Rahul Gandhi court case

Rahul Gandhi Citizenship Case: क्या सच में ब्रिटिश नागरिक हैं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी? आज इलाहाबाद हाई कोर्ट करेगा सुनवाई

24 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की नागरिकता (Rahul Gandhi Citizenship Case) के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने वाली है। दायर याचिका में राहुल गांधी के पास दोहरी नागरिकता होने का आरोप लगाया गया है। जिस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख पेश करने की अपेक्षा की है। गौरतलब हो कि इस मामले में कोर्ट ने केंद्र को 19 दिसंबर को निर्देश दिया था कि वह अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा 24 मार्च तक पेश करें। दरअसल, मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने यह आदेश कर्नाटक के सामाजिक कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर की याचिका पर दिया था। बता दें कि आज क्रेंद इस मामले पर जवाब दाखिल करने वाला है। ऐसे में यदि राहुल गांधी दो पासपोर्ट मामले में दोषी पाए जाते, हैं तो उनके खिलाफ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 (2) के तहत कार्रवाई की जाएगी। फिर उनके खिलाफ नागरिकता छिपाने और गलत जानकारी देने का केस दर्ज किया जाएगा। गौर करने वाली बात यह कि नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने पर किसी व्यक्ति को 5 साल की सजा हो सकती है। 50,000 रुपये का जुर्माना या सजा दोनों लगाया जा सकता है। इसके साथ ही भारतीय नागरिकता भी खारिज की जा सकती है। वकील एस विग्नेश शिशिर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर (Rahul Gandhi Citizenship Case की थी याचिका  बता दें कि 1 जुलाई 2024 को कर्नाटक के बीजेपी के सदस्य और वकील एस विग्नेश शिशिर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर (Rahul Gandhi Citizenship Case) की थी। दायर इस याचिका में राहुल गांधी पर ब्रिटिश नागरिकता के आरोप लगाए गए थे। यही नहीं, याचिकाकर्ता ने ब्रिटिश सरकार के 2022 के गोपनीय मेल का भी हवाला भी दिया था। इसके अलावा विग्नेश ने भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 9 (2) के तहत राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग की थी। शिशिर ने दलील देते हुए कहा था कि राहुल गांधी की संसद की सदस्यता रद्द की जानी चाहिए। उनकी इस दलील के पीछे की वजह यह ये कि भारतीय नागरिकता रखने वाला व्यक्ति ही लोकसभा चुनाव लड़ सकता है। इसे भी पढ़ें:- कठुआ में 5 आतंकियों को सुरक्षा बलों ने घेरा, एनकाउंटर जारी, गोली लगने से एक बच्ची घायल  कथित ब्रिटिश नागरिकता मामले (Rahul Gandhi Citizenship Case) में की गई थी सीबीआई जांच की मांग  प्राप्त जानकारी के मुताबिक याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता मामले (Rahul Gandhi Citizenship Case) की भी सीबीआई जांच की मांग की थी। दरअसल, याचिका इस दावे के आधार पर दायर की गई थी कि राहुल गांधी भारत के नागरिक हैं या ब्रिटेन के नागरिक हैं? यदि वो ब्रिटिश नागरिक हैं तो वह संविधान के अनुच्छेद 84 (ए) के तहत चुनाव लड़ने के अयोग्य हैं। 2023 जुलाई में कोर्ट ने राहुल गांधी के सांसद के रूप में चुनाव को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को याचिकाकर्ता द्वारा वापस लेने के बाद खारिज कर दिया था। यही नहीं, बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में इसी तरह की याचिका दायर की थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा था कि “वह इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच में दायर याचिकाओं पर स्पष्टता मिलने के बाद ही मामले की सुनवाई करेगी।” Latest News in Hindi Today Hindi news Rahul Gandhi Citizenship Case #RahulGandhi #RahulGandhiCitizenship #Congress #BritishCitizenship #IndianPolitics #AllahabadHighCourt #RahulCase #PoliticalNews #IndiaNews #BreakingNews

