Congress demands explanation

Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump: मोदी सरकार पर हमलावर कांग्रेस, कहा- पीएम बताएं कि ट्रंप से क्या हुई बात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत को लेकर कांग्रेस ने पीएम मोदी और सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने बुधवार को मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीन देशों की यात्रा से लौटने के बाद तुरंत सर्वदलीय बैठक की बुलानी चाहिए। ताकि नेताओं को बताया जा सके कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से टेलीफोन पर बातचीत में क्या (Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump) कहा? पीटीआई से बात करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को संसद में ट्रंप के उन दावों का खंडन करना चाहिए, जिसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम के लिए व्यापार को एक साधन के रूप में इस्तेमाल करने का दावा किया है। ध्यान देने वाली बात यह कि रमेश की यह टिप्पणी मोदी द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप से बात करने के बाद आई है, जिसमें पीएम ने स्पष्ट किया कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पर हमले इस्लामाबाद के अनुरोध पर रोके थे, न कि अमेरिका की मध्यस्थता या व्यापार समझौते की पेशकश के कारण। राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मुनीर का विशेष आमने-सामने लंच के लिए आमंत्रित किया जाना बहुत बड़ा (Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump) झटका है  खैर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री के के मुताबिक, मंगलवार को ट्रंप के साथ 35 मिनट की फोन कॉल में पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति को पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों के खिलाफ भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी दी और यह साफ किया कि भारत ने कभी किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया है और भविष्य में भी इसे स्वीकार नहीं करेगा। इस बीच ट्रंप के जनरल मुनीर के साथ लंच करने की खबरों पर जयराम रमेश ने कहा, यह भारतीय कूटनीति के लिए तिहरा झटका है। आज फील्ड मार्शल मुनीर, जिनके भड़काऊ, भड़काऊ और अस्वीकार्य बयानों ने पहलगाम आतंकी हमले की पृष्ठभूमि बनाई, राष्ट्रपति ट्रंप के साथ लंच करने वाले (Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump) हैं। ऐसा सैन्यकर्मी जो सरकार का मुखिया नहीं है, उसे राष्ट्रपति ट्रंप के साथ विशेष आमने-सामने लंच के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। यह बहुत बड़ा झटका है।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र सरकार का तुगलकी फरमान, स्कूलों में हिन्दी की अनिवार्यता की खत्म, अब होगी तीसरी भाषा प्रधानमंत्री देश को विश्वास में लें और वे सारी बातें कहें जो उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप से कहनी (Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump) चाहिए सरकार को घेरते हुए जयराम रमेश ने आगे कहा कि तीसरा झटका राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 14 बार ऑपरेशन सिंदूर को रोकने और भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने का श्रेय लेना था। मोदी-ट्रंप की टेलीफोन पर बातचीत पर रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ट्रंप से कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के संबंध में व्यापार पर चर्चा नहीं हुई और मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है। रमेश ने आगे कहा, वह सर्वदलीय बैठक में यह बात क्यों नहीं (Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump) कहते? इसलिए हम संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं ताकि प्रधानमंत्री देश को विश्वास में लें और वे सारी बातें कहें जो उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप से कहनी चाहिए। खैर, कांग्रेस पार्टी ने उन रिपोर्ट्स को भी बड़ा झटका बताया, जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ट्रंप के साथ दोपहर का भोजन करेंगे। पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री को टेलीफोन पर बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति को इस पर भारत की नाराजगी के बारे में बताना चाहिए था। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ट्रंप ने कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान की बराबरी करते हुए व्यापार को एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने यह बात 14 बार कही और प्रधानमंत्री ने 10 मई के बाद से कुछ नहीं कहा। इसलिए यह तिहरा झटका है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump #Modi #Trump #Congress #IndiaUSRelations #PoliticalNews #BreakingNews #PMModi

