग का मुख्य उद्देश्य यही है कि प्रत्येक व्यक्ति के वोटिंग रिकॉर्ड की पुष्टि आधार कार्ड के माध्यम से की जा सके, जिससे चुनावी प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी हो सके। इसके अलावा, फर्जी वोटिंग, जाली वोटर आईडी कार्ड (Voter ID Card) बनाने और चुनावी धोखाधड़ी के मामलों पर भी काफी हद तक काबू पाया जा सकेगा। इससे चुनावों में पूरी तरह से पारदर्शिता आएगी और यह सुनिश्चित होगा कि केवल वही लोग मतदान कर रहे हैं, जो वास्तव में भारतीय नागरिक हैं। विशेषज्ञों से तकनीकी परामर्श चुनाव आयोग (Election Commission) और यूआईडीएआई के विशेषज्ञ (UIDAI Expert) जल्द ही आधार कार्ड और वोटर आईडी लिंकिंग पर तकनीकी परामर्श शुरू करेंगे। इसके बाद इस प्रक्रिया को लागू किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और सुरक्षित हो, इस पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। चुनाव आयोग ने भी इस बात पर जोर दिया है कि लिंकिंग का काम संवैधानिक और कानूनी दायरे में किया जाएगा, ताकि चुनावी प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता न हो। चुनाव आयोग का बयान चुनाव आयोग (Election Commission) ने अपने एक बयान में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत, मतदान का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को दिया जा सकता है, लेकिन आधार केवल व्यक्ति की पहचान को प्रमाणित करता है। इसलिए, वोटर आईडी कार्ड (ईपीआईसी) को आधार कार्ड से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23 (4), 23 (5) और 23 (6) के प्रावधानों और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले (2023) के अनुरूप लिया गया है। इसके अलावा आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून मतदाता सूचियों को आधार डेटाबेस के साथ स्वैच्छिक रूप से जोड़ने की अनुमति देता है, जिससे लोगों को अपनी जानकारी अपडेट करने में आसानी होगी। इसे भी पढ़ें:- पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब चुनावों में फर्जी वोटिंग (Fake Voters) और वोटर पहचान से संबंधित मुद्दे लगभग खत्म हो जाएंगे। इसके अलावा, मतदाता सूची में भी सुधार होगा, जिससे वोटर आईडी के साथ कोई भी झूठा नाम नहीं जोड़ा जा सकेगा। इससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी, जो लोकतंत्र की आत्मा है। इसके अलावा, यह फैसला चुनाव आयोग को यह सुविधा देगा कि वह एक सटीक और अद्यतन मतदाता सूची तैयार कर सके, जिससे चुनावी प्रबंधन में भी आसानी होगी। वोटर आईडी (Voter ID) को आधार कार्ड (Aadhar Card) से लिंक करने का चुनाव आयोग का यह कदम भारतीय लोकतंत्र को और भी मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह फर्जी मतदान, फेक वोटर आईडी कार्ड (Fake Voter ID Card) और अन्य चुनावी धोखाधड़ी से निपटने में मदद करेगा। साथ ही, यह चुनाव प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सटीक बनाएगा। अब यह देखना होगा कि यह प्रक्रिया कब लागू होती है और इसे कैसे तकनीकी दृष्टिकोण से सही तरीके से लागू किया जाता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Aadhar Card Link ToVoter ID #AadhaarCard #VoterID #FakeVoterID #ElectionCommission #AadharCardLinkToVoterID

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