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Ajit Pawar on Muslims

Ajit Pawar on Muslims: जो भी मुस्लिम भाइयों को आंख दिखाएगा, उसे हम नहीं छोड़ेंगे- अजित पवार 

महाराष्ट्र में नागपुर हिंसा को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। दरअसल, पूरा का पूरा विवाद महायुति सरकार द्वारा छत्रपति संभाजीनगर से औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग के बीच शुरू हुआ था। नागपुर हिंसा को लेकर विपक्ष द्वारा राज्य सरकार की आलोचना जारी रहने के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार ने मुंबई में इफ्तार पार्टी का आयोजन किया। विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ सांप्रदायिक सद्भाव और एकता पर जोर देते हए कहा कि “होली, गुड़ी पड़वा और ईद जैसे त्यौहार एकजुटता को बढ़ावा देते हैं। इन्हें सामूहिक रूप से मनाया जाना चाहिए, क्योंकि एकता ही देश की असली ताकत है।” यही नहीं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ने मुसलमानों को (Ajit Pawar on Muslims) आश्वासन देते हुए कहा कि “आपका भाई अजित पवार आपके साथ है। जो भी मुस्लिम भाइयों को आंख दिखाएगा, दो समूहों के बीच संघर्ष भड़काकर कानून व्यवस्था को बाधित करेगा, तथा कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करेगा, फिर वो चाहे कोई भी हो.. उसे किसी भी हालत में बख्शा नहीं किया जाएगा।” ये त्यौहार हमें साथ रहना सिखाते हैं- अजित पवार  अजित पवार यही नहीं रुके, (Ajit Pawar on Muslims) उन्होंने आगे कहा कि “जो कोई भी दो समुदायों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश करेगा, उसे कड़ी सजा मिलेगी। उन्होंने एकता पर जोर देते हुए कहा कि “छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बीआर अंबेडकर, ज्योतिबा फुले और अन्य जैसे कई महान नेताओं ने सभी धर्मों और जातियों को साथ लेकर सामाजिक प्रगति का मार्ग दिखाया है। हमें इस विरासत को आगे बढ़ाना है। भारत एकता और विविधता का प्रतीक है। हमने अभी होली मनाई है और अब गुड़ी पड़वा और ईद आने वाली है। ये त्यौहार हमें साथ रहना सिखाते हैं। हमारी असली ताकत एकता में है।” बता दें कि रमजान इस्लामी धर्म का सबसे पवित्र महीना है। यह हिजरी (इस्लामी चंद्र कैलेंडर) के नौवें महीने में आता है। इस पवित्र अवधि के दौरान, मुसलमान भोर से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं। जो इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है। #WATCH | Mumbai | Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar, at an Iftar party hosted by him, says, "…India is a symbol of unity in diversity… We should not fall into the trap of any divisive forces. We have just celebrated Holi, Gudi Padwa and Eid are coming – all these festivals… pic.twitter.com/5s7hMhdGmb — ANI (@ANI) March 22, 2025 इसे भी पढ़ें: इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर भड़की स्वाति मालीवाल, सुप्रीम कोर्ट से की दखल देने की मांग एनसीपी अजित पवार गुट की तरफ से  किया गया था इफ्तारी का आयोजन बता दें कि मुसलमानों के पाक माह रमज़ान पर एनसीपी अजित पवार (Ajit Pawar on Muslims) गुट की तरफ से मुंबई के इस्लाम जिम खाना में इफ्तारी का आयोजन किया गया था। इस मौके पर अजित पवार, छगन भुजबल, सना मलिक, प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे, नवाब मलिक सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। इसके अलावा भारी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग भी मौजूद थे। इस दौरान अजित पवार ने यह भी कहा कि “रमजान सिर्फ एक धर्म तक सीमित नहीं है। यह हमें एकता और भाईचारे का संदेश देता है। और जरूरतमंदों की पीड़ा को समझने की प्रेरणा देता है।” बता दें कि औरंगजेब की कब्र को हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान मुस्लिम समुदाय के पवित्र ग्रंथ को जलाये जाने की अफवाह के बाद मध्य नागपुर में सोमवार को तनाव उत्पन्न हो गया और पुलिस पर पथराव किया गया। इस दौरान चार लोग घायल हो गए।  Latest News in Hindi Today Hindi news Ajit Pawar on Muslims #AjitPawar #MuslimsInIndia #MaharashtraPolitics #AjitPawarStatement #IndianPolitics #MuslimRights #NCP #PoliticalNews #SecularIndia #MaharashtraNews