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PM Modi and President Trump

Modi-Trump की 35 मिनट की बातचीत: आतंकवाद पर कड़ा संदेश, अमेरिका का भारत को समर्थन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बुधवार को फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोदी और ट्रंप (Modi and Trump) की बात तकरीबन  35 मिनट तक चली। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब राष्ट्रपति ट्रंप को अपनी पहले से तय भारत की यात्रा स्थगित कर अमेरिका लौटना पड़ा, जिससे दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात टल गई है। ट्रंप के आग्रह पर यह फोन कॉल हुआ, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। मोदी और ट्रंप की आतंकवाद मुद्दे पर हुई बात  प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने बातचीत के दौरान आतंकवाद के मामले पर भारत की स्थिति को साफ तरीके से ट्रंप के साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि भारत अब आतंकवाद को ‘छद्म युद्ध’ के रूप में देखता है और इसके खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता देता है। इस क्रम में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) का भी जिक्र किया जो फिलहाल जारी है। इस ऑपरेशन के तहत भारत ने हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। दोनों नेताओं के बीच पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terror Attack) के बाद भारत-पाकिस्तान के बढ़ते तनाव (India-Pakistan Tension) पर भी विस्तार से चर्चा हुई। पीएम मोदी ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील (PM Modi and President Trump) या अमेरिका की किसी मध्यस्थता पर कोई चर्चा नहीं हुई। पाकिस्तान के आग्रह पर ही भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता हुई थी। प्रधानमंत्री ने ट्रंप को यह भी आश्वस्त किया कि भारत की ओर से कोई ऐसी पहल नहीं हुई जो अमेरिका को बीच में लाने की ओर संकेत दे। इस बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप (President Trump) ने भारत के आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में पूरी सहानुभूति और समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) की बातों को गंभीरता से सुना और कहा कि अमेरिका इस लड़ाई में भारत के साथ है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी इस बातचीत के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मोदी और ट्रंप की मुलाकात जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान होनी थी, लेकिन ट्रंप के अमेरिका लौटने के कारण ऐसा नहीं हो पाया। ट्रंप ने मोदी को अमेरिका आने का दिया निमंत्रण  बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका आने का निमंत्रण भी दिया। उन्होंने पूछा कि क्या पीएम मोदी कनाडा से वापसी में अमेरिका आ सकते हैं। लेकिन पीएम मोदी (PM Modi) ने पहले से तय कार्यक्रमों का हवाला देते हुए असमर्थता जताई। इसके बावजूद दोनों नेताओं ने भविष्य में शीघ्र मिलने की बात पर सहमति जताई। इसके अलावा विदेश सचिव ने यह भी जानकारी दी कि 9 मई की रात अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पीएम मोदी को कॉल किया था और आगाह किया था कि पाकिस्तान भारत पर बड़ा हमला कर सकता है। पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा कि अगर पाकिस्तान ऐसा करता है तो भारत जवाब देने में देर नहीं करेगा और यह जवाब पहले से भी ज्यादा शक्तिशाली होगा। इसके अगले ही दिन 10 मई को भारत ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर सशक्त कार्रवाई की, जिससे उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक यह बातचीत भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक सुरक्षा मसलों पर साझा दृष्टिकोण को और मजबूती देने का संकेत है। पीएम मोदी की यह पहल भारत की स्पष्ट विदेश नीति और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रवैये को दर्शाती है। वहीं अमेरिका की ओर से मिला समर्थन भारत के लिए कूटनीतिक रूप से एक अहम संकेत है कि उसकी सुरक्षा चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप (PM Modi and President Trump) की यह बातचीत न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण रही, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत अब किसी भी तरह के आतंकवादी हमले के जवाब में संकोच नहीं करेगा और वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को मजबूती से रखेगा।  Latest News in Hindi Today Hindi news  #ModiTrumpTalks #IndiaUSRelations #GlobalTerrorism #Diplomacy #USSupportsIndia

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US India diplomatic tension

US Betrays India: अमेरिका ने की भारत से गद्दारी, पाकिस्तान के इस साथी को देने जा रहा है खतरनाक मिसाइलें