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Tamil Nadu budget controversy

Stalin Removes ₹ Symbol from Budget: सीएम स्टालिन ने हिंदी विरोध की हदें की पार, बजट से हटाया ₹ का सिंबल

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने हिंदी विरोध की सारी हदें पार कर दी हैं। हिंदी को लेकर उनके में इस कदर घृणा है कि उन्होंने तमिलनाडु बजट 2025-26 के लिए रुपये के सिंबल को ही हटा दिया।  दरअसल, तमिलनाडु सरकार ने तमिलनाडु बजट 2025-26 के लिए अपने पहले के लोगो में रुपये के प्रतीक को बदलकर (Stalin Removes ₹ Symbol from Budget) तमिल भाषा का प्रतीक शामिल किया है। बता दें कि स्टालिन लगातार राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विरोध कर रहे हैं और इसी कड़ी में उन्होंने रुपये सिंबल भी बदल दिया। लोगो में तमिल शब्द ‘रुबय’ का प्रथम अक्षर अंकित किया गया है। तमिल भाषा में भारतीय मुद्रा को ‘रुबय’ बोला जाता है। लोगो में यह भी लिखा है कि सबकुछ सबके लिए, जिससे राज्य में सत्तारूढ़ द्रमुक शासन के समावेशी मॉडल के दावे का संकेत मिलता है। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को तमिलनाडु के वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राज्य विधानसभा में बजट प्रस्तुत करने वाले हैं। इस बीच स्टालिन ने मंगलवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति को विनाशकारी नागपुर योजना करार दिया और दोहराया कि राज्य इसे स्वीकार नहीं करेगा भले ही केंद्र सरकार 10,000 करोड़ रुपये ही क्यों न प्रदान करे।  तमिलनाडु में हिंदी के विरोध को लेकर छिड़ी सियासी जंग के बीच लिया (Stalin Removes ₹ Symbol from Budget) यह फैसला गौर करने वाली बात यह कि तमिलनाडु सरकार का ये (Stalin Removes ₹ Symbol from Budget) फैसला ऐसे समय आया है, जब पहले से ही तमिलनाडु में हिंदी के विरोध को लेकर सियासी जंग छिड़ी हुई है। दरअसल, हाल ही में तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने जबरन हिंदी थोपने का आरोप लगाया था। एमके स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा था कि “अखंड हिंदी पहचान की कोशिश के कारण प्राचीन भाषाएं खत्म हो रही हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश कभी भी हिंदी के इलाके नहीं रहे। लेकिन अब उनकी असली भाषा भूतपूर्व की प्रतीक चिन्ह बनकर रह गई हैं।” इस बीच राज्य सरकार के इस कदम की प्रदेश भाजपा प्रमुख के. अन्नामलाई ने आलोचना करते हुए कहा कि “द्रमुक सरकार का वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राज्य का बजट एक तमिल द्वारा डिजाइन किये गए रुपये के उस प्रतीक चिह्न को प्रतिस्थापित करता है, जिसे पूरे भारत द्वारा अपनाया गया और हमारी मुद्रा में शामिल किया गया है।” उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि “तिरु उदय कुमार, जिन्होंने रुपये का प्रतीक चिह्ल डिजाइन किया था, द्रमुक के एक पूर्व विधायक के बेटे हैं। उन्होंने तमिलनाडु के वित्त वर्ष 2024-25 के बजट का लोगो भी साझा किया, जिसमें भारतीय रुपये का प्रतीक चिह्न अंकित है।” बता दें कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने मंगलवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति को विनाशकारी नागपुर योजना करार देते हुए कहा कि “राज्य इसे स्वीकार नहीं करेगा भले ही केंद्र सरकार 10,000 करोड़ रुपये प्रदान करे।”  इसे भी पढ़ें:- होली पर योगी बाबा की पुलिस फुल अलर्ट पर, ड्रोन, सीसीटीवी और बॉडी वॉर्न कैमरों से पैनी नजर, गड़बड़ी करना पड़ेगा भारी  हिंदी भाषा (Stalin Removes ₹ Symbol from Budget) ने न जाने कितनी दूसरी भाषाओं को लील लिया है बता दें कि स्टालिन ने चेन्नई के नजदीक चेंगलपेट में एक सरकारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि “कल आपने टेलीविजन पर संसदीय कार्यवाही देखी होगी। वह अहंकार से कह रहे हैं कि तमिलनाडु को 2,000 करोड़ रुपये तभी दिए जाएंगे, जब हिंदी और संस्कृत को स्वीकार किया जाएगा। कौन? वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान थे।” उन्होंने कहा कि राज्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विरोध कर रहा है क्योंकि यह तमिलनाडु में शिक्षा के विकास को पूरी तरह से नष्ट कर देगा।” इस दौरान स्टालिन ने दूसरे राज्यों के लोगों से अपील करते हुए कहा कि “दूसरे राज्य में रहने वाले मेरे भाइयों और बहनों, क्या आपने कभी इस बारे में विचार किया है कि हिंदी भाषा (Stalin Removes ₹ Symbol from Budget) ने न जाने कितनी दूसरी भाषाओं को लील लिया है। मैथिली, अवधी, भोजपुरी, ब्रज, कुमाऊंनी, गढ़वाली और बुंदेली जैसी कई सारी भाषाएं हैं जो अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Stalin Removes ₹ Symbol from Budget #Stalin #HindiOpposition #TamilNaduPolitics #IndianPolitics #BudgetRow #RupeeSymbol #LanguageDebate #DMK #PoliticalNews #IndiaNews

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Election Fraud India

Voter List Scam: कांग्रेस ने लगाया बीजेपी पर चुनाव आयोग के साथ मिलीभगत कर मतदाता सूची में हेरफेर करने का गंभीर आरोप

एक के एक बाद लगातार कई राज्यों में चुनाव जीतने वाली बीजेपी पर कांग्रेस लंबे अरसे से एवीएम से छेड़छाड़ (Voter List Scam) जैसे कई गंभीर आरोप लगाती आ रही है।  पहले एवीएम और अब मतदाता सूची में हेरफेर करने का गंभीर आरोप मढ़ा है। कांग्रेस ने दावा किया है कि भगवा पार्टी चुनाव आयोग के साथ मिलीभगत कर पहले मतदाता सूची में हेरफेर करती है और फिर चुनाव जीतती है। इस पूरे मामले पर कांग्रेस का कहना है कि वह इसका समाधान कानूनी, राजनीतिक एवं अन्य तरीकों से निकालने की कोशिश करेगी।  जानकारी के मुताबिक वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के एक समूह ने एक ही पहचान संख्या वाले कई मतदाताओं पर निर्वाचन आयोग (ईसी) की चुप्पी पर सवाल उठाया और कहा कि “पार्टी इस मुद्दे को ऐसे ही जाने नहीं देगी क्योंकि इससे देश के चुनावी लोकतंत्र को गंभीर खतरा है।” प्राप्त जानकारी के मुताबिक कांग्रेस के नेताओं और विशेषज्ञों के अधिकार प्राप्त कार्य समूह (ईगल) ने एक बयान में कहा कि “यह चुनावी लोकतंत्र के रूप में भारत के विचार के लिए एक गंभीर खतरा है। यह राजनीतिक दलों और राजनीति से परे है। बाबासाहेब आंबेडकर ने चुनावों में विधायिका के हस्तक्षेप का विरोध करने के लिए एक स्वतंत्र चुनाव आयोग की स्थापना के लिए लड़ाई लड़ी थी। कांग्रेस इस मुद्दे को मिटने नहीं देगी और वह कानूनी, राजनीतिक, विधायी तथा किसी भी अन्य माध्यम से समाधान की तलाश में सक्रिय रूप से काम कर रही है।” बता दें कि इस समूह में अभिषेक सिंघवी, पवन खेड़ा, अजय माकन, दिग्विजय सिंह, नितिन राउत, गुरदीप सिंह सप्पल और वामशी चंद रेड्डी शामिल हैं। एक ही मतदाता पहचान पत्र संख्या का उपयोग कई मतदाताओं (Voter List Scam) के लिए किया जा रहा है कोंग्रेसी समूह ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग मतदाता सूची में हेरफेर (Voter List Scam) में सहभागी है। और यह दावा भी किया कि इस मुद्दे पर कुछ चौंकाने वाले घटनाक्रम सामने आए हैं। पूरे मामले पर समूह ने कहा कि “एक ही मतदाता पहचान पत्र संख्या का उपयोग कई मतदाताओं के लिए किया जा रहा है, चाहे वे एक ही राज्य के एक ही निर्वाचन क्षेत्र के हों या दूसरे राज्यों के। यह पूरी तरह से चौंकाने वाला है। प्रत्येक भारतीय मतदाता