यह जगजाहिर है कि भारत और पाकिस्तान के बीच व्याप्त तनाव के बीच तुर्किए ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया था। तुर्किए के इस रवैए से भारतीयों में जबरदस्त रोष है। तुर्किए को लेकर भारतीयों में इस कदर रोष है कि सोशल मीडिया पर बॉयकॉट तुर्की ट्रेंड करने लगा। इसका असर यह कि व्यापार से लेकर पर्यटन तक, भारत ने तुर्किए से दूरी बनानी शुरू कर दी। कहने के लिए तो अमेरिका भारत का हितैषी है लेकिन अमेरिका उस तुर्किए कि मदद करने जा (US Betrays India) रहा है जिसने भारत के खिलाफ पाकिस्तान सैकड़ों ड्रोन दिए थे। जानकारी के मुताबिक अमेरिका ने तुर्किए को मिसाइलें बेचने का फैसला लिया है। दरअसल, अमेरिका ने तुर्किए को 304 मिलियन डॉलर की मिसाइलें बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।  यह डील दोनों देशों के बीच सामरिक संबंधों को और मजबूत (US Betrays India) करेगी गौरतलब हो कि यह मंजूरी ऐसे वक़्त पर दी गई है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। तुर्किए खुले तौर पर पाकिस्तान की मदद कर रहा है। इस मिसाइल डील में तुर्किए को हवा से हवा में मार करने वाली AIM-120 AMRAAM मिसाइलें शामिल (US Betrays India) हैं। जानकारी के मुताबिक तुर्किए ने 225 मिलियन डॉलर की लागत से 53 एडवांस मीडियम रेंज मिसाइल और 79.1 मिलियन डॉलर की लागत से 60 ब्लॉक सेकंड मिसाइलों की भी मांग की है। कहा जा रहा है यह डील अमेरिका की रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (डीएससीए) की तरफ से प्रस्तावित है। लेकिन अभी इसे अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी मिलनी बाकी है। कहने की जरूरत नहीं कि यदि यह मंजूरी मिल जाती है, तो यह डील दोनों देशों के बीच सामरिक संबंधों को और मजबूत करेगी। बेशक इस कदम को अमेरिका और तुर्किए के बीच नाटो सहयोग को सुदृढ़ करने के रूप में देखा जा रहा है।  इसे भी पढ़ें:- जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में मुठभेड़ जारी, सुरक्षाबलों ने 2 आतंकियों को किया ढेर अमेरिका द्वारा तुर्किए से मिसाइल की डील करना क्या भारत के खिलाफ यह एक प्रकार की दगाबाजी नहीं (US Betrays India) है? बता दें कि तुर्किए नाटो का एक प्रमुख सदस्य है। यही नहीं वह अमेरिका के रणनीतिक सैन्य साझेदारों में से एक भी माना जाता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि जब तुर्किए भारत के विरोधी पाकिस्तान की सैन्‍य मदद कर रहा है तो अमेरिका द्वारा उससे मिसाइल की डील करना क्या भारत के खिलाफ यह एक प्रकार की दगाबाजी नहीं (US Betrays India) है? यहाँ तक कि भारत के कई विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम खुले तौर ओर उसकी दोहरी नीति को उजागर करता है। एक तरफ तो वह भारत को क्वैड (QUAD) जैसे मंचों पर रणनीतिक साझेदार कहता है तो वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान का साथ देने वाले देश को हथियार मुहैया कराता है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि इससे भारत और अमेरिका के रिश्तों में दरार पड़ सकती है। हालांकि इसपर अमेरिका का तर्क है कि यह डील बतौर नाटो सहयोगी तुर्किए की सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए है, न कि भारत के खिलाफ कोई साजिश।  Latest News in Hindi Today Hindi news US Betrays India #USBetraysIndia #IndiaUSRelations #PakistanMissiles #GlobalTensions #USDefenseDeal #SouthAsiaCrisis #IndiaSecurity #MissileAlert #GeopoliticalCrisis #USPakistanAlly

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Shashi Tharoor Gaza statement

Shashi Tharoor Slams US President : अमेरिकी राष्ट्रपति पर भड़के शशि थरूर, कहा, “अपराधी और पीड़ित को एक जैसा दिखाने की कोशिश”