के लिए एक अद्वितीय मतदाता पहचान पत्र एक स्वच्छ मतदाता सूची की मूलभूत आवश्यकता और आधार है। एक ही मतदाता पहचान पत्र संख्या वाले कई मतदाता एक ही पंजीकरण संख्या वाले कई वाहनों की तरह विचित्र हैं। किसी भी चुनावी लोकतंत्र में ऐसा सुनने में नहीं आता है।” गौरतलब हो कि दिसंबर में उन्होंने कहा था कि कांग्रेस ने महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता सूचियों में भारी अनियमितताओं और असामान्य स्थितियों की ओर इशारा किया था। उन्होंने कहा था कि यह तार्किक और सांख्यिकीय दोनों तरह से बेतुका है कि निर्वाचन आयोग ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच पांच महीनों में (40 लाख) ज्यादा नए मतदाता पंजीकृत किए, जबकि 2019 और 2024 के बीच पूरे पांच साल की अवधि में (32 लाख) इतने मतदाता पंजीकृत नहीं किए गए।”   इसे भी पढ़ें:- कांग्रेसी प्रवक्ता के इस बयान पर मचा सियासी घमासान, रोहित शर्मा को कहा मोटा तो बीजेपी ने की राहुल से तुलना लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में उठाया था चुनावों में धांधली (Voter List Scam) का मुद्दा  बता दें कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में यह मुद्दा (Voter List Scam) उठाया था। हालांकि इस मामले पर महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन के घटक दलों ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन भी बुलाया था। इस दरम्यान कांग्रेस नेताओं ने बयान में कहा कि “निर्वाचन आयोग की चुप्पी ने मतदाता सूची में हेराफेरी में उसकी मिलीभगत को और पुख्ता किया है। जब कई मतदाताओं द्वारा एक ही मतदाता पहचान पत्र संख्या का इस्तेमाल किए जाने के सबूत सामने आए, तो आयोग ने शुरू में यह दावा किया कि एक मतदाता पहचान पत्र संख्या सभी राज्यों में हो सकती है, लेकिन यह किसी एक राज्य के लिए अलग होती है।” उन्होंने कहा कि “यह भी एक सरासर झूठ निकला, क्योंकि एक ही राज्य और एक ही निर्वाचन क्षेत्र में कई मतदाताओं द्वारा एक ही पहचान पत्र संख्या का इस्तेमाल किए जाने के मामले सामने आए हैं। इस ओर ध्यान दिलाए जाने के बाद इस पर चुप्पी साध ली गई है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Voter List Scam #VoterListScam #CongressVsBJP #ElectionFraud #IndianPolitics #VoteTampering #BJPCongressClash #ECUnderFire #ElectionScam #DemocracyAtRisk #PoliticalControversy

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