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थिति बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिन्दूर चलाकर पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों समेत उनके तमाम एयरबेस और एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया था। कुछ घंटों की कार्रवाई में ही पाकिस्तान को लग गया था कि भारत आर-पार के मूड में है। भारत का रूद्र रूप देख पाकिस्तान ने दुनिया भर के देशों से हस्तक्षेप करशांति बहाल कराने की कोशिश की थी। पाकिस्तना की विवशता देख अमेरिका ने पहल कर दोनों देशों को सीज फायर के लिए राजी करवाया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर सीज फायर कराने का श्रेय लेते हुए दोनों देशों से संयम बरतने की बात कही। ट्रंप के इस दावे से दुनिया चकित रह गई थी। 10 मई को भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर को लेकर घमासान मचा हुआ है। दरअसल, भारत अपनी शर्तों पर सीज फायर के लिए राजी हो तो गया, लेकिन इस बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की तरफ से भारत-पाकिस्तान सीजफायर में अपनी भूमिका के दावे पर कड़ी आपत्ति (Shashi Tharoor Slams US President) जताई है। उन्होंने चार बिंदुओं पर अमेरिकी राष्ट्रपति की जमकर आलोचना की। बता दें कि इनमें, पीड़ित और अपराधी के बीच गलत समानता स्थापित करना, कश्मीर मुद्दे के अंतर्राष्ट्रीयकरण का प्रयास, और भारत की संप्रभुता में हस्तक्षेप इत्यादि शामिल है।  अमेरिकी राष्ट्रपति की दक्षिण दशियाई देशों के मामले में गैर जरूरी टिप्पणी (Shashi Tharoor Slams US President) कर रहे हैं Mr Trump’s post is disappointing for India in four important ways: First, it implies a false equivalence between the victim and the perpetrator, and seemingly overlooks the US’ own past unwavering stance against Pakistan’s well-documented links to cross-border terrorism. Second,… https://t.co/Za5cvwq82M — Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) May 12, 2025 बता दें कि शशि थरूर ने सीजफायर को लेकर कहा कि “अमेरिकी राष्ट्रपति की दक्षिण दशियाई देशों के मामले में गैर जरूरी टिप्पणी (Shashi Tharoor Slams US President) कर रहे हैं। वे अपने बयानों से भारत और पाकिस्तान को गलत तरीके से एक तराजू पर तौलने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही ट्रंप की सीजफायर पोस्ट को लेकर 4 प्वाइंट के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की है।” यही नहीं, थरूर ने ट्रम्प के बयान को न सिर्फ भारत के लिए निराशाजनक बताया बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति के दक्षिण एशियाई देशों के मामलों में हस्तक्षेप करने पर चिंता व्यक्त भी की। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि “ट्रंप की पोस्ट भारत के लिए चार महत्वपूर्ण तरीकों से निराशाजनक है। सबसे पहले, यह पीड़ित और अपराधी के बीच एक गलत समानता का संकेत देता है, और ऐसा लगता है कि यह पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद से जुड़े संबंधों के खिलाफ अमेरिका के अपने पिछले अडिग रुख को नजरअंदाज करता है। दूसरा ये कि भारत कभी भी अपने सिर पर आतंकवादी बंदूक तानकर बातचीत नहीं करेगा।” यही नहीं, शशि थरूर ने जोर देते हुए कहा कि “कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करना गलत है, आतंकवादी भी यही चाहते हैं। ये भारत का आंतरिक मामला है। इस पर किसी को दखल नहीं देना चाहिए। भारत ने कभी भी पाकिस्तान के साथ अपनी समस्याओं पर किसी विदेशी देश से मध्यस्थता का अनुरोध नहीं किया है। और न ही ऐसा करने की संभावना है।  इसे भी पढ़ें:-   पहलगाम हमले के बाद पाक आर्मी में गजब का खौफ, इस वजह से लोगों से की 2 महीने का राशन जमा करने की अपील राजनीतिक दल अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से हुए सीजफायर के ऐलान पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहे (Shashi Tharoor Slams US President) हैं गौरतलब हो कि ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे को लेकर सुलझाने की बात कही थी। फिर क्या था, इसके बाद विवाद बढ़ गया। तमाम राजनीतिक दल अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से हुए सीजफायर के ऐलान पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहे (Shashi Tharoor Slams US President) हैं। विरोधी पार्टियां  शिवसेना और कांग्रेस ने इसको लेकर सरकार से संसद सत्र की मांग करते हुए स्थिति स्पष्ट करने की बात कही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हुई एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि “अगर भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष नहीं रुका होता तो अमेरिका व्यापार रोक देता, लेकिन इस दावे का भारत की तरफ से कोई समर्थन नहीं मिला। ऐसे में बड़ा और अहम सवाल उठता है कि क्या यह बयान अपनी छवि को सशक्त बनाने के लिए दिया था या फिर यूँ ही क्रेडिट लेने के लिए हवाबाजी की थी? खैर ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा कि ट्रंप कहाँ तक सही थे?  Latest News in HindiToday Hindi news  Shashi Tharoor Slams US President #ShashiTharoor #USPresident #TharoorStatement #IndiaUSRelations #GazaConflict #MiddleEastCrisis #IsraelHamasWar #TharoorSpeech #GlobalPolitics #DiplomaticRow

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Trump tariff claim

Tariff Dispute: भारत ने ट्रंप के टैरिफ वाले दावे से किया किनारा, कहा अभी कोई समझौता नहीं, बस बातचीत जारी

अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण करने के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल से कनाडा, मैक्सिको और चीन समेत भारत पर टेरिफ लगाने की धमकी दी थी। यही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया था कि भारत टैरिफ कटौती पर सहमत (Tariff Dispute) हो गया है। जब कि भारत का कहना है कि “इस मुद्दे पर अमेरिका संग अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है।” हालाँकि दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। जानकारी के मुताबिक ट्रंप के दावे के दो दिन बाद भारत सरकार ने सोमवार को संसदीय पैनल को ये बात बताई। संसदीय पैनल के समक्ष अपनी बात रखते हुए सरकार ने कहा कि “व्यापार शुल्क को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ है। इस मुद्दे के हल के लिए सितंबर तक का समय मांगा गया है।” खैर, ऐसे में बड़ा सवाल यह कि ट्रंप आखिर करना क्या चाहते हैं? यह सवाल इसलिए भी क्योंकि ट्रंप ने दावा किया था कि “भारत टैरिफ कटौती पर राजी हो गया है।” तो वहीं इस मामले पर भारत का कहना है कि “अब तक ऐसा कोई समझौता हुआ ही नहीं।” जानकारी के मुताबिक वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति को बताया कि “भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ को बहुत कम करने को लेकर अब तक कोई समझौता नहीं हुआ है। दोनों ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं। सिर्फ तत्काल टैरिफ के मुद्दे पर ही नहीं दीर्घकालिक व्यापार सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।” संसदीय समिति के कई सदस्यों ने बर्थवाल से अमेरिका-भारत व्यापार (Tariff Dispute) वार्ता पर पूछे कई प्रश्न  जानकारी के मुताबिक समिति के कई सदस्यों ने बर्थवाल से अमेरिका-भारत व्यापार (Tariff Dispute) वार्ता पर कई प्रश्न पूछे। इस प्रश्न पर उन्होंने कहा कि “व्यापार वार्ता के दौरान भारत के हितों का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने समिति से कहा कि “भारत मुक्त व्यापार के पक्ष में है। और व्यापार का उदारीकरण चाहता है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि “टैरिफ वॉर छिड़ने से अमेरिका समेत किसी को भी फायदा नहीं होगा, इससे मंदी के हालात पैदा हो सकते हैं।” खैर, इस दौरान कुछ संसद सदस्यों ने वाणिज्य सचिव से यह भी पूछा कि “भारत सीमा शुल्क पर अमेरिकी कदमों को लेकर मेक्सिको और कनाडा की तरह अपनी आवाज क्यों नहीं उठा रहा?” इस कड़वे सवाल पर बर्थवाल ने कहा कि “दोनों मामलों की तुलना नहीं की जा सकती, क्योंकि अमेरिका के उनके साथ सुरक्षा संबंधी चिंताएं और सीमा आव्रजन संबंधी मुद्दे हैं।” इस दौरान समिति से वाणिज्य सचिव ने कहा कि “भारत ऐसे उद्योगों की रक्षा करेगा जो उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए अहम हैं। भारत द्विपक्षीय रूप से सीमा शुल्क कम कर सकता है लेकिन बहुपक्षीय रूप से ऐसा नहीं कर सकता। इसी वजह से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर काम किया जा रहा है।” इसे भी पढ़ें:- स्पेन में आतंकवाद के खिलाफ बड़ा एक्शन, दस पाकिस्तानी भाईजान गिरफ्तार किसी को भी ट्रंप के दावों और मीडिया रिपोर्टों पर नहीं करना चाहिए भरोसा (Tariff Dispute) गौर करने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि समिति के कई सदस्यों ने ट्रंप के उस दावे पर भी चिंता जाहिर की, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत टैरिफ घटाने को राजी (Tariff Dispute) हो गया है। बता दें कि कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा, असदुद्दीन ओवैसी और टीएमसी की सागरिका घोष जैसे विपक्षी सांसदों ने इसे लेकर कई सवाल पूछे। जिस पर सुनील बर्थवाल ने कहा कि “किसी को भी ट्रंप के दावों और मीडिया रिपोर्टों पर भरोसा नहीं करना चाहिए, क्यों कि दोनों ही देशों के बीच समझौते पर बातचीत अभी भी जारी है। उन्होंने संसदीय समिति को बताया कि “भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार शुल्क के मोर्चे पर किसी भी तरह की प्रतिबद्धता नहीं जताई है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Tariff Dispute #IndiaUSRelations #TariffDispute #TradeTalks #USIndiaTrade #TrumpIndia #EconomicPolicy #TariffWar #BilateralTrade #TradeNegotiations #GlobalEconomy

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